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अलविदा आलोक! यादों में हमेशा जिंदा रहोगे...  झारखंड के देवघर से एक दुखद खबर है। देवघर जिले के वरिष्ठ पत्रकार आलोक संतोषी ने हमारा साथ छोड़ दिया। अब आलोक हमारे साथ सिर्फ यादों में रहेंगे, खिलखिलाते हुए, जोर जोर से हंसते हुए। पिछले पांच साल से पेट के कैंसर की बीमारी ने आलोक को हरा दिया। ईलाज के दौरान उनको कई बार आर्थिक समस्याओं का भी सामना करना पड़ा।

स्व. आलोक संतोषी

भड़ास पर भी आलोक को आर्थिक मदद करने के लिए खबर छपी। लोगों ने मदद भी की। मगर निर्दय काल ने आलोक के लिए कुछ ओर तय करके रखा था। सांस्कृतिक कार्यक्रम के स्टेज पर कार्यक्रम होस्ट करने से लेकर अखबार के लिए देर रात तक एसाइनमेंट के बीच आलोक का मुस्कुराता चेहरा मानो कैंसर को हर समय मुंह चिढ़ा रहा था। लेकिन निर्दयी काल आलोक के मुस्कुराते चेहरे को भी देख कर रुका नहीं। अफसोस। अलविदा आलोक! मेरे भाई! मेरे दोस्त। आपकी बात कानों में गूंज रही है। फिर मिलेंगे वहीं उस दुनिया में और सुनेंगे आपकी खिलखिलाती हंसी।

अलविदा दोस्त.…

आपका भाई.

अनंत

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