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Sanjaya Kumar Singh : क्या ये सच नहीं है कि कीकू शारदा की गिरफ्तारी तब बाबा राम रहीम की ताकत बताने के लिए की गई थी... धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने की शिकायत पर टीवी अभिनेता कीकू शारदा के खिलाफ कार्रवाई करने वाली पुलिस को क्या यह पता नहीं था कि गुरमीत सिंह पर बलात्कार के आरोप हैं और उसकी जांच चल रही है। पुलिस जब बलात्कार के मामलों में कार्रवाई नहीं करती है और धार्मिक आस्था भड़काने की शिकायत पर कार्रवाई करेगी तो भक्त पगलाएंगे ही। जांच होनी चाहिए कि पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई किसके कहने पर की? हरियाणा पुलिस जब कीकू को गिरफ्तार कर मुंबई से ले आई थी तब स्थानीय मीडिया का काम था कि वह याद दिलाती कि बाबा बलात्कार के मामले में अभियुक्त है और पुलिस की फुर्ती असाधारण है। अगर मीडिया ने अपना यह मामूली सा काम किया होता और सरकार ने इस घटना से सीख ली होती तो पुलिस को भी जान रही होती।

'कॉमेडी नाइट्स विद कपिल' में पलक का किरदार निभाने वाले कीकू शारदा ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करके कहा कि डेरा सच्चा सौदा कोई धर्म नहीं है और यह बात डेरे की वेबसाइट से भी साफ पता चलती है। ऐसे में धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का मामला बनता ही नहीं है। फतेहाबाद पुलिस ने जांच में पाया कि कीकू के खिलाफ मामला बनता ही नहीं है, लिहाजा उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द करने की अर्जी अदालत में दायर की गई है। सरकार के इस जवाब को रिकार्ड में लेते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति आरके जैन ने सुनवाई 27 अप्रैल 2016 तक स्थगित कर दी थी।

इस मामले से संबंधित मार्च 2016 की खबरें वेब साइट पर मिलीं जिनके मुताबिक कीकू की रिहाई पीएमओ के हस्तक्षेप पर हुई थी और हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा था कि कामेडियन का उत्पीड़न नहीं होने देंगे। इसके बावजूद यह सच है कि डेरा सच्चा सौदा के गुरमीत राम रहीम (और बलात्कार के आरोपी, अब दोषी) की मिमिक्री करने के 'जुर्म' में कमीडियन कीकू शारदा दो बार हिरासत में लिए गए। उन्होंने कहा है कि यह बेहद यातनापूर्ण और दुखद था। एनडीटीवी से बात करते हुए ऐक्टर ने कहा था, मैं खुशकिस्मत हूं कि मुझे जेल में 14 दिन नहीं गुजारने पड़े।

कीकू ने यह भी कहा था, 'हालांकि जेल मेरे लिए ज्यादा महफूज थी, क्योंकि बाहर तो भयंकर भीड़ है।' कीकू ने कहा कि अगली बार से वह ज्यादा सतर्क रहेंगे और ऐसे किसी ऐक्ट से पहले रिसर्च भी करेंगे। उन्होंने कहा, 'काश हर कोई खुद पर हंसना सीख सके और सबमें थोड़ा ह्यूमर हो।' लेकिन सरकार और पुलिस ने इससे कोई सीख नहीं ली। पुलिस को तो खैर क्या सीखना था पर सरकार कैसे चूक गई?

वरिष्ठ पत्रकार संजय कुमार सिंह की एफबी वॉल से.

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