मीडिया को कैलाश जैसों से मतलब नहीं वो तो आमिर-अमिताभ को महिमामंडित करता है जिनके पीछे करोड़ों का बाज़ार खड़ा है

बचपन में फिल्मों के प्रति दीवानगी के दौर में फिल्मी पत्र-पत्रिकाएं भी बड़े चाव से पढ़ी जाती थी। तब यह पढ़ कर बड़ी  हैरत होती थी कि फिल्मी पर्दे पर दस-बारह गुंडों से अकेले लड़ने वाले होरी वास्तव में वैसे नहीं है। इसी तरह दर्शकों को दांत पीसने पर मजबूर कर देने वाले खलनायक वास्तविक जिंदगी में बड़े ही नेक इंसान हैं। समाज के दूसरे क्षेत्र में भी यह नियम लागू होता है। कोई जरूरी नहीं कि दुनिया के सामने भल मन साहत का ढिंढोरा पीटने वाले सचमुच वैसे ही हों। वहीं काफी लोग चुपचाप बड़े कामों में लगे रहते हैं। बचपन बचाओ आंदोलन के लिए नोबल पुरस्कार पाने वाले कैलाश सत्यार्थी का मामला भी कुछ ऐसा ही प्रतीत होता है। ये कौन हैं… किस क्षेत्र से जुड़े हैं… किसलिए… वगैरह – वगैरह। ऐसे कई सवाल हवा में उछले जब कैलाश सत्यार्थी को नोबल पुरस्कार मिलने की घोषणा हुई। क्योंकि लोगों की इस बारे में जानकारी बहुत कम थी।

मजीठिया के लिए इधर-उधर भटकने से बेहतर है कि सीधे कोर्ट जाएं या फिर सुप्रीम कोर्ट और केन्द्रीय श्रम मंत्रालय में आरटीआई लगाएं

मजीठिया वेतनमान को लेकर पत्रकारों के लिए 10 नबंवर का दिन खास हो सकता है। इस दिन गुजरात हाईकोर्ट पत्रकारों के केस की अंतिम सुनवाई करने वाला है यदि इसी दिन फैसला आ जाता है तो मजीठिया वेतनमान को लेकर प्रेस मलिकों की आफत तो तय है। जाहिर है इस केस का आधार लेकर हर राज्य में पत्रकार हाईकोर्ट जा सकते। दरअसल लेबर कोर्ट पत्रकारों का केस यह कहकर लेने से मना करता है कि वेतन भुगतान अधिनियम के तहत हम 14 हजार वेतन तक के मामलों की सुनवाई कर सकते है उससे अधिक वेतन पाने वाले अधिकारिक वेतनमान की श्रेणी में आते है और हाईकोर्ट ही मामले की सुनवाई कर सकता है।

भारत में ग़ैर सरकारी संगठनों का उभार और कैलाश सत्यार्थी को नोबेल मिलना महज़ इत्तेफाक नहीं

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यह संभवतः सन 2005 की बात है, एक शाम मैं सहारा समय समाचार चैनल देख रहा था तो एक समाचार प्रसारित हुआ कि कैलाश सत्यार्थी का नाम नोबल पुरस्कार के लिए प्रस्तावित हुआ है। मुझे इस  बात पर आश्चर्य हुआ। मैं तब मध्य प्रदेश के धार जिले में था वहां से मैंने इस बात की पुष्टि करनी चाही। उन दिनों सहारा समय के विदिशा के पत्रकार बृजेन्द्र पांडे हुआ करते थे वहीँ से यह समाचार लगा था।  बृजेंद्र पांडे, मेरे और कैलाश के सहपाठी थे सन 1967-69 में विदिशा के हायर सेकेण्ड्री स्कूल में। बाद को कैलाश ने इंजीनियरिंग कॉलेज में एडमीशन ले लिया, मैंने और बृजेंद्र ने बीएससी में।

केपी गंगवार बने जर्नलिस्ट यूनियन ऑफ उत्तराखण्ड की रुद्रपुर इकाई के अध्यक्ष, गोपाल भारती महामंत्री

रुद्रपुर। जर्नलिस्ट यूनियन ऑफ उत्तराखण्ड की नगर ईकाई का गठन करते हुये यूनियन के जिलाध्यक्ष नारायण दत्त भट्ट ने के.पी. गंगवार को पुनः यूनियन का नगरध्यक्ष घोषित किया है। इसके अलावा गोपाल भारती को महामंत्री, अमन सिंह को कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

