Aroon Purie को शर्म मगर आती नहीं….

जिस रोज पेशावर में मासूमों का कत्लेआम किया जा रहा था, जिस शाम पूरी दुनिया इस जघन्यतम बाल संहार से स्तब्ध होकर आंसू बहा रही थी, उसी रोज और उसी शाम अरुण पुरी अपनी पूरी टीम के साथ नोएडा फिल्म सिटी में पार्टी इंज्वाय कर रहे थे. बैंड बाजा लाइंटिंग डांस खाना पीना मस्ती.. फुल टाइट व्यवस्था थी और सबने जी भर कर इंज्वाय किया.. पार्टी India Today मैग्जीन की वर्षगांठ के मौके पर तय थी और हुई भी. एक बार भी अरुण पुरी का दिल पेशावर के बच्चों के लिए दर्द से नहीं भरा. सरोकारी पत्रकारिता और संवेदनशील पत्रकारिता का दावा करने वाले टीवी टुडे ग्रुप और लीविंग मीडिया कंपनी के मालिक अरुण पुरी से कम से कम ये उम्मीद तो हम सभी कर सकते हैं कि वह देश दुनिया की नब्ज, संवेदना, सरोकार को पकड़ेंगे, समझेंगे और उसके हिसाब से बिहैव करेंगे. फिल्म सिटी में काम करने वाले दर्जनों पत्रकारों ने भड़ास को फोन कर इस जघन्य पार्टी के बारे में जानकारी दी.

सोशल मीडिया पर बाल संहार वाले दिन ही कई मीडिया के साथियों ने अपना प्रोफाइल पिक्चर हटाकर वहां दुख स्वरूप ब्लैक ब्लैंक तस्वीर लगा दी ताकि शोक प्रकट किया जा सके, दुख अभिव्यक्त किया जा सके. नर पिशाचों के हाथों मारे गए मासूमों के परिजनों के मातम और बचे हुए बच्चों की चीखों दुखों ने हर एक को बेध दिया. पूरी दुनिया अब तक इस ग़म दुख से उबर न सकी है. ये किसी पाकिस्तान का मामला नहीं है. दुनिया के किसी हिस्से में इतने सारे मासूम एक साथ स्कूल में मार दिए जाएं तो वह राष्ट्रीय नहीं बल्कि ग्लोबल शोक का विषय है. हम सभ्यता के हजारों लाखों साल के विकास क्रम में आज यहां तक पहुंचे हैं कि अपने ही बच्चों को लाइन में लगाकर गोली मार देते हैं.

इस न भूले जाने वाली घटना ने छोटे बड़े हर मीडियाकर्मी से लेकर आम आदमियों तक को अंदर से हिला कर रख दिया. रातों की नींद छीन लिया. सबने उन बच्चों में अपने-अपने बच्चों, भाइयों का चेहरा देखा. बच्चे भगवान का रूप माने जाते हैं. बच्चे धर्म मजहब सबसे परे होते हैं क्योंकि वे सहज सरल सच्चे भोले होते हैं. इन बच्चों ने किसी का क्या बिगाड़ा था. सो, इनके कत्लेआम पर पूरी दुनिया रोई और रो रही है. लेकिन अरुण पुरी को लाज शरम नहीं आई. सोलह दिसंबर की काली शाम अरुण पुरी ने इंडिया टुडे मैग्जीन की वर्षगांठ मनाई और इस मौके पर जमकर पार्टी करवाई. उसी सोलह दिसंबर की शाम ‘दलित दस्तक’ मैग्जीन के संपादक और आईआईएमसी से पासआउट अशोक दास अपने फेसबुक वॉल पर कुछ यूं लिखते हैं:

Ashok Das : 17 दिसंबर को मेरा जन्मदिन होता है। जाहिर है फेसबुक यह संदेश आपलोगो तक पहुंचाएगा औऱ आप शुभकामनाएं देंगे। लेकिन प्लीज, इस बार रहने दीजिएगा। मैं शुभकामनाएं ले नहीं पाऊंगा। मेरी आंखों के सामने पाकिस्तान के वह 130 बच्चे हैं, जिन्हें मार दिया गया है। यह इतनी जल्दी नहीं भूला जा सकता।

अशोक दास के लिखे को बतौर उदाहरण पेश किया. हर किसी ने अपने अपने तरीके से इस बड़े दुख को अभिव्यक्त किया. किसी ने जन्मदिन न मनाकर. किसी ने ब्लैक प्रोफाइल पिक्चर लगाकर. किसी ने लिखकर. किसी ने एकांत धारण करके. एक और उदाहरण दे देता हूं. ‘समाचार प्लस’ न्यूज चैनल के निदेशक और संपादक उमेश कुमार ने भी अपना बर्थडे नहीं मनाया. उन्होंने फेसबुक पर लिखा है…

Umesh Kumar : Sorry Friends Pls Dont Wish Me….I’m not celebrating My bday… I’m not Able To come Out From Yesterday’s Incident happened In Pakistan…. Small Kids Were lying on the Floor…. Bloody So Called Talibaani Hijde Shot Them many times… Still I have tears In my eyes…. They Were Not Pakistani… They Were Kids…Meri Sharadhanjali Un Pyare Aur Masoom Bachcho Ke Liye…Jo Un Talibaani Hijde Haramjaado Se Kah Rahe Honge Ki Uncle Hume Mat Maaro…. Un Masoom Bachcho Ki Yaad Sone Nahi De Rahi…

लेकिन अरुण पुरी को कोई शर्म नहीं. कम से कम इस अरुण पुरी को टीवी टुडे समूह को अब खुद को सरोकारी पत्रकारिता करने वाला मीडिया समूह कहना छोड़ देना चाहिए. मान लेना चाहिए कि अब ये मीडिया घराने जनता के प्रतिनिधि नहीं बल्कि पूंजीपतियों के यार-रिश्तेदार हो गए हैं. इसी कारण इनका दिल सैकड़ों बच्चों के मारे जाने से नहीं दुखता… हां, कोई परिचित मोटा सेठ ज्यादा खाकर हार्ट अटैक से मर जाए तो जरूर कई दिन तक इनके घर में शोक मातम मनेगा. फिलहाल तो यही कहूंगा.. शेम शेम अरुण पुरी… थोड़ी भी संवेदना होती तो बच्चों के संहार के दुख में तुम अपनी इनहाउस पार्टी कैंसल कर दिए होते. पार्टी कैंसल करना ‘इंडिया टुडे’ की वर्षगांठ के लिए ज्यादा सम्मानजनक रहा होता. लेकिन पहले से तय पार्टी करके ‘इंडिया टुडे’ की छवि और तेवर को धक्का दिया है. पूरे कुकृत्य को छिछोरापन ही कहा जाएगा.

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से. संपर्क: yashwant@bhadas4media.com


अरुण पुरी के छिछोरेपन के कुछ अन्य किस्से इन लिंक्स goo.gl/XMLj5v , goo.gl/LvW876  और goo.gl/0N9jJO पर भी क्लिक करके पढ़ सकते हैं.

 

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *