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मधुबनी में रैकेटियर किस्म के रंगे सियार होने लगे हैं असली पत्रकारों पर हावी...

महोदय, आपके प्रतिष्ठित पोर्टल में छपे एक रैकेटियर ब्लॉगर रजनीश के. झा के उस पत्र पर मैं अपना पक्ष रखना चाहता हूं जिसमें मेरे उपर ढेर सारे बेबुनियाद और मानहानिकारक आरोप लगाए गए हैं.  पहली बात ये है कि कि रजनीश के झा नामक प्राणी जो पहले दिल्ली में मार्केटिंग का काम करता था, कुछ समय से जो लाइव आर्यावर्त डॉट कॉम चला रहा है, उस साइट की न तो कोई रैंकिंग है और न ही उसका कहीं कोई रजिस्ट्रेशन है. वह मीडिया है ही नहीं. वह एक ब्लॉग है जिस पर वह गूगल से मैटर चोरी कर कट पेस्ट करता रहता है.

सच कहूं तो रजनीश के. झा एक ब्लैकमेलर है और वह अपनी साइट के जरिए केवल हफ्ता वसूली का काम करता है. बरसों पहले बंद हुए अखबार आर्यावर्त से इसकी वेबसाइट का कोई लेना-देना नहीं है. इसे चलाने वाले दरभंगा निवासी रजनीश के. झा ने पटना के पते पर सरकार को रजिस्ट्रेशन का आवेदन किया है जबकि वह मधुबनी में अपने परिवार के साथ किराये पर रहता है.

मैं कॉलेज के समय से ही पत्र-पत्रिकाओं से जुड़ा रहा हूँ और पिछले कई वर्षों में रफ्तार टाईम्स, हिंदुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी, ऑव्जर्वर इंडिया, आवाज मासिक पत्रिका, इंडिया टुमारो डॉट कॉम सहित देशभर के कई पत्र पत्रिकाओं और वेबसाइटों के लिये काम करता रहा हूँ. वर्ष 2014 में मैंने मधुबनी से एक पाक्षिक पत्रिका समाचार संसार की भी शुरुआत की. मैं पत्रकारों की सबसे बड़ी संस्थाओं में से एक आईएफडब्लूजे का जिला प्रभारी भी हूँ. 

कुछ महीने पहले रजनीश और इसके एक दो गुर्गों ने मेरे सामने प्रस्ताव रखा कि मैं भी उनकी टोली में शामिल हो कर शहर में व्यापारियों से भयादोहन और वसूली करूं तथा अपराधियों के लिये थाने व जेल आदि में दलाली करूँ.  मैंने न सिर्फ उसे डांटा बल्कि ये भी चेतावनी दी कि अगर उनके खिलाफ कोई शिकायत मिलेगी तो पत्रकार संघों की तरफ से कानूनी कार्रवाई भी करवाऊंगा.

उस वक्त तो उनकी टोली ने क्षमा मांगते हुए किनारा कर लिया, लेकिन जल्दी ही उनके खिलाफ शिकायतें मिलने लगीं. फेसबुक और सोशल मीडिया पर वे लगातार मेरे खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश करते रहे, लेकिन हर बार शहर के लोगों ने उनके इरादों को ध्वस्त कर दिया.

पिछले दिनों जब पत्रकारों की बैठक हुई तो ये भी खुद को मीडियाकर्मी बताते हुए उसमें शामिल हुए. कई वरिष्ठ पत्रकारों ने मधुबनी में भयादोहन, ब्लैकमेलिंग का मुद्दा उठाया तो ये बौखला कर गाली-गलौच पर उतर आये. जब मैंने उन्हें कड़े शब्दों में चेतावनी दी तो वे फेसबुक और मीडिया पोर्टलों पर मेरी छवि खराब करने की कोशिशों में जुट गये. आपसे अनुरोध है कि ऐसे फर्जी पत्रकारों से दूर रहें और हो सके तो उन्हें ब्लैकमेलिंग व भयादोहन जैसे हथकंडों से दूर रहने की सलाह भी दें क्योंकि आपके पोर्टल को मिशन के तौर पर देखा जाता है और इसका उद्देश्य ही पत्रकारिता की आड़ में पनप रहे भ्रष्टाचार को दूर करना है.  उम्मीद है मेरे इस पत्र को प्रकाशित कर आप मेरी स्थिति को सबके सामने स्पष्ट करेंगे ताकि मुझ पर लगे निराधार आरोपों की लोग असलियत जान सकें.

आशा है परस्पर सहयोग बनाये रखेंगे.

धन्यवाद

हेमंत सिंह

वरिष्ठ पत्रकार

मधुबनी

7004541911

मूल खबर...

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