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 चीन की कंपनी अलीबाबा ग्रुप के यूसी न्यूज़ में काम कर रही महिला कर्मचारी को अपने हक के लिए आवाज़ उठाने पर दिखा दिया गया बाहर का रास्ता

भारत-चीन का मुद्दा जग जाहिर है. सीमा पर चल रहे विवाद के बावजूद चीन की कई बड़ी कंपनियों ने भारतीय बाज़ार में अपने पैर फैला रखे है. उन्हीं में से एक है जाने-माने अलीबाबा ग्रुप का यूसी न्यूज़ (UC NEWS) जिसका ऑफिस गुरुग्राम में स्थित है. अपना ऑफिस होने के बाद भी यूसी न्यूज़ ने एक कंसल्टेंसी कंपनी को अपनी वेबसाइट पर आने वाली ख़बरों के कंटेंट ऑडिट, वीडिओ ऑडिट, ट्रांसलेशन आदि का काम सौंप रखा है. दूसरे शब्दों में “एन्हांस बिज़नेस सोल्यूशन” नाम की इस कंसल्टेंसी कंपनी का यूसी न्यूज़ एक क्लाइंट है. यहाँ काम करने वाले सभी ऑडिटर्स वैसे तो काम यूसी न्यूज़ के लिए कर रहे लेकिन उनका पेरोल एन्हांस बिज़नेस सोल्यूशन के नाम पर ही होता है.

अलीबाबा जैसे बड़े ग्रुप की जिसने इतनी बड़ी कमान कुछ महीने पहले आई एक ऐसी कंपनी को सौंप दी है जिसे न तो अपने कर्मचारियों से बात करने की तमीज है और न ही उनकी दिक्कतों को समझने की समझ. यहाँ एचआर पद पर बैठी एक महिला अपने आप को कंपनी की मालिक समझती है. उसने एक एम्प्लोयी को सिर्फ इसलिए बाहर का रास्ता दिखा दिया क्यूंकि उसने न सिर्फ एचआर द्वारा अपने ऊपर बार बार होने वाले जातिवादी व क्षेत्रवादी कमेंट के खिलाफ़ आवाज़ उठाई बल्कि ऑफिस के कुछ बेसिरपैर के कायदे-कानून के खिलाफ़ सवाल किये.

मसलन गुरुग्राम में किसी महिला एम्प्लोई को 8 बजे के बाद गाड़ी की सुविधा देना अनिवार्य होता है. इससे बचने के लिए कंपनी ने ऑफिस समय ही 10:45 से 7:45 कर दिया जिससे उन्हें गाड़ी की सुविधा न देनी पड़े. इस पर जब ऑफिस की एक महिला एम्प्लोई ने सवाल किया तो उसे यह कह कर बेइज्जत किया की “कानपुर-यूपी जैसे छोटे शहरों के लोगों को नौकरी में रखना ही नहीं चाहिए, तुम लोगों को लगता है कि 8 बजते ही सड़कें सूनसान हो जाती है, यह दिल्ली एनसीआर है यहाँ 12-12 बजे तक लड़कियां पार्टी करती हैं, इसीलिए यह कनपुरिया स्टाइल अपने अन्दर से निकाल दो.”

महिला कर्मचारी द्वारा अपने आप को संबोधित करने के लिए “मैं” की जगह “हम” शब्द का प्रयोग करने पर भी एचआर हेड ने मजाक बनाया.

उसे ज़बरदस्ती सुबह 11 बजे से 8 बजे वाली शिफ्ट करने पर मजबूर किया और जब उसने इसके खिलाफ़ उन्हें जवाब देने की कोशिश की तो उसे अचानक एक दिन अपने केबिन में बुला कर ज़बरदस्ती मजबूर किया कि या तो वह कंपनी से तत्काल इस्तीफ़ा दे या फिर उसे तुरंत टर्मिनेट किया जायेगा. महिला एम्प्लोई ने उससे सोचने के लिए कुछ वक़्त की मांग की तो धमकी भरे लहजे में उससे बोला कि “तुम्हे सोचने का वक़्त नहीं दिया जायेगा, तुरंत फैसला लो और इस केबिन से तुम्हें तभी बहार निकलने देंगे जब तुम इन दोनों में से किसी एक को स्वीकार कर लोगी. और ऐसा नहीं करने की स्थिति में हम तुम्हें टर्मिनेट कर देंगे और यह भी पक्का करेंगे कि तुम्हें कहीं और नौकरी न मिले.”

अपनी गलती पूछने पर उसने बोला- तुम सवाल बहुत करती हो और तुम्हारी देखा-देखी और भी लड़कियां सवाल करने आ जाती हैं. मैं अपने ऑफिस में किसी की आवाज़ नहीं उठने दूंगी. तुम बाकी सबके लिए एक उदाहरण बनोगी कि इस ऑफिस में आवाज़ उठाने का क्या अंजाम होता है.

उस महिला एम्प्लोई को इतना डरा दिया की उसने मजबूरी में आकर उनकी तरफ से पहले से तैयार इस्तीफ़े पर साइन कर दिए.

एचआर का मन इससे भी नहीं भरा तो उसने अपनी जूनियर को बुलाया और उसे बोला कि “ये अपना सामान लेने अपनी सीट पर जा रही है, तुम इसके साथ साथ पीछे जाओ और ध्यान रहे कि ये किसी से बात न करने पाए और न ही किसी से मिल पाए.” यहाँ तक कि उसके बाद उसने जूनियर एम्प्लोई को उस महिला को बाहर गेट तक छोड़ने के लिए भेजा जिससे वो किसी को कुछ न बता पाए. उस महिला एम्प्लोई के साथ इतना दुर्व्यवहार निंदनीय था. उसके साथ ऐसा व्यवहार किया गया जैसे उसने ऑफिस में कोई चोरी या फिर क्राइम किया हो. शर्म आती है ऐसी महिला अधिकारियों पर जो किसी का ऑफिस में काम नहीं देखतीं बल्कि अपना ईगो संतुष्ट करने के लिए उन्हें ऑफिस से निकाल देती है. चीन के अलीबाबा ग्रुप को शायद यह नहीं पता कि अपने काम की ज़िम्मेदारी उन्होंने जिस कंपनी को दी है वह अपने कर्मचारियों से इतना दुर्व्यवहार करती है. कर्मचारी फ़िलहाल श्रम न्यायालय में अपने साथ हुए इस दुर्व्यवहार के खिलाफ़ हक़ की लड़ाई लड़ रही है.

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