जागरण ग्रुप के नई दुनिया अखबार से होगी दो लाख तीस हजार रुपये की वसूली, देखें आदेश की कॉपी

जानेमाने रंगकर्मी एवं साहित्यकार नीलाभ अश्क चुपचाप अपने घर से लापता हो गए हैं। अपने साथ वह घर के ढेर सारे जरूरी सामान लैपटॉप, कंप्यूटर, फोन सेट आदि भी उठा ले गए हैं। उनके जानने वालों का कहना है कि वह अपनी भूमिका द्विवेदी से डर कर कहीं जा छिपे हैं। उन्हें अपनी जान जाने का अंदेशा रहा है। उनकी पत्नी का शुरू से ही उनकी धन-संपत्ति पर निगाह रही है। बाकी सब सरोकार तो एक दिखावा भर रहा है। गुमशुदगी के संबंध में पुलिस को भी अवगत करा दिया गया है। पुलिस मामले की छानबीन के साथ ही नीलाभ अश्क को ढूंढने में भी जुट गई है। 

अपनी पहुंच और ताकत की बदौलत अखिलेश दास गुप्‍ता भारतीय बैडमिंटन संघ के सचिव डा. विजय सिन्‍हा पर भारी पड़ गए

उत्‍तर प्रदेश बैडमिंटन एसोसिएशन में मचे घमासान ने जाहिर कर दिया है कि देश भर के खेल संस्‍थानों पर नेता-अधिकारी और धनपशुओं का कब्‍जा है। खेलों के नाम पर आने वाले धन का बंदरबांट तो यह लोग करते ही हैं, खिलाडि़यों का शारीरिक, मानसिक और आर्थिक शोषण भी करते हैं। खासकर महिला खिलाडि़यों का शोषण खेल संस्‍थानों में आम हो चुका है। फुटबालर सोना चौधरी के आरोप हों या केरल साईं सेंटर में आत्‍म हत्‍या करने वाली एथलीट अपर्णा रामचंद्रन, या फिर महिला क्रिकेट या हॉकी, तमाम खिलाड़ी इस खेल संघों के कर्ताधर्ताओं के शोषण की शिकार हुई हैं। प्‍लेयरों की शिकायतों की कोई सुनने वाला नहीं है। उत्‍तर प्रदेश बैडमिंटन एसोसिएशन से पैदा हुआ विवाद इस बात का गवाह है कि खेल संस्‍थाएं खेल को दरकिनार कर ‘गंदा खेल’ खेलने में जुटी हुई हैं। संभावना है कि आपसी विवाद के बाद अब इसके भीतर की गंदगी भी बाहर आएगी, लेकिन सवाल यह है कि नेता-अधिकारी और धनपशुओं के कब्‍जे से खेल संस्‍थानों को मुक्ति कब मिलेगी? आखिर कब ये संस्‍थाएं भाई-भतीजावाद और शोषण से खिलाडि़यों को मुक्‍त करेंगी? बड़ा सवाल है।

आईपीएस हिमांशु के निलंबन के बाद बोले अमिताभ ठाकुर- ‘सरकारी कर्मी को मिले घटनाक्रम पर टिप्पणी का अधिकार’

आईपीएस अफसर हिमांशु कुमार के निलंबन से उठ रहे हंगामे के बीच आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर ने अपने फेसबुक पर लिखा कि उनका व्यक्तिगत मत है कि बदलते समय में सरकारी कर्मी को भी विभिन्न विषयों और घटनाचक्र पर अपना मंतव्य देने का अधिकार मिलना चाहिए, जब तक वह मंतव्य देश की सुरक्षा, संरक्षा आदि से न जुड़ा हो अथवा अपने शासकीय पद की गोपनीयता भंग कर नहीं दिया जा रहा हो.  अमिताभ के अनुसार किसी स्तर पर किसी प्रकार के भ्रष्टाचार, सामान्य घटनाक्रम आदि पर सरकारी कर्मी को टिप्पणी करने का अधिकार देना पारदर्शिता, बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था और अभिव्यक्ति की आज़ादी के हित में है. उन्होंने कहा कि इस पर रोक लगाने विषयक नियम को उन्होंने हाई कोर्ट में चुनौती दी है जो अभी विचाराधीन है.

