‘नवभारत’ के ‘मुंबई प्लस’ ने आज खूब जग हंसाई कराई

मुंबई : यहां से प्रकाशित ‘नवभारत’ समाचार पत्र में शहर की खबरें अलग से चार पेज ‘मुंबई प्लस’ के नाम से प्रकाशित होती हैं। आज 27 जुलाई के ‘मुंबई प्लस’ पूल आउट के पहले पेज की खबरों को ही पेज नं. 3 पर रिपीट कर छाप दिया। माना जा रहा है कि अखबार प्रबंधन और संपादकीय विभाग की किसी बहुत बड़ी चूक के कारण ऐसा हुआ है। इससे अखबार की खूब जगहंसाई हुई है। पेज इस प्रकार हैं – 

नवभारत के मुंबई प्लस का पेज-1

मौजू मीडिया : ‘बसंती इन कुत्तों के आगे मत नाचना ! ‘

  ‘शोले’ के इस कालजयी डायलॉग से शायद ही कोई अंजान हो! फ़िल्म में नायक धर्मेन्द्र का ये संवाद सम्बोधित तो था नायिका हेमामालिनी के लिए लेकिन इंगित था खलनायक गब्बर यानी अमज़द ख़ान और उसके गुर्गों के लिए…! ये संवाद आज भी बेहद मौजू है क्योंकि इसमें नायिका की जिस सुचिता (purity) का वास्ता दिया गया है वो सामाजिक बुराइयों के आगे घुटने नहीं टेकने का है!

अमिताभ को घेरने में डीजीपी, डीआईजी, एसएसपी का हाथ

लखनऊ : सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. नूतन ठाकुर ने अपने पति आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर के खिलाफ गाजियाबाद की एक महिला द्वारा बलात्कार का एफआईआर लिखवाने में बड़े पुलिस अफसरों की साफ़ मिलीभगत का आरोप लगाया है। कहा है कि डीजीपी, डीआईजी और एसएसपी की यह असामान्य तत्परता और पुलिस द्वारा इस तरह फूहड़ तरीके से धारा 420 लगाना इस मामले में भारी ऊपरी दवाब को पूरी तरह स्थापित करता है।

घायल राष्ट्रीय पक्षी को सारनाथ पक्षी विहार में मिला आसरा

वाराणसी : चौबेपुर क्षेत्र के भंदहा कला (कैथी) गाँव स्थित टेलीफ़ोन एक्सचेंज के पास एक बगीचे में एक माह पूर्व एक मोरनी की चोंच के पास घाव हो गया था। मोरनी को स्थानीय निवासियों ने इलाज कराने के बाद छोड़ दिया। घाव के कारण उसकी एक आँख जाती रही , एक तरफ से न दिखाई  देने के कारण कुछ दिन बाद मोरनी सड़क पार करते समय किसी वाहन की चपेट में आ गयी। 

घायल मोरनी का इलाज कराते स्थानी पक्षीप्रेमी

म.प्र. : एक बार फिर सुर्खियों में सिविल सेवा परीक्षा विवाद

मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग द्बारा आयोजित होने वाली प्रतियोगी परीक्षाएं बिना किसी विवाद के संचालित हो जाएं, यह कई वर्षों से सम्भव नहीं हो पा रहा है। ताजा मामला प्रदेश की सिविल सेवा परीक्षा-2०14 की प्रारम्भिक परीक्षा का है। यह परीक्षा 9 मई 2०15 को सम्पन्न हुई जिसके परिणाम जुलाई माह में जारी हुए हैं। आयोग ने अपनी बेवसाइट पर विभिन्न कटेगरी के लिए ‘कटऑफ’ मार्क्स जारी किए हैं, जिसको लेकर प्रतियोगी परीक्षार्थियों में असंतोष है और उनका दावा है कि उन्होंने आयोग द्बारा घोषित ‘कटऑफ ’ मार्क्स से अधिक अंक हासिल किए हैं, लेकिन आयोग को इससे कोई लेना-देना नहीं है। 

