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इंडियन एक्सप्रेस को आरटीआई के तहत अखिलेश यादव के कार्यकाल में यश भारती पाने वाले 142 लोगों का ब्योरा मिला है. जिन लोगों का ब्योरा इंडियन एक्सप्रेस को मिला है उनकी लिस्ट देखते हुए ये साफ है कि यश भारती बांटने में जमकर भाई-भतीजावाद हुआ है. पुरस्कार देने के लिए कोई तय आवेदन प्रक्रिया या मानदंड नहीं था. कई लोगों ने सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय को अपने आवेदन भेजे थे जबकि ये पुरस्कार आधिकारिक तौर पर राज्य का संस्कृति मंत्रालय देता था.

यश भारती पाने के लिए हेमंत शर्मा ने अपने सीवी लिखा है-  “पहले लेखन को गुजर बसर का सहारा माना, अब जीवन जीने का.” हेमंत शर्मा की सीवी में दावा किया गया है कि वो 1989, 2001 और 2013 का महाकुम्भ कवर करने वाले एकलौते पत्रकार हैं. ज्ञात हो कि एक सीबीआई छापे के बाद हेमंत शर्मा को इंडिया टीवी से हटा दिया गया है.

आरटीआई के तहत मिली सूचना के अनुसार, कम से कम 21 लोगों को सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय में आवेदन भेजने के बाद यश भारती पुरस्कार मिला था. कम से कम छह पुरस्कार विजेता ऐसे हैं जिनका नाम समाजवादी पार्टी नेताओं ने बढ़ाया था. दो नाम तो अखिलेश यादव के चाचा और उनकी सरकार में मंत्री रहे शिवपाल यादव ने अनुशंसित किए थे. एक नाम सपा के वरिष्ठ नेता आजम खान ने भी अनुशंसित किया था. अखिलेश यादव सरकार में मंत्री रहे राजा भैया ने भी दो नामों की अनुशंसा की थी जिन्हें यश भारती मिला.

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