जागरण ग्रुप के नई दुनिया अखबार से होगी दो लाख तीस हजार रुपये की वसूली, देखें आदेश की कॉपी

जानेमाने रंगकर्मी एवं साहित्यकार नीलाभ अश्क चुपचाप अपने घर से लापता हो गए हैं। अपने साथ वह घर के ढेर सारे जरूरी सामान लैपटॉप, कंप्यूटर, फोन सेट आदि भी उठा ले गए हैं। उनके जानने वालों का कहना है कि वह अपनी भूमिका द्विवेदी से डर कर कहीं जा छिपे हैं। उन्हें अपनी जान जाने का अंदेशा रहा है। उनकी पत्नी का शुरू से ही उनकी धन-संपत्ति पर निगाह रही है। बाकी सब सरोकार तो एक दिखावा भर रहा है। गुमशुदगी के संबंध में पुलिस को भी अवगत करा दिया गया है। पुलिस मामले की छानबीन के साथ ही नीलाभ अश्क को ढूंढने में भी जुट गई है। 

अपनी पहुंच और ताकत की बदौलत अखिलेश दास गुप्‍ता भारतीय बैडमिंटन संघ के सचिव डा. विजय सिन्‍हा पर भारी पड़ गए

उत्‍तर प्रदेश बैडमिंटन एसोसिएशन में मचे घमासान ने जाहिर कर दिया है कि देश भर के खेल संस्‍थानों पर नेता-अधिकारी और धनपशुओं का कब्‍जा है। खेलों के नाम पर आने वाले धन का बंदरबांट तो यह लोग करते ही हैं, खिलाडि़यों का शारीरिक, मानसिक और आर्थिक शोषण भी करते हैं। खासकर महिला खिलाडि़यों का शोषण खेल संस्‍थानों में आम हो चुका है। फुटबालर सोना चौधरी के आरोप हों या केरल साईं सेंटर में आत्‍म हत्‍या करने वाली एथलीट अपर्णा रामचंद्रन, या फिर महिला क्रिकेट या हॉकी, तमाम खिलाड़ी इस खेल संघों के कर्ताधर्ताओं के शोषण की शिकार हुई हैं। प्‍लेयरों की शिकायतों की कोई सुनने वाला नहीं है। उत्‍तर प्रदेश बैडमिंटन एसोसिएशन से पैदा हुआ विवाद इस बात का गवाह है कि खेल संस्‍थाएं खेल को दरकिनार कर ‘गंदा खेल’ खेलने में जुटी हुई हैं। संभावना है कि आपसी विवाद के बाद अब इसके भीतर की गंदगी भी बाहर आएगी, लेकिन सवाल यह है कि नेता-अधिकारी और धनपशुओं के कब्‍जे से खेल संस्‍थानों को मुक्ति कब मिलेगी? आखिर कब ये संस्‍थाएं भाई-भतीजावाद और शोषण से खिलाडि़यों को मुक्‍त करेंगी? बड़ा सवाल है।

आईपीएस हिमांशु के निलंबन के बाद बोले अमिताभ ठाकुर- ‘सरकारी कर्मी को मिले घटनाक्रम पर टिप्पणी का अधिकार’

आईपीएस अफसर हिमांशु कुमार के निलंबन से उठ रहे हंगामे के बीच आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर ने अपने फेसबुक पर लिखा कि उनका व्यक्तिगत मत है कि बदलते समय में सरकारी कर्मी को भी विभिन्न विषयों और घटनाचक्र पर अपना मंतव्य देने का अधिकार मिलना चाहिए, जब तक वह मंतव्य देश की सुरक्षा, संरक्षा आदि से न जुड़ा हो अथवा अपने शासकीय पद की गोपनीयता भंग कर नहीं दिया जा रहा हो.  अमिताभ के अनुसार किसी स्तर पर किसी प्रकार के भ्रष्टाचार, सामान्य घटनाक्रम आदि पर सरकारी कर्मी को टिप्पणी करने का अधिकार देना पारदर्शिता, बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था और अभिव्यक्ति की आज़ादी के हित में है. उन्होंने कहा कि इस पर रोक लगाने विषयक नियम को उन्होंने हाई कोर्ट में चुनौती दी है जो अभी विचाराधीन है.

अखिलेश यादव लिफाफा प्रेमी पत्रकारों, भ्रष्ट अफसरों और चाटुकार नेताओं की गिरफ्त में थे!

Manoj Kumar Mishra : उत्तर प्रदेश के विधान सभा चुनावों से पूर्व चाटुकारों से घिरे अखिलेश यादव जनता की नब्ज और जमीनी हकीकत समझ ही नहीं पाये। एक के बाद एक रणनीतिक चूक करते हुए वो बार बार ये हवाई दावे करते रहे कि “जनता अपना मन बना चुकी है” और अपने ही भ्रमजाल से बाहर नहीं निकल सके।

सहारा प्रबन्धन के खिलाफ जुलूस : सहारा टॉवर, सहारा शहर और ओपी श्रीवास्तव के घर के सामने हुआ प्रदर्शन

लखनऊ। सहारा प्रबन्धन के खिलाफ आज उत्पीड़ित और शोषित सैकड़ों कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर विरोध रैली निकालकर सहारा टावर कपूरथला, सहारा शहर और वायरलेस चैराहा स्थित ओ0पी0 श्रीवास्तव के आवास के समक्ष जोरदार प्रदर्शन किया। सहारियन कामगार संगठन उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष ऋषि कुमार त्रिवेदी के नेतृत्व में सहारा स्टेट जानकीपुरम से सैकड़ों की संख्या में कर्मियों की शुरू हुयी विरोध रैली जैसे ही कपूरथला स्थित सहारा कार्पोरेट कार्यालय पहंची, जोरदार प्रदर्शन शुरू कर दिया गया। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान सहारा कार्यालय में मौजूद अन्य सभी कर्मी भी बाहर निकल आये और प्रदर्शनकारियों के साथ प्रबन्धन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी।

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अब शिवपाल पड़े अखिलेश पर भारी, कइयों को पार्टी से खदेड़ा

अजय कुमार, लखनऊ

समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव के तेवर लगातार तीखे होते जा रहे हैं। ‘शिव’ के तांडव ने पार्टी के भीतर और बाहर खलबली मचा दी है। रविवार को एमएलसी और प्रो. रामगोपाल यादव के भांजे आरविंद यादव को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया गया, तो दूसरे ही दिन एक ही झटके में सपा से उन सात नेताओं को निष्कासित कर दिया गया, जिन पर किसी न किसी बड़े नेता का हाथ था। इतने बढ़े स्तर पर निष्कासन की कार्रवाई करके शिवपाल ने जता दिया है कि वह अपनी मर्जी के मालिक हैं।

प्रियंका टिक्कू को गद्दी पर बिठाकर पीटीआई की सत्ता अपने हाथ में रखना चाहते हैं एमके राज़दान!

यशवंतजी
नमस्कार,

आशा करती हूँ आप कुशल होंगे. Bhadas4media पर प्रकाशित PTI की एक स्टोरी पढ़ी. काफी सटीक थी, पर ये पूरी कहानी नहीं है. पूरी कहानी कुछ और है बल्कि यहां ये कहना गलत नहीं होगा कि समझिए एक तरह से PTI की कब्र खोदी जा रही है और उसे सुपुर्दे खाक प्रियंका टिक्कू ही करेंगी. दरअसल प्रियंका टिक्कू पीटीआई के सीईओ और एडिटर इन चीफ एम के राज़दान की बहुत ख़ास हैं और ये कोई गुप्त बात भी नहीं है. राज़दान साहब पीटीआई को अपनी जागीर समझते हैं और जब पीटीआई बोर्ड ने उनको बाहर का रास्ता दिखा दिया तो वे प्रियंका टिक्कू को वहां बिठाना चाहते है. ये बात पीटीआई में सबको पता है पर अपनी नौकरी किसको प्यारी नहीं होती. मैं ये सब आपको इसलिए लिख पा रही हूँ क्योंकि मैं वहां से अब इस्तीफ़ा दे चुकी हूं.

गूंगी आकाशवाणी से प्रशिक्षुओं में निराशा

आकाशवाणी की संवादहीनता के रवैये से प्रशिक्षु पत्रकारों में काफ़ी निराशा है। नाराज प्रशिक्षुओं ने कहा है कि इसकी शिकायत सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर से कर दी गयी है और अब तक की पूरी सिलसिलेवार जानकारी उन तक पहुंचा दी गयी है। प्रशिक्षुओं का आरोप है कि प्रसार भारती के आदेश के बावजूद भी आकाशवाणी उनको इंटर्नशिप के लिए अपने यहां नियुक्ति नहीं दे रहा है जबकि उनके ही साथ के अन्य प्रशिक्षु जिन्हें प्रसार भारती ने दूरदर्शन के लिये चयनित किया था उनकी नियुक्ति हो गयी है और उनको पारिश्रमिक भी मिलना शुरू हो गया है जबकि आकाशवाणी अपनी निरंकुशता के कारण अब तक नियुक्ति नहीं दे सका है। बल्कि उल्टे संवादहीनता की स्थिति को कायम कर मामले को छिपाने की साज़िश रच रहा है। उन्होने कहा कि इसकी शिकायत सम्बन्धित मंत्रालय से कर दी गयी है।

दीपक शर्मा स्टिंग मुकदमा प्रकरण : आज़म खान को हाईकोर्ट में मुंह की खानी पड़ी

इलाहबाद: पत्रकारों पर मुक़दमे ठोंकने में माहिर यू पी के मुग़ले आज़म मंत्री आज़म खान को आज इलाहबाद हाई कोर्ट में मुंह की खानी पड़ी। आजतक के पत्रकारों पर चार चार आपराधिक मुक़दमे दर्ज़ करवा कर आज़म खान दीपक शर्मा सहित कई बड़े पत्रकारों को जेल भेजना चाह रहे थे। ये मुक़दमे १० पुलिस अफसरों के ज़रिये आज़म खान के गोपनीय मौखिक आदेश पर दर्ज़ किये गए थे।  मंगलवार को इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज जस्टिस बी के नारायण और जस्टिस विजय लक्ष्मी ने यूपी पुलिस को अंतरिम आदेश दिए की वो मुज़फ्फरनगर दंगो में दिखाए गए ऑपरेशन दंगे को लेकर दर्ज़ मुकदमे में आजतक के किसी भी पत्रकार को गिरफ्तार नही करेंगी।

यूपी के पत्रकारों ने अपने खानपान समारोह के लिए इकट्ठा पैसा बीमार पत्रकार को दे दिया

