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Ravish Kumar : टी एम कृष्णा हिन्दी जगत के लिए अनजान ही होंगे। मैं ख़ुद कृष्णा के बारे में तीन चार साल से जान रहा हूं, संगीत कम सुना मगर संगीत पर उनके लेख ज़रूर पढ़े हैं। टी एम कृष्णा कर्नाटिक संगीत के लोकप्रिय हस्ती हैं और वे इस संगीत की दुनिया का सामाजिक विस्तार करने में लगे हैं। उनकी किताब A SOUTHERN MUSIC-THE KARNATIK STORY हम जैसे हिन्दी भाषी पाठकों के लिए दक्षिण भारत के संगीत की दुुनिया खोल देती है। संगीत से लेकर मौजूदा राजनीति के बारे में उन्होंने काफी लिखा है जो इस वक्त TMKRISHNA.COM पर मौजूद भी है। कृष्णा कर्नाटिक संगीत सभा पर ऊंची जाति के वर्चस्व को लेकर काफी मुखर रहे हैं और कोशिश करते रहे हैं कि संगीत की इस दुनिया में दलित प्रतिभाएं भी स्थान और मुकाम पाएं। जिसके लिए उन्हें कर्नाटिक संगीत के पांरपरिक उस्तादों की काफी नाराज़गी भी झेलनी पड़ती है।

मैं यहां पर कृष्णा के एक वीडियो की बात करना चाहता हूं। तमिलनाडु में ennore creek के अतिक्रमण को लेकर काफी विवाद हो रहा है। क्रीक मतलब संकरी खाड़ी जहां कोसास्थलियर नदी आकर समुद्र में मिलती है। इस खाड़ी पर कारखानों का कब्ज़ा हो गया है। यह प्राकृतिक जगह पूरी तरह नष्ट हो चुकी है। कृष्णा इसके लिए प्रतिरोध का संगीत रचते हैं। क्रीक के बीचों बीच खड़े होकर बदहवास विकास का चेहरा दिखाते हैं। उनके गाने को आप सुन सकते हैं। दृश्य शानदार हैं। अंग्रेज़ी में सबटाइटल है तो दिक्कत नहीं होगी।

कृष्णा इस गाने के लिए पोरंबोक शब्द का इस्तमाल करते हैं। पोरंबोक का मतलब है बिना पट्टे वाली सामूहिक भूमि। एक और मतलब है कि आवारा और लापरवाह जिसकी कोई कदर नहीं। वो गाकर बताते हैं कि कैसे एक शब्द जिसका अर्थ सामूहिकता से है वो लांछन में बदल जाता है। कृष्णा ennore creek से कहते हैं कि तुम्हें पावर प्लांट चाहिए था न देखो, आसमान में राख का अंधेरा है। इस प्लांट ने नदी और समुद्र को अलग कर दिया है, क्योंकि अतिक्रमण हो जाने से नदी अब समुद्र में नहीं मिल पाती है। उसके भीतर प्लांट का राख भर गया है। नदी की गहराई कम हो गई है। कृष्णा कहते हैं कि जब विकास की यह भूख ennore creek को हड़प लेगी तो हमारी तरफ आएगी। हम सबको पोरंबोक समझ हड़प लेगी।

हिन्दी के दर्शकों को अपनी दुनिया का विस्तार करना चाहिए। बहुत लोग करते भी हैं मगर सबको करना चाहिए। टी एम कृष्णा बेहद प्रतिभाशाली और दिलचस्प शख़्स हैं। इस म्यूज़िक वीडियो के ज़रिए अपने ही मिडिल क्लास फैन्स या श्रोता को झकझोर रहे हैं कि जागो, वरना अब तुम्हारा ही अतिक्रमण या कब्ज़ा होना बाकी है। मैंने उत्तर भारत में कम ही शास्त्रीय संगीतकार देखें हैं जो सत्ता और कारपोरेट को चुनौती देता हो। हिन्दी शास्त्रीय जगत के गायक और गायिकाओं को सत्ता की चरणों में लोटते ही देखा है। कभी राष्ट्रवाद के बहाने तो कभी संस्कृति के गौरव के बहाने। कृष्णा शास्त्रीय संगीत की दुनिया को बदल रहे हैं। वे शास्त्रीय संगीत में प्रतिरोध के स्वर पैदा कर रहे हैं, उसे लोक संगीत बना रहे हैं।

एनडीटीवी के चर्चित एंकर रवीश कुमार की एफबी वॉल से.

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