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  • Published in सुख-दुख

Ashwini Sharma :  ''ब्रेकिंग न्यूज़ लिखते लिखते जब हम खुद ही ब्रेक हो गए..., अपनों ने झाड़ा पल्ला जो बनते थे ख़ुदा वो भी किनारे हो गए..'' साल 2005 में मुंबई इन टाइम न्यूज़ चैनल के बंद होने के बाद मैंने ये पंक्तियां लिखी थीं..तब मेरे साथ इन टाइम के बहुत से पत्रकार बेरोज़गार हुए थे..कुछ को तो नौकरी मिल गई लेकिन कुछ बदहाली के दौर में पहुंच गए..वैसे ये कोई नई बात नहीं है कई चैनल अखबार बड़े बड़े दावों के साथ बाज़ार में उतरते हैं..बातें बड़ी बड़ी होती हैं लेकिन अचानक गाड़ी पटरी से उतर जाती है..जो लोग साथ चल रहे होते हैं वो अचानक मुंह मोड़ लेते हैं..जो नेता अफसर कैमरा और माइक देखकर आपकी तरफ लपकते थे वो भी दूरी बना लेते हैं..

कई बार तो अपनों को भी मुंह मोड़ते देखा है..आज मैं ये सब इसलिए लिख रहा हूं..क्योंकि कुछ दिन पहले ही देश के नामचीन अखबार हिंदूस्तान टाइम्स अखबार की ऑफिस के सामने ही एक पत्रकार ने तड़पते तड़पते दम तोड़ दिया..तेरह साल पहले चार सौ लोगों को नैतिकता की बात करने वाले अखबार ने एक झटके में निकाल दिया था..वो तेरह साल से अपने अधिकार की लड़ाई लड़ रहा था..मिलता तो खा लेता.. न मिले तो भूखे सो जाता..आसपास के दुकानदारों और कुछ जानने वालों के रहमोकरम पर वो ज़िंदा था..

कोर्ट कचहरी मंत्रालय सत्ता मीडिया सब कुछ दिल्ली में होने के बाद भी सब आंखों में पट्टी बांधे थे..सो आखिरकार उस कमजोर हो चुके इंसान ने एचटी के ऑफिस के सामने ही दम तोड़ दिया..मैं यही कहूंगा कि ये घटना उन सभी लोगों के लिए एक सबक है जो किसी न किसी मीडिया हाउस में तैनात हैं..मेरा मानना है कि हालात अच्छे भी हो तो मुगालता नहीं पालना चाहिए और हो सके किसी असहाय भाई की मदद अवश्य करें..

'भारत समाचार' चैनल में वरिष्ठ पद पर कार्यरत टीवी पत्रकार अश्विनी शर्मा की एफबी वॉल से.

मूल खबर...

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