समाचार पत्र वितरकों को मिलेगा दुर्घटना सहायता, पेंशन, स्वास्थ्य बीमा सेवाओं का लाभ

कानपुर : श्रमायुक्त शालिनी प्रसाद ने गत दिनो समाचार पत्र वितरकों को एक मीटिंग में बताया कि अब उनको भी केंद्र सरकार की दुर्घटना सहायता, पेंशन, स्वास्थ्य बीमा सेवाओं का लाभ मिलेगा। वितरकों ने इसके लिए अभियान चलाया था। कानपुर शहर में साढ़े तीन हजार से अधिक समाचार पत्र वितरक हैं।

 

कानपुर में समाचारपत्र वितरकों एवं पत्रकारों को योजना की शुरुआत की जानकारी देतीं श्रमायुक्त शालिनी प्रसाद 

करोड़ों अकेले बेबस लोगों का देश

देश में अभी भी पचास करोड़ से ज्यादा वोटर किसी भी राजनीति दल के सदस्य नहीं हैं। और इतनी बडी तादाद में होने के बावजूद यह सभी वोटर अपनी अपनी जगह अकेले हैं। नहीं ऐसा भी नहीं है कि बाकि तीस करोड़ वोटर जो देश के किसी ना किसी राजनीतिक दल के सदस्य हैं, वे अकेले नहीं है। दरअसल अकेले हर वोटर है। लेकिन एक एक वोट की ताकत मिलकर या कहे एकजुट होकर जब किसी राजनीतिक दल को सत्ता तक पहुंचा देती है तो वह राजनीतिक दल अकेले नहीं होता। उसके भीतर का संगठन एक होकर सत्ता चलाते हुये वोटरो को फिर अलग थलग कर देता है। यानी जनता की एकजुटता वोट के तौर पर नजर आये । और वोट की ताकत से जनता नहीं राजनीतिक दल मजबूत और एकजुट हो जाये । और इसे ही लोकतंत्र करार दिया जाये तो इससे बडा धोखा और क्या हो सकता है। क्योंकि राजनीतिक पार्टी को सत्ता या कहे ताकत जनता देती है। लेकिन ताकत का इस्तेमाल जनता को मजबूत या एकजूट करने की जगह राजनीतिक दल खुद को खुद को मजबूत करने के लिये करते हैं। एक वक्त काग्रेस ने यह काम वोटरों को बांट कर सियासी लाभ देने के नाम पर किया तो बीजेपी अपने सदस्य संख्या को ग्यारह करोड़ बताने से लेकर स्वयंसेवक होकर काम करने के नाम पर कर रही है । 

इतनी घटिया हरकत से भी बाज नहीं आ रहा घबराया हुआ जागरण प्रबंधन

जागरण कर्मियों की एकजुटता से घबराया हुआ प्रबंधन कितनी गिरी हुई हरकत कर सकता है। इसका एक सटीक उदाहरण हाल ही में सामने आया है। 

मजीठिया वेतनमान : दैनिक जागरण के मीडिया कर्मी भर रहे प्रपत्र-सी, आप क्‍यों रहें पीछे !

दैनिक जागरण के स्‍थायी, अनुबंधकर्मी और अंशकालिक मीडिया कर्मियों ने प्रपत्र-सी को भर लिया है और जो रह गए हैं, वह भी इन्‍हें जल्‍द ही भरने जा रहे हैं। ऐसे में अन्य अखबारों के मीडिया कर्मी पीछे क्‍यों रह रहे हैं। यदि किसी के पास प्रपत्र-सी नहीं है तो जल्‍द इसे साइट से डाउनलोड कर ले। नहीं तो जागरण के साथियों से संपर्क करे, वे मदद करेंगे। यदि जागरण छोड़ने के बाद किसी अन्‍य संस्‍थान में कार्य कर रहे हैं तो भी प्रपत्र-सी को भरने के लिए पुराने सहयोगियों से संपर्क कर सकते हैं।

