फ्री-टू-एयर चैनलों को विज्ञापनों के लिए निर्धारित समय सीमा से मुक्त करेगी सरकार

सूचना व प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा है कि सरकार फ्री-टू-एयर (एफटीए) चैनलों को विज्ञापन समय की सीमा के नियम से मुक्त करना चाहती है। इस संबंध में जल्दी ही आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। सरकार का ये निर्णय उन न्यूज़, म्यूज़िक व क्षेत्रीय ब्रॉडकास्टरों के लिए खुशखबरी है जो विज्ञापन समय की सीमा थोपे …

हुड्डा राज में हरियाणा हरामखोर-भ्रष्ट नौकरशाहों और कालोनाइज़रों के लिए स्वर्ग बन गया

हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा अपनी सभाओं में बड़े गर्व से कहते हैं कि उनकी रगों में स्वतंत्रता सेनानी चौ. रणबीर सिंह का खून है इसलिए वे ईमानदारी से अपनी सरकार चला रहे हैं। मुख्यमंत्री बनने से पहले एक बार हुड्डा हरिद्वार जाते हुए नदी में डूबते-डूबते बचे थे तब उनके समर्थकों ने उन्हें गंगापुत्र के नाम से नवाज़ा था। मुख्यमंत्री बनने के बाद अपनी सभाओं में भूपेंद्र हुड्डा कहते थे कि नदी में डूबने से बचा हूं और मैने मौत को करीब से देखा है, इंसान के साथ कुछ नहीं जाता, इसलिए मैंने फैसला लिया है कि मैं बिना किसी के दबाव के अपनी आत्मा की आवाज़ पर चलुंगा। लेकिन कथनी और करनी में दिन रात का फर्क वाली कहावत को चरितार्थ करते हुए उनके सारे काम इसके उलट ही साबित हुए हैं।

सम्पादक मण्डल जौनपुर के नये पदाधिकारियों ने ली शपथ, पत्रकार और समाजसेवी सम्मानित

sampadak mandal JNP

सम्पादक मण्डल के नये पदाधिकारियों को शपथ दिलाते आरक्षी अधीक्षक बबलू कुमार

जौनपुर। सम्पादक मण्डल जौनपुर का शपथ ग्रहण समारोह कलेक्ट्रेट स्थित पत्रकार भवन के सभागार में सम्पन्न हुआ। समारोह में चयनित पदाधिकारियों को पद व गोपनीयता की शपथ दिलायी गयी। इसके पहले मुख्य अतिथि आरक्षी अधीक्षक बबलू कुमार सहित विशिष्ट अतिथि एमएलसी प्रभावती पाल, नगर पालिकाध्यक्ष दिनेश टण्डन, तरूणमित्र के समूह सम्पादक कैलाशनाथ ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलित किया। तत्पश्चात् सभी पदाधिकारियों सहित अन्य सम्पादक व पत्रकार बंधुओं ने मंचासीन अतिथियों को माल्यार्पण किया।

हिन्दुस्तान की उदारता, अमर उजाला के विज्ञापन को ख़बर बना के छापा

hindustan MK

हिन्दुस्तान में छपी ख़बर

गलाकाट व्यापारिक प्रतिस्पर्धा के बीच क्या एक अखबार किसी दूसरे अखबार की विज्ञापन योजना को प्रोत्साहित कर सकता है? कतई नहीं। लेकिन 9 अक्टूबर को हिन्दुस्तान में छपी एक खबर को इस का उदाहरण कहा जा सकता है।

क्या जागरण बठिंडा वालों ने नाम न छापने के लिए पार्षद और भिवानी स्वीट्स की मिठाई खाई

