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ये एक दिन में नहीं हुआ है। और, ये स्थापित करने में सबसे बड़ी भूमिका बड़का टाइप के सरोकारी साबित पत्रकार, लेखकों ने निभाई है। ताज़ा सागरिका घोष का मुख़्तार परिवार का महिमामंडन वाला लेख पढ़ लीजिए या किसी हरिशंकर तिवारी, रघुराज प्रताप सिंह जैसों के बारे में दिल्ली लखनऊ से इन आरोपी अपराधियों के इलाक़े में गए पत्रकारों की रिपोर्टिंग पढ़िए। सब राबिनहुड छवि बनाने का ठेका लिए दिखते हैं।

इन बड़का पत्रकारों ने समाज में अपराधियों को मान्यता दिलाने में अथक परिश्रम किया है। और दोष ये स्टूडियो में बैठकर समाज को देते हैं, अपनी जातियों के अपराधी छवि वाले नेताओं को मत देने का। इन पत्रकारों की रिपोर्ट ध्वस्त कीजिए। अपने इलाक़े के किसी हरिशंकर तिवारी, अमनमणि त्रिपाठी, रघुराज प्रताप सिंह, मुख़्तार अंसारियों को, उनके नाम पर किसी को वोट मत दीजिए।

वरिष्ठ पत्रकार हर्षवर्धन त्रिपाठी की एफबी वॉल से.

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