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इसे कहते हैं मोदी की आँख में आँख डाल कर पत्रकारिता करना!

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दया शंकर राय-

इसे कहते हैं देश के मुखिया से आँख से आँख मिलाकर बात करने वाली पत्रकारिता..! अगर देश की मुख्यधारा मीडिया का एक चौथाई हिस्सा भी यह काम करने लगे तो मुल्क को शायद वो जुबान मिल जाय जिसकी आज उसे जरूरत है..!

भारतीय और भारतीय मूल के 113 लेखकों ने भारत की आजादी के 75 साल पूरा होने पर न्यूयॉर्क में एक कार्यक्रम के दौरान इस बात पर गहरी चिंता जताई कि ऐसे में जबकि देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है, वहाँ अल्पसंख्यकों, बुद्धिजीवियों, लेखकों का दमन हो रहा है और लोकतंत्र की हालत ठीक नहीं है..!

इन लेखकों में किरण देसाई, जुम्पा लाहिरी, गीतांजलि श्री, सुकेत मेहता, सलमान रुश्दी और राज मोहन गाँधी के नाम शामिल हैं। इसके साथ ही दुनिया भर के 102 लेखकों ने 15 अगस्त को राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू को चिट्ठी लिख लेखकों की लेखकीय आजादी सीमित होते जाने पर फिक्र जताते हुए यह आजादी बहाल करने की अपील की है..!

आजादी के अमृत काल में देश के लिए यह कितने फ़क्र की बात है..!!

वाक़ई मिस्टर मोदी.....आप सही हैं और ये सभी नामचीन गलत..!

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