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Girijesh Kumar : भारतीय रेल की सवारी लगातार महँगी होती जा रही है, रेलवे को इंटरनैशनल बना देने के बड़े बड़े दावे किए जा रहे हैं. इन सबके बीच भारतीय रेल सेवा की हैरान करनेवाली हक़ीक़त देखिए. मैंने झाँसी से दिल्ली लौटने के लिए AC-3 में ऑनलाइन टिकट बुक किया. टिकट कन्फ़र्म था. मैसेज भी आ गया था. लेकिन ऐन यात्रा के दिन जो मैसेज आया उसमें मेरी सीट स्लीपर क्लास में दी गयी थी.

बिना किसी सूचना के, बिना किसी बातचीत के. ये उस रेलवे का हाल है जहाँ फ़ीडबैक लेने के लिए बाक़ायदा कॉल सेंटर चल रहे हैं. स्टेशन पर पहुँचकर TI अनिल कुमार शर्मा जी से पूछा तो पता चला AC3 के डिब्बे नहीं लगे इसलिए स्लीपर में ऐडजस्ट कर दिया. मैंने कहा चलिए ठीक है, बाक़ी के पैसे तो मिलेंगे? बताने लगे कि वो एक पर्ची देंगे, जिसे लेकर मैं कहीं जमा कराने जाऊँगा, तब मुझे बक़ाया राशि मिल सकेगी. बहरहाल ट्रेन चलने का वक़्त हो रहा था, लिहाज़ा मैं भागकर अपने स्लीपर क्लास बर्थ पर आ गया हूँ. देखना ये है कि जादुई पर्ची वाले TI साहब से अपनी क़िस्मत की पर्ची ले पाता हूँ या नहीं.

पूरे प्रकरण से संबंधित वीडियो ये है :

वरिष्ठ टीवी पत्रकार गिरिजेश कुमार की एफबी वॉल से.

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