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ये प्रदीप भंडरिया दरअसल ‘अर्णव स्कूल ऑफ बकालोजी’ का छात्र है, इसलिए किसी विवेक की आशा न करें!

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टांझू पत्रकार प्रदीप भंडारी की टीआरपी नई उंचाई छू गई है. सोशल मीडिया पर उनका वीडियो क्लिप खूब वायरल हो रहा है. जंता मजे ले ले कर देख रही और अपने अपने वक्तव्य पेल रही. आप भी आनंद लेवें…

आजकल की मुख्यधारा की पत्रकारिता दरअसल आनंद लेने-देने की ही चीज है… क्योंकि उससे दर्शक आनंद न ले पाएगा तो उसका बीपी बढ़ जाएगा और कई रोगों को शिकार हो जाएगा… इसलिए आनंद लेना मजबूरी वाला एकमात्र आप्शन है… सो, इस आप्शन को एंजाय किया करें…

सेकेंड इस मुख्यधारा की पत्रकारिता से मीडिया मालिक को धन मिल जाता है, सत्ता के बहुत सारे लाभ मिल जाते हैं… इसलिए मालिक आनंद में रहता है… सत्ता में बैठा आदमी इसलिए आनंद में रहता है कि उसकी महान गाथाएं मीडिया में चलती रहती हैं.. उसके गड़बड़ घोटाले पर पूरा पर्दा डाला जाता है… इसलिए दोतरफा आनंद आता है इस पत्रकारिता के कारण…

जनता-दर्शक के पास आनंद लेने का आप्शन मजबूरी वाला होता है… सो, लोग अब आनंद ले रहे हैं…

मोहम्मद अनस ने सोभड़ीवाला एवार्ड से सम्मानित प्रदीप भंडारी के वीडियो क्लिप को बस एक लाइन लिखते हुए एफबी पर डाला है- ध्यान से सुनिए इस वीडियो को.

लोगों ने ध्यान से सुना और अपना अपना नतीजा बताया. वीडियो देखने सुनने के बाद प्रदीप भंडारी के लिए अनिल मलिक ने कमेंट किया- ‘अर्णव स्कूल ऑफ बकालोजी का छात्र है। इस लिए कोई विवेक की आशा न करें’.

देखें वीडियो, क्लिक करें- https://www.facebook.com/anas.journalist/videos/575330693679961

मोहम्मद अनस द्वारा अपलोड इस वीडियो पर कुछ अन्य लोगों की प्रतिक्रियाएं देखें-

O.p. Yadav
सही तो कह रहा इस देश मे कानून को झांट बराबर भी नहीं समझता कोई 🙂

Rohil Khan
कानून को अखरोट भी नही समझते,,,,,अश्लील है ये एंकर 🙂

Faraz Ahmed
थू है ऐसी भाषा बोलने वाले पर अब ये स्तर रह गया है पत्रकारिता का? शर्म आनी चाहिए की आपके यहाँ ऐसे घटिया लोग हैं IndiaNews

पाशा मेहराज
मैं झांट शब्द लिखते हुए शरमाता था, आज पता चला कि यह तो सभ्य शब्द है।

Shadab Malik
वीडियो में चलने वाली हेडिंग पर ध्यान नहीं दिया आपने एक और मज़ेदार चीज़ है उसके अंदर, एक हेडिंग में तो लिखा है शव को लटका दिया गया और दूसरे में लिखा है पीड़ित अभी भी जिंदा है..

Vaseem Ahmad
ट की जगह त बोल रहा है शायद… बाबा तोतले को भी एंकर बनवा दिए हो

Mohammad Kashif
क्या इसी को आजाद पत्रकारिता बोलते हैं..?

Shameem Fateh
हा रात आफिस मे फोन पर भी यही बकचोदी पेल रहा था कि कोई गलत वर्ड थोडी है ये… 🙂

Ahmed Hussain
झांट के बाल का ताबीज़ बना कर पहने वाले चाटुकार

Gufran Khan
कहा तो ठीक ही है…. पर कत्तई अश्लील शब्द 🙂

Aijaz Khan
उम्मीद है जल्द ही टेलीविजन वर्ल्ड में झां.. शब्द को आम स्वीकृति प्रदान कर दी जाएगी ..

MD Maaz
शुक्र है ये शब्द अश्लीलता के दायरे से बाहर आ गया अब से फेसबुकिया समाज अपने शब्दों के चयन में इस शब्द को बिना संकोच के साथ सम्मलित करेगा

Ashad Khan
मोदी जी की जय,,,, बस अब अंजना मोदी और रूह बिका भी अखरोट, खरबूजे और संतरे पर ज्ञान बिखेरने लग तो लाइफ बन जायेगी भाजपा की।

Tariq Sayeed Ajju
मोदी राज में देश तरक्की कर रहा है… यह गंदा शब्द भी अब अदालतों में बोला जाएगा ऐसा इसकी भाषा से लग रहा है

Vikram Singh Chauhan
रिपब्लिक में चीखता था, दौड़ता था। यहाँ आकर तो गाली गलौच करने लगा। सुदर्शन में जायेगा तो किसी का लाइव मर्डर ही कर देगा। इन चैनलों का ऑन एयर चलना ही इस बात का सबूत है कि कोई भी मीडिया नियामक संस्था अब अस्तित्व में नहीं है।

Shameem Ahmad
बड़ा अश्लील लोंडा है ये।।

Nafees Al Kabeer Shamsi
यह शब्द सरदारों के लिए बोला गया है , बाक़ी तो सब समझते हैं

Suhel Ahmad Siddiqui
भारतीय टी वी में समाचार वाचन एवं सम्प्रेषण की गुणवत्ता में अभूतपूर्व गिरावट आई है।

Imran Akhtar Khan
इसके कहने का मतलब ये है कि देश के कानून-व्यवस्था को कम से कम झा&%$ तो समझिये…

Ramesh Kumar
यह मूर्ख एंकर जो कह रहा है कि “वे कानून को ….नहीं समझते हैं! दरअसल “वे” वही समझते हैं तभी उस कानून को काटते/तोड़ते रहते हैं…

Rehan Srk
इस तरह के पत्रकार को हम ….. समझते है

M Quraishi
मार भोसड़ी वाले के चुतिया दल्ला पत्रकार

Er Faiz Farooqui
कानून को …..ट भी नहीं समझते हैं

Parvez Jaleel Kidwai
गिरता हुआ पत्रकारिता का स्तर

Neelesh Pal
ये भंडारे का शिकार व्यक्ति है। निजिरूप से इनसे मिल चुका हूं, जब जन की बात के नाम से दुकान चलाते थे। बाते इतनी अव्वल दर्जे की करते है कि अगर सामने वाला सुन्न दिमाग का हो तो वहीं चारणासन कर ले।

Usman Khan Gauri
मीडिया है कुछ भी बोल सकती है

महेंद्र कुमार यादव
बाबा की बूटी का सेवन करके ऐंकरिंग कर रहा है ये दलाल

Tauseef Raza
मैं झांट शब्द लिखते हुए शरमाता था, आज पता चला कि यह तो सभ्य शब्द है।

Md Nezamuddin
झांट कोई गाली थोड़ी न है ये तो शरीर का एक हिस्सा है.. …

Mohd Waseem
एन्करो की ऐसी भाषा शैली धीरे-धीरे देश की मीडिया की ऑफिशियल भाषा शैली होती चलीं जायेगी… दरअसल…राष्ट्रवादी भारत की न्यू इंडिया की एंकरिंग है।

Kumar Suraj
राजीव तलवार को फेल कर दिया इस झांटू ने।

Sahbaz Khan
Had ho gayi anchoring ki yar batavo ye to live gali galoj karne lage bhosdi wale

Asif Rizvi
कुछ लोग नेशनल न्यूज़ को $&@ भी नहीं समझते हैं

Chanendra Dewangan
गजब का स्वघोषित राष्ट्रवादी पत्रकार है!
इसका उछल कूद भी देखा है हमने!

Karan GurJar
मिर्जापुर देखने के बाद तुरंत एंकरिंग करने का नतीजा

Mohammad Imran Bhati
देश को मिर्जापुर बनाने की कोशिश… वो वक्त लाना चाह रहे “अब लफ्ज ओ बया का काम नही”

Mohammad Aasif
पता नहीं कौन सा नशा करते हैं

Suhail Ahmed
जैसी मीडिया हाउस है उसके हिसाब से इसकी भाषा ठीक है

शकील अंसारी
विडीयो का सर्फ़ दसवाँ सेकंड काम का है। बाक़ी सब जेर ए नाफ़ है।

Adv Waish Khan Habibi
हम इसे भी झा…. समझते हैं

Anil Malik
अर्णव स्कूल ऑफ बकालोजी का छात्र है। इस लिए कोई विवेक की आशा न करें

Yagnyawalky Mishra
जो झांट बोला है उसी को ध्यान से सुनने बोल रहे हो न..

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