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वाराणसी में भी हस्‍ताक्षर : आई नेक्‍स्‍ट के पत्रकारों को नहीं चाहिए ज्‍यादा वेतन

: आई नेक्‍स्‍ट, वाराणसी के ग्रोथ पर नाराजगी जताई आलोक सांवल ने :  दैनिक जागरण के बाद इस ग्रुप के बच्चा अखबार आई नेक्स्ट में भी प्रबंधन ने मजीठिया आयोग के मुताबिक वेतनमान ना देने का प्रबंध कर लिया है. आई नेक्स्ट में काम करने वालों से इस सम्बन्ध में एक पेपर पर साइन कराया गया है. बुधवार को वाराणसी में आई नेक्स्ट के मैनेजिंग एडिटर आलोक सांवल की मौजूदगी में अदालती भाषा में लिखे इस पेपर पर सभी के साइन लिए गए.

आलोक सांवल, आई नेक्‍स्‍ट के संपादकीय प्रभारी विश्‍वनाथ गोकर्ण और वाराणसी के मैनेजर अंकुर चड्ढा की मीटिंग के बाद आई नेक्स्ट, वाराणसी में कार्यरत सत्रह लोगों के साइन लिए गये.  किसी ने भी साइन करने से इनकार नहीं किया. दो प्रतियों में साइन कराया गया है. इसमें एक प्रति आलोक सांवल अपने साथ ले गए जबकि एक प्रति वाराणसी यूनिट के मैनेजर अंकुर चड्ढा के पास है.

हालांकि आलोक सांवल ने लगे हाथ आई नेक्स्ट के लोगों को इन्क्रीमेंट का लॉलीपाप भी दे गए. यह लॉलीपाप दो टुकड़े में मिलेगा. कुछ हिस्सा अभी जबकि बाकी का बचा हिस्सा अप्रैल में दिया जायेगा. सात सरोकार चलाने वाला यह ग्रुप कितना सरोकार विहीन है सारी दुनिया जानने लगी है. अपने को नम्‍बर एक कहने वाला यह ग्रुप दो नम्‍बरी तरीके से कर्मचारियों को पैसा ना देने की कवायद कर रहा है. वैसे भी इस कवायद का कोई फायदा होता नहीं दिख रहा है, हां इससे ग्रुप के बट्टेदार साख पर और बट्टा जरूर लग रहा है. 

अलोक सांवल ने आई नेक्स्ट, वाराणसी के पत्रकारों के साथ एक मीटिंग भी की. सूत्रों की माने तो इस मीटिंग में अलोक सांवल की अखबार को लेकर नाराज़गी साफ दिखाई पड़ी. अलोक सांवल अखबार के बनारस में फ्लाप रहने और तेवर ना बना पाने को लेकर परेशान दिखे. कंटेंट और पैकेजिंग को लेकर भी वे नाराज़ रहे. उन्होंने साफ़ कर दिया कि जो काम करेगा वो रहेगा. आलोक सांवल के यह तेवर पहली बार देखे गएँ हैं. इससे पहले कभी भी इतने कड़े शदों में अलोक सांवल को इस तरह से बात करते नहीं सुना गया. इससे लग रहा था कि वो कितने दबाव में हैं.

हालांकि यह भी हैरानी की बात है कि आई नेक्स्ट सुधार की कवायद तो कर रहा है लेकिन स्टाफ में लगातार कटौती करता जा रहा है. सिर्फ सत्रह लोगों के सहारे पूरा अखबार निकाला जा रहा है. पिछले कुछ महीनों में अखबार से अम्‍बुजेश शुक्‍ला, अमित गुप्‍ता, रितु सिंह, वीणा तिवारी और सौरभ अग्रवाल जा चुके हैं पर आने वालों में मात्र देवेंद्र कुमार और गोपाल मिश्रा के नाम हैं. काम का दबाव और तनाव का ताजा उदाहरण है डेस्‍क पर काम करने वाले आशीष तिवारी को रिपोर्टिंग में लाना. प्रबंधन ने रिपोर्टर न मिलने के चलते मजबूरी में आशीष को यह दायित्‍व सौंपा है. सूत्रों का कहना है कि आशीष तिवारी को रिपोर्टिंग में लाने के पीछे यह तर्क दिया गया कि आई नेक्स्ट में डेस्क पर सिर्फ तीन लोग ही रखे जायेंगे. वाराणसी में चार लोग थे, लिहाजा आशीष तिवारी से पहले आगरा ट्रान्सफर करने की धमकी दी गई बाद में उन्हें बनारस में ही रिपोर्टिंग सौंप दिया गया.

हस्‍ताक्षर अभियान के संदर्भ में जब वाराणसी यूनिट के मैनेजर अंकुर चड्ढा से पूछा गया तो उन्‍होंने कहा कि उनके पास ऐसी कोई जानकारी नहीं है. यह सारी जानकारी फर्जी है. इसके बारे में आलोक सांवल से पूछे. इधर, सूचना है कि आज यानी गुरुवार को इलाहाबाद आई नेक्‍स्‍ट के लोगों से भी हस्‍ताक्षर कराए जाने की योजना है. इसके बाद दैनिक जागरण के कर्मचारियों की बारी आएगी. 

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