अखिलेश यादव लिफाफा प्रेमी पत्रकारों, भ्रष्ट अफसरों और चाटुकार नेताओं की गिरफ्त में थे!

Manoj Kumar Mishra : उत्तर प्रदेश के विधान सभा चुनावों से पूर्व चाटुकारों से घिरे अखिलेश यादव जनता की नब्ज और जमीनी हकीकत समझ ही नहीं पाये। एक के बाद एक रणनीतिक चूक करते हुए वो बार बार ये हवाई दावे करते रहे कि “जनता अपना मन बना चुकी है” और अपने ही भ्रमजाल से बाहर नहीं निकल सके।

सहारा प्रबन्धन के खिलाफ जुलूस : सहारा टॉवर, सहारा शहर और ओपी श्रीवास्तव के घर के सामने हुआ प्रदर्शन

लखनऊ। सहारा प्रबन्धन के खिलाफ आज उत्पीड़ित और शोषित सैकड़ों कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर विरोध रैली निकालकर सहारा टावर कपूरथला, सहारा शहर और वायरलेस चैराहा स्थित ओ0पी0 श्रीवास्तव के आवास के समक्ष जोरदार प्रदर्शन किया। सहारियन कामगार संगठन उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष ऋषि कुमार त्रिवेदी के नेतृत्व में सहारा स्टेट जानकीपुरम से सैकड़ों की संख्या में कर्मियों की शुरू हुयी विरोध रैली जैसे ही कपूरथला स्थित सहारा कार्पोरेट कार्यालय पहंची, जोरदार प्रदर्शन शुरू कर दिया गया। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान सहारा कार्यालय में मौजूद अन्य सभी कर्मी भी बाहर निकल आये और प्रदर्शनकारियों के साथ प्रबन्धन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी।

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अब शिवपाल पड़े अखिलेश पर भारी, कइयों को पार्टी से खदेड़ा

अजय कुमार, लखनऊ

समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव के तेवर लगातार तीखे होते जा रहे हैं। ‘शिव’ के तांडव ने पार्टी के भीतर और बाहर खलबली मचा दी है। रविवार को एमएलसी और प्रो. रामगोपाल यादव के भांजे आरविंद यादव को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया गया, तो दूसरे ही दिन एक ही झटके में सपा से उन सात नेताओं को निष्कासित कर दिया गया, जिन पर किसी न किसी बड़े नेता का हाथ था। इतने बढ़े स्तर पर निष्कासन की कार्रवाई करके शिवपाल ने जता दिया है कि वह अपनी मर्जी के मालिक हैं।

प्रियंका टिक्कू को गद्दी पर बिठाकर पीटीआई की सत्ता अपने हाथ में रखना चाहते हैं एमके राज़दान!

यशवंतजी
नमस्कार,

आशा करती हूँ आप कुशल होंगे. Bhadas4media पर प्रकाशित PTI की एक स्टोरी पढ़ी. काफी सटीक थी, पर ये पूरी कहानी नहीं है. पूरी कहानी कुछ और है बल्कि यहां ये कहना गलत नहीं होगा कि समझिए एक तरह से PTI की कब्र खोदी जा रही है और उसे सुपुर्दे खाक प्रियंका टिक्कू ही करेंगी. दरअसल प्रियंका टिक्कू पीटीआई के सीईओ और एडिटर इन चीफ एम के राज़दान की बहुत ख़ास हैं और ये कोई गुप्त बात भी नहीं है. राज़दान साहब पीटीआई को अपनी जागीर समझते हैं और जब पीटीआई बोर्ड ने उनको बाहर का रास्ता दिखा दिया तो वे प्रियंका टिक्कू को वहां बिठाना चाहते है. ये बात पीटीआई में सबको पता है पर अपनी नौकरी किसको प्यारी नहीं होती. मैं ये सब आपको इसलिए लिख पा रही हूँ क्योंकि मैं वहां से अब इस्तीफ़ा दे चुकी हूं.