सभी मान्यता प्राप्त साथियों,

एक परंपरा इस बार टूट गई है। चुनाव में आपके 100 रुपए के आर्थिक अंशदान से एकत्र हुए फंड से इस बार नव निर्वाचित समिति आपके सम्मान में लंच का आयोजन नहीं कर सकेगी। साथ मिल बैठकर खाना फिर कभी किसी और मौके पर निश्चित ही होगा। लेकिन इस बार समिति के समक्ष दो विकल्प थे। एक तरफ चुनावी फंड से बचे तकरीबन 30 हजार रुपए से लंच के आयोजन तो दूसरी तरफ हम सब के साथी, पूर्व में मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के सदस्य रहे सुरेंद्र सिंह व उनके परिवार की मदद का विकल्प।

अनिल अंबानी ने TOI पर ठोका 5 हजार करोड़ की मानहानि का मुकदमा

अनिल अंबानी ने टाइम्स ऑफ इंडिया पर पाँच हज़ार करोड़ की मानहानि का दावा ठोका है। भारतीय मीडिया के इतिहास में अब तक किसी मीडिया ग्रुप पर लगाया गया मानहानि का ये सबसे बड़ा दावा है। सीएजी यानी कैग की ड्राफ्ट रिपोर्ट के आधार टाइम्स ऑफ इंडिया ने 18 अगस्त को अपने अखबार में कई लेख प्रकाशित किए थे। जिसमें अंबानी की बिजली कंपनी बीएसईस के खातों में कई तरह की गड़बड़ियाँ पाए जाने की बात कही गई थी।

60 से कम आयु में दिवंगत पत्रकारों के परिजनों को भी मिले 5 लाख रुपये की धनराशि

लखनऊ- उत्तर प्रदेश जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन के प्रान्तीय महामंत्री रमेश चन्द जैन ने प्रदेश के 60 वर्ष से कम आयु में दिवंगत होने वाले पत्रकारों के परिजनों को भी दिवंगत अधिवक्ताओं के परिजनों की भांति 5 लाख रुपये की धनराशि दिए जाने की सरकार से मांग की है।

मलेथा के मायने : मेरा गाँव-मेरी पहचान… 20 सितम्बर को ऋषिकेश पहुंचिए

उत्तराखंड राज्य बनने के साथ-साथ समय-समय पर उत्तराखंड के विकास को लेके अनेक रूप में आवाज़ें उठते रही है। अनेक तरीके से इस पर कार्यवाही करने का प्रयास किया गया है, चाहे वो गैर सरकारी संघठन हो या चाहे वो अलग-अलग राजनितिक संघठन हो जो  समय पर सूबे जो चलाने में योगदान देते रहे हो। चाहे वो विभिन्न क्षेत्र के बुद्धिजीवी वर्ग के लोग हो या फिर वो शासन में योगदान देने वाले अधिकारी।

हिन्दी के आयोजनों को चश्मा उतार कर देखें

मध्य प्रदेश भारत का ह्दयप्रदेश है और हिन्दी के एक बड़ी पट्टी वाले प्रदेश के रूप में हमारी पहचान है। हिन्दी हमारे प्रदेश की पहचान है और लगातार निर्विकार भाव से हिन्दी में कार्य व्यवहार की गूंज का ही परिणाम है कि चालीस साल बाद हिन्दी के विश्वस्तरीय आयोजन को लेकर जब भारत का चयन किया गया तो इस आयोजन के लिए मध्यप्रदेश को दसवें विश्व हिन्दी सम्मेलन की मेजबानी सौंपी गई। गंगा-जमुनी संस्कृति वाले भोपाल में हिन्दी का यह आयोजन न केवल भोपाल के लिए अपितु समूचे हिन्दी समाज के लिए गौरव की बात है।

वाह रे लोकसभा टीवी के शेखचिल्ली, ‘डायरिया स्पेशल’ से उड़ाई कलाम की मर्यादा की खिल्ली

लोकसभा टीवी ने मर्यादा की सारी सीमाएं लांघ कर एक बार फिर ये साबित कर दिया है कि यहां काम करने वाले लोग बेहद अनप्रोफेशनल तो हैं ही, उसके साथ ही असंवेदनशील भी हैं। कलाम के अचानक हुए निधन के बाद लोकसभा टीवी ने जो लाइन ली है उससे सारा देश शर्मिंदा है। सोशल मीडिया पर लोकसभा टीवी के उन कार्यक्रमों की तस्वीरें वाइरल हो रही हैं, जो कार्यक्रम लोकसभा टीवी भारत रत्न और पीपुल्स प्रेजिडेंट कलाम के निधन के बाद दिखा रहा था। हद तो तब हो गयी जब देर रात तक लोकसभा टीवी पर कलाम के निधन की खबर तक नहीं चली। देश के तमाम बड़े सम्पादकों ने लोकसभा टीवी की इस बेशर्म हरकत पर हैरानी जताई है। फेसबुक पर इण्डिया टीवी के संपादक अजीत अंजुम सहित कईं अखबारों और न्यूज़ चैनलों के अन्य संपादकों ने भी कलाम के दिल्ली में अंतिम दर्शन के कार्यक्रम के दौरान लोकसभा टीवी के ‘डायरिया स्पेशल’ प्रोग्राम दिखाए जाने की तस्वीरें पोस्ट की हैं।

खौफनाक : डर-डर कर दिन बसर कर रहे पाकिस्तान के मशहूर टीवी पत्रकार हामिद मीर

सवाल बनता है कि क्या कोई पत्रकार हमारे देश भी हमीद मीर की तरह अपनी हिफाजत को लेकर इस कदर अपनी जिंदगी में दो चार हो रहा है।, शायद नहीं। तो फिर क्यों नहीं? क्यों कि हमारे देश में जनपक्षधरता के मसले पर अपनी अलोकतांत्रिक हरकतों के लिए कुख्यात नेताओं वाली सरकारों और सिर्फ पैसे के भूखे मीडिया घरानों को चला रहे पत्रकारों में कोई फर्क नहीं दिखता है। हमीद मीर इन दिनो डरे हुए हैं। वह अपना डर ‘वाशिंगटन पोस्ट’ से साझा करते हैं। वह अपनी हिम्मत और बेबाकी के नाते पाकिस्तान के टीवी मीडिया में शीर्ष हैसियत रखते हैं। उन पर एक बार आतंकवादी अटैक हो चुका है। वह आईएसआई की चेतावनी के बावजूद पीछे नहीं हटे। अब उन्हें अपनी जिंदगी की हिफाजत सता रही है। हमारे देश के मीडिया पर तो बड़ा सीधा सा फार्मूला लागू होता है कि जब कर नहीं, तो डर किस बात का। यानी जब कोई हिम्मत का काम कर गुजरे, तभी तो….हमारे यहां तो पत्रकारों का एक बहुसंख्यक धड़ा मंत्रियों, अफसरों की दलाली में जुटा रहता है।  

मरीज के इलाज में वाराणसी का मैक्सवेल हास्पिटल दोषी करार

वाराणसी : अपर मुख्य चिकित्साधिकारी की जांच में पता चला है कि बक्सर निवासी मरीज ओंकारनाथ तिवारी के इलाज में मैक्सवेल अस्पताल के डॉक्टर ने लापरवाही बरती थी। इसकी शिकायत सोशल फाउंडेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स के अध्यक्ष ने चिकित्सा प्रशासन से गंभीर शिकायत की थी। उल्लेखनीय है मैक्सवेल के डॉक्टरों ने ज्यादा पैसे वसूलने के चक्कर में ओंकारनाथ का पैर काट दिया था। 

राजस्थान पत्रिका के रिपोर्टर ने चारागाह की जमीन को पत्नी के नाम आवंटित करा लिया

अजमेर (राजस्थान) : जिले के सावर क्षेत्र में राजस्थान पत्रिका के रिपोर्टर सत्यनारायण कहार पर लाखों रूपयों की बेशकीमती चारागाह भूमि को अपने नाम आवंटित करवाने का आरोप लगा है। सत्यनारायण पूर्व में ग्राम पंचायत सदारा का उपसरपंच रह चुका है। तब भी यह पत्रिका का ही रिपोर्टर था।

इंदौर में बारिश न होने पर सुमित्रा महाजन ने जपी माला

हमारे भारतीय समाज खासकर सवर्ण जातियों में अंध विश्वास की खाई दिन ब दिन गहराती जा रही है। जिस तरह से समाज में अंध विश्वास अपनी जड़ें जमा रहा है, उसे देखते हुए तो कह सकते हैं कि देश में वैज्ञानिक चेतना के विकास या प्रचार-प्रसार के लिए अब तक की गई तमाम कोशिशें लगभग बेमानी ही साबित हो रही हैं। जब राजनेता व नौकरशाही से जुड़े जागरूक समझे जाने वाले लोग भी अंध-मान्यताओं के हिसाब से अपनी दिनचर्या और कार्य व्यवहार तय करते दिखते हैं तो समझना और भी मुश्किल हो जाता है कि अभी तक विज्ञान के क्षेत्र में हमारी सभी उपलब्धियों का हासिल क्या रहा है। 

दलित अधिकारियों, कर्मचारियों की पदावनति के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट जायेगा आइपीएफ – दारापुरी

लखनऊ : पूर्व आईजी एवं आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट (आइपीएफ) के राष्ट्रीय प्रवक्ता एस. आर. दारापुरी ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आरक्षण और परिणामी ज्येष्ठता के आधार पर सभी विभागों में पदोन्नति पाए दलित अधिकारियों और कर्मचारियों को पदावनत करने के फैसले पर गहरा दुःख व्यक्त किया है. उन्होंने कहा है कि इससे प्रदेश में …

हमीरपुर के बिंवार गांव में जो घटित हुआ, जान लीजिए

12वीं क्लास में पढ़ रही एक बेटी सुबह 7 बजे गावं में ही कोचिंग जा रही थी। उ. प्र. सरकार के दो रिश्तेदारों ने उसे सरेराह रोककर छींटाकसी की। कपड़े खीचे। बाल पकड़ कर खींचा। बेटी को तरह-तरह से बेइज्जत किया। पास में रहने वाली एक मुस्लिम महिला ने अपनी जान जोखिम में डाल कर बेटी को बचाया। वहां से छूट कर वो किसी तरह घर भागी। पिता और चाचा ने उसकी दुर्दशा देखी और उन गुंडों का पता करने निकल पड़े। उनके पीछे माँ भी उलाहना देने चल दी। इधर भीषण अपमान से आहत बेटी को कोई रास्ता न सूझा। उसने अपने ऊपर किरोसिन डाल कर आग लगा ली। पड़ोसी चिल्लाये, दौड़े तो आग बुझाई। माँ-बाप-चाचा उलटे पांव लौटे और बेटी को लेकर थाने भागे। थानेदार ने वाकया और अभियुक्तों का नाम सुनते ही वहां से भगाया तो वो कोई साधन लेकर मौदहा तहसील और फिर हमीरपुर जिला अस्पताल पहुंचे। जिला अस्पताल के गेट पर पहुंचते पहुंचते बेटी ने दम तोड़ दिया। 