देश भर में मिलावटखोरी के खिलाफ मुहिम चलाने का दावा करने वाले दैनिक जागरण के बठिंडा संस्करण के लोकल पुलआउट में गुरुवार को नकली मिठाई पकड़े जाने वाली ख़बर प्रकाशित की। ख़बर में पूर्व कांग्रेसी पार्षद के कोल्ड स्टोर और मिठाई बनाने वाले प्रतिष्ठान के नाम का ज़िक्र नहीं किया गया। बिना नाम वाली ये खबर दिन भर लोगों और पत्रकारों में चर्चा का विषय बनी रही। जबकि दैनिक भास्कर समेत अन्य अखबारों के लोकल पुलआउट में इसी खबर को पूरी आक्रामकता और पूर्व कांग्रेसी पार्षद तथा मिठाई बनाने वाले प्रतिष्ठान के नाम के साथ प्रमुखता से छापा गया।

गंगा को बहुराष्ट्रीय कंपनियों के हवाले कर देना चाहती है सरकारः जलपुरुष राजेन्द्र सिंह

munger

मुंगेर। विश्वबैंक की नज़र गंगा की कमाई पर है, जबकि गंगा माई किसानों, मछुआरों के साथ गंगा तट पर बसे लोगों की जीविका का आधार है। गंगा के नाम पर वोट तो बटोरे गये, लेकिन सत्ता के गलियारें में पहुंचते ही वोट मांगने वाले गंगा को बहुराष्ट्रीय कंपनियों के हवाले करने पर अमादा हैं। आज जिस तरह प्राकृतिक संसाधनों पर से आम लोगों का हक छिनता जा रहा है, उस स्थिति में मीडिया एक्टिविस्ट की भूमिका अदा करनी होगी। ये उद्गार मैग्सेसे एवार्ड से सम्मानित राजेन्द्र सिंह ने सूचना भवन, मुंगेर में मुंगेर पत्रकार समूह द्वारा ‘प्राकृतिक संसाधनों के दोहन को रोकने में मीडिया की भूमिका’ पर आयोजित संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में व्यक्त किये।

अमरीका-वियतनाम युद्ध को कवर करने वाले एकमात्र भारतीय पत्रकार थे हरिश्चन्द्र चंदोला

harish-chandra-chandola

हरिश्चन्द्र चंदोला ने वर्ष 1950 में दिल्ली से प्रकाशित हिन्दुस्तान टाइम्स से अपने पत्रकारिता कैरियर की शुरूआत की। यह वह समय था, जब देश को आजाद हुऐ ज्यादा समय नहीं हुआ था। भारत में संचार माध्यमों का खास विकास नहीं हुआ था। मुद्रित माध्यमों में भी ज्यादातर अंग्रेजी अखबार ही प्रचलन में थे। उसमें भी टाइम्स ऑफ इंडिया, हिन्दुस्तान टाइम्स व इंडियन एक्सप्रेस ही प्रमुख अखबारों में थे। ऐसे में देश के प्रमुख समाचार पत्र में नौकरी मिलना हरिश्चन्द्र जी के लिए अच्छा मौका था। हरिश्चन्द्र जी की पारिवारिक पृष्ठभूमि पत्रकारिता से जुड़ी रही। यही कारण रहा कि उन्होंने देश के नहीं बल्कि विदेशी समाचार पत्रों में भी लेख लिखे। चंदोला विश्व के प्रमुख युद्ध पत्रकारों में पहचाने जाते हैं। उन्होंने सन् 1968 से लेकर 1993 तक के सभी महत्वपूर्ण युद्धों व क्रांतियों के बारे में घटना स्थल पर जाकर लिखा।

राजनीति के जंगल में औरतों के भूखे न जाने कितने भेड़िये रहते हैं जो उन की देह चाटते रहते हैं

DN Pandey

अब तक मैं दयानंद जी की 25 कहानियों में गोता लगा चुकी हूं …यानि उन्हें पढ़ चुकी हूं। जिन में  कुछ प्रेम कहानियां , कुछ पारिवारिक जीवन और कुछ व्यवस्था पर हैं। आप के लेखन में समकालीन जीवन के रहन-सहन और उनकी समस्यों का विवरण बड़े खूबसूरत और व्यवस्थित ढंग से देखने व पढ़ने को मिलता है।  आपकी ये सात कहानियां व्यवस्था पर हैं। अगर जीवन में व्यवस्था सही ना हो तब भी बहुत समस्या हो जाती है।

