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Mridul Tyagi : भारत में वुल्फ अटैक शुरू हो चुके हैं. वुल्फ अटैक मतलब एक दहशतगर्द अचानक उपलब्ध परंपरागत संसाधनों से ज्यादा से ज्यादा जनहानि की कोशिश करता है. भारतीय मीडिया ने 26 जनवरी से ऐन पहले हुई दो बड़ी घटनाओं को न तो समझा न तवज्जो दी. पहली घटना 19 जनवरी को हुई. मुरादनगर में फुरकान नाम का शख्स गंग नहर पुल से ऐन पहले रेलवे पटरी के बोल्ट खोलता पकड़ा गया. तीन किशोरों ने इसे पकड़ा.

ध्यान दीजिएगा, इन बोल्ट को खोलने वाली चाबी बाजार में नहीं मिलती. ये स्पेशल साइज है, जो सिर्फ रेलवे के कर्मचारियों के पास होता है. इसे स्पेशली चाबी उपलब्ध कराई गई. यह जहां पटरी का जोड़ खोल रहा था, वहां से चंद मिनट बाद देहरादून एक्सप्रेस को गुजरना था. साजिश ये थी कि ट्रेन डीरेल होकर गंग नहर में जा गिरे. बड़े-बड़े दावे करने वाले अखबारों ने इस वुल्फ अटैक को नहीं समझा.

दूसरी कोशिश दिल्ली में पालम के पास ओवर ब्रिज के नीचे बम लगाने की हुई. एक कश्मीरी दहशतगर्द दिल्ली में घुसा और पालम जैसे इलाके में बम लगाने की कोशिश करता पकड़ा गया. उसने भी बाकी वुल्फ अटैकर की तरह पकड़े जाने पर अल्लाह हू अकबर के नारे लगाए. इन दो घटनाओं की कड़ी को जोड़कर देखें, तो मुझे लगता है कि 26 जनवरी पर या उससे पहले कोई बड़ा वुल्फ अटैक होने वाला है. भगवान न करे ऐसा हो. लेकिन कांग्रेस, पाकिस्तान और हाफिज सईद एक जैसी हालत में है. बौखलाए हुए हैं. ये कुछ भी कर सकते हैं.

वरिष्ठ पत्रकार मृदुल त्यागी की एफबी वॉल से.

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