सोशल मीडिया में भी जातिवाद का जहर

शुक्र है कि सोशल मीडिया का सरकारीकरण नहीं हुआ है। इस कारण वहां आरक्षण भी नहीं है और जातिवाद भी लगभग नहीं के बराबर है। अगर सोशल मीडिया सरकारी होता तो कुछ नेता अवश्य मांग करते कि फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन आदि में आरक्षण किया जाए। ऐसी व्यवस्था हो कि निश्चित प्रतिशत लाइक आरक्षित कोटे के हो ही। यह भी होता कि अकाउंट शुरू करने के पहले किसी राजपत्रित अधिकारी से प्रमाणित प्रमाण-पत्र की प्रतिलिपि नत्थी करनी पड़ती कि आप किस जाति के हो। 

पंजाब में आतंकी अटैक के लाइव टीवी प्रसारण पर सूचना मंत्रालय ने दी कार्रवाई की चेतावनी

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने न्यूज और करेंट अफेयर्स चैनलों को आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन की कवरेज के संबंध में जारी एक तात्कालिक हिदायत में कहा है कि आज पंजाब के गुरदासपुर में आतंकवाद विरोधी अभियान का कुछ न्यूज और करेंट अफेयर्स चैनलों ने प्रसारण किया। यह प्रसारण वहां नियुक्त अधिकारी के अनुमति के बिना उस समय प्रसारित किया गया, जब ऑपरेशन उस समय चल रहा था।   

शावकों की मौत की खबर मीडिया में लीक करने पर लॉयन सफारी के चौकीदार को डंडों से पीटा

इटावा (उ.प्र.) : पहले शेर-शेरनी की मौत के बाद अब चार शावकों की जन्म के बाद ही मौत से खिसियाए लॉयन सफारी प्रशासन को लोगों ने मुख्यमंत्री से शिकायत और यहां की खबरें लीक करने का आरोप लगा चौकीदार को जमकर पीट दिया। 

प्रेस काउंसिल अध्यक्ष ने कहा – पत्रकारों पर हमला संज्ञेय अपराध, पांच साल सजा होनी चाहिए

दिल्ली : प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन न्‍यायमूर्ति सीके प्रसाद ने कहा है कि आंकड़ों के हिसाब से पत्रकारों पर हमले की घटनाएं बढ़ी नहीं हैं। पीसीआई की एक उप समिति ने इस तरह की धममियों से निपटने के लिए कानून संबंधी अपनी सिफारिशें दे दी हैं। पत्रकार पर उसके काम को लेकर किया गया हमला काफी गंभीर मामला है। इसे संज्ञेय अपराध की श्रेणी में लाया जाना चाहिए। हमने इस अपराध के लिए पांच साल की सजा की सिफारिश की है। उन्होंने कहा कि इलेक्‍ट्रॉनिक मीडिया को भी पीसीआई के तहत लाया जाना चाहिए।

एबीपी के अनोखे शो ‘प्रेस कांफ्रेस’ में गूंजा केजरीवाल का ‘ठुल्ला’

एबीपी न्यूज ने नया शो प्रेस कांफ्रेंस ने शुरू किया है जो हर शनिवार रात 8 बजे, रविवार सुबह 10 बजे और रात में 8 बजे प्रसारित किया जाता है. एबीपी न्यूज के पहले शो में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शिरकत की और खुलकर सारे सवालों का जवाब दिया. ये देश का इकलौता पहला शो है जिसमें 12 वरिष्ठ पत्रकार शामिल हैं जो हर गेस्ट से ये सवाल करेंगे. प्रेस कांफ्रेंस शो के एंकर वरिष्ठ पत्रकार दिबांग हैं.

एफएम रेडियो की नीलामी में रेड एफएम को भाग लेने की हाईकोर्ट से मंजूरी

रेड एफएम को दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक बड़ी राहत दी और केंद्र सरकार के 15 जुलाई के उस आदेश को रद्द कर दिया जिसमें इस रेडियो चैनल को सुरक्षा संबंधी मंजूरी देने से इनकार कर दिया गया था और एफएम नीलामी के तीसरे चरण में रेड एफएम के भाग लेने के आवेदन को भी रद्द कर दिया गया था।

सीकुराज भारद्वाज को इंसाफ दिलाने के लिए पटना में कैंडिल मार्च

पटना: जस्टिस फॉर सीकुराज भारद्वाज फोरम ने गत दिवस शहीद सीकुराज भारद्वाज के इन्साफ की मांग को लेकर पटना के कारगिल चौक से डाक बंगला चौराहे तक पद यात्रा, कैंडल मार्च निकाला। 

क्या राजनीति का अर्थ केवल भूमाफिया, चोर- उच्चकों और फर्जी डिग्री धारकों से है!

आज जब मैं अपनी स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति पर आये मित्रों के मत पर अपनी सफाई पेश कर रहा हूँ, तो कबीर की याद आ रही है और ” झीनी चादर ” अपने जीवन में ओढ़ने वाले सभी मित्रों को नमन कर सफाई देने का मन है। मैंने ३४ साल की नौकरी की है तथा इस का मतलब यह नहीं कि मैंने इतनी लम्बी सेवा घुटन या विवशता के साथ की। यथा शक्ति, मनोयोग से जिन पदों पर रहा, काम किया। 

‘नवभारत’ के ‘मुंबई प्लस’ ने आज खूब जग हंसाई कराई

मुंबई : यहां से प्रकाशित ‘नवभारत’ समाचार पत्र में शहर की खबरें अलग से चार पेज ‘मुंबई प्लस’ के नाम से प्रकाशित होती हैं। आज 27 जुलाई के ‘मुंबई प्लस’ पूल आउट के पहले पेज की खबरों को ही पेज नं. 3 पर रिपीट कर छाप दिया। माना जा रहा है कि अखबार प्रबंधन और संपादकीय विभाग की किसी बहुत बड़ी चूक के कारण ऐसा हुआ है। इससे अखबार की खूब जगहंसाई हुई है। पेज इस प्रकार हैं – 

नवभारत के मुंबई प्लस का पेज-1

मौजू मीडिया : ‘बसंती इन कुत्तों के आगे मत नाचना ! ‘

  ‘शोले’ के इस कालजयी डायलॉग से शायद ही कोई अंजान हो! फ़िल्म में नायक धर्मेन्द्र का ये संवाद सम्बोधित तो था नायिका हेमामालिनी के लिए लेकिन इंगित था खलनायक गब्बर यानी अमज़द ख़ान और उसके गुर्गों के लिए…! ये संवाद आज भी बेहद मौजू है क्योंकि इसमें नायिका की जिस सुचिता (purity) का वास्ता दिया गया है वो सामाजिक बुराइयों के आगे घुटने नहीं टेकने का है!

अमिताभ को घेरने में डीजीपी, डीआईजी, एसएसपी का हाथ

लखनऊ : सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. नूतन ठाकुर ने अपने पति आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर के खिलाफ गाजियाबाद की एक महिला द्वारा बलात्कार का एफआईआर लिखवाने में बड़े पुलिस अफसरों की साफ़ मिलीभगत का आरोप लगाया है। कहा है कि डीजीपी, डीआईजी और एसएसपी की यह असामान्य तत्परता और पुलिस द्वारा इस तरह फूहड़ तरीके से धारा 420 लगाना इस मामले में भारी ऊपरी दवाब को पूरी तरह स्थापित करता है।

घायल राष्ट्रीय पक्षी को सारनाथ पक्षी विहार में मिला आसरा

वाराणसी : चौबेपुर क्षेत्र के भंदहा कला (कैथी) गाँव स्थित टेलीफ़ोन एक्सचेंज के पास एक बगीचे में एक माह पूर्व एक मोरनी की चोंच के पास घाव हो गया था। मोरनी को स्थानीय निवासियों ने इलाज कराने के बाद छोड़ दिया। घाव के कारण उसकी एक आँख जाती रही , एक तरफ से न दिखाई  देने के कारण कुछ दिन बाद मोरनी सड़क पार करते समय किसी वाहन की चपेट में आ गयी। 

घायल मोरनी का इलाज कराते स्थानी पक्षीप्रेमी

म.प्र. : एक बार फिर सुर्खियों में सिविल सेवा परीक्षा विवाद

मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग द्बारा आयोजित होने वाली प्रतियोगी परीक्षाएं बिना किसी विवाद के संचालित हो जाएं, यह कई वर्षों से सम्भव नहीं हो पा रहा है। ताजा मामला प्रदेश की सिविल सेवा परीक्षा-2०14 की प्रारम्भिक परीक्षा का है। यह परीक्षा 9 मई 2०15 को सम्पन्न हुई जिसके परिणाम जुलाई माह में जारी हुए हैं। आयोग ने अपनी बेवसाइट पर विभिन्न कटेगरी के लिए ‘कटऑफ’ मार्क्स जारी किए हैं, जिसको लेकर प्रतियोगी परीक्षार्थियों में असंतोष है और उनका दावा है कि उन्होंने आयोग द्बारा घोषित ‘कटऑफ ’ मार्क्स से अधिक अंक हासिल किए हैं, लेकिन आयोग को इससे कोई लेना-देना नहीं है। 

समाचार पत्र वितरकों को मिलेगा दुर्घटना सहायता, पेंशन, स्वास्थ्य बीमा सेवाओं का लाभ

कानपुर : श्रमायुक्त शालिनी प्रसाद ने गत दिनो समाचार पत्र वितरकों को एक मीटिंग में बताया कि अब उनको भी केंद्र सरकार की दुर्घटना सहायता, पेंशन, स्वास्थ्य बीमा सेवाओं का लाभ मिलेगा। वितरकों ने इसके लिए अभियान चलाया था। कानपुर शहर में साढ़े तीन हजार से अधिक समाचार पत्र वितरक हैं।

 

कानपुर में समाचारपत्र वितरकों एवं पत्रकारों को योजना की शुरुआत की जानकारी देतीं श्रमायुक्त शालिनी प्रसाद 

