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फुटपाथ पर जीवन गुजारने वाली एक अनाथ और फटेहाल महिला के लिए भगवान बन प्रकट हुए अलीगढ़ के एसएसपी राजेश पांडेय

नाम- मीना देवी, उम्र लगभग 34 वर्ष, आस-पास के लोगों के सहयोग से परिवार का भरण-पोषण। पति- कन्हैया, काम- मजदूरी, स्टेटस- कई महीने से गायब| मूल निवास-छोटी कशेर थाना डिवाई, जनपद बुलंदशहर। वर्तमान निवास- फुटपाथ, शमशाद मार्केट जनपद अलीगढ़| लड़का- विकास, उम्र- 4 माह, कोई चोरी कर ले गया| लड़की- काजल, उम्र- 8 वर्ष, कोई चोरी कर ले गया| लड़का- राहुल, उम्र 10 वर्ष, बिरियानी के ठेले पर मजदूरी|

मीना देवी पति के गायब होने के बाद से मुफलिसी में जीवनयापन करती हैं। मजदूरी मिल गयी तो ठीक, नहीं तो लोगों से सहयोग माँग कर बच्चों का पेट भर रही थीं। लगभग 4 माह पहले जब अपने बच्चों के साथ फुटपाथ पर सो रही थी, रात्रि में कोई उसके 4 माह के बच्चे को चोरी कर ले गया।  फुटपाथ पर खोखे, रेहड़ी लगाने वाले लोगों से गुहार की, सभी लोगों ने सलाह बहुत दी, पर मदद किसी ने नहीं की।

10 दिन पहले रात्रि जब वह बड़े बेटे व बेटी के साथ फुटपाथ पर सो रही थी, कोई उसकी बेटी को भी चोरी कर ले गया। फिर उसने मदद की गुहार की, लेकिन कुछ नहीं हुआ। न कोई नेता आया, न कोई संस्था, न तमाशबीन आये, न पुलिस, न पत्रकार, न कोई चैनल ,न कोई हल्ला मचा। वह पागलों की तरह लोगों के पास भटकती रही।

कल मेरे सरकारी ड्राइवर मौ. हनीफ ने मुझे बताया कि शमशाद मार्केट में फुटपाथ पर रहने वाली एक महिला के दो बच्चे चोरी कर लिए गये, उसकी कोई मदद नहीं कर रहा है। दो प्रयास के बाद आखिरकार महिला शाम को 8:00 बजे फुटपाथ पर सोती मिली। फुटपाथ पर अशोक के पेड़ की डाल पर धागे में लटकाई हुई अपनी बेटी काजल की पासपोर्ट साइज की फोटो दिखा कर रोने लगी और कहने लगी “मैंने फोटो भी टांग दी” फिर भी कोई नहीं बता रहा है।

उसकी यह व्यथा, पीड़ा, गुस्सा और बेबसी देखकर थोड़ी देर के लिए मैं भी संज्ञाशून्य हो गया। आस-पास लगी लोगों की भीड़ मे सभी शान्त थे।थाना सिविल लाइन के प्रभारी निरीक्षक को बुलाकर तुरन्त मुकदमा कायम कराया गया। टीम बनवायी और बच्चों के बरामदगी का प्रयास किया जा रहा है। उसकी किसी ने नहीं सुनी क्योंकि वह गरीबी रेखा के अन्तिम पायदान पर है। मेरे समाज ने उसे सामाजिक संरचना में कोई स्थान नहीं दिया ।

26 अक्टूबर 2017 को फुटपाथ पर सोने वाली मीनादेवी जिसके दो बच्चे चोरी हुए थे, जिसका दुख, पीडा, गुस्सा ,समाज के प्रति मन में उपजी भावना और बच्चो से विछड़ने की वेदना मैंने देखी थी। आज उसी मीना देवी की खुशी, ममता, दुलार, विजयीभव मुद्रा भी मैंने देखी। आज उसकी लडकी काजल (उम्र 08 वर्ष) उसे मिल गयी।

जैसे ही सूचना मिली कि काजल वापस आ गयी है तो मैं किसी घटना व दुर्घटना की आशंका से मीना देवी के पास पहुंचा और मीना देवी अर्द्धविक्षिप्त सी मुझसे लिपट गयी और रोने लगीं। चिल्लाने लगीं और काजल का हाथ पकड़कर जोर-जोर से उसने बताया कि मेरी काजल आ गयी। काजल को उसने सीने से लगा लिया। मैंने जब काजल से बात करने की कोशिश की कि कौन लोग थे, कहां ले गये थे, कहां से आयी है, खाना मिला था या नहीं, मारते- पीटते तो नही थे, तो मीना देवी को इन सवालों में कोई रूचि नहीं थी। वह सिर्फ एक रट लगाये थी कि उसकी काजल मिल गयी।

थोडी देर में श्री तसुब्बर अली, चौकी प्रभारी भमोला तथा बहुत से पुलिस कर्मचारी आ गये। हर आते हुए पुलिस कर्मी से वह यही कह रही थी कि मेरी काजल मिल गयी, किसी को अंकल कह रही थी, किसी को बाबूजी, किसी को भइया कहा, हर पुलिस वाले से लिपट रही थी।  वहां काफी भीड एकत्रित हो गयी। सबने यह दृश्य देखा।

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मीनादेवी की आँखो में ममता का समुन्दर बह रहा था और आज मां की ममता गरीबी से जीत गयी, मां की ममता अमीरों से भी अमीर हो गयी, जिसके गवाह वहां मौजूद तमाम लोग थे। काजल को मेडिकल परीक्षण हेतु भेज दिया गया है। ऐसा लगता है कि जो लोग उसे ले गये थे वो सोशल मीडिया, समाचार पत्र, न्यूज चैनल और पुलिस टीमों की सक्रियता को नजदीक से देख रहे थे। शायद इसी वजह से काजल को रेलवे स्टेशन के पास छोड़ कर चले गये, जहां से वह पैदल अपनी मां के पास आ गयी। गहनता से विवेचना कर काजल को ले जाने वालों को चिन्हित करने का प्रयास किया जा रहा है, हो सकता है कि मीना देवी का 04 माह का बेटा भी उसकी मां तक पहुंच जाये ।

(अलीगढ़ के एसएसपी राजेश पांडेय से हुई बातचीत पर आधारित.)

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