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Priyabhanshu Ranjan : साल 1997 से पहले फास्टिंग ब्लड सुगर की ऊपरी लिमिट 140 होती थी। फिर WHO ने एक पैनल बिठाया और उसने यह लिमिट 126 कर दी और रातों रात दुनिया की 14 प्रतिशत जनसंख्या डायबिटीज की मरीज हो गई।

फिर 2003 में अमेरिकन डायबिटिक एसोसिएशन ने यह लिमिट 100 कर दी। और फिर से रातों रात भारत की 60 प्रतिशत जनसंख्या डायबिटीज की मरीज बन गई।

आपको पता है कि लिमिट तय करने वाले इन पैनलों के सदस्य कौन हैं? ये हैं दुनिया की बड़ी दवा कंपनियों के कंसलटेंट। इससे क्या पता चलता है? यही कि आपको डायबिटीज है या नहीं, यह दवा कम्पनियां तय करती हैं।

पीटीआई के प्रतिभाशाली पत्रकार प्रियभांशु रंजन की एफबी वॉल से.

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