बंगलूरू के टीवी पत्रकार ने फांसी लगा कर जान दी

बंगलूरू। एक चैनल के पत्रकार संजय, 29 वर्ष, ने शुक्रवार की रात घर में पंखे से लटककर आत्महत्या कर ली। वे चैनल में कापी एडिटर थे।

सुब्रत रॉय की रिहाई के लिए हेज फंड से कर्ज़ लेगा सहारा समूह

सहारा ग्रुप अपने चीफ सुब्रत रॉय की रिहाई वास्ते धन जुटाने के लिए दो अमरीकी हेज फंज फंडों से बात कर रहा हैं। इस सौदे से सहारा ग्रुप करीब एक अरब डॉलर (6000 करोड़ रुपए) का कर्ज़ जुटाना चाहता है। मीडिया में आई ख़बरों के मुताबिक ये दोनों हेज फंड, विदेशों में सहारा समूह के तीन होटलों पर कुल एक अरब डॉलर से अधिक (6,000 करोड़ रुपये) के ऋण के वित्त पोषण के लिए धन दे सकते हैं।

मुख्यमंत्री ने पत्रकार किरन खरे के निधन पर शोक व्यक्त किया

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने पत्रकार किरन खरे के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने दिवंगत आत्मा की शांति की कामना करते हुए शोक संतप्त परिजनों के प्रति अपनी संवेदना भी व्यक्त की है। किरन खरे सूचना विभाग में कार्यरत दिनेश खरे की पत्नी थीं।

आईएसआईएस ने इराकी टीवी पत्रकार समेत 13 की हत्या की

समारा (इराक) : इस्लामिक स्टेट के आतंकियों ने उत्तरी बगदाद के विभिन्न शहरों एवं गांवों में एक इराकी समाचार कैमरामैन और 12 अन्य की हत्या कर दी। इस बात की जानकारी अधिकारियों, मारे गए लोगों के संबंधियों और प्रत्यक्षदर्शियों ने दी।

आईजी से शिकायत का हुआ असर, चौकी इंचार्ज ने लौटाए घूस के रुपए लेकिन दो हज़ार काट के

अमेठी जिले के गाँव ओटिया, पुलिस चौकी इन्होना, थाना शिवरतनगंज में एक हरा पेड़ काटने के मामले में चौकी इंचार्ज महेश चंद्रा द्वारा ठेकेदार ताज मोहम्मद उर्फ़ तजऊ को पकड़ कर 15,000 रुपये वसूलने के मामले में आइपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर द्वारा आईजी ज़ोन लखनऊ सुभाष चंद्रा को शिकायत करने के बाद 13,000 रुपये वापस हो गए हैं. चौकी इंचार्ज ने 2,000 रुपये इसलिए वापस नहीं किये क्योंकि यह हरा पेड़ काटने का पुलिस चौकी का अपना रेट है.

केजरीवाल को अकल नहीं थी…भाग गया कुर्सी छोड़ कर…मुझे नहीं लगता उसका भविष्य उज्ज्वल है: ओमपुरी

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व्यवस्था के खिलाफ अपनी फिल्मों में उन्होंने शुरूआती दौर में जो आक्रोश दिखाया था, आज भी वैसा ही तेवर उनमें मौजूद है। फिल्म अभिनेता और सामाजिक कार्यकर्ता ओम पुरी आज भी मानते हैं कि व्यवस्था बदलने के लिए जन आंदोलन बेहद जरुरी है। पर्यावरण जैसे मुद्दों से लेकर वह ‘निर्भया’ जैसे बड़े आंदोलन के हिमायती हैं। 4-5 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर हुए वाइल्ड लाइफ फिल्म फेस्टिवल शिरकत करने ओम पुरी खास तौर पर आए थे। दो दिन के व्यस्त कार्यक्रम के बाद फुरसत पाते ही ओमपुरी ने बातचीत  के लिए वक्त निकाला। इस दौरान उन्होंने साफगोई के साथ बहुत कुछ अपनी कही और कुछ आज के मुद्दों पर बात की।