सुब्रत रॉय की हिरासत पर कानूनविदों ने उठाए सवाल

Subrat Roy

नई दिल्ली। सहारा प्रमुख सुब्रत रॉय को तिहाड़ जेल में छह महीने से अधिक हो चुके हैं। इन छह महीनों में उनकी रिहाई की संभावनाएं कई बार बनीं और औंधे मुंह गिरीं। अब जैसै-जैसे दिन बीतते जा रहे है ये कहना मुश्किल होता जा रहा है कि वो सुप्रीम कोर्ट की शर्त के अनुसार अपनी रिहाई के लिए सेबी को 10,000 करोंड़ रुपए दे भी पाएंगे या नहीं।

अखबारी दुनिया के मालिकों व इस के कर्मचारियों की ज़िंदगी में झांकना हो तो ‘हारमोनियम के हज़ार टुकड़े’ उपन्यास ज़रूर पढ़ें

DN Pandey

दयानंद पांडेय

मैं दयानंद जी के ‘बांसगांव की मुनमुन’ उपन्यास को भी पढ़ चुकी हूं जो एक सामाजिक उपन्यास है। समय के साथ हर चीज़ में परिवर्तन होता रहा है। चाहें वो प्रकृति हो या इंसान, सामाजिक रीति-रिवाज या किसी व्यावसायिक संस्था से जुड़ी धारणाएं। इस उपन्यास ‘हारमोनियम के हज़ार टुकड़े’ में समय के बदलते परिवेश में अखबारी व्यवस्था का बदलता रूप दिखाया गया है। जिस किसी भी को अखबारी दुनिया के मालिकों व इस के कर्मचारियों की ज़िंदगी में झांकना हो उन से मेरा कहना है कि वो इस उपन्यास को ज़रूर पढ़ें। उपन्यास के आरंभ में सालों पहले अस्सी के दशक की दुनिया की झलक देखने को मिलती है जो आज के अखबारों की दुनिया से बिलकुल अलग थी। धीरे-धीरे अखबार के मालिक, संपादक और कर्मचारियों के संबंधों में बदलते समय की आवाज़  गूंजने लगती है।

आरटीआई संगठनों ने यूपी के सूचना आयुक्तों को दी एक्ट पर खुली बहस की चुनौती, 12 अक्टूबर को करेंगे धरना-प्रदर्शन

उत्तर प्रदेश के राज्य सूचना आयोग के निराशाजनक प्रदर्शन के विरोध में प्रदेश के विभिन्न सामाजिक संगठनों ने  ‘तहरीर’ नामक  संस्था के साथ इकट्ठे होकर राजधानी लखनऊ के लक्ष्मण मेला मैदान धरना स्थल पर 12 अक्टूबर 2014 को पूर्वान्ह 11 बजे से अपरान्ह 03 बजे तक धरना-प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है। इस कार्यक्रम में येश्वर्याज सेवा संस्थान, एक्शन ग्रुप फॉर राइट टु इनफार्मेशन, आरटीआई कॉउंसिल ऑफ़ यूपी, ट्रैप संस्था अलीगढ, सूचना का अधिकार कार्यकर्ता एसोसिएशन, मानव विकास सेवा समिति, मुरादाबाद, जन सूचना अधिकार जागरूकता मंच, भ्रष्टाचार हटाओ देश बचाओ मंच, एसआरपीडी मेमोरियल समाज सेवा संस्थान, आल इण्डिया शैडयूल्ड कास्ट्स एंड शैडयूल्ड ट्राइब्स एम्पलाइज वेलफेयर एसोसिएशन आदि संगठन शिरकत कर रहे हैं।

