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एडवोकेट सुनीता भारद्वाज पर हमले का मामला... दिल्ली के दिल कनाट प्लेस इलाके में गुंडे सरेआम एक सीनियर महिला वकील पर हमला करते हैं और पुलिस ने गुंडों की मदद करते हुए पीड़िता वकील के खिलाफ ही मुकदमा लिख लिया है. घटना के हफ्ते भर बीत जाने के बाद भी बाराखंभा थाने की पुलिस पीड़िता वकील की तहरीर दबाए बैठे है और हमलावरों की रक्षा में खुलकर खड़ी है. पीड़िता सुनीता भारद्वाज और उनके पति एडवोकेट उमेश शर्मा का बाराखंभा रोड स्थित नई दिल्ली हाउस में आफिस है. सुनीता नयी दिल्ली हाउस फ्लैट ओनर्स एसोसिएशन की सचिव भी हैं.

18 अप्रैल की शाम 3.30 पर अधिवक्ता श्रीमती सुनीता भारद्वाज जब अपने ऑफिस जा रही थीं तो माफिया के लोगों ने गुर्गों से जानलेवा हमला करवा दिया. उनकी लाठी, डंडों, राडों से पिटाई की गई. इससे वह बुरी तरह घायल हो गईं. पीड़िता सुनीता भारद्वाज का कहना है कि उन पर हमला कंवलजीत संगर, अनिल कुमार, अनिल बंसल, अनिल गर्ग ने करवाया. इन लोगों ने भाड़े के गुंडे बुला रखे हैं और ये गुंडे अब भी नई दिल्ली हाउस स्थित बिल्डिंग के ग्राउंड फ्लोर पर टहलते दिख जाते हैं. गुंडों में महिलाओं की संख्या ज्यादा है.

सुनीता ने बताया कि बिल्डरों के इशारे पर दिल्ली पुलिस का दरोगा राजेश कुमार हमले के समय मौजूद था और वह वीडियो क्लिप केवल उस एंगल से बना रहा था जिसमें पीड़िता को ही दोषी दिखाया जा सके. जब लाठी राड से हमला शुरू हुआ तो सुनीता ने अपने बचाव में पास स्थित एक रॉड को उठा लिया और हमलावरों से प्रतिरोध करने लगीं. दरोगा राजेश कुमार ने हमलावरों को रोकने या पीड़िता को बचाने की बजाय वीडियो क्लिप बनाया और उसको बाद में अपने हिसाब से दिखा कर यह कहता रहा कि सुनीता भारद्वाज ही इनको मार रहीं थीं. सवाल यह है कि जो महिलाएं और पुरुष घात लगा कर हमला किए और जो माफिया के लोग उनके साथ शामिल थे, उनको पुलिस क्यों बचा रही है. वो हमलावर महिलाएं न उस बिल्डिंग में काम करती हैं न ही उनका वहां होने का कोई मतलब बनता है. फिर भी पुलिस दिन को रात बनाने में लगी हुई है. उनमें से एक महिला प्रिया सिंह पर पहले से ही लोगों पर हमले के कई मुकदमे दर्ज हैं और वह पैसे लेकर झूठे मुकदमे लिखाने का काम करती है.

पुलिस का अत्याचार यहीं नहीं ख़त्म हुआ. सुनीता भारद्वाज को दरोगा राजेश कुमार ने बारा खम्भा थाने में ले जा कर एक कमरे में बंद कर दिया और उनको गंभीर चोटों के बाद भी अस्पताल नहीं ले गया. सुनीता भारद्वाज ने फिर वहां से कमिश्नर को फोन किया. तब उनके आदेश पर कैट की एम्बुलेंस थाने पर आई और उनको उठा कर राम मनोहर लोहिया अस्पताल ले गयी जहाँ उनको २४ घंटे भर्ती रखा गया. मेडिकल सर्टिफिकेट के अनुसार उनके सर, पीठ, बाजू, कंधे पर काफी चोट के निशान हैं और चीरा लगा हुआ है परन्तु पुलिस के हिसाब से यह मुक़दमा उन्हीं के खिलाफ बनता है.

पुलिस और माफिया के साठगांठ का यह अजूबा दिल्ली के दिल में हो रहा है और पीड़िता को लगातार अपनी शिकायत वापस लेने की धमकी मिल रही है. इस घटना की CCTV  क्लिप भी पुलिस के पास है फिर भी कोई कार्यवाही नहीं हो रही है और पीड़िता न्याय के लिये गुहार लगती फिर रही है. सुनीता भारद्वाज सचिव की हैसियत से उस बिल्डिंग का मालिकाना हक़ फ्लैट मालिकों को दिलाने की क़ानूनी लड़ाई में जीत गयी हैं. इस कारण बिल्डर माफिया में बौखलाहट है और उनको डरा कर पीछे कर देना चाहते हैं. ये वही अधिवक्ता सुनीता भरद्वाज हैं जिन्होंने शीला दीक्षित के खिलाफ लोकायुक्त दिल्ली की अदालत से केस जीता था. हमले से संबंधित एक वीडियो देखने के लिए नीचे क्लिक करें...

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  • Guest - Rajni

    ऐसा पहली बार नहीं हुआ है इससे पहले भी कयी बार ऐसा देखने को मिला है जहाँ पर पुलिस और गुंडों की साँठ गाँठ रहती है। वहाँ दुकानों बार के मालिकों के साथ मिलकर ये पुलिस वाले लोगों को ज़बरन झूठे केस में फँसाते है। इसका एक उदाहरण मेरा क़रीबी है जिसे पुलिस ने झूठे इल्ज़ाम में फँसाने की कोशिश की। सीपी के पुलिसवाले सबसे घटिया पुलिसवाले हैं।

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