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यूपी में एक वरिष्ठ आईएएस की बेबाक बयानी ने अखिलेश सरकार की दोरंगी नीतियों की रही सही पोल-पट्टी भी खोल दी है। आईएएस सूर्यप्रताप सिंह अपने फेसबुक वॉल पर लगातार सरकार को आगाह कर रहे हैं कि वह किस तरह मदहोश है और प्राकृतिक आपदा के सताए प्रदेश के किसान बेमौत मर रहे हैं, खुदकुशी और आत्मदाह कर रहे हैं। वह लिखते हैं - 'किसान कहां जायें? अन्नदाता मुसीबत में तथा लखनऊ में 'ग्रामीण क्रिकेट लीग' (ICGL) का ग्लैमर।'

 

1982 बैच के आईएएस सूर्य प्रताप सिंह प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी में शीर्ष पदों पर रहे हैं। वह जब औद्योगिक विकास विभाग से हटाकर माध्यमिक शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव बने तो नकल माफिया पर नकेल कसने के कारण उन्हें तभी से प्रमुख सचिव सार्वजनिक उद्यम बना दिया गया है। वह इससे पहले फेसबुक पर नकल रोको अभियान भी चला चुके हैं। उनका मानना है कि प्रदेश में दस हजार करोड़ का नकल का कारोबार है। वह बुलंदशहर के रहने वाले हैं और इसी साल रिटायर हो जाएंगे। उनकी टिप्पणियों ने इन दिनों प्रदेश के आला शासकों और सरकार, दोनो के कान खड़े कर दिए हैं।  

वह लिखते हैं - ''अन्नदाता मुसीबत में आत्महत्या कर रहा और वो कह रहे हैं, कोई नहीं मर रहा, क्यों परेशान हो, ये तो सब चलता है ! 100 से ज्यादा मर चुके हैं, अब तो जागना चाहिए। अन्नदाता मुसीबत में और ये राजनैतिक चकल्लसबाजी में समय ख़राब क्यों? जब पूरे देश में बर्बाद हुई 185 लाख हेक्टेयर फसल में से 75 लाख हेक्टेयर फसल का नुकसान अकेले उत्तर प्रदेश में हुआ है। सरकारी आंकड़े के अनुसार 1100 करोड़ फसल का नुकसान उत्तर प्रदेश में हुआ है। फिर अब तक सिर्फ 175 करोड़ का ही मुआवजा क्यों वितरित किया गया है? किसान का इस वर्ष का 7500 करोड़ का गन्ना मूल्य बकाया है; पूर्व के वर्षों का भी बहुत बकाया है।'' इसके साथ ही उन्होंने ‘सात किसानों ने जान दी’ शीर्षक एक अखबार की कटिंग पोस्ट की है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री की क्रिकेट खेलते हुए फोटो पोस्ट की है। साथ ही इस क्रिकेट लीग में चीयर लीडर्स के डांस की भी फोटो पोस्ट की है। 

वह लिखते हैं कि व्यवस्था के पालनहार मस्त और किसान पस्त। वे एक अखबार की कटिंग पोस्ट करते हैं जिसका शीर्षक है किसानों को मुआवजे के नाम पर ऊंट के मुंह में जीरा। वे अपनी फेसबुक वाल पर लगातार किसानों के पक्ष में सरकार पर हमलावर हो रहे हैं। वे लिखते हैं कि और कितने किसानों की मौतों का इंतजार। इसके साथ ही उन्होंने एक अखबार की कटिंग पोस्ट की है जिसका शीर्षक है ‘बीस और किसानों ने तोड़ा दम।’ वे यह भी लिखते हैं कि अन्नदाता मुसीबत में आत्महत्याएं कर रहा है और वे कह रहे हैं कि कोई नहीं मर रहा। जबकि सौ से ज्यादा मर चुके हैं। अब तो जागना चाहिए। 

सूर्य प्रताप सिंह आज एक चौंकाने वाली आपबीती से एफबी पाठकों को रू-ब-रू कराते हैं - '' आज ये क्या हुआ? ......कल रात 9.०० बजे के बाद मुझे मुख्य सचिव के पी. ए. श्री शिव दास गुप्ता(९८३९४५८११२) द्वारा सूचित किया गया कि 5, कालिदास मार्ग (मा. मुख्य मंत्री कैंप ऑफिस ) पर मेरे सार्वजनिक उद्यम ब्यूरो जैसे महत्वहीन विभाग की समीक्षा बैठक आज दिनांक 10/04/2015 प्रातः 8.30 बजे रखी गयी है। यह अत्यन्त आश्चर्यजनक व सुखद लगा कि अब सार्वजनिक उद्यम ब्यूरो जैसे 'महत्वहीन' विभाग की भी समीक्षा बैठक होने लगी, जहां न कोई प्लान बजट है, और न ही कोई योजना; फिर काहे की समीक्षा बैठक।

'' मैंने रात भर लग कर स्वयं टाइप कर जो हो सकता था, सूचनाएं तैयार कीं, क्योंकि इतनी रात मैं ऑफिस तो खुलवा नहीं सकता था। मैं, जो भी हो सकती थी, तैयारी की। साथ ही 5, कालिदास मार्ग समय से प्रातः 8.30 बजे पहुँच गया, परन्तु मुझे गेट पर आधा घंटा खड़ा रखा गया, इसके बाद बताया गया कि यहां ऐसी कोई बैठक की सूचना नहीं है। क्या ये संवादहीनता का उदाहरण था या वरिष्ट अधिकारिओं के गेट पर प्रतीक्षा करने व अपमानित होते रहने का फरमान, डांट खाकर, पैर छूते रहना एक सामान्य सी बात है। 

'' यहां तक कि महिला अधिकारियों (आईएएस तक) द्वारा तमाम लोगों के कैरियर की खातिर पैर छूने की सूचना है, काश कि यह सत्य न हो ! मैं विनम्र भाव से जो भी हुआ, अपनी नियति के रूप में स्वीकार करता हूँ ....अभी तो आगे क्या-क्या देखना बाकी है? किसी ने ठीक ही कहा है - चलो अच्छा हुआ, जो तुम मेरे साथ उस दर पे नहीं आए, तुम झुकते नहीं, और हमें चौखटो पर खड़ा रहना अजीज है।''

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