मजीठिया वेतनमान : ये है दैनिक अमर उजाला का सैलरी ग्रेड

2010 – 407 करोड़ रुपये, 2011 – 477 करोड़ रुपये, 2012 – 526 करोड़ रुपये, 2013 – 544 करोड़ रुपये, 2014 – 640 करोड़ रुपये। साथियों, उपरोक्‍त आंकड़े देखकर आप समझ सकते हैं कि अमर उजाला कौन से ग्रेड का समाचारपत्र है। यह आंकड़े उस रिपोर्ट के हैं जो अमर उजाला ने सेबी को शेयर बाजार में सूचीबद्व होने के लिए जमा करवाए थे। आप अमर उजाला की वित्‍तीय रिपोर्ट सेबी से या आरटीआइ (RTI) के माध्‍यम से एमसीए (Ministry Of Corporate Affairs website-  http://www.mca.gov.in/) और इनकम टैक्‍स विभाग से भी मांग सकते हैं।

उत्तराखंड : एक भ्रष्ट अफसर का आखिरी वक्त तक गुणगान करता रहा बेशर्म मीडिया

उत्तराखण्ड के 15 साल बता रहे हैं कि उसे अपना समझने की हिमाकत न तो राज्य सत्ता ने की है और न ही नौकरशाहों ने। सब ने उसे खाला का घर बना दिया है। जहां, जब तक डट सकते हो, डटे रहो। एक मुख्य सचिव बी आर एस के नाम पर सूचना आयुक्त बन 5 साल का जुगाड़ कर लेता है, तब दूसरा आता है और फिर तीसरा, संघर्ष और शहादतों से लिए राज्य में ये तमाशा क्या है?

न्यूज़ एक्सप्रेस के मालिक इस पोस्ट को पढ़ रहे हों तो गुजारिश है, दुआएँ लो, बद्दुआएँ नहीं

भड़ास4मिडिया के माध्यम से मैं आज अपना ये दर्द बाँट रहा हूँ । ये दर्द मेरा ही नहीं बल्कि उन सभी दोस्तों का है, जो इस दर्द से गुजर चुके हैं । अगर न्यूज़ एक्सप्रेस के मालिक इस पोस्ट को पढ़ रहे हों तो उनसे मेरी गुजारिश है कि दुआएँ लो, बद दुआएँ नहीं । आखिर कब तक हिंदुस्तान में दिन रात भूके प्यासे भागदौड़ करने वाले न्यूज़ चैनल स्ट्रिंगरों का शोषण होता रहेगा । वो स्ट्रिंगर जो अपने परिवार को छोड़ पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ जान हथेली पर रख इस आस में चैनल पर खबरें भेजता है कि अपने परिवार का पालन पोषण कर सके।

जगजीत शर्मा ऑल इंडिया जर्नलिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोनीत

गुड़गांव : पत्रकारों के हक-हकूक के हितों की लड़ाई के लिए अस्तित्व में आए ऑल इंडिया जर्नलिस्ट एसोसिएशन की बैठक में गत दिनो जगजीत शर्मा को सर्व सम्मत्ति से अध्यक्ष मनोनीत किया गया। 

मजीठिया भाग-8A : क्यों चाहिए 44 महीने की नौकरी और 15 लाख रुपए एरियर

 मजीठिया वेतनमान के लिए पात्र पत्रकारों के ध्यानार्थ यहां एरियर राशि को सोदाहरण एक चार्ट के माध्यम से दर्शाया जा रहा है। इसका एकमात्र उद्देश्‍य है कि अभी तक जो पत्रकार इस गफलत में थे कि उन्हे तो इस संस्‍थान में आए हुए मात्र तीन-चार साल ही हुए हैं तो उनका एरियर बनेगा ही कितना या उनके नए वेतनमान में क्‍या अंतर आएगा। इस विस्तार से इस प्रकार जान सकते हैं – 

खून खौला देता है यह विज्ञापन, फुरसत मिले तो पढ़िएगा !