आत्महत्या करने को मजबूर हैं उत्तराखंड के आपदा प्रभावित व्यापारी

देश के कई राज्यों में पिछले कई सालों से किसान आत्महत्या करने को मजबूर हैं। आत्म हत्याओं का यह सिलसिला थम नहीं रहा है। इसके लिए संबधित राज्यों की सरकारों के साथ केन्द्र सरकार भी जिम्मेदार है। देश के अन्य राज्यों की अपेक्षा उत्तराखंड में इस तरह के मामले न के बराबर हैं। लेकिन पिछले साल आई प्राकृतिक आपदा के चलते यहां एक नई परेशानी पैदा हो गई है। आपदा प्रभावित इलाकों के व्यापारी आत्महत्या करने लगे हैं। पहले गुप्तकाशी में एक युवा व्यापारी ने मौत को गले लगाया और अब उत्तरकाशी में दूसरे व्यापारी ने सरकार की उपेक्षा के चलते आत्महत्या कर ली। आपदा प्रभावित क्षेत्र में रह रहे प्रभावित अभी पहली घटना के कारणों का अध्ययन कर ही रहे थे कि दूसरी घटना ने राज्य सरकार की प्रभावितों के बारे में की जा रही कोरी बयानबाजी को उजागर कर दिया है।

नेपाल के राष्ट्रपति के आमंत्रण पर काठमाण्डू गए मधेपुरा वरिष्ठ पत्रकार देवाशीष बोस

मधेपुरा के वरिष्ठ पत्रकार और बिहार जर्नलिस्ट यूनियन के प्रदेश महासचिव देवाशीष बोस नेपाल के राष्ट्रपति डॉ. राम बरन यादव के निजी आमंत्रण पर आज काठमाण्डू के लिए रवाना हो गये। डॉ. बोस नेपाल में पांच दिवसीय प्रवास पर रहेंगे। इस अवसर पर वे नेपाली राष्ट्रपति से भारत-नेपाल मैत्री और सांस्कृतिक एकता के अलावा दोनों देशों के संयुक्त आपदा प्रबंधन पर वार्ता करेगें तथा उन्हें बिहार यात्रा के लिए आमंत्रण देंगे।

फॉरवर्ड प्रेस पर दिल्ली पुलिस का छापा मोदी सरकार का फासीवादी कदम: जेयूसीएस

लखनऊ। जर्नलिस्टस् यूनियन फॉर सिविल सोसाईटी (जेयूसीएस) ने फॅारवर्ड प्रेस के दिल्ली कार्यालय पर दिल्ली की बसंतनगर थाना पुलिस द्वारा 8 अक्टूबर को छापा मारने तथा उसके चार कर्मचारियों को अवैध रूप से हिरासत में लिए जाने की घटना की कठोर निंदा की है। जेयूसीएस ने दिल्ली पुलिस की इस कारवाई को फॉसीवादी हिन्दुत्व के दबाव में आकर उठाया गया कदम बताते हुए इसके लिए नरेन्द्र मोदी सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। इसके साथ ही फॉरवर्ड प्रेस की मासिक पत्रिका के अक्टूबर-2014 के अंक ’बहुजन श्रमण परंपरा विशेषांक’ को भी पुलिस द्वारा जब्त करने को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताते हुए इसे मुल्क में फासीवाद के आगमन की आहट कहा है।

जी हां, मुझे मलाल है कि उस सत्यार्थी को नोबल मिला जिसने हज़ारों हाथों को तराशने के बजाय भिखमंगा बना दिया

मुझसे कई मित्रों ने पूछा कि क्या आपको मलाल है कि सत्यार्थी को नोबल पुरस्कार मिला? फिर मेरे देश प्रेम पर सवाल उठाया कि आप कैसे भारतीय हैं? तो मैं कहना चाहूंगा कि जी हां, मुझे मलाल है। क्योंकि मैं हर बजते ढोल की ताल पर नाचने में यकीन नहीं रखता। मुझे मलाल है क्योंकि शांति और अहिंसा के विश्वदूत “गांधी” अभी तक खारिज हैं, और मेरा भारत खामोश है।