पैसों के अभाव में इलाज को मोहताज ब्रेन ट्यूमर से पीड़ित पत्रकार सुरजीत, मदद को आगे आए हाथ

apne baccho ke sath surjit ki patni 3

सुरजीत और उनका परिवार

जादूगोड़ा क्षेत्र के पत्रकार सुरजीत सिंह को पिछले डेढ़ वर्ष से ब्रेन ट्यूमर है। इस दौरान उसका दो बार असफल ऑपरेशन हो चुका है। जादूगोड़ा व आसपास के सामाजिक संगठनो से सुरजीत के परिवार ने मदद की गुहार भी लगाई लेकिन डेढ़ वर्षो के दौरान कोई भी सरकारी या सामाजिक मदद सुरजीत को नहीं मिल पायी। इस कारण आज सुरजीत जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं। सुरजीत की पत्नी नीतू कौर ने बताया की पिछले कई माह से सुरजीत बिस्तर पर हैं, वह न तो कुछ खाते हैं और न ही कुछ बोलते हैं। किसी तरह उनके मुंह मे तरल पदार्थ डाला जाता है और पिछले डेढ़ साल मे उनके इलाज़ पर घर का सबकुछ बिक चुका है।

सपा राष्ट्रीय अधिवेशन में बसपा पर चुप्पी का मतलब किसी को समझ नहीं आया

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अधिवेशन का पहला दिन अपने पीछे कई खट्टे-मीठे अनुभव छोड़ गया। उम्मीद के अनुसार मुलायम सिंह यादव को नौंवी बार अध्यक्ष चुने जाने की औपचारिकता पूरी करने के अलावा अगर कुछ खास देखने और समझने को मिला तो वह यही था कि समाजवादी नेताओं ने यह मान लिया है कि अब उनकी लड़ाई भारतीय जनता पार्टी के साथ ही होगी। यही वजह थी वक्ताओं ने भाजपा और खासकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर खूब तंज कसे। इसके साथ ही समाजवादी मंच से एक बार फिर तीसरे मोर्चे की सुगबुगाहट भी सुनाई दी। जनता दल युनाइटेड(जेडीयू) के अध्यक्ष शरद यादव की उपिस्थति ने इस सुगबुगाहट को बल दिया। मुलायम के अध्यक्षीय भाषण के बाद शरद यादव बोलने के लिये खड़े हुए तो उनके तेवर यह अहसास करा रहे थे कि दोनों यादवों को एक-दूसरे की काफी जरूरत है।

वेब मीडिया पर संगोष्‍ठी 16 अक्‍टूबर को, दस वेब लेखक होंगे सम्‍मानित

विचार पोर्टल प्रवक्‍ता डॉट कॉम ‘वेब मीडिया की बढ़ती स्‍वीकार्यता’ विषय पर एक संगोष्‍ठी का आयोजन करने जा रही है। यह संगोष्‍ठी 16 अक्‍टूबर 2014 को स्‍पीकर हॉल, कांस्टिट्यूशन क्‍लब, नई दिल्‍ली में सायं 4.30 बजे आयोजित होगी। ‘प्रवक्‍ता’ के छह साल पूरे होने के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्‍वविद्यालय, रायपुर (छत्‍तीसगढ़) द्वारा संचालित कबीर संचार अध्‍ययन शोधपीठ के सहयोग से संपन्‍न होगा।

गांधीवादी राजनीति का सपना देखने वाला, आज की जातिवादी और सांप्रदायिक राजनीति से हारता आनंद

DN Pandey

दयानंद पांडेय

आज के जमाने में सिद्धांतों और आदर्शों पर चलना हर किसी के वश  की बात नहीं। इंसान जीवन के आदर्शों को अपने स्वार्थ की खातिर भेंट चढ़ा देता है, कभी विवशता से और कभी स्वेच्छा से। दयानंद जी के इस उपन्यास ‘वे जो हारे हुए ‘ में राजनीति में उलझे या ना उलझे लोगों का ऐसा जखीरा है जिस में इंसान किसी और इंसान की कीमत ना आंकते हुए दिन ब दिन अमानवीय होता जा रहा है।

