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पोंटी के खिलाफ छापेमारी (दो) : कहानी जमीन से आसमान तक पहुंचने की

 छापे के दौरान आयकर विभाग यह समझने की कोशिश में जुटा रहा कि विभाजन के समय पाक के मोंटगोमरी से भाग कर पहले रामनगर और उसके बाद मुरादाबाद के रिफ्यूजी क्वार्टर्स में पनाह लेने वाला यह परिवार किस तरह इतनी बड़ी सल्तनत का मालिक बन बैठा। इस परिवार ने न केवल दौलत कमाई बल्कि दहशत भी फैलाई। पोंटी के बाबा को तो लोग कोई खास नहीं जान पाए लेकिन बेटे कुलवंत सिंह ने 1960 में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिला मुरादाबाद से शराब के धंधे में पांव रखा तो फिर पीछे मुड़ कर नहीं देखा। कुलवंत सिंह की कोठी मुरादाबाद के पॉश इलाके सिविल लांइस में है। इस कोठी का नाम सुनकर लोगों के मुंह से शब्द भले न निकलते हों लेकिन चेहरे पर दहशत का एक अजीब से भाव जरूर दिखाई पड़ जाता है। पिता कुलवंत के पद चिन्हों पर ही नहीं चला उनका बड़ा बेटा पोंटी। बल्कि उसने अपने पिता को भी काफी पीछे छोड़ दिया।

पोंटी के पिता ने अपना कारोबार उत्तर प्रदेश के बाद पंजाब में फैलाया तो पोंटी ने उत्तर प्रदेश और उतराखंड के नेताओं के सहारे खूब नोट बटोरे। मुलायम सिंह से नजदीकियां हासिल करके पोंटी ने उत्तर प्रदेश के शराब व्यवसाय पर पूरी तरह से कब्जा कर लिया। यह वह दौर था जब मुलायम और माया साथ मिलकर चल रहे थे, मुलायम ने ही पोंटी की मुलाकात माया से कराई। इसके बाद तो पोंटी मुलायम से अधिक माया के करीबी बन गए। यहां तक कि आबकारी विभाग जो पॉलिसी बनाता उस पर भी पोंटी की छाप दिखती। पोंटी ने सरकार से करीबी का फायदा उठा कर कई चीनी मिले कौड़ियों के भाव में हथिया लीं। पोंटी के पिता ने जो कारोबार जमीन पर शुरू किया था, उसे पोंटी ने आसमान की बुलंदियों पर पहुंचा दिया।

                          आबकारी मंत्री  से लोकायुक्त ने मांगा जवाब

उत्तर प्रदेश के लोकायुक्त ने एक निजी कंपनी को कथित रूप से लाभ पहुंचाने के लिए सरकार की आबकारी नीति का उल्लंघन करने के आरोप में मिली एक शिकायत पर प्रदेश के गन्ना विकास एवं आबकारी मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी को नोटिस जारी करके उनका जवाब मांगा है। लोकायुक्त न्यायमूर्ति एनके मेहरोत्रा ने बताया है कि इलाहाबाद के विनय कुमार मिश्र ने शिकायत की थी कि नसीमुद्दीन ने एक निजी कंपनी को लाभ पहुंचाने के लिए वर्ष 2007 में निर्धारित आबकारी नीति की अवहेलना की है।

न्यायमूर्ति मेहरोत्रा ने बताया कि वर्ष 2007 में जो नीति बनी थी, उसके तहत शराब के थोक व्यापार का लाइसेंस निगमों को दिये जाने की बात तय हुई थी, मगर बाद में यह लाइसेंस चीनी संघ के साथ साझे में ब्लू वाटर प्राइवेट लिमिटेड को दे दिया गया। लोकायुक्त ने बताया कि इस प्रकरण में मंत्रिपरिषद के निर्णय के आधार पर बनायी गयी आबकारी नीति के उल्लंघन का आरोप प्रथम दृष्टया सही पाया गया है और मामला दर्ज करके नसीमुद्दीन से 19 फरवरी तक अपना पक्ष रखने की नोटिस भेज दिया गया है और इस संबंध में मुख्यमंत्री मायावती को भी सूचित कर दिया गया है।

लेखक संजय सक्‍सेना पत्रकारिता से जुड़े हुए हैं.

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