गूंगी आकाशवाणी से प्रशिक्षुओं में निराशा

आकाशवाणी की संवादहीनता के रवैये से प्रशिक्षु पत्रकारों में काफ़ी निराशा है। नाराज प्रशिक्षुओं ने कहा है कि इसकी शिकायत सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर से कर दी गयी है और अब तक की पूरी सिलसिलेवार जानकारी उन तक पहुंचा दी गयी है। प्रशिक्षुओं का आरोप है कि प्रसार भारती के आदेश के बावजूद भी आकाशवाणी उनको इंटर्नशिप के लिए अपने यहां नियुक्ति नहीं दे रहा है जबकि उनके ही साथ के अन्य प्रशिक्षु जिन्हें प्रसार भारती ने दूरदर्शन के लिये चयनित किया था उनकी नियुक्ति हो गयी है और उनको पारिश्रमिक भी मिलना शुरू हो गया है जबकि आकाशवाणी अपनी निरंकुशता के कारण अब तक नियुक्ति नहीं दे सका है। बल्कि उल्टे संवादहीनता की स्थिति को कायम कर मामले को छिपाने की साज़िश रच रहा है। उन्होने कहा कि इसकी शिकायत सम्बन्धित मंत्रालय से कर दी गयी है।

दीपक शर्मा स्टिंग मुकदमा प्रकरण : आज़म खान को हाईकोर्ट में मुंह की खानी पड़ी

इलाहबाद: पत्रकारों पर मुक़दमे ठोंकने में माहिर यू पी के मुग़ले आज़म मंत्री आज़म खान को आज इलाहबाद हाई कोर्ट में मुंह की खानी पड़ी। आजतक के पत्रकारों पर चार चार आपराधिक मुक़दमे दर्ज़ करवा कर आज़म खान दीपक शर्मा सहित कई बड़े पत्रकारों को जेल भेजना चाह रहे थे। ये मुक़दमे १० पुलिस अफसरों के ज़रिये आज़म खान के गोपनीय मौखिक आदेश पर दर्ज़ किये गए थे।  मंगलवार को इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज जस्टिस बी के नारायण और जस्टिस विजय लक्ष्मी ने यूपी पुलिस को अंतरिम आदेश दिए की वो मुज़फ्फरनगर दंगो में दिखाए गए ऑपरेशन दंगे को लेकर दर्ज़ मुकदमे में आजतक के किसी भी पत्रकार को गिरफ्तार नही करेंगी।

यूपी के पत्रकारों ने अपने खानपान समारोह के लिए इकट्ठा पैसा बीमार पत्रकार को दे दिया

सभी मान्यता प्राप्त साथियों,

एक परंपरा इस बार टूट गई है। चुनाव में आपके 100 रुपए के आर्थिक अंशदान से एकत्र हुए फंड से इस बार नव निर्वाचित समिति आपके सम्मान में लंच का आयोजन नहीं कर सकेगी। साथ मिल बैठकर खाना फिर कभी किसी और मौके पर निश्चित ही होगा। लेकिन इस बार समिति के समक्ष दो विकल्प थे। एक तरफ चुनावी फंड से बचे तकरीबन 30 हजार रुपए से लंच के आयोजन तो दूसरी तरफ हम सब के साथी, पूर्व में मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के सदस्य रहे सुरेंद्र सिंह व उनके परिवार की मदद का विकल्प।