दैनिक भास्कर अजमेर ने छापी ईद की एक साल पुरानी फोटो

old photo

हिन्दुस्तान का सबसे बड़ा अखबार होने का दावा करने वाला दैनिक भास्कर अब लगता हैं बासी व पुरानी फोटोज़ से ही अपनी गुजर बसर कर रहा हैं। भास्कर के कर्मचारियों के आलस्य का अनुमान आप इसी बात से लगा सकते हैं कि एक फोटो जो साल भर पहले भास्कर ने ही अपने अखबार में छापी थी उसे फिर से आज अखबार में छाप दिया गया। अगर कोई खड्ड़ा या कोई ऐसी समस्या की फोटो होती जो साल भर पूर्व भी ऐसी थी और अब भी वैसी हैं तो समझ आता हैं मगर फोटो तो थी ईद पर नमाज अदा कर रहे अकीदतमंदों की।

अकस्मिक घटना नहीं थी चौरी-चौरा विद्रोह: प्रो. चमनलाल

CC 1

प्रसिद्ध क्रांतिकारी दुर्गा भाभी के जन्म दिन 07 अक्टूबर, 2014 को सुभाष चन्द्र कुशवाहा की चर्चित पुस्तक- चौरी चौरा विद्रोह और स्वाधीनता आन्दोलन पर लखनऊ मॉन्टेसरी इन्टर कॉलेज के सरदार भगत सिंह सभागार में चर्चा, परिचर्चा आयोजित की गई । सबसे पहले शहीद भगत सिंह और दुर्गा भाभी के चित्र पर माल्यार्पण किया गया। उसके बाद कॉलेज की छात्राओं ने प्रसिद्ध क्रांतिकारी राम प्रसाद बिस्मिल का गीत ‘सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है’, गा कर माहौल में गर्मजोशी पैदा कर दी। लखनऊ विश्वविद्यालय की डॉ. रश्मि कुमारी ने दुर्गा भाभी के योगदान पर वृत्त चित्र प्रस्तुत किया। ‘चौरी चौरा विद्रोह और स्वाधीनता आन्दोलन’ पुस्तक के लेखक सुभाष चन्द्र कुशवाहा ने इतिहासकारों से उनके कार्य पर प्रकाश डालने का अनुरोध किया और इस कार्य को करने की प्रेरणा तथा दस्तावेजों को हासिल करने की मशक्त को संक्षेप में उल्लेख किया।

कमल शर्मा को मिला ‘माणक अलंकरण’ पुरस्कार

पत्रकारिता के क्षेत्र में राजस्थान का प्रतिष्ठित पुरस्कार ‘माणक अलंकरण’ जन टीवी के कार्टूनिस्ट कमल शर्मा को प्रदान किया गया है। कमल शर्मा को कार्टूनिस्ट की श्रेणी में विशिष्ट पुरस्कार के लिए पिछले वर्ष चयनित किया गया था। जोधपुर में गांधी जयंती पर 32वां माणक अलंकरण समारोह आयोजित किया गया। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, हरिदेव जोशी, पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलपति सनी सेबिस्टियन, सांसद गजेंद्र सिंह, जसवंत सिंह विश्नोई ने पुरस्कार प्रदान किए। गौरतलब है कि कमल शर्मा पिछले बारह सालों से बतौर कार्टूनिस्ट कार्य कर रहे हैं।

होमगार्ड के क़त्ल का आरोपी है ज़ी संगम का हापुड़ संवाददाता

जी मीडि़या का भगवान ही मालिक हैं यहां कत्ल के आरोपियों को रिर्पोटर बनाया जा रहा है। यूपी के हापुड़ जनपद में पिलखुवा निवासी मौ. ताहिर नाम का शख्स जी संगम के लिए रिर्पोटिंग कर रहा है। जानकारी के अनुसार मौ. ताहिर पुत्र मौ. यामीन, निवासी पिलखुवा, जनपद हापुड़, पर गाजियाबाद के थाना लिंक रोड़ क्षेत्र में 13.07.2012 को डयूटी पर तैनात होमगार्ड विकास तिवारी की अपने साथियों के साथ पीट पीटकर हत्या करने का आरोप है।

