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Anil Jain : गौरी लंकेश की हत्या के बाद जैसी आशंका जताई गई थी, वैसा ही हो रहा है। त्रिपुरा में शांतनु भौमिक की हत्या इसकी पहली मिसाल है। पत्रकारों और लेखकों को धमकाने का सिलसिला शुरू हो चुका है। नीचे दिया गया स्क्रीन शॉट मेरे मित्र और पुराने सहकर्मी अनिल सिन्हा को मिले वाट्सएप मैसेज का है।

अज्ञात व्यक्तियों की ओर से चार अलग-अलग फोन नंबरों (9984825094, 8874856328, 9984482860, 9984162349) से भेजे गए एक ही तरह के इस मैसेज में साफ तौर स्वीकार किया गया है कि गौरी लंकेश हिंदुत्ववादियों के हाथों इसलिए मारी गई, क्योंकि वह भाजपा और आरएसएस के खिलाफ लिखती थीं। मैसेज में गौरी को गद्दार, राष्ट्रविरोधी और हिंदू विरोधी करार दिया गया है। इसी के साथ मैसेज के आखिरी में धमकी दी गई है कि देश में जो भी व्यक्ति मोदी जी, भाजपा या संघ के खिलाफ लिखने की हिम्मत करेगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा। मुसलमानों के नाम के साथ-साथ ऐसे गद्दारों को भी मिटा दिया जाएगा।

यह मैसेज अनिल सिन्हा के अलावा कुछ अन्य लोगों को भी मिला है। मैसेज में भले ही प्रधानमंत्री श्री मोदी और भाजपा की तरफदारी की गई हो, लेकिन फिर भी यह कतई नहीं माना जा सकता कि इस तरह के धमकी भरे मैसेज प्रधानमंत्री या भाजपा की सहमति से भेजे जा रहे हो। हो सकता है कि कोई व्यक्ति या समूह भाजपा, संघ और मोदी जी का नाम लेकर इस तरह की शरारतपूर्ण कारस्तानी कर रहा हो।

जो भी हो, मामला गंभीर तो है ही। जिन लोगों को यह मैसेज प्राप्त हुआ है वे तो इस बारे में पुलिस में शिकायत दर्ज करा ही रहे हैं, प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, प्रेस एसोसिएशन और अन्य पत्रकार संगठन भी इस मामले को अपने स्तर पर उठाएंगे ही। लेकिन सरकार को भी ऐसे मामले का संज्ञान लेकर उचित कार्रवाई करना चाहिए, क्योंकि पत्रकारों और लेखकों को धमकाने का यह काम प्रधानमंत्री और सत्तारूढ दल के नाम पर हो रहा है।

वरिष्ठ पत्रकार अनिल जैन की एफबी वॉल से.

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