Category: इवेंट, पावर-पुलिस, न्यूज-व्यूज, चर्चा-चिट्ठी... Published on Tuesday, 22 November 2011 19:31 Written by B4M
हरिद्वार । जब कोई मीडिया का बड़ा नाम मीडिया पर ही चोट करे तो समझ लेना चाहिए कि कहीं ना कहीं तो मीडिया में गिरावट आ रही है। मीडिया खासकर टीवी पत्रकारिता के क्षेत्र के दिग्गज पत्रकार पुण्य प्रसून वाजपेयी का मानना है कि आज के दौर में मीडिया भी खुद को सत्ता समझने लगा है। मीडिया मुनाफे के चक्कर में आम आदमी से दूर होता जा रहा है और अब तो ज्यादातर मीडिया घराने कारपोरेट घरानों की तरह चल रहे हैं। यही वजह है कि देश के आम आदमी से सीधे जुड़े अन्ना के आंदोलन को भी मीडिया ने मुनाफे का जरिया बना लिया। वाजपेयी हरिद्वार में हरिद्वार प्रेस क्लब के 25 साल पूरे होने पर आयोजित रजत जयन्ती समारोह में बोल रहें थे।
समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए जी न्यूज के सलाहाकार सम्पादक पुण्य प्रसून वाजपेयी ने कहा कि आज देश का मीडिया मुनाफे के चक्कर में राजनीतिक गलियारों तक ही पहुंच बनाकर खुद को ताकतवर समझने लगा है। जबकि मीडिया को देश के आम जनमानस के मर्म को समझ कर उसके अनुरूप काम करना चाहिए। उनका कहना है कि मीडिया को राजनीतिक गलियारों से बाहर निकलना जाहिए और वहाँ तक पहुंचना चाहिए जहाँ असली भारत बसता है। वाजपेयी ने कहा कि पिछले दिनों देश ने अन्ना के आंदोलन के दौरान मीडिया की ताकत को देखा। अन्ना या उनके संगठन ने देश की जनता को निमन्त्रण नही दिया फिर भी करीब 62 देशों में एक साथ अन्ना के पक्ष में प्रदर्शन हुए और देश में तो जनता अन्ना के पक्ष में सङकों पर उतर आई तो सरकार को भी घबरा कर अन्ना की मांगों को मानना पड़ा। पर इसके बावजूद भी अन्ना के आंदोलन में भी मीडिया मुनाफा ढूंढता रहा है कि कैसे उनके समाचार पत्र की पाठक संख्या बढे या उसके चैनल की टीआरपी में इजाफा हो। वाजपेयी ने कहा कि मीडिया को सामाजिक सरोकारों और आम आदमी की आकांक्षाओं के अनुरूप काम करना चाहिए पर अगर मीडिया खुद को सत्ता समझने लगेगा तो उसकी ताकत सत्ता की तरह से ही ज्यादा दिनों तक बनी नही रह सकती है।
समारोह में सोशल मीडिया के क्षेत्र में जाना माना नाम दिल्ली से आये युवा पत्रकार पीयूष पांङे ने मीडिया मे क्षेत्र में सोशल मीडिया की बढती ताकत से रूबरू कराया। पांङे ने बताया कि सोशल मीडिया में फेसबुक, ट्वीटर आदि नई पीढी का एक ऐसा मीडिया माध्यम है जो आम आदमी के लिए अभिव्यक्ति का एक सशक्त माध्यम बनकर तेजी से उभरा है।उन्होने कहा कि सोशल मीडिया के जरिये आप अपनी बात को एक साथ दुनिया भर के लोगो तक पहुंचा सकतें हैं। फेसबुक हो या ट्वीटर जैसे सोशल मीडिया आज आम आदमी की सीधी पहुंच में हैं। जिसके पास भी मल्टीमीडिया मौबाइल है वह पत्रकार ना होते हुए भी पत्रकार है। क्योंकि वह अपनी भावनाओं को इनके जरिये अभिव्यक्त कर सकता है। उन्होने कहा कि अन्ना के आंदोलन को यदि उतनी बङी सफलता मिली और एक साथ देश को करोङो लोग अन्ना के आंदोलन से जुङे तो इसके पीछे सोशल मीडिया ही माध्यम बना। इसके जरिये लोग एक दूसरे से जुङते गये और अन्ना के आंदोलन को सफल बना दिया। उन्होने कहा कि सोशल मीडिया भले ही आम आदमी के लिए एक सशक्त माध्यम बना हो पर उसके कई खतरों भी है। उन्होने कहा कि इन माध्यमों में कोई भी अपनी बात तो कह सकता है पर वह कुछ भी कह दें और फिर वह मानहानि जैसे मामलों में फंसने का खतरा उठाये। पीयूष पांङे ने लोगो को आगाह किया कि इन माध्यमों का उपयोग करते समय वहुत सोच समझ कर लिखना4 चाहिए नही तो उस पर जो भी आप लिखेंगे उसकी जिम्मेदारी भी आपकी होगी।
समारोह में इंङियन एक्सप्रेस के फोटो एङिटर नीरज प्रियदर्शी ने फोटो पत्रकारिता की बारिकियों से लोगो को रूबरू कराया। उत्तराखण्ङ के मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहाकार उमाकांत लखेड़ा ने भी आज के दौर में मॉङिया की विश्वनियता को संकट में बताया। समारोह में प्रेस क्लब के अध्यक्ष अविक्षित रमन, महामंत्री दीपक नौटियाल, कोषाध्यक्ष बालकृष्ण शास्त्री, संयोजक डा. रजनीकांत शुक्ला, सुनील सिंह, संजय आर्य, ललितेन्द्र नाथ, संदीप शर्मा, सलमानी, डा. राधिका नागरथ अमित शर्मा कौशल सिखौला, रघुवीर सिंह, डा. कमलकांत बुधकर , सुनील दत्त पांडे, डा. शिव शंकर जायसवाल, गोपाल रावत, नरेश गुप्ता, देवेन्द्र शर्मा, राजेश शर्मा, संजय रावल, गुलशन नैय्यर, रामेश्वर शर्मा, नवीन पांडे, महावीर नेगी, आशीष मिश्रा, श्रवण झा, राजकुमार, रूपेश शर्मा, शिवा अग्रवाल, आदि सहित कई पत्रकारों ने स्वागत किया।
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