3 TAHIR DURING REPORTIN

मौ. ताहिर, कैमरे से शूट करते हुए

राष्ट्रीय सहारा वाराणसी के स्ट्रिंगरो पर काम का बोझ अधिक लेकिन वेतन कम, विरोध करने पर किया जा रहा परेशान

सर जी, आपको अवगत करना चाहते है की राष्ट्रीय सहारा, वाराणसी यूनिट को शुरु हुए चार साल होने जा रहे हैं लेकिन यहां काम करने वाले स्ट्रिंगरों का वेतन एक रुपया भी नहीं बढ़ा है। सहारा श्री के जेल जाने से पहले तक अधिकारी सभी को परमानेंट कर देने का आश्वासन दे रहे थे। अब इस संबंध में बात भी करो तो अधिकारी नौकरी छोड़ देने की बाते करते हैं। स्ट्रिंगरो का वेतन यहाँ 36सौ रुपये से शुरु है जो अधिकतम 9 हजार तक है।

कैनविज टाइम्स से जुड़े तारिक, रज़ा का जोश प्लस से इस्तीफा

पीलीभीत से सूचना है कि पत्रकार तारिक कुरैशी ने अपनी नई पारी की शुरुआत कैनविज टाइम्स के साथ की है। उन्हे पीलीभीत का नया ब्यूरो चीफ बनाया गया है। तारिक इससे पूर्व अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान में सीनियर रिपोर्टर रह चुके हैं।

बांध परियोजना के नाम पर गांव उजड़ेंगे, करोड़ों के वारे-न्यारे होंगे तभी विकास की धारा बहेगी

PUNYA

जिस दिन वोट पड़ेंगे उस दिन हम उजड़ जायेंगे। कोई नेता, कोई मंत्री, कोई अधिकारी इस गांव में झांकने तक नहीं आता। छह महीने पहले तक गांव में हर कोई आता था। छह महीने पहले चुनावी बूथ भी गांव में बना था। छह महीने पहले मिट्टी की दीवार पर लगा पंतप्रधान नरेन्द्र मोदी का पोस्टर तो अभी भी चस्पा है। लेकिन पीढ़ियों से जिस मिट्टी की गोद पर सैकड़ों परिवार पले बढे उनके पास सिर्फ 15 अक्टूबर तक का वक्त है। हमारी खेती छिन गयी। हमारा घर गया। बच्चो को लगता है घूमने जाना है तो वह अपनी कॉपी किताब तक को बांध रहे हैं। बुजुर्गो को लगता है उनकी सांस ही छिन गयी।

दिग्विजय-अमृता की लीक तस्वीरों के मामले में गूगल ने क्राइम ब्रांच को सौंपी रिपोर्ट

 

नई दिल्ली। कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह और राज्यसभा चैनल की एंकर अमृता राय की निजी तस्वीरें सोशल मीडिया पर लीक होने के मामले में सर्च इंजन गूगल ने दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। गूगल ने बताया है कि फरवरी से मई तक अमृता के 1030 आइपी लॉग मिले हैं। इस अवधि के दौरान अमृता का ईमेल भारत के विभिन्न शहरों के अलावा विदेशों में 1030 बार खोला गया। अब क्राइम ब्रांच अमृता से इस संबंध में पूछताछ कर पता लगाने की कोशिश करेगी कि जहां-जहां आइपी लॉग मिले हैं वे उस समय वहां थीं अथवा नहीं।

अब सहाराश्री को जेल में चाहिये फाइव स्टार सुविधाएं

सहारा प्रमुख सुब्रत रॉय ने तिहाड़ जेल में पुनः विशेष सुविधाओं की मांग की है जो उन्हें 30 सितंबर तक कोर्ट के आदेश से मिली थी। इसके लिए उनकी ओर से तिहाड़-प्रशासन को पत्र लिखा गया है। हालांकि तिहाड़ प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि बिना अदालत के आदेश के उस तरह की सुविधा नहीं दी जा सकतीं। रॉय ने कहा है कि होटल बेचने के लिए खरीदारों से बातचीत उन सुविधाओं के बिना संभव नहीं है। रॉय के अनुसार होटलों की बिक्री के लिए बातचीत लगभग 80 प्रतिशत पूरी हो चुकी है। उक्त सौदों के लिए पहले उन्हें तिहाड़ में एसी कार्यालय, फोन, इंटरनेट और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधाएं दी गईं थी, जो बाद में वापस ले ली गईं।

