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सीडीएमए सिम बंद होने से डब्बा हो रहे हैं रिलायंस मोबाइल, 4 जी के लिये नये मोबाइल खरीदने पर ग्राहकों का डबल नुकसान

4जी नेट की तकनीक लेकर आ रहे रिलायंस कम्यूनिकेशन ने मोबाइल मार्केट में हलचल मचा रखी है लेकिन उससे भी ज्यादा परेशान उसके वे ग्राहक हो रहे हैं जो अभी तक रिलायंस सीडीएमए सेवा का उपयोग कर रहे थे। कम्पनी अपने 50 लाख से ज्यादा सीडीएमए ग्राहकों की सिम को 4 जी में अपग्रेड कर रही है। इसके चलते इसके ग्राहकों को जहाँ नया मोबायल खरीदना पड़ रहा है वहीं उनके पुराने सीडीएमए मोबाइल डब्बों में तब्दील हो रहे हैं। इन मोबाइल में कोई भी जीएसएम सिम प्रयोग में नहीं लायी सकती है।

ग्राहकों के सामने दूसरी कम्पनियों की सीडीएमए सेवा उपयोग के भी ज्यादा विकल्प मौजूद नहीं हैं। अभी टाटा इंडिकॉम, एमटीएस के साथ कहीं-कहीं बीएसएनएल, एमटीएनएल ही सीडीएमए सेवा दे रहे हैं, इनमें भी जल्द ही इस सेवा के बंद होने के आसार हैं। बाकि रिलायंस के बहुत सारे मोबाइल में केवल रिलायंस की ही सिम प्रयोग में लायी जा सकती है। एैसे में सीडीएमए सिम ऑपरेट कर रहे यह रिलायंस मोबाइल केवल ई-कचरा बनकर रह जायें तो कोई आश्चर्य नहीं है।

कम्पनी ने नहीं किया किसी योजना का खुलासा

रिलायंस ने सीडीएमए सेवा बंद करने के चलते बेकार हुये मोबाइल सेट्स को लेकर अभी किसी योजना का खुलासा नहीं किया है। फिलहाल इसमें ग्राहकों का भारी नुकसान हो रहा है। उन्हें ना चाहते हुये भी दूसरा जीएसएम मोबाइल खरीदना पड़ रहा है। अपुष्ट सूत्रों का कहना है कि कम्पनी किसी एैक्सचैंज ऑफर के तहत अपने सीडीएमए मोबाइल को लेकर अपने ग्राहकों को राहत दे सकती है।

बीएसएनएल ने बदले हैं अपने सीडीएमए सेट्स

हॉल ही में झारखण्ड में बीएसएनएल ने अपनी सीडीएमए सेवा बंद करने से पहले अपने ग्राहकों के मोबाइल फोन मुफ्त में बदलकर दिये हैं। जानकारों का कहना है कि इन बेकार सेटों का उचित प्रकार से नष्ट होना पर्यावरण हित में जरूरी है। प्रयोग में ना आने के चलते यह ई-प्रदूषण बढ़ाने में सहायक होंगे। कम्पनी ही इनका उचित निपटान कर सकती है।

उपभोक्ता पूछ रहे हैं पुराने फोन का क्या करें?

एक वेबसाईट पर रिलायंस सेवा के बारे में लिखी अपनी पीड़ा में मुंबई के एक कस्टमर ने कहा कि रिलायंस के अपने बेसिक फोन पर भी सीडीएमए सेवा बंद करने से उसका फोन डिब्बा बन गया है। कम्पनी 1800 रूपये में नया फोन दे रही है अब वह इस फोन का क्या करें। उसके नुकसान की भरपाई कौन करेगा । एक उपभोक्ता का प्रश्न था कि किसी सेवा को बन्द करने के चलते होने वाली असुविधा व नुकसान के लिये क्या कम्पनी की कोई जिम्मेदारी नहीं है। हमने केवल रिलायंस के लिये छः माह पहले महंगा एचसीटी का सीडीएम मोबायल सेट खरीदा है अब यह सिम बंद होने से वह कूड़ा बन जायेगा। ऐसे में इस फोन का क्या करें।

ई-कचरे से बचना जरूरी

संयुक्त राष्ट की संस्था ग्लोबल ई-वेस्ट मॉनीटर 2014 के अनुसार भारत ई-कचरा पैदा करने वाला विश्व में पाँचवा सबसे बड़ा देश है। 2015 के आकड़ों के अनुसार भारत में इलेक्ट्रानिक्स एवं इलेक्ट्रिकल्स आदि का 17 लाख टन ई-कचरा निकला था। इसमें 5 प्रतिशत कम्पयूटर उपकरण एवं मोबाइल आदि का ई-कचरा शामिल था। रिलायंस के माजूदा कनैक्शन ग्राहक संख्या 11 करोड़ के करीब है। उसमें सबसे पुराने जुड़े हुये सीडीएमए ग्राहक 50 लाख से ज्यादा हैं। ऐसे में 50 लाख से ज्यादा मोबायल सैट ई-कचरा बन जायगें। उचित निपटान ना होने से यह पर्यावरण के लिये नुकसानदेय साबित हो सकते हैं। गौरतलब है कि इनमें सिलीकॉन, केडमियम, सीसा, क्रोमियम, पारा व निकल जैसी भारी धातुओं का उपयोग किया जाता है। वैज्ञानिकों के अनुसार पर्यावरण में असावधानी व लापरवाही से इस कचरे को फेंका जाता है, तो इनसे निकलने वाले रेडिएशन शरीर के लिए घातक होते हैं। इनके प्रभाव से मानव शरीर के महत्वपूर्ण अंग प्रभावित होते हैं। कैंसर, तंत्रिका व स्नायु तंत्र पर भी असर हो सकता है।

लेखक जगदीश वर्मा ‘समन्दर’ से संपर्क के जरिए किया जा सकता है.

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  • Guest - ashok

    रिलायंस सीडीएमए की सबसे विशेष बात ये थी कि इसकी फ्रिक्वेंसी कभी भी रेडियो,टेलीविज़न या कैमरे की फ्रिक्वेंसी को डिस्टर्ब नहीं करती थी, जबकि जीएसएम पर आने वाली कॉल से इलेक्ट्रॉनिक उपकरण की फ्रिक्वेंसी में बाधा आती है जिस वज़ह से एक तेज़ कड़कड़ाहट की आवाज़ आती है, पैनल डिस्कशन में भी साइलेंट मोड पर भी जीएसएम सेट की फ्रिक्वेंसी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिये परेशानी बनती जा रही है, सीडीएमए तुम बहुत याद आओगे हम मीडिया वालों को