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Prabhat Shunglu : शहला राशिद का प्रेस क्लब प्रोटेस्ट वाला वीडिया यू ट्यूब पर देखा। दो बातें कहनी हैं। एक- शहला ने जब रिपब्लिक टीवी को गेट आउट कहा तो वो मुझे उसका ये बिहेवियर कहीं से भी जागृति शुक्ला या दधीचि से अलग नहीं लगा। दूसरा- शहला या किसी को भी प्रेस और पत्रकारिता के इस दौर को कोसने का पूरा हक है, लेकिन शहला के अंदाज़ और भाषा में वायलंस था और मैं इसकी निंदा करता हूं।

रिपब्लिक टीवी के पत्रकार को भी वहां रहकर अपना काम करने का पूरा हक था जैसे कि और चैनल्स भी कर रहे थे। वहां खड़े दूसरे पत्रकारों नें शहला को अपने कंडक्ट के लिये माफी मांगने पर ज़ोर नहीं दिया, इससे ये भी साफ है कि पत्रकारिता आइडियोलिजी के पूर्वाग्रहों से इतना ग्रसित है कि ग़लत को भी सही बताने पर मजबूर हो गई है या गलत के विरोध में सेलेक्टिव हो गई है। और वो इसलिये भी क्योंकि अब पत्रकार अपनी मनपसंद पार्टी का भोंपू कहलाने में ज्यादा गर्व महसूस करता है।

ये अब एक्टिविस्ट भी नहीं रहे। महज़ पार्टी प्रवक्ता में ट्रांसफॉर्म हो चुके हैं। प्रेस क्लब मैनेजमेंट ने नेताओं को मंच देकर गौरी लंकेश की आत्मा को चोट पहुंचाई है। इसके लिये मैनेजमेंट को लिखित तौर पर मेल के ज़रिये सभी सदस्यों से माफी मांगनी चाहिये।

टीवी पत्रकार प्रभात शुंगलू की एफबी वॉल से.

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