खबरों की सुर्खियां  ही इतिहास नहीं बताती, कभी-कभी विज्ञापन भी बता देते  है।  4-5 सेंटीमीटर में छपे विज्ञापन भी खून खौला देते हैं। जैसे यह ! न्यू फ्लोरिडा मेल, अमेरिका अखबार के 8 मार्च 1846 को छपे इस विज्ञापन पर भी नजर डालें। यह कहता  है कि 19 साल की एक सुंदर निग्रो गुलाम युवती को , जो गर्भावस्था के प्रारंभिक दौर में है, कोई चुरा ले गया है या वह  भाग गई है। उसे पकड़कर लानेवाले को पचास डॉलर का नकद इनाम दिया जाएगा।

ऐसे विज्ञापन आम थे अखबारों में 

मीडिया खामोश : मरीज लाचार, बाबा और डॉक्टर बने लुटेरे, मठ-मंदिर, अस्पताल हुए कसाईबाड़ा

देश के अस्पतालों में क्या हो रहा है, कैसे बाबाओं और डॉक्टरों द्वारा मरीजो को बेखौफ लूटा-निचोड़ा और गलत दवाएं देकर मौत के घाट उतारा जा रहा है, इस ओर न मेडिकल नियामक शीर्ष सरकारी संस्थाओं का ध्यान है, न देश-प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्रियों का। जब से इलाज के नाम पर लुटेरों को खुला छोड़ दिया गया हो। इसी तरह धर्मांधता का फायदा उठाने में जुटे तरह तरह के पाखंडी बाबाओं ने अंधेरगर्दी मचा रखी है। बड़ी-बड़ी आलीशान बिल्डिंगों में चल रहे अस्पताल और दवा इलाज के नाम पर बेखौफ तांडव के ठिकाने बने मठ-मंदिर देश में तो जो कर रहे, सो कर ही रहे, विदेशों तक झूठे प्रचार, अखबारों और चैनलों पर प्रकाशित-प्रसारित हो रहे विज्ञापनों की आड़ में ठगी अखाड़ों में तब्दील हो चुके हैं। 

मध्य प्रदेश में 15 अगस्त से पत्रकार स्वास्थ्य एवं दुर्घटना बीमा योजना

भोपाल : मध्यप्रदेश सरकार ने पत्रकारों के लिए दुर्घटना बीमा योजना लागू करने की घोषणा की है। प्रदेश के जनसंपर्क एवं ऊर्जा मंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने बताया है कि मध्यप्रदेश में पत्रकारों की सुरक्षा के लिए स्वास्थ्य और दुर्घटना बीमा योजना 15 अगस्त से लागू की जाएगी।  स्व. महेन्द्र चौधरी स्मृति राज्य-स्तरीय फोटो पत्रकारिता सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि इस वर्ष से राज्यस्तर के साथ-साथ आंचलिक फोटो पत्रकारिता को भी पुरस्कृत किया जायेगा।

महाराष्ट्र सरकार जल्द बनाएगी पत्रकार सुरक्षा कानून का प्रारूप

मुंबई : विधानपरिषद में विरोधी पक्ष नेता धनंजय मुंडे ने कहा कि पिछले तीन साल में राज्य भर में करीब 265 पत्रकारों पर हमले हुए। उन पर झूठे आरोप लगाकार मामले दर्ज किए जा रहे हैं। उनकी हत्या हो रही है। सरकार बिना देरी किए पत्रकारों की सुरक्षा के लिए कड़ा से कड़ा कानून बनाए।

