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लंबे समय तक जनसत्ता अखबार के लखनऊ ब्यूरो चीफ रहे और इन दिनों जनादेश मैग्जीन के संपादक के रूप में सक्रिय अंबरीश कुमार के पिता जी का निधन होने की सूचना है. अंबरीश के पिताजी का नाम तारा प्रसाद श्रीवास्तव है. उनका  लखनऊ में स्वर्गवास हुआ. अंतिम संस्कार लखनऊ में ही किया गया. तारा प्रसाद जी CDRI लखनऊ में इंजीनियर के पद से रिटायर हुए थे. अम्बरीश कुमार की माता जी का निधन लगभग 6 साल पहले हो चुका है. उनके जानने वालों ने ईश्वर से प्रार्थना की है कि दिवंगत को सदगति और परिजनों को धैर्य प्रदान करें.

पिता के निधन पर अंबरीश कुमार ने फेसबुक पर पोस्ट पर ये लिख कर सबको सूचित किया था...

Ambrish Kumar : तीस दिसंबर को रात करीब ग्यारह बजे पिताजी अंतिम यात्रा पर चले गए भाभा एटामिक एनर्जी मुंबई .भारतीय रेलवे और सीएसआईआर जैसे संस्थानों में मेकेनिकल इंजीनियर के रूप में सेवा देने वाले पापा से ही घूमने फिरने और पेड़ पौधों से जुड़ने की प्रेरणा मिली थी . पापा श्री तारा प्रसाद श्रीवास्तव मूल रूप से बरहज बाजार देवरिया के रहने वाले थे .हवन आज दोपहर दो बजे लखनऊ के गुलिस्तां कालोनी स्थित आवास पर.

प्रेस रिलीज...

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव ने दैनिक जनसत्ता के पूर्व संवाददाता एवं शुक्रवार पाक्षिक के सम्पादक श्री अंबरीश कुमार के पिता श्री तारा प्रसाद श्रीवास्तव के निधन पर गहरा शोक जताते हुए दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की है और संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की है। श्री तारा प्रसाद श्रीवास्तव केन्द्रीय सरकार के मैकेनिकल इंजीनियर के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। वे भाभा इंस्टीट्यूट में भी कार्यरत रहे थे। श्री श्रीवास्तव जी पिछले काफी समय से बीमार थें। रात 10 बजे उनका निधन हुआ। आज बैकुण्ठ धाम में उनकी अंत्येष्टि में अधिकारी, पत्रकार और परिवारीजन बड़ी संख्या में पहुंचे और उन्हें श्रद्धांजलि दी।
(अरविन्द कुमार सिंह)
प्रदेश सचिव

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  • Guest - ashish kumar singh

    ईश्वर अंबरीष जी के पिता की आत्मा को शांति दे औऱ उनके परिवार को दुख की इस घड़ी में शक्ति प्रदान करे। मैं भी हाल में पितृशोक से गुज़रा हूं सो उनकी स्थिति हर प्रकार से समझ सकता हूं। दिसंबर के महीने में नवभारत टाइम्स में उन्होने इस दौर के एक बेहद ज़रुरी और उपेक्षित विषय पर बड़ा मार्मिक लेख लिखा था। वो लेख यहां शेयर कर रहा हूं... एक बार हम सभी को इसे फिर से पढ़ना चाहिए...समझने-समझाने के लिए, जगने-जागने के लिए... नहीं कुछ तो ये दुआ करने के लिए आखिरी सांस तक हम काम करते रहें....हमारा शरीर काम करता रहे।
    आशीष कुमार सिंह

    http://epaper.navbharattimes.com/details/44150-63264-1.html

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