सीबीआई रिपोर्ट में हुआ खुलासा, पत्रकार सुशील पाठक को दो पिस्तौलों से गोली मारी गयी थी

बिलासपुर। पत्रकार सुशील पाठक हत्याकाण्ड की जांच कर रही सीबीआई ने हाईकोर्ट में जवाब पेश कर दिया है। शपथ पत्र में सीबीआई ने कहा है कि जांच किसी भी प्रकार का कोई दबाव नहीं है। रिश्वत लेने वाली जांच टीम को पूरी तरह बदल दिया गया है और नई टीम जांच कर रही है। अभी तक 78 लोगों के बयान हुए है और जांच ठोस स्थिति में है।

अर्जियों से लेकर अनशन में बीत गए सत्रह साल, विकलांग अध्यापक को नहीं मिली स्थायी नियुक्ति

DSC 0813

रविन्द्रपुरी स्थित सांसद/प्रधानमंत्री कार्यालय में पत्रक सौंपते डॉ. केशव ओझा

वाराणसी। 17 साल के कड़वे अनुभवों को परे रखकर विकालांग अध्यापक डॉ. केशव ओझा ने बीते 8 सितंबर को जब प्रधानमंत्री मोदी के रविन्द्रपुरी कार्यालय पहुंच अपने अच्छे दिनों के लिए दस्तक देते हुए अर्जी दी थी तो शायद उन्हें नहीं मालूम था, कि सत्ता की सूरत भले ही बदल गयी हो पर सीरत नहीं बदली, महीना भर बीत जाने के बाद भी डॉ. ओझा का प्रार्थना प्रत्र सत्ता की अंधी गलियों में कही गुम हो कर रह गया है और डॉ. ओझा का संघर्ष वहीं का वहीं खड़ा है।

सुब्रत रॉय को हमले का डर, सुरक्षित जेल में शिफ्ट किए गए

नई दिल्ली। तिहाड़ जेल में बंद सहारा प्रमुख सुब्रत रॉय इन दिनों काफी डरे हुए हैं। उन्होंने जेल प्रशासन से कहा है कि उन्हें डर है कि कहीं कोई उन पर जानलेवा हमला न कर दे। उनके इसी डर को देखते हुए उन्हें जेल नंबर-3 से जेल नंबर-1 में शिफ्ट किया गया है। वहां उनकी सुरक्षा का रिव्यू करके सिक्युरिटी दी गई है।

नितिन का बीबीसी से इस्तीफा, माइक्रोसॉफ्ट से जुड़े

बीबीसी के भारत संवाददाता नितिन श्रीवास्तव ने बीबीसी से इस्तीफा दे दिया है। अक्टूबर के दूसरे हफ्ते में वे बीबीसी से कार्यमुक्त हो जाएंगे। नितिन पिछले आठ वर्षों से बीबीसी से जुड़े हुए थे।

गुहा जैसों की वजह से ही भागवत पहले भी खबर थे और आगे भी बने रहेंगे

DD

उम्मीद नहीं थी कि इतिहासकार राम चन्द्र गुहा आरएसएस की खिलाफत के लिए इतना कमजोर दांव खेलेंगे। उन्हें दूरदर्शन पर मोहन भागवत के भाषण दिखाने पर आपत्ति है। वे कहते कि आरएसएस कम्यूनल है। लगे हाथ मोहन भागवत की तुलना इमामों और पादरियों से कर बैठे। तो क्या वे कहना चाहते कि इस देश के इमाम और पादरी कम्यूनल होते हैं?