अनिल अंबानी ने TOI पर ठोका 5 हजार करोड़ की मानहानि का मुकदमा

अनिल अंबानी ने टाइम्स ऑफ इंडिया पर पाँच हज़ार करोड़ की मानहानि का दावा ठोका है। भारतीय मीडिया के इतिहास में अब तक किसी मीडिया ग्रुप पर लगाया गया मानहानि का ये सबसे बड़ा दावा है। सीएजी यानी कैग की ड्राफ्ट रिपोर्ट के आधार टाइम्स ऑफ इंडिया ने 18 अगस्त को अपने अखबार में कई लेख प्रकाशित किए थे। जिसमें अंबानी की बिजली कंपनी बीएसईस के खातों में कई तरह की गड़बड़ियाँ पाए जाने की बात कही गई थी।

60 से कम आयु में दिवंगत पत्रकारों के परिजनों को भी मिले 5 लाख रुपये की धनराशि

लखनऊ- उत्तर प्रदेश जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन के प्रान्तीय महामंत्री रमेश चन्द जैन ने प्रदेश के 60 वर्ष से कम आयु में दिवंगत होने वाले पत्रकारों के परिजनों को भी दिवंगत अधिवक्ताओं के परिजनों की भांति 5 लाख रुपये की धनराशि दिए जाने की सरकार से मांग की है।

मलेथा के मायने : मेरा गाँव-मेरी पहचान… 20 सितम्बर को ऋषिकेश पहुंचिए

उत्तराखंड राज्य बनने के साथ-साथ समय-समय पर उत्तराखंड के विकास को लेके अनेक रूप में आवाज़ें उठते रही है। अनेक तरीके से इस पर कार्यवाही करने का प्रयास किया गया है, चाहे वो गैर सरकारी संघठन हो या चाहे वो अलग-अलग राजनितिक संघठन हो जो  समय पर सूबे जो चलाने में योगदान देते रहे हो। चाहे वो विभिन्न क्षेत्र के बुद्धिजीवी वर्ग के लोग हो या फिर वो शासन में योगदान देने वाले अधिकारी।

हिन्दी के आयोजनों को चश्मा उतार कर देखें

मध्य प्रदेश भारत का ह्दयप्रदेश है और हिन्दी के एक बड़ी पट्टी वाले प्रदेश के रूप में हमारी पहचान है। हिन्दी हमारे प्रदेश की पहचान है और लगातार निर्विकार भाव से हिन्दी में कार्य व्यवहार की गूंज का ही परिणाम है कि चालीस साल बाद हिन्दी के विश्वस्तरीय आयोजन को लेकर जब भारत का चयन किया गया तो इस आयोजन के लिए मध्यप्रदेश को दसवें विश्व हिन्दी सम्मेलन की मेजबानी सौंपी गई। गंगा-जमुनी संस्कृति वाले भोपाल में हिन्दी का यह आयोजन न केवल भोपाल के लिए अपितु समूचे हिन्दी समाज के लिए गौरव की बात है।

वाह रे लोकसभा टीवी के शेखचिल्ली, ‘डायरिया स्पेशल’ से उड़ाई कलाम की मर्यादा की खिल्ली

लोकसभा टीवी ने मर्यादा की सारी सीमाएं लांघ कर एक बार फिर ये साबित कर दिया है कि यहां काम करने वाले लोग बेहद अनप्रोफेशनल तो हैं ही, उसके साथ ही असंवेदनशील भी हैं। कलाम के अचानक हुए निधन के बाद लोकसभा टीवी ने जो लाइन ली है उससे सारा देश शर्मिंदा है। सोशल मीडिया पर लोकसभा टीवी के उन कार्यक्रमों की तस्वीरें वाइरल हो रही हैं, जो कार्यक्रम लोकसभा टीवी भारत रत्न और पीपुल्स प्रेजिडेंट कलाम के निधन के बाद दिखा रहा था। हद तो तब हो गयी जब देर रात तक लोकसभा टीवी पर कलाम के निधन की खबर तक नहीं चली। देश के तमाम बड़े सम्पादकों ने लोकसभा टीवी की इस बेशर्म हरकत पर हैरानी जताई है। फेसबुक पर इण्डिया टीवी के संपादक अजीत अंजुम सहित कईं अखबारों और न्यूज़ चैनलों के अन्य संपादकों ने भी कलाम के दिल्ली में अंतिम दर्शन के कार्यक्रम के दौरान लोकसभा टीवी के ‘डायरिया स्पेशल’ प्रोग्राम दिखाए जाने की तस्वीरें पोस्ट की हैं।