करोड़ों अकेले बेबस लोगों का देश

देश में अभी भी पचास करोड़ से ज्यादा वोटर किसी भी राजनीति दल के सदस्य नहीं हैं। और इतनी बडी तादाद में होने के बावजूद यह सभी वोटर अपनी अपनी जगह अकेले हैं। नहीं ऐसा भी नहीं है कि बाकि तीस करोड़ वोटर जो देश के किसी ना किसी राजनीतिक दल के सदस्य हैं, वे अकेले नहीं है। दरअसल अकेले हर वोटर है। लेकिन एक एक वोट की ताकत मिलकर या कहे एकजुट होकर जब किसी राजनीतिक दल को सत्ता तक पहुंचा देती है तो वह राजनीतिक दल अकेले नहीं होता। उसके भीतर का संगठन एक होकर सत्ता चलाते हुये वोटरो को फिर अलग थलग कर देता है। यानी जनता की एकजुटता वोट के तौर पर नजर आये । और वोट की ताकत से जनता नहीं राजनीतिक दल मजबूत और एकजुट हो जाये । और इसे ही लोकतंत्र करार दिया जाये तो इससे बडा धोखा और क्या हो सकता है। क्योंकि राजनीतिक पार्टी को सत्ता या कहे ताकत जनता देती है। लेकिन ताकत का इस्तेमाल जनता को मजबूत या एकजूट करने की जगह राजनीतिक दल खुद को खुद को मजबूत करने के लिये करते हैं। एक वक्त काग्रेस ने यह काम वोटरों को बांट कर सियासी लाभ देने के नाम पर किया तो बीजेपी अपने सदस्य संख्या को ग्यारह करोड़ बताने से लेकर स्वयंसेवक होकर काम करने के नाम पर कर रही है । 

इतनी घटिया हरकत से भी बाज नहीं आ रहा घबराया हुआ जागरण प्रबंधन

जागरण कर्मियों की एकजुटता से घबराया हुआ प्रबंधन कितनी गिरी हुई हरकत कर सकता है। इसका एक सटीक उदाहरण हाल ही में सामने आया है। 

मजीठिया वेतनमान : दैनिक जागरण के मीडिया कर्मी भर रहे प्रपत्र-सी, आप क्‍यों रहें पीछे !

दैनिक जागरण के स्‍थायी, अनुबंधकर्मी और अंशकालिक मीडिया कर्मियों ने प्रपत्र-सी को भर लिया है और जो रह गए हैं, वह भी इन्‍हें जल्‍द ही भरने जा रहे हैं। ऐसे में अन्य अखबारों के मीडिया कर्मी पीछे क्‍यों रह रहे हैं। यदि किसी के पास प्रपत्र-सी नहीं है तो जल्‍द इसे साइट से डाउनलोड कर ले। नहीं तो जागरण के साथियों से संपर्क करे, वे मदद करेंगे। यदि जागरण छोड़ने के बाद किसी अन्‍य संस्‍थान में कार्य कर रहे हैं तो भी प्रपत्र-सी को भरने के लिए पुराने सहयोगियों से संपर्क कर सकते हैं।

मजीठिया वेतनमान : ये है दैनिक अमर उजाला का सैलरी ग्रेड

2010 – 407 करोड़ रुपये, 2011 – 477 करोड़ रुपये, 2012 – 526 करोड़ रुपये, 2013 – 544 करोड़ रुपये, 2014 – 640 करोड़ रुपये। साथियों, उपरोक्‍त आंकड़े देखकर आप समझ सकते हैं कि अमर उजाला कौन से ग्रेड का समाचारपत्र है। यह आंकड़े उस रिपोर्ट के हैं जो अमर उजाला ने सेबी को शेयर बाजार में सूचीबद्व होने के लिए जमा करवाए थे। आप अमर उजाला की वित्‍तीय रिपोर्ट सेबी से या आरटीआइ (RTI) के माध्‍यम से एमसीए (Ministry Of Corporate Affairs website-  http://www.mca.gov.in/) और इनकम टैक्‍स विभाग से भी मांग सकते हैं।

उत्तराखंड : एक भ्रष्ट अफसर का आखिरी वक्त तक गुणगान करता रहा बेशर्म मीडिया

उत्तराखण्ड के 15 साल बता रहे हैं कि उसे अपना समझने की हिमाकत न तो राज्य सत्ता ने की है और न ही नौकरशाहों ने। सब ने उसे खाला का घर बना दिया है। जहां, जब तक डट सकते हो, डटे रहो। एक मुख्य सचिव बी आर एस के नाम पर सूचना आयुक्त बन 5 साल का जुगाड़ कर लेता है, तब दूसरा आता है और फिर तीसरा, संघर्ष और शहादतों से लिए राज्य में ये तमाशा क्या है?

न्यूज़ एक्सप्रेस के मालिक इस पोस्ट को पढ़ रहे हों तो गुजारिश है, दुआएँ लो, बद्दुआएँ नहीं

भड़ास4मिडिया के माध्यम से मैं आज अपना ये दर्द बाँट रहा हूँ । ये दर्द मेरा ही नहीं बल्कि उन सभी दोस्तों का है, जो इस दर्द से गुजर चुके हैं । अगर न्यूज़ एक्सप्रेस के मालिक इस पोस्ट को पढ़ रहे हों तो उनसे मेरी गुजारिश है कि दुआएँ लो, बद दुआएँ नहीं । आखिर कब तक हिंदुस्तान में दिन रात भूके प्यासे भागदौड़ करने वाले न्यूज़ चैनल स्ट्रिंगरों का शोषण होता रहेगा । वो स्ट्रिंगर जो अपने परिवार को छोड़ पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ जान हथेली पर रख इस आस में चैनल पर खबरें भेजता है कि अपने परिवार का पालन पोषण कर सके।

जगजीत शर्मा ऑल इंडिया जर्नलिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोनीत

गुड़गांव : पत्रकारों के हक-हकूक के हितों की लड़ाई के लिए अस्तित्व में आए ऑल इंडिया जर्नलिस्ट एसोसिएशन की बैठक में गत दिनो जगजीत शर्मा को सर्व सम्मत्ति से अध्यक्ष मनोनीत किया गया। 

मजीठिया भाग-8A : क्यों चाहिए 44 महीने की नौकरी और 15 लाख रुपए एरियर

 मजीठिया वेतनमान के लिए पात्र पत्रकारों के ध्यानार्थ यहां एरियर राशि को सोदाहरण एक चार्ट के माध्यम से दर्शाया जा रहा है। इसका एकमात्र उद्देश्‍य है कि अभी तक जो पत्रकार इस गफलत में थे कि उन्हे तो इस संस्‍थान में आए हुए मात्र तीन-चार साल ही हुए हैं तो उनका एरियर बनेगा ही कितना या उनके नए वेतनमान में क्‍या अंतर आएगा। इस विस्तार से इस प्रकार जान सकते हैं – 

खून खौला देता है यह विज्ञापन, फुरसत मिले तो पढ़िएगा !

खबरों की सुर्खियां  ही इतिहास नहीं बताती, कभी-कभी विज्ञापन भी बता देते  है।  4-5 सेंटीमीटर में छपे विज्ञापन भी खून खौला देते हैं। जैसे यह ! न्यू फ्लोरिडा मेल, अमेरिका अखबार के 8 मार्च 1846 को छपे इस विज्ञापन पर भी नजर डालें। यह कहता  है कि 19 साल की एक सुंदर निग्रो गुलाम युवती को , जो गर्भावस्था के प्रारंभिक दौर में है, कोई चुरा ले गया है या वह  भाग गई है। उसे पकड़कर लानेवाले को पचास डॉलर का नकद इनाम दिया जाएगा।

ऐसे विज्ञापन आम थे अखबारों में 

मीडिया खामोश : मरीज लाचार, बाबा और डॉक्टर बने लुटेरे, मठ-मंदिर, अस्पताल हुए कसाईबाड़ा

देश के अस्पतालों में क्या हो रहा है, कैसे बाबाओं और डॉक्टरों द्वारा मरीजो को बेखौफ लूटा-निचोड़ा और गलत दवाएं देकर मौत के घाट उतारा जा रहा है, इस ओर न मेडिकल नियामक शीर्ष सरकारी संस्थाओं का ध्यान है, न देश-प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्रियों का। जब से इलाज के नाम पर लुटेरों को खुला छोड़ दिया गया हो। इसी तरह धर्मांधता का फायदा उठाने में जुटे तरह तरह के पाखंडी बाबाओं ने अंधेरगर्दी मचा रखी है। बड़ी-बड़ी आलीशान बिल्डिंगों में चल रहे अस्पताल और दवा इलाज के नाम पर बेखौफ तांडव के ठिकाने बने मठ-मंदिर देश में तो जो कर रहे, सो कर ही रहे, विदेशों तक झूठे प्रचार, अखबारों और चैनलों पर प्रकाशित-प्रसारित हो रहे विज्ञापनों की आड़ में ठगी अखाड़ों में तब्दील हो चुके हैं। 

मध्य प्रदेश में 15 अगस्त से पत्रकार स्वास्थ्य एवं दुर्घटना बीमा योजना

भोपाल : मध्यप्रदेश सरकार ने पत्रकारों के लिए दुर्घटना बीमा योजना लागू करने की घोषणा की है। प्रदेश के जनसंपर्क एवं ऊर्जा मंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने बताया है कि मध्यप्रदेश में पत्रकारों की सुरक्षा के लिए स्वास्थ्य और दुर्घटना बीमा योजना 15 अगस्त से लागू की जाएगी।  स्व. महेन्द्र चौधरी स्मृति राज्य-स्तरीय फोटो पत्रकारिता सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि इस वर्ष से राज्यस्तर के साथ-साथ आंचलिक फोटो पत्रकारिता को भी पुरस्कृत किया जायेगा।

महाराष्ट्र सरकार जल्द बनाएगी पत्रकार सुरक्षा कानून का प्रारूप

मुंबई : विधानपरिषद में विरोधी पक्ष नेता धनंजय मुंडे ने कहा कि पिछले तीन साल में राज्य भर में करीब 265 पत्रकारों पर हमले हुए। उन पर झूठे आरोप लगाकार मामले दर्ज किए जा रहे हैं। उनकी हत्या हो रही है। सरकार बिना देरी किए पत्रकारों की सुरक्षा के लिए कड़ा से कड़ा कानून बनाए।

