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Ravindra Tripathy : रतन थियम को फिर से NSD का चैयरमैन नहीं होना चाहिए। मेरी ये राय है कि रतन थियम को फिर से nsd का चैयरमैन नहीं होना चाहिेए। उनका कार्यकाल 18 अगस्त को खत्म हो रहा है और वे फिर से इस पद को पाने के लिए बेकरार हैं। लेकिन क्या वे इस तथ्य से इनकार कर सकते हैं `भारत रंग महोत्सव' जैसे आयोजन को ध्वस्त कर theatre olympic जैसे विदेशी ब्रांड को उभारना चाहते हैं? ये एक तरह से भारत नाम के इस देश के साथ विश्वासघात है।

nsd के निदेशक वामन केंद्रे भी उनकी मदद कर रहे हैं। ये भी एक तरह से देशद्रोह है। theatre olympic एक विदेशी ngo है और रतन इससे जुड़े हैं। पता नहीं उन्होंने मंत्री को कैसे बरगला लिया है और मंत्रालय के कुछ (सभी नहीं) अधिकारियों को पटा लिया है। ये मेरे लिए एक रहस्य ही है कि कौन सी पटाऊ विद्या उनके पास है। किसी को जानकारी हो तो बताए।

मेरा ये कहना है कि सौ, पांच सौ या हजार नाटकों का समारोह करने में कोई हर्ज नहीं है। लेकिन ये सब भारत रंग महोत्सव के बैनर में क्यों नहीं हो सकता? सिर्फ इसलिए कि रतन थियम को पचास लाख या एक करोड़ की फीस दिलानी है इसलिए भारत रंग महोत्सव नाम के ब्रांड को, जो उन्नीस साल में तैयार किया गया और जिसके लिए Ram Gopal Bajaj, राम गोपाल बजाज, देवेंद्र राज अंकुर और अनुराधा कपूर जैसे पूर्व निर्देशकों और देश के तमाम रंगकर्मियों और नाटक प्रेमियों ने विकसित किया और उसे रातोरात रतन थियम और वामन केंदे जैसे लोग अपनी निजी फायदे के लिए ध्वस्त कर रहे हैं?

केंद्र सरकार से मेरी अपील है कि रतन थियम को फिर चैयरमैन न बनाए और `भारत रंग महोत्सव नाम' के आयोजन को खत्म न करे। उसे होने दे और उसके नाम पर बड़ा आयोजन करे। आखिर `मेक इन इंडिया' थिएटर में क्यों नहीं?

पत्रकार और समीक्षक रवींद्र त्रिपाठी की एफबी वॉल से.

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