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यूपी में अपने मुख्यमंत्रित्व काल में अखिलेश यादव ने 2012 से 2017 के बीच 200 से ज्यादा लोगों को यश भारती पुरस्कार बांटा. अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस ने एक आरटीआई से मिली जानकारी के बाद जिन लोगों को यश भारती मिला, उनको किस मापदंड या सिफारिश के आधार पर दिया गया, इसका खुलासा किया है. लिस्ट देखने से पता चलता है कि कहीं कोई मापदंड नहीं था. सिर्फ सिफारिश ही काम आई. यश भारती पुरस्कारों के लिए सत्ता की मर्जी ही मानक थी.

शिवपाल यादव, आजम खां से लेकर राजा भैया तक की सिफारिश से लोगों को यश भारती एवार्ड मिले हैं. यादव परिवार के पुरोहित से लेकर फेमिली डॉक्टर और अपने ग्राम प्रधान तक को यूपी का 'यश भारती' मिला. शिवपाल यादव से लेकर आजम खां और राजा भैया तक की सिफारिश काम आई. आईएएस हिमांशु कुमार की बेटी से लेकर तत्कालीन मुख्य सचिव आलोक रंजन की पत्नी सुरभि रंजन तक को पुरस्कार से नवाजा गया. यश भारती सम्मान के साथ 11 लाख रुपए नगद की पुरस्कार राशि और 50000 रुपए महीना की आजीवन पेंशन दी जाती है. शिवपाल यादव की सिफारिश पर लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार योगेश मिश्र को यश भारती पुरस्कार दिया गया था. यह खुलासा भी आरटीआई के जरिए हुआ है.

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