राहुलजी, आपकी बातें भी हवा-हवाई, वजन लाइये जनाब, कब तक करेंगे जुमलेबाजी

सालों तक सत्ता में रहने वाली कांग्रेस को आज तक विपक्ष का रोल अदा करना नहीं आया है, दूसरी तरफ भाजपा आज भी सत्ता में होने के बावजूद विपक्ष की पार्टी लगती है। कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी गायब होने के बाद अचानक प्रकट होते हैं और भाषण से लेकर टीवी कैमरों के सामने जुमलेबाजी करते नजर आते हैं। अभी राहुल गांधी ने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि वे हवा में बातें करते हैं और उनकी बातों में वजन होना चाहिए। ललित गेट और व्यापमं के मुद्दे पर उन्होंने प्रधानमंत्री की चुप्पी पर भी सवाल उठाए मगर मोदीजी जहां इन मुद्दों पर चुप हैं, लेकिन उनकी पूरी पार्टी पलटवार करने में पीछे नहीं है। 

असिस्टेंट प्रोफेसर-प्रिंट मीडिया की नियुक्ति में मनमानी पर मंत्रालय ने किया जवाब तलब

भड़ास पर छपी खबर का असर : राष्ट्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संस्थान नई दिल्ली नई में गत 25 जून को हुए सहायक आचार्य प्रिंट मीडिया के चयन में मनमानी पर केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने यहां के निदेशक से जवाब तलब किया है। इस पद के लिए इंटरनल कैंडिडेट को विशेष लाभ देते हुए उसे स्क्रीनिंग एवं चयन सूची में प्रथम स्थान पर रखने एवं नियुक्ति सूची में प्रथम रैंक पर केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के सचिव ने स्पष्टीकरण मांगा है। इस पद के लिए पहले से ही संभावना जताई जा रही है कि संस्थान के निदेशक ने निजी लाभ के लिए ऐसे अभ्यर्थी का चयन कराया है जो ओबीसी श्रेणी की अर्हता पूरी नहीं करता है और उसकी शैक्षिक योग्यता भी संदिग्ध है।

बाराबंकी प्रेस क्लब चुनाव में अखिलेश अध्यक्ष और कृष्ण कुमार महामंत्री निर्वाचित

बाराबंकी। आखिरकार शनिवार को बाराबंकी प्रेस क्लब का चुनाव सर्वसम्मति से जिला पंचायत सभागार में सम्पन्न हो गया। इस दौरान पत्रकारों ने अखिलेश ठाकुर को अध्यक्ष, रमेश वर्मा को वरिष्ठ उपाध्यक्ष तथा कृष्ण कुमार द्विवेदी राजू भैया को महामंत्री चुन लिया। उपाध्यक्ष पद के लिए सरफराज, ऑडीटर के लिए परवेज अहमद तथा कोषाध्यक्ष पद पर चन्द्रकांत मौर्या चुने गये। पत्रकारों ने सभी पदाधिकारियों को माला पहनाकर बधाई दी। 

झाबुआ में चिकित्सा-विमर्श : मीडिया को मेडिकल से क्या काम, सेहत से खेल रहे अस्पताल

झाबुआ : कंठ तक भ्रष्टाचार में डूबी देश की चिकित्सा व्यवस्था और उसके प्रति नितांत अगंभीर कारपोरेट मीडिया घरानों ने करोड़ो-करोड़ परेशानहाल लोगों से अपनी चिंताएं पूरी तरह हटा ली हैं। संसाधनहीन लोगों और गरीबों के प्रति जैसी उदासीनता सरकारी और प्राइवेट चिकित्सा संस्थान बरत रहे हैं, वही हाल खुद को चौथा खंभा कहने वाला मीडिया का भी है। प्रायः लगता है कि जैसे, देश की पूरी चिकित्सा व्यवस्था पैसे के भूखे इन गिरोहबाजों के चंगुल में फंस गई है। मीडिया घराने चिकित्सा क्षेत्र के विज्ञापनों को लेकर जितने आकुल-व्याकुल दिखते हैं, काश उतना आग्रह परेशान और असहाय मरीजों की मुश्किलों पर भी होता।  

कभी उमा तो कभी शिवराज-सुषमा के पैर पड़े सीहोर का महाचाटुकार पत्रकार

सीहोर (म.प्र.) : हाल ही में राज्य सरकार से सम्मानित एक पत्रकार ने केंद्रीय मंत्री उमा भारती के पैर पड़ कर बोले कि दीदी आपके आशीर्वाद से मुझे मध्य प्रदेश सरकार ने सराहा है। ये पत्रकार सुषमा स्वराज या शिवराज सिंह चौहान के भी इस क्षेत्र में आने पर इसी तरह की शर्मिंदा करने वाली हरकतें करता रहता है। वे जब तक क्षेत्र में रहेंगे, उनके आगे-पीछे घूमता रहेगा। 

रियल स्टेट : कानपुर प्रेस क्लब के पत्रकार और सपा नेताओं के संरक्षण में करोड़ों का घोटाला

कानपुर (उ.प्र.) : समाजवादी पार्टी के कुछ नेताओं के संरक्षण में कानपुर रियल स्टेट में करोड़ों रुपए के घोटाले की खबर है। पीड़ित के अनुसार कानपुर प्रेस क्लब के नामी पदाधिकारी भी इस घोटाले में शामिल हैं। ‘हैप्पी होम्स इंफ्रा डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड’ के माध्यम से जालसाजी कर लोगों को जम कर चपत लगाई है। अब शिकार हुए लोग दर-दर भटक रहे हैं। पीड़ितों में महिला सब इंस्पेक्टर उज्जवला गुप्ता, गिरीश कुलश्रेष्ठ, रितेश अग्रवाल, शिरीष सिंह, तुषार, मोईन लारी, अंकित सिंह आदि बताए गए हैं। मामले में सत्ता पक्ष के बड़े नेताओं का नाम आने से पुलिस का रवैया ढुलमुल बना हुआ है। डीएम, कमिश्नर, आईजी, डीआईजी तक ने मामला संज्ञान में आने के बाद चुप्पी साध रखी है। मामले का खुलासा एस.आर.न्यूज़ द्वारा सोशल मीडिया में किये जाने के बाद एक पीड़ित को तो उसके बच्चों के अपहरण तक की धमकी दी गई है। 

कानपुर प्रेस क्लब की करतूतों का महामंत्री ने किया खुलासा

कानपुर प्रेस क्लब के फर्ज़ीवाड़ा प्रकरण में क्लब के महामंत्री अवनीश दीक्षित द्वारा एस.आर.न्यूज़ के मुख्य प्रबन्ध सम्पादक बलवन्त के शिकायती पत्र पर जवाब देने के लिए डिप्टी रजिस्ट्रार कार्यालय पहुंचे। उन्होंने डिप्टी रजिस्ट्रार को अपने जवाब सौंप दिया, जिसकी एक कॉपी एस.आर.न्यूज़ के प्रतिनिधि बृजेन्द्र कुमार मिश्र को भी दी गयी। 

इतनी बड़ी कॉरपोरेट जालसाज़ी के आरोपियों में टाइम्‍स ऑफ इंडिया समूह के मालिक समीर जैन भी

कोई भी कहानी कभी भी खत्‍म नहीं होती। बस, हम उसका पीछा करना छोड़ देते हैं। पचास साल पुरानी एक लंबी और जटिल कहानी से मेरी मुलाकात दस साल पहले 2005 में हुई थी जिसका नायक उस वक्‍त 84 साल का था। निर्मलजीत सिंह हूण नाम के इस एनआरआइ के इर्द-गिर्द मुकदमों का जाल था। एक ज़माने में कॉरपोरेट जगत पर राज करने वाले शख्‍स को इस देश के कारोबारियों, पुलिस और न्‍याय व्‍यवस्‍था ने पंगु बनाकर छोड़ दिया था। फिर इस शख्‍स ने इस देश की न्‍याय प्रणाली का परदाफाश करने को अपना मिशन बना लिया। उसके मिशन में से एकाध कहानियां हमने भी उठाकर 2005 में ‘सीनियर इंडिया’ में प्रकाशित की थीं, जिसके बाद प्रतिशोध की कार्रवाई में संपादक आलोक तोमर समेत प्रकाशक और मालिक सबको जेल हो गई। पत्रिका बंद हो गई, आलोकजी गुज़र गए, हूण से हमारा संपर्क टूट गया, लेकिन उनका मिशन जारी रहा।

आरा शहर की एक लड़की दो साल तक बहेलिए पत्रकार की बाहों में

जिंदगी के कैसे-कैसे रंग दिखाती है यह कमबख्त फेसबुक। अभी थोड़ी देर पहले विदेश में रहने वाले फेसबुक मित्र राजीव जजवालिया का संदेशा आया। कैसे आरा शहर की एक लड़की अपने सपनों को पूरा करने के वास्ते शहर का रुख करती है। महुआ टीवी में नौकरी मिलती है..ख्वाबों को पर लग जाते हैं..। उगते परों को पहचान शातिर पत्रकार करीब आता है..दोस्त बन सहलाता है। फिर ले उड़ता है। दो साल तक यह लड़की बहेलिए पत्रकार की बाहों में झूलती हुई कुछेक भोजपुरी फिल्मों में छोटे मोटे काम भी करती है। रंगीन दुनिया में अपने वजूद को तलाशती हुई बेफिक्र रहती है..क्योंकि हमदर्द बहेलिया जो साथ था.. 

अब दारूबाज करते हैं दैनिक जागरण में भविष्‍य का फैसला

चौथे स्‍तंभ का यह कलंक है या कुछ और…अब कुछ दारूबाज मिल कर करते हैं दैनिक जागरण में संपादकीय विभाग के कर्मचारियों के भविष्‍य का फैसला। पिछले एक साल का रिकार्ड देखें तो जिन लोगों को प्रमोशन या इंक्रीमेंट मिला है, उनमें अधिकतर दारूबाज हैं, जो अपने सरगना के लिए शाम को दारू की व्‍यवस्‍था करते हैं। दारू की इस व्‍यवस्‍था के बदले में उन्‍हें मोटी तनख्‍वाह मिलती है। काम के मामले में ये कितने काबिल हैं, वह बात किसी से छिपी नहीं हैं। पिछले दिनों इस गिरोह के सदस्‍यों ने एक सप्‍लीमेंट प्‍लान किया, जिसके लिए चवन्‍नी का विज्ञापन नहीं मिला। उससे मालिक संजय गुप्‍ता इन दारूबाजों से खासे खफा हैं।

अब पूरे देश में एक लाख की जमानत और इजाजत के बिना पत्रकारों के जेल में प्रवेश पर पाबंदी

केंद्र सरकार ने विशेष अनुमति के बगैर पत्रकारों और फिल्म निर्माताओं के जेल में प्रवेश पर पाबंदी लगा दी है। गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव कुमार आलोक ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पत्र लिखा है कि किसी भी पत्रकार, एनजीओ या कंपनी के कर्मचारी को शोध करने, डॉक्यूमेंटरी बनाने, लेख लिखने या साक्षात्कार लेने के लिए जेल में प्रवेश करने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए।