मासूम रुद्राक्ष की हत्या के गुनहगार हैं मीडिया और पुलिस

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Sumant Bhattacharya थोड़ी देर पहले ही एक राष्ट्रीय टीवी चैनल के राजस्थान प्रमुख का फोन आया और कहा कि सुमंत भाई इस पर कुछ लिखो। मुद्दा बेहद गैरजिम्मेदाराना किस्म की पत्रकारिता की वजह से एक मासूम की मौत का है। राजस्थान के कोटा में दो एक रोज पहले किन्ही बैंक मैनेजर के पांच सात साल के बेटे का अपहरण हो गया। अपहर्ताओं ने आज शुक्रवार को शाम तक का वक्त दिया और एक करो़ड़ बतौर फिरौती मांगी। पर आज ही राजस्थान के दो प्रमुख अखबारों राजस्थान पत्रिका और दैनिक भास्कर ने इस खबर को पहले पेज पर जोरदार तरीके से छाप दिया। सुबह पांच बजे खबर अखबारों में आई और दो घंटे के बाद मासूम की लाश तलाब से मिली। मीडिया ने पुलिस को अपना काम करने का वक्त ही नहीं दिया, खबर के बाद अपहर्ताओं को लगा कि बच्चा रहा तो पकड़े जाएंगे। सनसनी फैलाने वाले और सबसे तेज खबर के कारोबारियों ने अपने बाजारवाद में एक बच्चे को दुनिया से विदा कर डाला।

चंदन के भोजपुरी गानों को सभी घर-परिवार में बैठ सुन सकते हैं

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पिछले कई महीनों से यहां-वहां सुन रहा था। लोग कह रहे थे कि भोजपुरी को नई शारदा सिन्‍हा व विंध्‍यवासिनी देवी मिलती दिख रही है। कोई चंदन तिवारी है, जो भोजपुरी गाती है। उम्र अभी कम है, लेकिन टपकेबाजों को सुनने के लिए नहीं गाती। सड़कछाप भी दूर हैं। चंदन की भोजपुरी को सभी घर-परिवार में बैठ सुन सकते हैं। मैंने कभी सुना नहीं था, सो कहने वालों के लिए कुछ जोड़-घटा नहीं सकता था। पिछले महीने रांची के रास्ते जमशेदपुर जा रहा था। बाहर झमाझम बारिश हो रही थी। थकान के कारण मन अलसाया था। तभी सारथी समीर ने कोई सीडी बजा दी। भोजपुरी सुन पहले तो मन नहीं रमा। तभी अचानक ‘बेटी की विदाई’ की गीत के बोल निकले। विदाई की कसक थी, दर्द भरे शब्‍द थे। मन की अलसाहट खत्‍म हुई। ध्‍यान से सुनता गया। रोने के अलावा कुछ नहीं बचा था। लगा घर से मेरी बिटिया जाएगी, तब भी ऐसा ही होगा।

भाजपा और मोदी को कोसने में बीत गया सपा का राष्ट्रीय अधिवेशन

कुछ बड़े राजनेताओं का जब मुंह खुलता हैं तो उनके श्रीमुख से जहरीली वाणी ही निकलती है। मनोरोगी की तरह व्यवहार करने वाले इन नेताओं को अपने अलावा सारी दुनिया साम्प्रदायिक, चोर, भ्रष्टाचारी, खूनी, वहशी नजर आती है। न यह उस मिट्टी का मान रखते हैं जिसमें वह पल कर बढ़े हुए हैं, न ही इन्हे देश-समाज की प्रतिष्ठा की चिंता रहती है। भारत मां को डायन कहने वाले ऐसे नेता अपने आप को बहुत ही समझदार और काबिल मानते हैं, लेकिन किसी गंभीर मसले पर बात करते समय इनके मुंह पर ताला जड़ जाता है। हां, बात का बतंगड़ बनाने की महारथ इन्हें जरूर हासिल होती है, जिसकी नुमाईश यह समय-समय पर करते रहते हैं। दूसरों की बैसाखियों के सहारे अपनी राजनीति चमकाने वाले इन नेताओं की भले ही उनके अपने जिले में कोई न पूछता लेकिन यह अपने आप को राष्ट्रीय नेता समझने का मुगालता पाले रहते है।

अरनब गोस्वामी का महान दुख और प्रधानमंत्री-पत्रकारों के रिश्ते

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सुनने में आ रहा है कि इन दिनों टाइम्स नॉउ के अरनब गोस्वामी बेहद दुखी हैं। करीब सवा सौ ईमेल भेज चुके हैं फिर भी उन्हें नरेंद्र मोदी ने मुलाकात के लिए समय देना तो दूर रहा, जवाब तक नहीं दिया। चुनाव के पहले भी यही हुआ था। अरनब को लग रहा था कि जैसे वे राहुल गांधी का इंटरव्यू हासिल करने में कामयाब हो गए थे वैसे ही मोदी भी तैयार हो जाएंगे। मगर मोदी ने उनकी जगह ईटीवी को चुना।

