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Panini Anand : कल संघ या भाजपा का कोई व्यक्ति अगर किसी पत्रकार को उसके चैनल या पब्लिकेशन की पहचान की वजह से भगाएगा तो हम उसे सही मानें या ग़लत. रिपोर्टर रिपब्लिक का हो या पांचजन्य का, वायर का हो या एक्सप्रेस का, उसे रहने का हक़ है. यह बात सारे सार्वजनिक जीवन वाले लोग समझ लें. नहीं समझेंगे तो हम इसका विरोध करेंगे, चाहे आप किसी भी विचारधारा के हों. याद रखिए, अन्याय के विरुद्ध लड़ते हुए अन्याय करना खुद अन्यायी बन जाना है.

पत्रकार पाणिनी आनंद की एफबी वॉल से. इस पर आईं कुछ प्रमुख टिप्पणियां...

Gilvester Assari ; But that reporter was trying to shove his Mike on her face...as if he wanted to provoke her..she asked him to take away the Mike but he didn't. .yes getting provoked by such provocations will only affect the larger fight...should not fall in their trap...

Panini Anand माइक दूर क्यों करें. हम जो कह रहे हैं उसमें अगर कुछ गलत नहीं, संदेह नहीं तो फिर चिंता कैसी. किलिंग द मैसेंजर को कैसे सही ठहरा दें. रिपब्लिक गलत है इसलिए हम भी गलती करें क्या. भाजपा ने एनडीटीवी का बहिष्कार कर रखा है. क्या वो सही है.

Kuldeep Kumar मैंने संघ और भाजपा के अनेक शीर्ष नेताओं का इंटरव्यू किया लेकिन अटलबिहारी वाजपेयी ने कभी टाइम नहीं दिया. दिया तो मिले नहीं. क्या मैं उनके साथ ज़बरदस्ती कर सकता था? यदि कोई टीवी पत्रकार मुझसे कोई प्रश्न करता है, तो क्या मुझे जवाब देने या न देने की आज़ादी नहीं है? टीवी पत्रकारों में जो अहंकार है वह कभी प्रिंट पत्रकारों में नज़र नहीं आया. उनका रवैया यह होता है कि ऐसा कैसे हो सकता है कि हम आपकी बाइट लेना चाहें और आप न दें. लोकतंत्र में बहिष्कार की भी आज़ादी है. यदि भाजपा ने एनडीटीवी का बहिष्कार कर रखा है तो यह उसका अधिकार है. और यदि एनडीटीवी भी किसी नेता या पार्टी का बहिष्कार करना चाहे तो यह उसका अधिकार होगा.

Gilvester Assari The way these people have been shoving the Mike on people, shouting at people, chasing g them in groups is no journalism either..and what is happening in their studio, how people are treated, shouted down, branded anti national, maoists, Pakistanis does not require any explanation....in a way they are getting it back from some if not everyone...

Panini Anand हां मुझे पता है. लेकिन हम जानवर के साथ जानवर बन गए तो वहीं हार जाएंगे. अपना धैर्य रखना है. लोग देख रहे हैं कि सही कौन है और गलत कौन. और अगर चिंता इतनी ही है तो सामने आए रिपोर्टर को मत दुतकारिए, रिपब्लिक चैनल के सामने जाकर लड़िए, प्रदर्शन कीजिए. विरोध का यह तरीका असंगत है और हमें छोटा बनाता है. बहिष्कार कीजिए लेकिन बहिष्कार की भाषा उनकी भाषा जैसी न हो. यह ध्यान रखना होगा. हत्यारे को मृत्युदंड का विरोध इसी तर्क के आधार पर करते हैं.

Nirnimesh Kumar Well said Panini. We should fight all those who attempt to muzzle the voice of dissent.

Jyotsna Singh Panini Sir, Republic and Panchjanya mein fark hai. Panchjanya "independent journalism" karne ka dawa nahi karta hai. Shehla and her comrades have been victims of fake and propagandist reporting by this channel. The channel continues to indulge in unethical reporting. And there is no redressal -- what are Editors Guild or Press Council doing? We have let unethical reporting grow in this country and we have called this upon ourselves!

Panini Anand बिल्कुल पूछिए कि ये सब संस्थाएं क्या कर रही हैं. इसमें कोई संदेह नहीं कि रिपब्लिक ज़हरीला चैनल है. लेकिन जब आप सार्वजनिक मंच पर सार्वजनिक स्थान पर बोल रहे हों, तो आप यह तय नहीं करेंगे कि कौन आपको सुनेगा और कौन वहां से भाग जाए. आप उसके माइक के सामने कहिए कि वो पत्रकारिता को कलंकित कर रहा है. गेट लॉस्ट वाला तरीका तो सही नहीं है. सबसे बड़ा संकट यही है कि हम अपने जैसों के बीच अपनी जैसी बातें कहने के आदी हो चुके हैं. विरोधियों, असहमतों के बीच जाकर या उनके सामने सधे और तार्किक ढंग से बात करने की आदत नहीं रही. और इसीलिए हम एक बौद्धिक ब्राह्मणवाद में जी रहे हैं. इसीलिए मुट्ठीभर बचे हैं. मैं तो कई बातों पर गांधी से असहमत हूं लेकिन यह एक बात उनसे सीखने लायक है. विरोधियों के सामने अपनी बात को कैसे रखना है और कैसा बर्ताव करना है. वो आदमी अपने विरोधी को चारों खाने चित्त कर देता था.

Jyotsna Singh I will do what you are proposing. But I can do it as a journalist, because what happens in my profession is my responsibility too. But I will have different expectations from others. Republic is not opposition, Republic is propaganda. For her, that's what it means...

Nirnimesh Kumar But the press club is not the place for a non-journalist to fight the alleged biases. They should hit the street or go to the designated forum.

Prince Pratikshit रिपब्लिक टीवी को अगर कोई न्यूज़ चैनल मानता है तो वो हद दर्जे का बेवकूफ इंसान है। दरअसल ये गुंडों की एक फ़ौज का नाम है जो पत्रकारिता के नाम पर गुंडागर्दी करते हैं, लोगों का चरित्रहरण करते हैं। हत्यारों एवं हत्याओं पर जश्न मनाने वालों को ये वैचारिक खुराक देते हैं। ये लोग समाज में ज़हर घोलने वाले हैं जो स्टूडीयो में बैठ कर दिन रात लोगों के ज़हन में बारूद भर रहे हैं।

Nirnimesh Kumar No sir, there is a big difference between a political party and a media organidation. The media is an open forum which a political party is not.

Vivek Raj Press should be free - we may not agree with a channel but we can't stop them from recording your views in public.

Vaibhav Sinha Rehne ka haq hai... Undoubtedly this is must, we are with you in the fight.

Manikant Thakur यही तेवर या ऐसा ही रवैया रहा तो और सिमटते जाएँगे.

Ravish Kumar बिल्कुल सबको सब जगह रहने का हक है। गलत हुआ

Chaman Lal Over projection by media Itself, create illusion in the minds of young leaders of their 'power' to control,which itself is a bigger illusion!

Nirnimesh Kumar Congrats for letting your conscience speak out

Chaman Lal It is very tough and complex situation,I have lost all interest in going to electronic media discussions unless it is some sensible anchor and participants,now almost becoming very rare!Even on that day,I avoided going to even a non controversial channel for discussion

Masaud Akhtar मैं शहला के बर्ताव के साथ हूँ। पत्रकार अपने व्यवहार व काम से पत्रकार के रूप में आएं। सिर्फ साइन बोर्ड होने से कुछ नहीं होता।

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