जी न्यूज के कैमरामैन ने सड़क हादसे में दम तोड़ा

पलारी (रायपुर) : बलौदाबाजार रोड पर ग्राम कुसमी से जरौद भाटापारा जा रहे जी न्यूज के कैमरामैन की बाइक, बस से टकरा गई। हादसे में कैमरा मैन की घटनास्थल पर ही मौत हो गई और उसके मौसी का बेटा व दोस्त गंभीर रूप से घायल हो गए। दुर्घटना के बाद ड्राइवर बस छोड़कर फरार हो गया। 

जस्टिस काटजू और टाइम्स ऑफ इंडिया को कोर्ट का नोटिस

इलाहाबाद की जिला अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मार्कण्डेय काटजू के खिलाफ क्रिमिनल केस की अर्जी मंजूर करते हुए उन्हें नोटिस जारी कर दो हफ्ते में जवाब तलब किया है। गाय के मांस संबंधी काटजू के बयान पर जस्टिस काटजू जवाब मांगते हुए कोर्ट ने टाइम्स ऑफ इंडिया को भी नोटिस जारी कर दिया है, क्योंकि उसने खबर प्रकाशित की थी। 

पुलिसकर्मी ने अपने पैंट की जीप खोल पत्रकार को जलील किया

केरल : यहां के एक पत्रकार से अभद्रता कर रहे पुलिस कर्मी ने अपने पैंट की ज़िप खोल दी. मीडिया में मामला सुर्खियों में आने पर पता चला कि पुलिसकर्मी एक्सिडेंट के बाद एक व्यक्ति को पीट रहे थे। पत्रकार मोहम्मद रफी ने उसे अपने कैमरे में कैद कर लिया। इस पुलिस वाले आग बबूला हो गए। 

सीएम शिवराज ने किया ‘सुबह सवेरे’ के नव-कलेवर अंक का विमोचन

भोपाल : मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को भोपाल में दैनिक ‘सुबह सवेरे’ के नव-कलेवर अंक का विमोचन किया। मुख्‍यमंत्री ने कहा कि कुछ सनसनीखेज बनाने की होड़ में रचनात्मक और सकारात्मक पत्रकारिता कहीं पीछे छूट गई है। जबकि रचनात्‍मक और सकारात्‍मक पत्रकारिता के माध्यम से ही देश, प्रदेश और समाज की सेवा की जा सकती है।

‘सुबह सवेरे’ के नव-कलेवर अंक का विमोचन करते मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह एवं अन्य

सेक्स रैकेट में पत्रकारों के लिप्त होने की जांच कराएंगे एसएसपी

रविवार को ग्रेटर नोएडा के चाई सेक्टर में चल रहे सेक्स रैकेट मामले में पुलिस और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के कुछ पत्रकारों की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। जिन दो इलेकट्रॉनिक मीडिया के पत्रकारों का नाम लिया जा रहा है, दलालों द्वारा दी गयी पूरी बाइट में कहीं भी उन पत्रकारों के रैकेट में शामिल होने की पुष्टि नहीं की गई है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा दी गई गाइड लाइंस के अनुसार पुलिस कभी भी किसी आरोपी की बाइट थाने में नहीं कराती, फिर भी पुलिस ने उनकी बाइट करायी, जिसमें पत्रकारों द्वारा बार-बार पूछे जाने पर भी दलालों ने पत्रकारों द्वारा संरक्षण की बात कहीं नहीं बोली। उसके बावजूद पुलिस ने दो इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकारों के नाम फर्द में डाल दिये। जबकि पुलिस को पहले जांच करनी चाहिए थी। 

आलोचना की संस्कृति खतरे में है : प्रो.मैनेजर पाण्डेय

लखनऊ : आज के भारत में लोकतंत्र और आलोचना की संस्कृति – यह विषय था लखनऊ में जन संस्कृति मंच के तत्वाधान में आयोजित संगोष्ठी का। अध्यक्षता की वरिष्ठ लेखक रवींद्र वर्मा ने। मुख्य वक्ता थे -वरिष्ठ आलोचक प्रो.मैनेजर पाण्डेय। प्रो.पाण्डेय ने इंगित किया कि पश्चिम में डेमोस अर्थात जनसाधारण शब्द का प्रयोग होता है। अब्राहम लिंकन ने कहा था जनता का शासन, जनता द्वारा और जनता के लिए। हमारे देश में केंद्र में सरकार है और अनेक राज्यों की सरकारें हैं। मालूम नहीं चलता कि कौन सी सरकार है जनता के लिए और जनता द्वारा? यहां पूंजीतंत्र है – अंबानी और अडानी का तंत्र है। दबंगों का राज्य है। वही नेता हैं, वही विधायक हैं। वही कानून बनाते हैं और खुद को कानून से ऊपर रखते हैं। 

लखनऊ में जनसंस्कृति मंच की संगोष्ठी को सम्बोधित करते प्रो.मैनेजर पांडेय

एसपी बिजनौर ने पहले तो विकलांग को थप्पड़ मारा, फिर रात के अंधेरे में हाथ जोड़कर माफी मांगी

बिजनौर :  जिले के एसपी गुंडा-माफिया तत्वों और राजनेताओं से तो डरते हैं, विकलांगों को बहादुरी दिखाते हैं, जो खुद ही मुकद्दर के मारे हुए हैं। एसपी ने वर्दी के जुनून में एक विकलांग को थप्पड़ तो जड़ दिया मगर जब पेंशन और राशन कार्ड मांगने पहुंच सभी विकलांग आमरण अनशन पर बैठक गए तो देर रात डीएम के साथ वहां पहुंचकर रात के अंधेरे में हाथ जोड़कर माफी मांग ली। 

जागरण के ‘रेडियो सिटी’ के खिलाफ टीवी टुडे का सौ करोड़ मानहानि का दावा

टीवी टुडे नेटवर्क ने अपने सलाहकार संपादक राजदीप सरदेसाई पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने मुंबई हाईकोर्ट में दैनिक जागरण के एफएम स्‍टेशन ‘रेडियो सिटी’ के खिलाफ 100 करोड़ रुपए की मानहानि का मुकदमा दर्ज करा दिया है। मुंबई हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति गौतम पटेल की पीठ में विचाराधीन मामले पर तात्कालिक निर्देश दिया गया है कि ‘रेडियो सिटी’ प्रबंधन उस टिप्पणी का दोबारा प्रसारण न करे। मामले पर 11 अगस्त को अंतिम सुनवाई होनी है। अदालत ने रेडियो सिटी को 28 जुलाई तक अपना जवाब दाखिल करने को कहा है। 

पत्रकार आयोग के गठन पर विचार करेगी बिहार सरकार

विक्रमगंज (रोहतास) : पत्रकारों की मांग पर बिहार सरकार ने नियमावली में संशोधन कर, पत्रकार आयोग के गठन और कैशलेस मेडिक्लेम दुर्घटना बीमा योजना लागू करने सहित 18 सूत्री मांगों को संज्ञान लिया है। बिहार वर्किंग जर्नलिस्ट एसोसिएशन के संयोजक एवं वरिष्ठ पत्रकार दुर्गेश किशोर तिवारी ने बताया कि सरकार के संज्ञान लेने से आंचलिक पत्रकारों में हर्ष व्याप्त है। –

मीडिया का दमन करने की कोशिश, केंद्रीय गृह मंत्रालय में अब पत्रकारों के प्रवेश पर पाबंदी

नई दिल्ली : केंद्रीय गृह मंत्रालय ने प्रवक्ता को छोड़कर अपने दूसरे अधिकारियों से पत्रकारों के मिलने पर प्रतिबंध लगा दिया है। अब मीडिया तक सूचनाएं पहुंचाने के दिशानिर्देश तय किए गए हैं. पत्रकारों ने विरोध जताते हुए कहा है कि यह मीडिया का दमन करने की कोशिश है.

यादव सिंह पीआईएल आदेश : आईटी छापा ‘मेकॉन-यादवसिंह’ ग्रुप पर था – हाईकोर्ट

लखनऊ : इलाहाबाद हाईकोर्ट के लखनऊ बेंच में चीफ जस्टिस डॉ डी वाई चंद्रचूड और जस्टिस एस एन शुक्ला की बेंच द्वारा एक्टिविस्ट डॉ नूतन ठाकुर की यादव सिंह के खिलाफ दायर पीआईएल के पारित आदेश से स्पष्ट होता है कि यादव सिंह के घर पर 27 और 28 नवम्बर 2014 का आयकर छापा मेकॉन-यादव सिंह ग्रुप पर हो रहे ओपरेशन का हिस्सा था.

 

लंदन के विश्व विख्यात अखबार ‘फाइनेंशियल टाइम्स’ को जापानी मीडिया ग्रुप ‘निक्की’ ने आठ हजार करोड़ में खरीदा

लंदन : आखिरकार, ब्रिटेन के 171 साल पुराने पब्लिशिंग हाउस पियर्सन के विश्व विख्यात अखबार फाइनेंशियल टाइम्स को जापानी मीडिया ग्रुप ‘निक्की’ ने 1.3 बिलियन डॉलर (8212 करोड़ रुपए) में खरीद लिया। इस डील में एफटी ग्रुप के ‘द इकोनॉमिस्ट’ मैगजीन या थेम्स नदी के किनारे बने लंदन हेडक्वार्टर्स के 50 परसेंट स्टैक साझा नहीं। निक्की ग्रुप के सीईओ और चेयरमैन सुनिओ किटा ने कहा कि हम फाइनेंशियल टाइम्स को लेकर गर्व महसूस कर रहे हैं। 

राघवेंद्र हत्याकांड : गूंजा भड़ास, मुंबई के पत्रकारों ने मुंह पर काली पट्टी बांधकर प्रशासन की बोलती बंद की

यशवंत भाई,

सहयोग के लिए आपका आभार. जिस पत्रकार की हत्या से मुंबई के मठाधीश बन बैठे पत्रकारों का दिल नहीं पसीजा, वहीं आंदोलन की ख़बर को प्रधानता देकर आपने इस आवाज़ को गली से निकाल कर दिल्ली तक पहुंचा दिया. आपके और हमारे अन्य पत्रकार भाइयों के समर्थन ने पत्रकार राघवेंद्र दूबे की आत्मा को सच्ची श्रद्धांजलि देने में मदद की है.