खौफनाक : डर-डर कर दिन बसर कर रहे पाकिस्तान के मशहूर टीवी पत्रकार हामिद मीर

सवाल बनता है कि क्या कोई पत्रकार हमारे देश भी हमीद मीर की तरह अपनी हिफाजत को लेकर इस कदर अपनी जिंदगी में दो चार हो रहा है।, शायद नहीं। तो फिर क्यों नहीं? क्यों कि हमारे देश में जनपक्षधरता के मसले पर अपनी अलोकतांत्रिक हरकतों के लिए कुख्यात नेताओं वाली सरकारों और सिर्फ पैसे के भूखे मीडिया घरानों को चला रहे पत्रकारों में कोई फर्क नहीं दिखता है। हमीद मीर इन दिनो डरे हुए हैं। वह अपना डर ‘वाशिंगटन पोस्ट’ से साझा करते हैं। वह अपनी हिम्मत और बेबाकी के नाते पाकिस्तान के टीवी मीडिया में शीर्ष हैसियत रखते हैं। उन पर एक बार आतंकवादी अटैक हो चुका है। वह आईएसआई की चेतावनी के बावजूद पीछे नहीं हटे। अब उन्हें अपनी जिंदगी की हिफाजत सता रही है। हमारे देश के मीडिया पर तो बड़ा सीधा सा फार्मूला लागू होता है कि जब कर नहीं, तो डर किस बात का। यानी जब कोई हिम्मत का काम कर गुजरे, तभी तो….हमारे यहां तो पत्रकारों का एक बहुसंख्यक धड़ा मंत्रियों, अफसरों की दलाली में जुटा रहता है।  

मरीज के इलाज में वाराणसी का मैक्सवेल हास्पिटल दोषी करार

वाराणसी : अपर मुख्य चिकित्साधिकारी की जांच में पता चला है कि बक्सर निवासी मरीज ओंकारनाथ तिवारी के इलाज में मैक्सवेल अस्पताल के डॉक्टर ने लापरवाही बरती थी। इसकी शिकायत सोशल फाउंडेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स के अध्यक्ष ने चिकित्सा प्रशासन से गंभीर शिकायत की थी। उल्लेखनीय है मैक्सवेल के डॉक्टरों ने ज्यादा पैसे वसूलने के चक्कर में ओंकारनाथ का पैर काट दिया था। 

राजस्थान पत्रिका के रिपोर्टर ने चारागाह की जमीन को पत्नी के नाम आवंटित करा लिया

अजमेर (राजस्थान) : जिले के सावर क्षेत्र में राजस्थान पत्रिका के रिपोर्टर सत्यनारायण कहार पर लाखों रूपयों की बेशकीमती चारागाह भूमि को अपने नाम आवंटित करवाने का आरोप लगा है। सत्यनारायण पूर्व में ग्राम पंचायत सदारा का उपसरपंच रह चुका है। तब भी यह पत्रिका का ही रिपोर्टर था।

इंदौर में बारिश न होने पर सुमित्रा महाजन ने जपी माला

हमारे भारतीय समाज खासकर सवर्ण जातियों में अंध विश्वास की खाई दिन ब दिन गहराती जा रही है। जिस तरह से समाज में अंध विश्वास अपनी जड़ें जमा रहा है, उसे देखते हुए तो कह सकते हैं कि देश में वैज्ञानिक चेतना के विकास या प्रचार-प्रसार के लिए अब तक की गई तमाम कोशिशें लगभग बेमानी ही साबित हो रही हैं। जब राजनेता व नौकरशाही से जुड़े जागरूक समझे जाने वाले लोग भी अंध-मान्यताओं के हिसाब से अपनी दिनचर्या और कार्य व्यवहार तय करते दिखते हैं तो समझना और भी मुश्किल हो जाता है कि अभी तक विज्ञान के क्षेत्र में हमारी सभी उपलब्धियों का हासिल क्या रहा है। 

