खुद के कर्मचारियों को नौकरी से निकालकर दूसरों की मदद कर रहे हैं प्रदीप रॉय!

लॉकडाउन अवधि के दौरान इंडिया लीगल और एपीएन न्यूज में अप्रत्यक्ष रूप से वेतन कटौती और छंटनी हुई है…

एपीएन न्यूज चैनल और इंडिया लीगल से लॉकडाउन में छंटनी व कर्मचारियों को सैलरी ना दिए जाने की खबरें आ रही हैं। खास बात ये है कि चैनल के मालिक प्रदीप राय खुद तो अपने कर्मचारियों के पैसे नहीं दे रहे हैं और ट्विटर पर अन्य संस्थानों के कर्मचारियों की मदद करने के लिए तैयार हैं। दरअसल, हाल ही में चैनल और मैगजीन की डिजिटल टीम ने लॉकडाउन के दौरान सैलरी नहीं देने और कुछ कर्मचारियों को बाहर निकाल दिए जाने पर ट्विवटर के जरिए अपनी आवाज उठाई।

बता दें कि इंडिया लीगल और एपीएन सहायक कंपनी हैं, जिनके मालिक सीनियर वकील प्रदीप राय हैं। कंपनी के कर्मचारियों ने प्रदीप राय के उस ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए अपनी आवाज उठाई, जिसमें राय ने दूसरे संस्थानों के उन कर्मचारियों की कानूनी मदद की पेशकश की थी, जिन्हें लॉकडाउन के दौरान ऑफिस आने के लिए कहा जा रहा है और कंपनी द्वारा परेशान किया जा रहा है। जहां प्रदीप राय दूसरे संस्थानों की मदद कर रहे हैं, वहीं उनकी कंपनी के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

प्रदीप राय के इस ट्वीट के बाद इंडिया लीगल के पूर्व कर्मचारी विकास भदौरिया ने इस ट्वीट पर रिप्लाई करते हुए राय से उनकी कंपनी में ही काम कर रहे कर्मचारियों के साथ हो रहे उत्पीड़न के लिए भी मदद मांगी। इसके बाद प्रदीप राय ने किसी भी कर्मचारी के सवाल का जवाब नहीं दिया और इस पर प्रतिक्रिया देने वाले और रीट्वीट करने वाले कर्मचारियों को ब्लॉक कर दिया।

आरोप है कि लॉकडाउन की घोषणा होने के अगले दिन ही इंडिया लीगल ने अपने कर्मचारियों से बातचीत करना बंद कर दिया था। यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि कर्मचारियों को लॉकडाउन अवधि के लिए भुगतान नहीं किया गया, जिसके कारण कई कर्मचारियों को इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा।

विकास के ट्वीट में आगे आरोप लगाया गया है कि एक संगठन जो एक सीनियर वकील द्वारा चलाया जा रहा है, वो कानून के खिलाफ है। विकास ने आरोप लगाया, “संगठन अपने कर्मचारियों को दस्तावेज नहीं देता है, इस्तीफे के बाद भी कई कर्मचारियों को अपना ऑफर लेटर, कॉन्ट्रेक्ट लेटर, सैलरी स्लिप और रेजिगनेशन लेटर नहीं मिला है।”

इंडिया लीगल के एक और कर्मचारी प्रशांत मुखर्जी ने आरोप लगाया है कि बिना किसी औचित्य के पहले भी वेतन में अनुचित कटौती की गई है, लेकिन कर्मचारी बोल नहीं सकते। मुखर्जी ने बताया, ‘कर्मचारी पहले भी नहीं बोल सकते थे और उनमें से कई कर्मचारियों को तो मैनेजमेंट के गलत व्यवहार की वजह से नौकरी छोड़नी पड़ी थी। कई लोगों ने इस वजह से आवाज नहीं उठाई कि संस्थान एक सीनियर वकील की ओर से चलाया जा रहा है, जिनके जूडिसिरी में अच्छे संबंध हैं।’

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