कोबरा पोस्ट द्वारा न्यूज चैनलों, अखबारों और वेबसाइट्स पर किए गए स्टिंग के सारे वीडियोज देखें

कोबरा पोस्ट की टीम ने अपने ताजे स्टिंग आपरेशन में मीडिया हाउसेज पर डंक मारा है. कई न्यूज चैनल, अखबार और वेबसाइड पेड न्यूज के धंधे में लिप्त हैं. इसका खुलासा कोबरा पोस्ट ने किया है. इस बाबत आज दिल्ली के प्रेस क्लब आफ इंडिया में अनिरुद्ध बहल और उनकी टीम के लोगों ने एक प्रेस कांफ्रेंस किया. इस पीसी में उन्होंने स्टिंग आपरेशन की सीडी दिखाई.

बाद में एक परिचर्चा का भी आयोजन किया गया जिसमें प्रशांत भूषण समेत कई जाने-माने लोग शामिल थे. कोबरा पोस्ट की टीम ने स्टिंग आपरेशन के वीडियोज अपने यूट्यूब चैनल पर डालने शुरू कर दिए हैं.  मीडिया पर किए गए इस स्टिंग की खबर शायद ही किसी चैनल और अखबार में विस्तार से आए, इस कारण यह जरूरी है कि आप सभी सजग पाठक सारे वीडियोज आनलाइन ही देखें और इसे अपने अपने स्तर पर दूसरों तक शेयर करें..

नीचे कोबरा पोस्ट के यूट्यूब चैनल का लिंक है, उस पर क्लिक करें. स्टिंग से संबंधित सारे वीडियोज आप देख पाएंगे…

https://www.youtube.com/channel/UCJbGQNou2GBFAi_fnMP2_4A/videos  

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कोबरा पोस्ट द्वारा किए गए ‘समाचार प्लस’ चैनल के स्टिंग का वीडियो देखें

यूपी और उत्तराखंड के न्यूज चैनल समाचार प्लस का स्टिंग आपरेशन कोबरा पोस्ट की टीम ने किया. समाचार प्लस चैनल के उत्तराखंड के मैनेजर सेल्स मुकेश बगियाल से कोबरा पोस्ट की टीम मिलती है और हिंदुत्व के एजेंडे समेत कई मुद्दों पर डील करने का आफर देती है जिसने उन्होंने सहर्ष स्वीकार कर लिया.

इसके बाद कोबरा पोस्ट की टीम समाचार प्लस के नोएडा आफिस जाकर उनके मार्केटिंग हेड अमित त्यागी से मिलती है. इन दोनों से हुई बातचीत से कई बड़े राज खुलते हैं. समाचार प्लस चैनल से जुड़े लोगों के स्टिंग का वीडियो देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें :

https://www.youtube.com/watch?v=J3TbL6BtJGk

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कोबरा पोस्ट का डंक इंडिया टीवी, समाचार प्लस, साधना प्राइम, हिंदी खबर, दैनिक जागरण समेत कई मीडिया हाउसों को लगा

कोबरा पोस्ट ने आज प्रेस क्लब आफ इंडिया में मीडिया पर आधारित एक स्टिंग आपरेशन के डिटेल शेयर किए और संबंधित सीडी सबके सामने चलाई. इस स्टिंग आपरेशन का नाम ‘ऑपरेशन 136’ है. इसके तहत कोबरा पोस्ट ने पैसे लेकर खबर चलाने के लिए तैयार कई मीडिया हाउसों का पर्दाफाश किया है.

कोबरा पोस्ट के स्टिंग आपरेशन में यह भी दिखाया गया है कि कई मीडिया समूह हिन्दुत्व के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए पैसे लेकर राजनीतिक अभियान चलाने को तैयार हैं. कोबरा पोस्ट ने ‘ऑपरेशन 136’ नाम के अपने स्टिंग में दिखाया है कि देश के कई बड़े मीडिया समूह पैसे लेकर खबरें चलाने के लिए तैयार हैं. ये मीडिया हाउस इसके लिए काला धन भी लेने को तैयार हैं.

