मजीठिया मामले के निपटारे को सुप्रीम कोर्ट द्वारा कमेटी बनाए जाने की उम्मीद : एडवोकेट उमेश शर्मा

मजीठिया मामले में तीन मई को आरपार की उम्मीद…. देश भर के मीडियाकर्मियों के लिये माननीय सुप्रीमकोर्ट में जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड की लड़ाई लड़ रहे एडवोकट उमेश शर्मा का मानना है कि अखबार मालिकों के खिलाफ चल रही अवमानना मामले की यह लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है और तीन मई को इस मामले में आरपार होने की उम्मीद है। यह पूछे जाने पर कि इस लड़ाई का निष्कर्ष क्या निकलने की उम्मीद है, एडवोकेट उमेश शर्मा का कहना है कि लड़ाई मीडियाकर्मी ही जीतेंगे लेकिन जहां तक मुझे लग रहा है, सुप्रीमकोर्ट इस मामले में एक कमेटी बना सकती है।

यह कमेटी अखबार मालिकों से साफ कहेगी कि आप कर्मचारियों की लिस्ट और इनकम टैक्स विभाग में जमा कराया गया अपना 2007 से 2010 तक की बैलेंसशीट लेकर आईये। यह कमेटी फाईनल कर देगी कि आपने वेज बोर्ड की सिफारिश लागू किया या नहीं। यह कमेटी दस्तावेज देखकर तुरंत बता देगी कि अखबार मालिकों ने जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ कर्मचारियों को दिया है या नहीं। इससे काफी कुछ साफ हो जायेगा।

लीगल इशूज के मामले पर उमेश शर्मा ने कहा कि मैं बार बार कहता हूं कि लीगल इशूज कोई गंभीर मुद्दा नहीं हैं। इसके जरिये कुछ लोग सिर्फ भ्रम फैला रहे हैं और अखबार मालिक भी सुप्रीमकोर्ट को भ्रमित कर रहे हैं। एक अन्य प्रश्न के उत्तर में श्री शर्मा ने कहा कि जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड मामले का सही निराकरण कमेटी बनाकर ही हो सकता है और कमेटी बनी तो हम केस जीत भी जायेंगे। नहीं तो, लीगल इश्यू में फसेंगे तो फंसते ही जायेंगे।

उमेश शर्मा कहते हैं- अरे भाई साफ बताईये, हम अ्वमानना की सुनवाई में गये हैं तो इसमें लीगल इश्यू कहां से आ गया। लीगल इश्यू के ज्यादा चक्कर में पड़ेंगे तो हमें जिन्दगी भर लेबर कोर्ट का चक्कर ही काटना पड़ेगा। मैं आज भी अपने इस बात पर कायम हूं। लीगल इश्यू जो फ्रेम हुये हैं, सुप्रीम कोर्ट अगर सुनवाई के बाद यह बोल दे कि २० जे का मामला विवादित है और ये हमारे अधिकार क्षेत्र में नहीं आता तो हम इस पर कुछ नहीं कर सकते हैं।

दूसरी चीज अगर सुप्रीम कोर्ट यह बोल दे कि कंटेंप्ट के तहत यह स्पष्ट नहीं हो रहा कि मालिकों ने जान बूझ कर अवमानना की है, तो हो गया ना सबको नुकसान। इसका तरीका यह है कि पहले जांच कमेटी बनाने पर जोर दिया जाता फिर जांच कमेटी के सामने २० जे व अन्य समस्याओं के बारे में तथ्य इकट्ठा कर सुप्रीम कोर्ट के सामने लाया जाये तो सुप्रीमकोर्ट भी इसे गंभीरता से लेती। मैं फिर कह रहा हूं कमेटी बनाना ही एक मात्र उचित विकल्प होगा।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्टीविस्ट
९३२२४११३३५

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