मुंबई में जर्नलिस्ट एक्शन कमेटी के झंडे तले मुंह पर काली पट्टी बांधकर राघवेंद्र दूबे हत्याकांड के खिलाफ मौन विरोध करते पत्रकार 

जी संगम : मैडम को खुश करने के लिए एक और पत्रकार की नौकरी खा गए वाशिंद्र मिश्रा

जी मीडिया का एक और चैनल एक बार फिर अपनी काली करतूतों की वजह से सुर्खियों में है। जी संगम के एडिटर वाशिंद्र मिश्रा बड़ी नैतिकता की बात करते हैं लेकिन वह अपने चेलो के साथ मिलकर गरीब पत्रकार की नौकरी खा जाते हैं। वह न्यूज रूम की एक मैडम को खुश करने के लिए एक और परिवार पर गाज गिरा गए।

एलजी साहब, ये तो हद हो गई !

नई दिल्ली में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनकी सरकार के साथ उप राज्यपाल यानि एलजी नजीब जंग के बीच चल रही जंग अब अत्यंत ही फूहड़ और अलोकतांत्रिक हो गई है। एक सामान्य बुद्धि का व्यक्ति भी यह बात समझ सकता है कि विशाल बहुमत से चुनी गई नई दिल्ली की केजरीवाल सरकार को हर तरह से केन्द्र की भाजपा सरकार द्वारा परेशान किया जा रहा है। 

भिवानी में गिर रहा अमर उजाला का सरकुलेशन, 18 महीने में ही सातवीं बार सर्वे

भिवानी (हरियाणा) : जिले में एक बार फिर अमर उजाला ने अपना सातवां सर्वे शुरू कर दिया है। केवल 18 महीनों हुए रिलांचिंग के, और सातवीं बार सर्वे कराया जारहा है। 

मजीठिया: मालिकों के हित में अपनी जिम्मेदारी कर्मचारियों पर थोप रहा श्रम विभाग

मन में मजीठिया और बाहर मक्कार तंत्र का ताना-बाना। अखबार कर्मचारी आज इसी स्थिति में फंसे हुए हैं। उन्हें इससे निकलने का कोई कारगर-प्रभावी रास्ता सूझ नहीं रहा है। या कहें कि सूझने नहीं दिया जा रहा है। आप छूटते ही सवाल दागने की मुद्रा में आएं उससे पहले ही मैं बता देना चाहता हूं कि वह है सरकार का श्रम विभाग। जी हां, श्रम विभाग! जिसे आपकी मदद करनी चाहिए, सहयोग करना चाहिए, सुझाव देने चाहिए, वही अपनी जिम्मेदारी  कर्मचारियों पर थोप रहा है, लाद रहा है। अपनी जिम्मेदारी से बच रहा है, पीछा छुड़ा रहा है।

दैनिक भास्कर का भागलपुर संस्करण भी लांच, इसके बाद मुजफ्फरपुर और गया की बारी

भागलपुर (बिहार) : दैनिक भास्कर के भागलपुर संस्करण का आज 23 जुलाई को विधिवत उद्घाटन हो गया । यह दैनिक भास्कर का पटना के बाद भागलपुर में दूसरा संस्करण है । 

गांधी जी के नग्न स्टैच्यू-विवाद की जांच सात माह बाद शुरू

ब्रिटिश प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल ने कभी महात्मा गांधी को धोती पहनने पर अर्धनग्न फकीर से संबोधित किया था. लेकिन गुजरात के गांधीनगर में जनवरी 2015 में आयोजित प्रवासी दिवस में गांधीजी की नग्न मूर्तियों के प्रदर्शन को लेकर जो विवाद उठा था अब उसकी जांच सात महीने के बाद प्रारंभ की जा रही है. गौरतलब है कि गांधीनगर के सेक्टर 7 में जांच के आदेश दिए गए हैं और यह जांच भी बार-बार एक सूचना कार्यकर्ता के फरियाद करने पर की जा रही है.

न्यूज चैनलों के जमाने में सिर्फ बयानों पर ही पत्रकारिता और राजनीति

आज-कल एक नई किस्म की राजनीति देश में नजर आ रही है। हालांकि पहले भी होती थी, लेकिन अब मीडिया और खासकर न्यूज चैनलों के जमाने में सिर्फ बयानों और आरोपों पर ही पत्रकारिता के साथ-साथ ये राजनीति भी चल रही है। कांग्रेस के राज में भाजपा भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए संसद से सड़क तक हल्ला मचाती रही और तबकी नेता प्रतिपक्ष श्रीमती सुषमा स्वराज से लेकर अरुण जेटली प्रधानमंत्री के साथ-साथ आरोपों में घिरे मंत्रियों से इस्तीफा मांगते रहे और सदन की कार्रवाई चलने ही नहीं दी और तब ये भी कहा था कि सदन को चलाने की जिम्मेदारी सत्ता पक्ष की ही है। 

हर बार नया अर्थ देते हैं उद्भ्रांत – जयप्रकाश मानस

विद्वान समीक्षक और लेखक डॉ. सुशील त्रिवेदी ने अपने प्रमुख समीक्षात्मक आलेख में कहा कि उद्भ्रांत हमारे समय के श्वेत-श्याम को पौराणिक मिथकों और प्रतीकों में कहने वाले बहुआयामी कवि हैं और उनकी कविताएँ भी इतनी बहुआयामी कि हर बार नया अर्थ देती हैं । प्रसंग था – रायपुर में संपन्न हिंदी के वरिष्ठ कवि उद्भ्रांत का एकल कविता पाठ, समीक्षा गोष्ठी और सम्मान समारोह ।

काव्यपाठ करते कवि उद्भ्रांत

गीतों की चांदनी में एक माहेश्वर तिवारी का होना

गीतों की चांदनी में एक माहेश्वर तिवारी का होना दूब से भी कोमल मन का होना है । गीतों की चांदनी में चंदन सी खुशबू का होना है । मह-मह महकती धरती और चम-चम चमकते आकाश का होना है । माहेश्वर तिवारी के गीतों की नदी में बहना जैसे अपने मन के साथ बहना है । इस नदी में प्रेम की पुरवाई की पुरकशिश लहरें हैं तो चुभते हुए हिलकोरे भी । भीतर के सन्नाटे भी और इन सन्नाटों में भी अकेलेपन की महागाथा का त्रास और उस की फांस भी । माहेश्वर के गीतों में जो सांघातिक तनाव रह-रह कर उपस्थित होता रहता है ।  निर्मल वर्मा के गद्य सा तनाव रोपते माहेश्वर के गीतों में नालंदा जलता रहता है ।  खरगोश सा सपना उछल कर भागता रहता है ।  घास का घराना कुचलता रहता है ।  बाहर का दर्द भीतर से छूता रहता है , कोयलों के बोल / पपीहे की रटन / पिता की खांसी / थकी मां के भजन बहने लगते हैं।  भाषा का छल , नदी का अकेलापन खुलने लगता है।  और इन्हीं सारी मुश्किलों और झंझावातों में किलकारी का एक दोना भी दिन के संसार में उपस्थित हो मन को थाम लेता है ।

गोरखपुर आइ-नेक्स्ट इंचार्ज ने अपनी शिकायत होने पर रिपोर्टर का ट्रांसफर कर दिया

आइ-नेक्स्ट गोरखपुर के सीनियर रिपोर्टर अभिषेकI सिंह का मैनेजमेंट ने जमशेदपुर ट्रांसफर कर दिया है। बताया जा रहा है कि ये ट्रांसफर आइ-नेक्स्ट इडिटोरियल इंचार्ज अश्विनी पांडेय ने किया है। अभिषेक सिंह ने संपादकीय प्रबंधन से अपने तबादले की वजह जाननी चाही है। पांडेय ने इस संबंध में उन्हें जानकारी देने से साफ मना कर दिया है। 

हरीश रावत निजी सचिव स्टिंग प्रकरण : बेशर्म ‘हिंदुस्तान’ की पत्रकारिता तो देखिए….

आज का हिंदुस्तान 23 जुलाई 2015, दिल्ली व देहरादून अंक, जिस किसी ने पढ़ा, उसे देखकर कोई अंधा भी बता सकता है कि कांग्रेस को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत की जरा भी चिंता नहीं। साथ ही, पूरे देश के अखबारों ने रावत के निजी सचिव की संटिग लीड खबर को जमकर छापा। हिंदुस्तान भारत का अकेला अखबार है जिसे इतनी महत्वपूर्ण खबर नहीं दिखाई दी। दिल्ली में अखबार ने लीड खबर में संसद के हंगामे की चर्चा के साथ चलते- चलते सीएम रावत के निजी सचिव के स्टिंग का हल्का जिक्र करके इतिश्री कर ली।

मीडिया का आपातकाल : उजाले के भीतर छिपा है गहन अंधेरा

पहले थोड़ा आपातकाल की यादें ताजा कर दूं। आपातकाल के दौरान एक कविता लिखी गई, ठेठ अवधी में- माई आन्‍हर बाबू आन्‍हर, हमे छोड़ कुल भाई आन्‍हर, केके केके दिया देखाईं, बिजली एस भौजाई आन्‍हर…. यह कविता यदि आप नहीं समझ पा रहे हैं तो इसका अर्थ भी बता देता हूं। मां अंधी है, पिता अंधे हैं। भाई भी अंधे हैं। किसको किसको दीपक दिखाऊं, बिजली की तरह चमक दमक वाली भाभी भी तो अंधी हैं। आपातकाल के दौरान इस कविता में निहित लक्षणा, व्‍यंजना मोटी बुद्धि के लोगों की समझ में नहीं आई और कवि का कुछ बुरा नहीं हुआ।

महाराष्‍ट्र के श्रम अधिकारियों को क्‍या वाकई मजीठिया संबंधी कोई आदेश-निर्देश नहीं

मैं एक आरटीआई कार्यकर्ता हूं और स्‍वतंत्र पत्रकारिता भी करता हूं। पिछले दिनों एक आरटीआई के माध्‍यम से जब मैंने मुंबई के लेबर कमिश्‍नर कार्यालय से ये जानना चाहा कि क्‍या मुंबई के एक दिग्‍गज प्रकाशन संस्‍थान मैग्‍ना पब्लिशिंग कंपनी में मजीठिया आयोग की‍ सिफारिशें लागू कर दी गयी हैं, जिसकी स्‍टारडस्‍ट अंग्रेजी, स्‍टारडस्‍ट हिंदी, सैवी हेल्‍थ एंड न्‍यूट्रिशनए सोसायटी, सोसायटी इंटीरियर, सिटाडेल जैसी आधा दर्जन से अधिक पत्रिकाएं प्रकाशित होती हैं, तो लेबर ऑफिसर महेश पाटिल ने मुझे आरटीआई का लिखित जवाब देने की बजाय आरटीआई पर दिये मेरे फोन नं पर मुझसे संपर्क कर मिलने के लिए अपने कार्यालय में बुलाया। वहां मौजूद उनके साथी अधिकारियों उप श्रम आयुक्‍त जाधवए सहायक श्रम आयुक्‍त भुजबल आदि ने हैरत भरे अंदाज में कहा कि ये मजीठिया वेज बोर्ड क्‍या है। 

