इलाहाबाद के किस्से (पार्ट-1) : रोज नई क्रांति कर रहे कवि को पत्नी की चिट्ठी- दर्शन दे दिया करो मेरे छैला!
बोधिसत्व- बात 1995 की होगी। एक युवा कवि का विवाह हुआ। वह पहले लेखकों के एक संगठन में था बाद में द्रोही हो गया। गुरु जी को महत्त्व नहीं देता था। गुरु जी उसकी नई गृहस्थी उजाड़ देना चाहते थे। यह गुरु जी अपने मन के आनन्द के लिए कर रहे थे। उसे उजाड़ने के … Continue reading इलाहाबाद के किस्से (पार्ट-1) : रोज नई क्रांति कर रहे कवि को पत्नी की चिट्ठी- दर्शन दे दिया करो मेरे छैला!
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बोधिसत्व- बात 1995 की होगी। एक युवा कवि का विवाह हुआ। वह पहले लेखकों के एक संगठन में था बाद में द्रोही हो गया। गुरु जी को महत्त्व नहीं देता था। गुरु जी उसकी नई गृहस्थी उजाड़ देना चाहते थे। यह गुरु जी अपने मन के आनन्द के लिए कर रहे थे। उसे उजाड़ने के … Continue reading इलाहाबाद के किस्से (पार्ट-1) : रोज नई क्रांति कर रहे कवि को पत्नी की चिट्ठी- दर्शन दे दिया करो मेरे छैला!