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गजब है अपना देश. ईमानदार होना तो जैसे गुनाह है. फील्ड चाहे कोई हो. ठगी, लालच, धूर्तई, धोखेबाजी, बेईमानी, छल, अवसरवादिता, निहित स्वार्थीपना .. ये सब हम भारतीयों के खून में है. हजारों सालों से हो रहे हमलों और हमारी हारों ने अपन लोगों को जिंदा रहने की खातिर इन सब हथियारों का सहारा लेने को मजबूर किया और इतने दिनों तक इसका सहारा लेते रहे कि अब इसकी आदत पड़ गई है. यह हमारे खून, दिल, दिमाग का हिस्सा हो गया है. सदियों से चलने वाले ठगी प्रथा को साफ करने में अंग्रेजों को दशकों लग गए.

मतलब साफ है. जो चीजें हम लोगों से सदियों से करते रहे हैं, उसे भले कई वजहों से छोड़े हुए हों, कई किस्म के दबावों-मजबूरियों के कारण न करते हों, लेकिन अवचेतन में जिंदा है... अगर उचित मौका-अवसर मिले तो ये अपराधी डीएनए हुंकार भरने लगता है... धोखेबाज खून खौलने लगता है.... सो, सही कहा गया है- 'हम भ्रष्टन के, भ्रष्ट हमारे'! 

बेइमानी के डीएनए वाले इस महा भ्रष्ट देश में इन्हीं ऐतिहासुक 'गुणों' की वजह से जनहित और देशहित में काम करने वाले सरोकारी टाइप लोग पगलेट माने जाते हैं. समाज-राजनीति से लेकर पेशे-महकमें के लोग तक इनका इलाज करने पर उतारू हो जाते हैं.

पत्रकारों के साथ तो इन दिनों खास बुरा हो रहा है. बेंगलुरु से लेकर बनारस तक पत्रकार मारे जा रहे हैं या पिट रहे हैं. त्रिपुरा और नोएडा की घटनाएं भी हाल की हैं. मेरा हाल भी आप लोगों ने देखा ही था. पोलखोल खबरों के प्रकाशन के कारण मेरे उपर भी दिल्ली के हर्ट प्रेस क्लब आफ इंडिया में हमला किया गया. फिलहाल ताजा मामला नकल रोकने पर एक गुरुजी के पिटाने का है. आगरा के इन प्रोफ़ेसर महोदय ने नकल विहीन परीक्षा के लिए कमर कस ली थी. बस, इसी गलती पर इन पर जानलेवा हमला हो गया. हमलावर मरणासन्न स्थिति में इन्हें छोड़ कर भाग निकले.

इन्हें देखकर अब मैं खुद के बारे में सोचता हूं... दुनिया में कितना ग़म है, मेरा ग़म कितना कम है...

युवा पत्रकार अंकित सेठी ने जानकारी दी है कि आगरा के सिकंदरा क्षेत्र के निवासी सीनियर प्रोफ़ेसर पीएस तिवारी को आरबी कॉलेज में चल रही लॉ की परीक्षाओं के लिए प्रभारी नियुक्त किया गया. सोमवार को परीक्षा के दौरान नक़ल करने से रोकने पर प्रोफ़ेसर तिवारी की कुछ छात्रों और एक साथी प्रोफेसर के साथ कहासुनी हो गई. मंगलवार सुबह लगभग सात बजे जब वह कॉलेज जाने के लिए निकले तो बाइक सवार अज्ञात हमलावरों ने उनकी गाडी रुकवाकर उन पर सरिया और लोहे की रोड से हमला कर दिया. पीड़ित ने बताया की हमलावर उन्हें परीक्षाओं में नकल को लेकर धमका रहे थे. उनका कहना है कि नक़ल विहीन परीक्षा कराने के उनके इरादों से परेशान होकर नक़ल माफिया, जिसमें कई प्रोफ़ेसर भी शामिल हैं, ने उन पर जानलेवा हमला करवाया है.

भड़ास एडिटर यशवंत सिंह की रिपोर्ट. संपर्क :

पूरे मामले को समझने के लिए इन्हें भी पढ़ें...

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