पंजाब केसरी ग्रुप ने प्रधान मंत्री को भेंट किए राहत फंड के 2.41 करोड़

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 2.41 करोड़ रुपए का ड्राफ्ट देता हुआ पंजाब केसरी परिवार

दिल्ली : पिछले दिनों पंजाब केसरी ग्रुप के पाठकों की ओर से नेपाल के भूकंप पीड़ितों को प्राइम मिनिस्टर रिलीफ फंड के लिए भेजे गए 2.41 करोड़ रुपए का ड्राफ्ट प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को सौंपे गए। 

एएससीआई ने 114 बड़ी कंपनियों के विज्ञापन रोके

एडवर्टाइजिंग स्टैंडर्ड काउंसिल ऑफ इंडिया ने एक जांच में सौ से अधिक कंपनियों के विज्ञापनों के संबंध में शिकायत सही पाए जाने के बाद उन्हें संदिग्ध मानते हुए रोकने देने का फरमान जारी किया है।

‘ज़ी पुरवइया’ से एंकर सैयद हुसैन का इस्तीफ़ा

सैयद हुसैन ‘ज़ी पुरवइया’ में बतौर सीनियर एंकर कार्यरत थे। वह एंकर हेड का काम संभाल रहे थे। चैनल हेड शिवपूजन झा के तानाशाही रवैये से क्षुब्ध होकर उन्होंने इस्तीफ़ा दे दिया। सैयद हुसैन चैनल लांच होने के समय से ही जुड़े हुए थे। ज़ी पुरवइया का पहला बुलेटिन भी उन्होंने ही पढ़ा था। इससे पहले …

यूपी में एक और पत्रकार पुलिस की साजिश का शिकार, पीजीआई में भर्ती

सहारनपुर (उ.प्र.) : एसओ के खिलाफ खबर लिखना पत्रकार को इतना मंहगा पड़ गया कि उसे अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। दुष्कर्म का मुकदमा कायम होने के बावजूद थानाध्यक्ष ने आरोपी को छोड़ दिया था। पीड़ित पत्रकार की तहरीर पर पुलिस ने कार्रवाई नहीं की, उल्टे धमकाया कि नतीजा भुगतने के लिए तैयार रहना। पुलिस के इशारे पर कस्बे के एक नेता ने पत्रकार पर अटैक कर दिया। उनके दो दांत टूट गए, जबड़े में फ्रैक्चर हो गया, आंख घायल हो गई, खून की दो उल्टियां हुईं। वह पीजीआई में भर्ती हैं।  

नई शैली का नया अखबार ‘सुबह सवेरे’ जल्द ही भोपाल से

अपनी तरह की नई शैली की पत्रकारिता वाले हिंदी अख़बार ‘सुबह सवेरे’ की भोपाल में री-लॉन्चिंग की तैयारी है। 2003 से भोपाल से प्रकाशित हो रहे इस अख़बार को अब जाने-माने पत्रकार उमेश त्रिवेदी अपने बैनर पर पाठकों के सामने ला रहे हैं। 

मुंबई के बीयर बारों के नाश के लिए लड़ाई में उतरे एकजुट पत्रकार, सीएम फडणवीस ने दिया जांच का आदेश

मुंबई (महाराष्ट्र) : मीरा भाईंदर में पत्रकार राघवेंद्र दूबे की हत्या के प्रकरण को पत्रकारों के मुखपत्र भड़ास4 मीडिया में जगह देने के लिए आभार जताते हुए पत्रकार भरत मिश्रा ने बताया है कि इस मामले में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अपने अधिनस्थ प्रशासनिक उच्च-अधिकारियों को जांच के लिए सौंप दिया है. अफसोस है की स्थानीय मीरा भाईंदर महानगर पालिकe अब भी अवैध बीयर बार पर कारवाई नहीं कर रही । उल्टे मनपा में बने पत्रकार कक्ष को ही ताला जड़ने की मंगलवार को कोशिश की गई, जिससे पत्रकार की आवाज़ दब जाए. 

मजीठिया की आग : चौबीस घंटे बोलने वाला इलेक्ट्रानिक मीडिया भी खामोश

देश-विदेश की कई घटनाओं व समस्याओं पर आवाज बुलंद करने वाले प्रिंट मीडिया कर्मियों के खिलाफ पिछले एक साल से एक ऐसी घटना घटित हो रही है, जिसकी आवाज तक नहीं उठ पा रही है। यह घटना है प्रिंट मीडिया के कर्मियों के लिए घोषित मजीठिया वेज बोर्ड को सर्वोच्च अदालत के आदेशों के बावजूद लागू न किया जाना। इससे भी बड़ी घटना यह तब बन चुकी है, जबकि अपना हक मांगने वाले कई पत्रकार व गैर पत्रकार साथियों को अखबार मालिकों व उनके इशारों पर नाचने वाले प्रबंधन का शिकार होकर नौकरी से हाथ धोना पड़ा है। 

23 जुलाई जयंती पर विशेष : हे अमर बलिदानी तुझे शत-शत प्रणाम

हिंदुस्तान को फ़िरंगियों की ग़ुलामी से आज़ाद कराने के लिए इस धरती के सपूतों ने अपनी जान तक कुर्बान कर दी, लेकिन यह हमारे देश की बदक़िस्मती ही है कि राजनेताओं ने इस आज़ादी को केवल सत्ता हासिल करने का ज़रिया ही समझा. देश की अधिकांश आबादी आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रही है. एक तरफ़ मुट्ठी भर लोग गगनचुंबी इमारतों में बैठकर ऐश की ज़िंदगी जी रहे हैं, तो दूसरी तरफ़ लाखों लोग खुले आसमान के नीचे ज़िंदगी गुज़ारने के लिए मजबूर हैं. यह कैसी आज़ादी है, जहां जनता के साथ समान बर्ताव नहीं किया जाता है. महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आज़ाद समाजवादी शासन व्यवस्था के घोर समर्थक थे. उनके प्रति यही सच्ची श्रद्धांजलि होगी कि हम उनके सपने को साकार करें. राजकमल प्रकाशन ने चन्द्रशेखर आज़ाद नामक एक किताब प्रकाशित की है. यह किताब चंद्रशेखर आज़ाद के विश्‍वसनीय साथी विश्‍वनाथ वैशम्पायन की किताब अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद पर आधारित है. किताब के लेखक मलवेन्दर जीत सिंह व़ढैच और राजवन्ती मान ने चंद्रशेखर के जीवन वृतांत के साथ उनके युग की महान गाथा को बहुत ही करीने से पेश किया है. बेशक, चंद्रशेखर आज़ाद का बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत है.

सीरियल किलर रविंद्र जैसो को उन्हीं के अंदाज में क्रूरतम दंड मिले

अब तक करीब 35 बच्चों के साथ रेप और मर्डर की वारदात अंजाम देने वाला दिल्ली का सबसे बड़ा सीरियल किलर रविंद्र सनसनीखेज खुलासे कर रहा है। कैमरे के सामने रविंद्र अपना एक-एक जुर्म कबूल कर गया। वो बताता है कि शराब पीने के बाद उसे जाने क्या हो जाता था। वो नशे में चूर होकर बच्चों के साथ हैवानियत की हद तक गुजरता था।

झांसी में बवाल के बाद अखबार मालिक, समूह संपादक और संपादक गिरफ्तार

झांसी : सांध्य अखबार में संप्रदाय विशेष को चोट पहुंचाने वाली खबर छापने के आरोप में पुलिस ने मालिक, एडिटर समेत तीन को गिरफ्तार कर लिया। चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। अखबार से चूक ये हुई कि खबर के साथ दो धर्मों के लोगों की फोटो एक साथ इनसेट कर प्रकाशित कर दी गई। 

Veteran journalist Allah Bux died

Veteran journalist Allah Bux died . Mr. Bux who had been in the field of journalism for more than 50 years, serving for Daily Thanthi suffered breathlessness and died here around 2.30 p.m. He was 78 years old and he is survived by his wife Mumtaj and son Abul Kalam Azad, Daily Thanthi reporter. Bux entered the field of journalism at a very young age soon after completing the Pre University Course (PUC).

एएमयू के व्यापमं में 25 करोड़ का खेल, मीडिया खामोश, एक ही कमरे के 30 बच्चे बाजी मार ले गए

आज अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) के कुछ बच्चो के अभिभावकों का फोन आया। कहा, “आप अपनी पर वॉल ये मसला डाल दें.. हुक्मरानों की कान में तो जंग पड़ा हुआ है.. शायद आपकी चोट से निकल जाए..?” अरे…पता ही ना था कि अपन इतना मजबूत हो चुके हैं..तो सबसे पहले हर संघर्ष में साथ देने के लिए शुक्रिया मित्रों…और चाहूंगा कि सभी मित्र मुझ पर अपना नैतिक दबाव बनाएं रखें। 

फर्जी डिग्री विवाद में फंसे विधायक संगीत सोम

केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के फर्जी डिग्री विवाद में फंसे नेताओं की सूची में एक और नाम जुड़ गया है. यह नाम मुजफ्फरनगर दंगे से जुड़ा हुआ है. उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले की सरधना विधानसभा सीट से विधायक संगीत सोम पर आरोप लगा है कि वह हाईस्कूल फेल हैं, मगर हलफनामे में खुद को स्नातक बताया है.

मेरी चिंता बस इतनी, खत्‍म होते जा रहे हैं भाष्‍यम जैसे लोग

पता चला है कि भाष्‍यम श्रीनिवासन नहीं रहे। इनका जाना वैसे ही है जैसे कुछ साल पहले टंडनजी का जाना रहा या चाची का जाना। कौन थे ये शख्‍स? बनारस में बीएचयू से लेकर अस्‍सी चौराहे के बीच कभी भी और कहीं भी अचानक दिख जाने वाले भाष्‍यम उन सैकड़ों लोगों में एक थे जो बनारस को बनारस बनाते हैं। 

सोशल मीडिया पर टिप्‍पणी से अजमेर में पुलिस पर पथराव

अजमेर (राजस्थान) : जिले के रामगंज थाना इलाके में सोशल मीडिया पर आपत्तीजनक टिप्पणी के बाद दो सम्प्रदायों के बीच टकराव को रोकने के लिए पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पडा.