राहुलजी, आपकी बातें भी हवा-हवाई, वजन लाइये जनाब, कब तक करेंगे जुमलेबाजी

सालों तक सत्ता में रहने वाली कांग्रेस को आज तक विपक्ष का रोल अदा करना नहीं आया है, दूसरी तरफ भाजपा आज भी सत्ता में होने के बावजूद विपक्ष की पार्टी लगती है। कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी गायब होने के बाद अचानक प्रकट होते हैं और भाषण से लेकर टीवी कैमरों के सामने जुमलेबाजी करते नजर आते हैं। अभी राहुल गांधी ने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि वे हवा में बातें करते हैं और उनकी बातों में वजन होना चाहिए। ललित गेट और व्यापमं के मुद्दे पर उन्होंने प्रधानमंत्री की चुप्पी पर भी सवाल उठाए मगर मोदीजी जहां इन मुद्दों पर चुप हैं, लेकिन उनकी पूरी पार्टी पलटवार करने में पीछे नहीं है। 

असिस्टेंट प्रोफेसर-प्रिंट मीडिया की नियुक्ति में मनमानी पर मंत्रालय ने किया जवाब तलब

भड़ास पर छपी खबर का असर : राष्ट्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संस्थान नई दिल्ली नई में गत 25 जून को हुए सहायक आचार्य प्रिंट मीडिया के चयन में मनमानी पर केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने यहां के निदेशक से जवाब तलब किया है। इस पद के लिए इंटरनल कैंडिडेट को विशेष लाभ देते हुए उसे स्क्रीनिंग एवं चयन सूची में प्रथम स्थान पर रखने एवं नियुक्ति सूची में प्रथम रैंक पर केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के सचिव ने स्पष्टीकरण मांगा है। इस पद के लिए पहले से ही संभावना जताई जा रही है कि संस्थान के निदेशक ने निजी लाभ के लिए ऐसे अभ्यर्थी का चयन कराया है जो ओबीसी श्रेणी की अर्हता पूरी नहीं करता है और उसकी शैक्षिक योग्यता भी संदिग्ध है।

बाराबंकी प्रेस क्लब चुनाव में अखिलेश अध्यक्ष और कृष्ण कुमार महामंत्री निर्वाचित

बाराबंकी। आखिरकार शनिवार को बाराबंकी प्रेस क्लब का चुनाव सर्वसम्मति से जिला पंचायत सभागार में सम्पन्न हो गया। इस दौरान पत्रकारों ने अखिलेश ठाकुर को अध्यक्ष, रमेश वर्मा को वरिष्ठ उपाध्यक्ष तथा कृष्ण कुमार द्विवेदी राजू भैया को महामंत्री चुन लिया। उपाध्यक्ष पद के लिए सरफराज, ऑडीटर के लिए परवेज अहमद तथा कोषाध्यक्ष पद पर चन्द्रकांत मौर्या चुने गये। पत्रकारों ने सभी पदाधिकारियों को माला पहनाकर बधाई दी। 

झाबुआ में चिकित्सा-विमर्श : मीडिया को मेडिकल से क्या काम, सेहत से खेल रहे अस्पताल

झाबुआ : कंठ तक भ्रष्टाचार में डूबी देश की चिकित्सा व्यवस्था और उसके प्रति नितांत अगंभीर कारपोरेट मीडिया घरानों ने करोड़ो-करोड़ परेशानहाल लोगों से अपनी चिंताएं पूरी तरह हटा ली हैं। संसाधनहीन लोगों और गरीबों के प्रति जैसी उदासीनता सरकारी और प्राइवेट चिकित्सा संस्थान बरत रहे हैं, वही हाल खुद को चौथा खंभा कहने वाला मीडिया का भी है। प्रायः लगता है कि जैसे, देश की पूरी चिकित्सा व्यवस्था पैसे के भूखे इन गिरोहबाजों के चंगुल में फंस गई है। मीडिया घराने चिकित्सा क्षेत्र के विज्ञापनों को लेकर जितने आकुल-व्याकुल दिखते हैं, काश उतना आग्रह परेशान और असहाय मरीजों की मुश्किलों पर भी होता।  