पत्रकारिता के सिद्धांत, नैतिक मूल्य और उनकी सच्चाई

एक दिन मैं विश्वविद्यालय से घर के लिए निकल रहा था। थोड़ी ही दूर पहुंचा तो देखा कि जाम लगा था। मैंने अपनी गाड़ी को सड़क किनारे लगाया और पास ही बनी चाय की दुकान पर चाय पीने लगा। ट्रैफिक जाम ज्यादा बड़ा तो नहीं था लेकिन सबको जल्दी थी इसलिए साफ नहीं हो रहा था। मैं चाय पी ही रहा था कि अचानक से एक एंबुलेंस बहुत तेजी में आई। उसे देखकर समझ आ गया कि कोई इमरजेंसी है। लेकिन लोग उस एंबुलेंस को निकलने ही नहीं दे रहे थे।

वयोवृद्ध पत्रकार कुंवर नेगी ‘कर्मठ’ का निधन

कोटद्वार: समाज सेवी एवं गढ़गौरव पत्रिका के प्रधान सम्पादक कुंवर नेगी कर्मठ का 103 साल की उम्र में निधन हो गया। कुंवर सिंह नेगी कर्मठ के निधन पर सामाजिक संगठनों एवं पत्रकारों ने शोक व्यक्त किया है। वरिष्ठ पत्रकार एवं गढ़गौरव पत्रिका के सम्पादक कुंवर सिंह नेगी के आकस्मिक निधन के बाद उनके पार्थिव शरीर का यहां गाड़ीघाट स्थित मुक्तिधाम में सैकड़ों लोगों ने नम आंखों के साथ उनका अतिंम संस्कार किया।

निर्वाचन आयोग ने ‘राष्ट्रीय मीडिया पुरस्कार’ के लिए आवेदन आमंत्रित किए

चंडीगढ़। निर्वाचन आयोग ने लोकसभा चुनाव-2014 के दौरान लोगों को वोट डालने हेतु शिक्षित एवं जागरूक करने के लिए प्रिंट एवं इलैक्ट्रोनिक मीडिया हाउसेज़ से ‘राष्ट्रीय मीडिया पुरस्कार’ के लिए 30 अक्टूबर तक आवेदन आमंत्रित किए हैं।

भाजपा का चुनावी वादा, सत्ता में आने पर महाराष्ट्र के पत्रकारों को मिलेगी पेंशन

महाराष्ट्र बीजेपी ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में राज्य के वयोवृध्द पत्रकारों को हर माह 1500 रूपये पेन्शन देने का वादा किया है। महाराष्ट्र पत्रकार हमला विरोधी कृती समिती के ओर से राज्य के सभी प्रमुख राजनैतिक दलों को एक पत्र लिखकर पत्रकारो के मांगों के विषय में अपनी भूमिक चुनाव घोषणा पत्र के माध्यम से स्पष्ट करने की मांग की थी।

खस्ताहाल हैं कन्नौज के स्ट्रिंगर, कई ने दिया इस्तीफा

कन्नौज को वीवीआईपी जिला कहा जाता है लेकिन यहां काम करने वाले स्ट्रिंगरों (पत्रकारों) की हालत खस्ता है। उनको संस्थान से नए-नए निर्देश और प्लान तो दिए जाते हैं लेकिन वेतन नहीं बढ़ाया जाता है। कोई पत्रकार समय से वेतन नहीं मिलने, तो कोई अन्य समस्याओं के कारण संस्थानों से इस्तीफा दे रहा है।

जब कैलाश सत्यार्थी को ग्रेट रोमन सर्कस के मालिक ने बुरी तरह मारा था

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हर भारतीय की तरह मैं श्री कैलाश सत्यार्थी के नोबेल शांति पुरस्कार जीतने की ख़ुशी में फूला नहीं समा रहा हूँ और जून 2004 की करनैलगंज, गोंडा की उस घटना को याद कर रहा हूँ जब श्री सत्यार्थी को नेपाली सर्कस बालाओं को मुक्त करने के प्रयास में ग्रेट रोमन सर्कस के मालिक द्वारा बुरी तरह मारा-पीटा गया था.