दलित अधिकारियों, कर्मचारियों की पदावनति के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट जायेगा आइपीएफ – दारापुरी

लखनऊ : पूर्व आईजी एवं आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट (आइपीएफ) के राष्ट्रीय प्रवक्ता एस. आर. दारापुरी ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आरक्षण और परिणामी ज्येष्ठता के आधार पर सभी विभागों में पदोन्नति पाए दलित अधिकारियों और कर्मचारियों को पदावनत करने के फैसले पर गहरा दुःख व्यक्त किया है. उन्होंने कहा है कि इससे प्रदेश में …

हमीरपुर के बिंवार गांव में जो घटित हुआ, जान लीजिए

12वीं क्लास में पढ़ रही एक बेटी सुबह 7 बजे गावं में ही कोचिंग जा रही थी। उ. प्र. सरकार के दो रिश्तेदारों ने उसे सरेराह रोककर छींटाकसी की। कपड़े खीचे। बाल पकड़ कर खींचा। बेटी को तरह-तरह से बेइज्जत किया। पास में रहने वाली एक मुस्लिम महिला ने अपनी जान जोखिम में डाल कर बेटी को बचाया। वहां से छूट कर वो किसी तरह घर भागी। पिता और चाचा ने उसकी दुर्दशा देखी और उन गुंडों का पता करने निकल पड़े। उनके पीछे माँ भी उलाहना देने चल दी। इधर भीषण अपमान से आहत बेटी को कोई रास्ता न सूझा। उसने अपने ऊपर किरोसिन डाल कर आग लगा ली। पड़ोसी चिल्लाये, दौड़े तो आग बुझाई। माँ-बाप-चाचा उलटे पांव लौटे और बेटी को लेकर थाने भागे। थानेदार ने वाकया और अभियुक्तों का नाम सुनते ही वहां से भगाया तो वो कोई साधन लेकर मौदहा तहसील और फिर हमीरपुर जिला अस्पताल पहुंचे। जिला अस्पताल के गेट पर पहुंचते पहुंचते बेटी ने दम तोड़ दिया। 

सोशल मीडिया में भी जातिवाद का जहर

शुक्र है कि सोशल मीडिया का सरकारीकरण नहीं हुआ है। इस कारण वहां आरक्षण भी नहीं है और जातिवाद भी लगभग नहीं के बराबर है। अगर सोशल मीडिया सरकारी होता तो कुछ नेता अवश्य मांग करते कि फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन आदि में आरक्षण किया जाए। ऐसी व्यवस्था हो कि निश्चित प्रतिशत लाइक आरक्षित कोटे के हो ही। यह भी होता कि अकाउंट शुरू करने के पहले किसी राजपत्रित अधिकारी से प्रमाणित प्रमाण-पत्र की प्रतिलिपि नत्थी करनी पड़ती कि आप किस जाति के हो। 

पंजाब में आतंकी अटैक के लाइव टीवी प्रसारण पर सूचना मंत्रालय ने दी कार्रवाई की चेतावनी

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने न्यूज और करेंट अफेयर्स चैनलों को आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन की कवरेज के संबंध में जारी एक तात्कालिक हिदायत में कहा है कि आज पंजाब के गुरदासपुर में आतंकवाद विरोधी अभियान का कुछ न्यूज और करेंट अफेयर्स चैनलों ने प्रसारण किया। यह प्रसारण वहां नियुक्त अधिकारी के अनुमति के बिना उस समय प्रसारित किया गया, जब ऑपरेशन उस समय चल रहा था।   