कभी उमा तो कभी शिवराज-सुषमा के पैर पड़े सीहोर का महाचाटुकार पत्रकार

सीहोर (म.प्र.) : हाल ही में राज्य सरकार से सम्मानित एक पत्रकार ने केंद्रीय मंत्री उमा भारती के पैर पड़ कर बोले कि दीदी आपके आशीर्वाद से मुझे मध्य प्रदेश सरकार ने सराहा है। ये पत्रकार सुषमा स्वराज या शिवराज सिंह चौहान के भी इस क्षेत्र में आने पर इसी तरह की शर्मिंदा करने वाली हरकतें करता रहता है। वे जब तक क्षेत्र में रहेंगे, उनके आगे-पीछे घूमता रहेगा। 

रियल स्टेट : कानपुर प्रेस क्लब के पत्रकार और सपा नेताओं के संरक्षण में करोड़ों का घोटाला

कानपुर (उ.प्र.) : समाजवादी पार्टी के कुछ नेताओं के संरक्षण में कानपुर रियल स्टेट में करोड़ों रुपए के घोटाले की खबर है। पीड़ित के अनुसार कानपुर प्रेस क्लब के नामी पदाधिकारी भी इस घोटाले में शामिल हैं। ‘हैप्पी होम्स इंफ्रा डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड’ के माध्यम से जालसाजी कर लोगों को जम कर चपत लगाई है। अब शिकार हुए लोग दर-दर भटक रहे हैं। पीड़ितों में महिला सब इंस्पेक्टर उज्जवला गुप्ता, गिरीश कुलश्रेष्ठ, रितेश अग्रवाल, शिरीष सिंह, तुषार, मोईन लारी, अंकित सिंह आदि बताए गए हैं। मामले में सत्ता पक्ष के बड़े नेताओं का नाम आने से पुलिस का रवैया ढुलमुल बना हुआ है। डीएम, कमिश्नर, आईजी, डीआईजी तक ने मामला संज्ञान में आने के बाद चुप्पी साध रखी है। मामले का खुलासा एस.आर.न्यूज़ द्वारा सोशल मीडिया में किये जाने के बाद एक पीड़ित को तो उसके बच्चों के अपहरण तक की धमकी दी गई है। 

कानपुर प्रेस क्लब की करतूतों का महामंत्री ने किया खुलासा

कानपुर प्रेस क्लब के फर्ज़ीवाड़ा प्रकरण में क्लब के महामंत्री अवनीश दीक्षित द्वारा एस.आर.न्यूज़ के मुख्य प्रबन्ध सम्पादक बलवन्त के शिकायती पत्र पर जवाब देने के लिए डिप्टी रजिस्ट्रार कार्यालय पहुंचे। उन्होंने डिप्टी रजिस्ट्रार को अपने जवाब सौंप दिया, जिसकी एक कॉपी एस.आर.न्यूज़ के प्रतिनिधि बृजेन्द्र कुमार मिश्र को भी दी गयी। 

इतनी बड़ी कॉरपोरेट जालसाज़ी के आरोपियों में टाइम्‍स ऑफ इंडिया समूह के मालिक समीर जैन भी

कोई भी कहानी कभी भी खत्‍म नहीं होती। बस, हम उसका पीछा करना छोड़ देते हैं। पचास साल पुरानी एक लंबी और जटिल कहानी से मेरी मुलाकात दस साल पहले 2005 में हुई थी जिसका नायक उस वक्‍त 84 साल का था। निर्मलजीत सिंह हूण नाम के इस एनआरआइ के इर्द-गिर्द मुकदमों का जाल था। एक ज़माने में कॉरपोरेट जगत पर राज करने वाले शख्‍स को इस देश के कारोबारियों, पुलिस और न्‍याय व्‍यवस्‍था ने पंगु बनाकर छोड़ दिया था। फिर इस शख्‍स ने इस देश की न्‍याय प्रणाली का परदाफाश करने को अपना मिशन बना लिया। उसके मिशन में से एकाध कहानियां हमने भी उठाकर 2005 में ‘सीनियर इंडिया’ में प्रकाशित की थीं, जिसके बाद प्रतिशोध की कार्रवाई में संपादक आलोक तोमर समेत प्रकाशक और मालिक सबको जेल हो गई। पत्रिका बंद हो गई, आलोकजी गुज़र गए, हूण से हमारा संपर्क टूट गया, लेकिन उनका मिशन जारी रहा।

