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प्रभात ने आईएफडब्लूजे के खिलाफ निकाली भड़ास

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उत्तर प्रदेश के मान्यता प्राप्त पत्रकार प्रभात त्रिपाठी ने राज्य के प्रमुख सचिव, सूचना विजय शंकर पांडेय को एक पत्र भेजकर यूपी प्रेस क्लब पर एक संगठन के लंबे समय से कायम कब्जे और 300 मान्यता प्राप्त संवाददाताओं को क्लब का सदस्य न बनाए जाने की तरफ ध्यान आकृष्ठ किया है. प्रभात ने प्रेस क्लब को संगठन के कब्जे से मुक्त कराकर नया प्रेस क्लब बनाए जाने की मांग की है. पत्र में प्रभात ने लिखा है-

''चाइना गेट स्थित प्रेस क्लब को यूपी प्रेस क्लब का नाम तो दिया गया है लेकिन उसमें कब्जा पिछले पांच दशकों से एक संगठन आईएफडब्लूजे का लगातार बना हुआ है. प्रदेश का सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग (राज्य सरकार) कई वर्षों से इस प्रेस क्लब को लगातार आर्थिक सहायता इस कारण से देता चला आया है कि यह क्लब राजधानी के सभी सम्मानित समाचार पत्र के कलम नवीसों के लिये एक सुन्दर बैठने का स्थान बन सके. लेकिन जब इस क्लब की कहानी सामने खुलकर आती है तो काफी चौकाने वाली है. मसलन इस क्लब में एक ही संगठन का कब्जा पिछले पांच दशकों से जमा है. जिस प्रेस क्लब में साहित्यक व सांस्कृतिक आयोजन समय-समय पर सम्मानित पत्रकारों के परिवारों के बीच होने चाहिये, उस प्रेस क्लब में रोज शाम को क्या-क्या होता है, इस पर हम लिख नहीं सकते.''

प्रभात ने अपने लंबे चौडे़ पत्र में एक अन्य मुद्दा उठाते हुए लिखा है- ''यूपी में लगभग 290 पत्रकार राज्य मुख्यालय से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं. करीब 100 पत्रकार लखनऊ जिले के मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं. तकरीबन इनकी संख्या करीब 400 के आसपास होगी. जिन्हें सूचना विभाग ने मान्यता प्रदान की है. लेकिन इस प्रेस क्लब में इनको सदस्यता नहीं दी गयी है. जबकि इन सभी पत्रकारों का हक है कि वह अपने लिखने पढ़ने व प्रेस के सांस्कृतिक कार्य के लिये प्रेस क्लब के सदस्य बन सकें. मेरा कहना है कि अगर यह प्रेस क्लब आईएफडब्लूजे यूनियन का प्रेस क्लब है तो वह यूपी प्रेस क्लब की जगह आईएफडब्लूजे प्रेस क्लब बोर्ड में लिखे और सरकार एक दूसरी जगह नया यूपी प्रेस क्लब बनावाये जिससे सभी पत्रकारों को क्लब की सदस्यता मिल सके.''

पत्र में प्रभात ने अपनी पीड़ा भी बयान की है- ''मैं भी प्रेस क्लब का पिछले दो दशकों से सदस्य बनना चाहता था. लेकिन आज तक मुझे फार्म भरने के बाद भी सदस्य नहीं बनाया गया. मैं मान्यता प्राप्त पत्रकार पिछले सात आठ सालों से हूं.''

Comments (1)Add Comment
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written by हबीब सिद्धिकी, July 23, 2010
ifwj में भी राव और उसके चमचों ने कई सालों से कब्ज़ा जमा रखा है. राव हर बार ख़ुद ही इसका अध्यक्श बन जाता है. उसका खर्चा-पानी ऐसे ही चलता है.

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