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  • Published in सुख-दुख

28 जून 2017 के दिन बिहार सफ़र के दौरान समसतीपुर नेशनल हाईवे के मारगन चौक पर बजरंग दल के लोग ट्रक को रास्ते में रोककर रास्ता जाम कर रखा था. मैं कार लेकर खड़ा ही हुआ था कि केसरिया गमछा गले मे डाले कई लोग 'जय श्री राम' का नारा लगाते आ पहुंचे, मैंने पूछा क्यों रास्ता जाम है. पूछते ही कई लोगों ने मेरी कार के अंदर बैठी मेरे मां-पिता के साथ पत्नी पर नज़र डाली.  चूंकि मेरे पिताजी दाढ़ी रखे हुए हैं और पत्नी नक़ाब पहनती हैं तो इसको देखते हुए नारेबाज़ी तेज़ हो गई.

जब तक समझ पाता दो लोगों ने कार के शीशे के अंदर अपना अपना सिर घुसाकर कहा कि बोलो 'जय श्री राम' वरना कार फूंक देंगे. मैं दहशत में आ गया. वैसे मैं सभी मज़हबों का बहुत सम्मान करता हूं. मैं दिल से राम जी का सम्मान भी करता हूं. उनकी जय करने में मुझे कोई एतराज़ भी नहीं होता. लेकिन जिस दहशत में वह मुझे जय श्री राम कहलाना चाहते थे, अच्छा नहीं लगा. लेकिन दहशत में मुझे जय श्री राम कहकर अपने परिवार को बचाकर वापस भागकर जान बचानी पड़ी.

कुछ दूर जाने के बाद मैंने ट्विटर पर मुख्यमंत्री नीतिश कुमार को टैग करते हुए ट्वीट किया. जदयू के प्रवक्ता नीरज कुमार और राजद विघायक अखतरूल इस्लाम शाहीन को फोन करके मामले की जानकारी दी. अनुरोध किया कि तत्काल मामले में पुलिस मुस्तैदी के साथ सक्रिय हो ताकि कोई अप्रिय घटना ना घटे. बहरहाल मां को बहुत बीमार मामा से मिलाने के लिए किसी तरह रास्ता बदल कर मैं अपने ननिहाल रहीमाबाद पहुंचा. वापसी जल्द दिल्ली की होने वाली है. लेकिन नीतिश कुमार के राज में तांडव समझ में नहीं आया. किसी को नुक़सान ना हो, लेकिन इसके बाद भी आज भी मेरे दिल मे राम जी को प्रति आस्था कम नहीं हुई है.

एनडीटीवी के मीडियाकर्मी एम अतहरउददीन मुन्ने भारती की एफबी वॉल से.

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