बवाल कर रहे युवकों ने एएनआई संवाददाता को धमकाया, कैमरा छीनने का प्रयास

फर्रुखाबाद जनपद के एशियन न्यूज़ इंटरनेश्नल (ANI) जिला संवाददाता देर रात तकरीबन साढ़े दस बजे डॉ. के एम द्विवेदी अस्पताल में एक घायल पुलिस कर्मी की न्यूज़ कवर करने गए थे। वापस लौटते समय बस स्टैंड के सामने स्थित एक होटल पर करीब 15-18 युवकों को मार-पीट, गाली गलौज करते देख ANI रिपोर्टर घटना को अपने कैमरे से शूट करने लगे। कैमरा देख वहां मौजूद एक युवक रिपोर्टर के निकट आया और स्वयं को एक राजनैतिक दल का नेता बताते हुए हथियार निकाल कर धमकाने लगा।

लोक कवि जब अपनी सफलता के लिए डांसर लड़कियों के मोहताज़ हो जाते हैं

DN Pandey

दयानंद पांडेय

लोक कवि अब गाते नहीं

यह उपन्यास एक ऐसे भोजपुरिया लोक कवि के बारे में है जो दरिद्रता और फटेहाली का जीवन व्यतीत करते हुए  गांव से शहर की दुनिया में प्रवेश करता है। और फिर संघर्ष करते हुए धीरे-धीरे उस के जीवन की काया पलट होने लगती है या कहिए कि जैसे घूरे के दिन किसी दिन बदलते हैं वैसे ही उस की घूरे जैसी जिंदगी भी पैसा व शोहरत की मेहरबानी से चमकने लगती है। कुछ लोगों के अँधेरे जीवन में किस्मत से अचानक आशा की किरने फूटती हैं और रोशनी का समावेश होने लगता है तो ऐसा ही होता है लोक कवि के साथ भी। वरना पिछड़े वर्ग के कम पढ़े-लिखे गरीब इंसान कहां इतने ऊंचे सपने देख पाते हैं।

कैलाश सत्यार्थी और मलाला यूसुफज़ई को मिला शांति का नोबेल पुरस्कार

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इस साल शांति का नोबेल पुरस्कार भारत के सामाजिक कार्यकर्ता कैलाश सत्यार्थी और पाकिस्तान की मलाला यूसुफज़ई को संयुक्त रुप से दिया गया है।

मोदी की रैली में पुलिस ने पत्रकारों को अंदर जाने से रोका, चपरासी को पास थमा गायब हुए भाजपा के पीआरओ

मोदी मीडिया की परवाह नहीं करते, ये बात तो सुर्खियों में है ही। यहां संगठन के निचले स्तर पर भी यह झलकने लगा है। बुधवार को हरियाणा के यमुनानगर में हुई मोदी की रैली में पत्रकारों को अपमान का वो घूंट पीना पड़ा, जो वो इस जन्म में तो भूलेंगे नहीं। रैली के लिए पत्रकारों को पास देने का जो जिम्मा स्थानीय भाजपा के जनसंपर्क अधिकारी राजेश सपरा को दिया गया था, वो ही जनाब ऐन मौके पर पास देने की बजाए गायब हो गए।

आसाराम मामले में हाई कोर्ट ने दीपक चौरसिया की ज़मानत अर्जी खारिज की

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एक आपराधिक मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इंडिया न्यूज टीवी चैनल के एडिटर-इन-चीफ दीपक चौरसिया की ज़मानत अर्ज़ी खारिज कर दी है। चौरसिया व अन्य पर आसाराम बापू के विषय में आपत्तिजनक कार्यक्रम प्रसारित करने का आरोप है।

रामविलास शर्मा आर्य-अनार्य की बहस को साम्राज्यवाद का हथियार मानते थे

डॉ. रामविलास शर्मा (10 अक्टूबर 1912- 30 मई, 2000) हिंदी के महान समालोचक और चिंतक थे। 10 अक्टूबर, 1912 को जिला उन्नाव के ऊंचगांव सानी में जन्मे रामविलासजी ने 1934 में लखनऊ विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में एम.ए. और फिर 1938 में पी-एच.डी की। 1943 से 1971 तक आगरा के प्रसिद्ध बलवंत राजपूत कॉलेज में …