आरा शहर की एक लड़की दो साल तक बहेलिए पत्रकार की बाहों में

जिंदगी के कैसे-कैसे रंग दिखाती है यह कमबख्त फेसबुक। अभी थोड़ी देर पहले विदेश में रहने वाले फेसबुक मित्र राजीव जजवालिया का संदेशा आया। कैसे आरा शहर की एक लड़की अपने सपनों को पूरा करने के वास्ते शहर का रुख करती है। महुआ टीवी में नौकरी मिलती है..ख्वाबों को पर लग जाते हैं..। उगते परों को पहचान शातिर पत्रकार करीब आता है..दोस्त बन सहलाता है। फिर ले उड़ता है। दो साल तक यह लड़की बहेलिए पत्रकार की बाहों में झूलती हुई कुछेक भोजपुरी फिल्मों में छोटे मोटे काम भी करती है। रंगीन दुनिया में अपने वजूद को तलाशती हुई बेफिक्र रहती है..क्योंकि हमदर्द बहेलिया जो साथ था.. 

अब दारूबाज करते हैं दैनिक जागरण में भविष्‍य का फैसला

चौथे स्‍तंभ का यह कलंक है या कुछ और…अब कुछ दारूबाज मिल कर करते हैं दैनिक जागरण में संपादकीय विभाग के कर्मचारियों के भविष्‍य का फैसला। पिछले एक साल का रिकार्ड देखें तो जिन लोगों को प्रमोशन या इंक्रीमेंट मिला है, उनमें अधिकतर दारूबाज हैं, जो अपने सरगना के लिए शाम को दारू की व्‍यवस्‍था करते हैं। दारू की इस व्‍यवस्‍था के बदले में उन्‍हें मोटी तनख्‍वाह मिलती है। काम के मामले में ये कितने काबिल हैं, वह बात किसी से छिपी नहीं हैं। पिछले दिनों इस गिरोह के सदस्‍यों ने एक सप्‍लीमेंट प्‍लान किया, जिसके लिए चवन्‍नी का विज्ञापन नहीं मिला। उससे मालिक संजय गुप्‍ता इन दारूबाजों से खासे खफा हैं।

अब पूरे देश में एक लाख की जमानत और इजाजत के बिना पत्रकारों के जेल में प्रवेश पर पाबंदी

केंद्र सरकार ने विशेष अनुमति के बगैर पत्रकारों और फिल्म निर्माताओं के जेल में प्रवेश पर पाबंदी लगा दी है। गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव कुमार आलोक ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पत्र लिखा है कि किसी भी पत्रकार, एनजीओ या कंपनी के कर्मचारी को शोध करने, डॉक्यूमेंटरी बनाने, लेख लिखने या साक्षात्कार लेने के लिए जेल में प्रवेश करने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए।

जी न्यूज के कैमरामैन ने सड़क हादसे में दम तोड़ा

पलारी (रायपुर) : बलौदाबाजार रोड पर ग्राम कुसमी से जरौद भाटापारा जा रहे जी न्यूज के कैमरामैन की बाइक, बस से टकरा गई। हादसे में कैमरा मैन की घटनास्थल पर ही मौत हो गई और उसके मौसी का बेटा व दोस्त गंभीर रूप से घायल हो गए। दुर्घटना के बाद ड्राइवर बस छोड़कर फरार हो गया।