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कल प्रेस कान्फ्रेस के दौरान अखिलेश यादव उस समय भड़क गये जब एक वरिष्ठ पत्रकार ने उनसे सवाल किया, ''आपके चाचा शिवपाल जानना चाहते हैं कि आप अपने वादे के मुताबिक पिता मुलायम सिंह को राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद कब सौंप रहे हैं।'' इस सवाल पर वे इतना तमतमा गये कि संबंधित पत्रकार का नाम पूछ कर उसे भवगा पार्टी वाला कह दिया। अखिलेश यहीं नहीं रुके। तैश में यह तक कह गये, ’जब देश बर्बाद हो जायेगा तो तुम जैसे पत्रकार कहीं नहीं रहोगे।’

परिवार के सवाल पर उन्हें अक्सर आग बबूला होता देखा जाता है।

मैंने 48 वर्ष के पत्रकारिता जीवन में कभी किसी नेता को इतना तैश में नहीं देखा। मुलायम सिंह यादव से 90 के दशक में तमाम तीखे सवाल पत्रकारों द्वारा पूछे जाते थे। अयोध्या कांड के दौरान एक बार उनसे पूछा था, 'मुल्ला मुलायम की छवि से बाहर कब आइयेगा।’ किसी प्रकार का रियेक्ट करने के बजाये उन्होंने बड़े शांत स्वर में जबाव दिया था, 'अगर गोली न चलवाता तो उपद्रवी मस्जिद ढहा देते।'

प्रेस कांफ्रेस के बाद मुलायम सिंह ने मुझे अलग बुलाकर कहा था, 'ऐसे सवाल हमेशा पूछा करो, कम से कम मुसलमानों में तो मैसेज ठीक जायेगा।' हालांकि मन से वह कतई यह नहीं चाहते थे कि आगे से कोई उनसे ऐसा तीखा सवाल पूछे। आज अखिलेश की तमतमाहट तमाम पत्रकारों को नागवर लगी। एक सफल नेता बनने के लिये संयम जरूरी है।

अजय कुमार
वरिष्ठ पत्रकार
लखनऊ
मो-9335566111

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