शावकों की मौत की खबर मीडिया में लीक करने पर लॉयन सफारी के चौकीदार को डंडों से पीटा

इटावा (उ.प्र.) : पहले शेर-शेरनी की मौत के बाद अब चार शावकों की जन्म के बाद ही मौत से खिसियाए लॉयन सफारी प्रशासन को लोगों ने मुख्यमंत्री से शिकायत और यहां की खबरें लीक करने का आरोप लगा चौकीदार को जमकर पीट दिया। 

प्रेस काउंसिल अध्यक्ष ने कहा – पत्रकारों पर हमला संज्ञेय अपराध, पांच साल सजा होनी चाहिए

दिल्ली : प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन न्‍यायमूर्ति सीके प्रसाद ने कहा है कि आंकड़ों के हिसाब से पत्रकारों पर हमले की घटनाएं बढ़ी नहीं हैं। पीसीआई की एक उप समिति ने इस तरह की धममियों से निपटने के लिए कानून संबंधी अपनी सिफारिशें दे दी हैं। पत्रकार पर उसके काम को लेकर किया गया हमला काफी गंभीर मामला है। इसे संज्ञेय अपराध की श्रेणी में लाया जाना चाहिए। हमने इस अपराध के लिए पांच साल की सजा की सिफारिश की है। उन्होंने कहा कि इलेक्‍ट्रॉनिक मीडिया को भी पीसीआई के तहत लाया जाना चाहिए।

एबीपी के अनोखे शो ‘प्रेस कांफ्रेस’ में गूंजा केजरीवाल का ‘ठुल्ला’

एबीपी न्यूज ने नया शो प्रेस कांफ्रेंस ने शुरू किया है जो हर शनिवार रात 8 बजे, रविवार सुबह 10 बजे और रात में 8 बजे प्रसारित किया जाता है. एबीपी न्यूज के पहले शो में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शिरकत की और खुलकर सारे सवालों का जवाब दिया. ये देश का इकलौता पहला शो है जिसमें 12 वरिष्ठ पत्रकार शामिल हैं जो हर गेस्ट से ये सवाल करेंगे. प्रेस कांफ्रेंस शो के एंकर वरिष्ठ पत्रकार दिबांग हैं.

एफएम रेडियो की नीलामी में रेड एफएम को भाग लेने की हाईकोर्ट से मंजूरी

रेड एफएम को दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक बड़ी राहत दी और केंद्र सरकार के 15 जुलाई के उस आदेश को रद्द कर दिया जिसमें इस रेडियो चैनल को सुरक्षा संबंधी मंजूरी देने से इनकार कर दिया गया था और एफएम नीलामी के तीसरे चरण में रेड एफएम के भाग लेने के आवेदन को भी रद्द कर दिया गया था।

सीकुराज भारद्वाज को इंसाफ दिलाने के लिए पटना में कैंडिल मार्च

पटना: जस्टिस फॉर सीकुराज भारद्वाज फोरम ने गत दिवस शहीद सीकुराज भारद्वाज के इन्साफ की मांग को लेकर पटना के कारगिल चौक से डाक बंगला चौराहे तक पद यात्रा, कैंडल मार्च निकाला। 

क्या राजनीति का अर्थ केवल भूमाफिया, चोर- उच्चकों और फर्जी डिग्री धारकों से है!

आज जब मैं अपनी स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति पर आये मित्रों के मत पर अपनी सफाई पेश कर रहा हूँ, तो कबीर की याद आ रही है और ” झीनी चादर ” अपने जीवन में ओढ़ने वाले सभी मित्रों को नमन कर सफाई देने का मन है। मैंने ३४ साल की नौकरी की है तथा इस का मतलब यह नहीं कि मैंने इतनी लम्बी सेवा घुटन या विवशता के साथ की। यथा शक्ति, मनोयोग से जिन पदों पर रहा, काम किया।