जो मीडिया समूह पैसे के बदले खबरें चलाने को तैयार थे, उनमें हिंदी न्यूज चैनल ‘इंडिया टीवी’, ‘समाचार प्लस’, ‘साधना प्राइम’, ‘हिन्दी खबर’, हिन्दी अखबार ‘दैनिक जागरण’, नामी वेबसाइट ‘स्कूप हूप’ के नाम शामिल हैं. कोबरा पोस्ट ने इन न्यूज चैनलों, अखबार, वेबसाइट के उच्च प्रबंधन से बातचीत के वीडियो भी साझा किए हैं.

शुरुआती खबर ये है…

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कोबरा पोस्ट के स्टिंग आपरेशन में कई न्यूज चैनल उगाही करते हुए पकड़े गए

अनिरुद्ध बहल और उनकी टीम इस वक्त प्रेस क्लब आफ इंडिया में प्रेस कांफ्रेंस कर एक नए स्टिंग आपरेशन के डिटेल का पत्रकारों के सामने खुलासा कर रही है. अबकी ‘कोबरा पोस्ट’ ने मीडिया पर ही डंक गड़ा दिया है. चौथे स्तंभ के रूप में विख्यात मीडिया आजकल किस तरह उगाही और ब्लैकमेलिंग का माध्यम बन गया है, इसका आंख खोलने वाला सुबूत अनिरुद्ध बहल की टीम ने जुटाया है. साथ ही यह भी बताया है कि किस तरह ये मीडिया हाउस हिंदुत्व के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए पैसे लेकर खबर चलाने दिखाने को तैयार हैं.

कई महीनों तक किए गए स्टिंग आपरेशन में कई बड़े नामी चैनल फंसे हैं. इनमें से ज्यादातर हिंदी के रीजनल न्यूज चैनल हैं. ‘कोबरा पोस्ट’ ने अपने स्टिंग आपरेशन में पैसे ले कर फ़र्ज़ी ख़बर बनाने और चलाने वाले न्यूज़ चैनलों को बीच चौराहे पर नंगा कर डाला… प्रेस क्लब आफ इंडिया में अनिरुद्ध बहल की टीम अपने स्टिंग आपरेशन की सीडी चलाकर पत्रकारों को दिखा रही है. इसके बाद एक पैनल डिस्कशन होगा.

दिल्ली के प्रेस क्लब आफ इंडिया में कोबरापोस्ट के स्टिंग की सीडी चलने की खबर पूरे मीडिया जगत में फैल चुकी है और खासतौर पर मीडिया प्रबंधकों की सांसें फूली हुई हैं कि कहीं इनमें उनका चैनल तो नहीं. कोबरा पोस्ट का जो डंक इस बार मीडिया को लगा है, उसका असर दूर तक और देर तक देखने को मिलेगा. देखना यह भी होगा कि इस स्टिंग की खबर कितने चैनलों पर चलती है और कितने अखबार इसे छापने की हिम्मत जुटा पाते हैं. हां, सोशल मीडिया पर जरूर इस स्टिंग आपरेशन के डिटेल शेयर किए जाएंगे और संबंधित चैनलों के कर्ताधर्ताओं को घेरा जाएगा.

अनिरुद्ध बहल आज के दौर के मीडिया के असली नायकों में से एक हैं. वे लगातार अदभुत काम कर रहे हैं पत्रकारिता के क्षेत्र में. बिलकुल चुपचाप. कोबरा पोस्ट के बैनर तले अनिरुद्ध बहल का ताजा धमाका जो मीडिया को लेकर है, इसे कर पाने का साहस केवल अनिरुद्ध बहल और उनकी कोबरा पोस्ट की टीम ही दिखा सकती थी.

भड़ास भी पिछले एक दशक से मीडिया के भीतर की गंदगी, उगाही, ब्लैकमेलिंग, पेड न्यूज और कारपोरेटाइजेशन को लगातार उजागर करता रहा है. इसके कारण भड़ास और इसकी टीम को लगातार मीडिया हाउसों का उत्पीड़न तरह-तरह से झेलना पड़ा. अनिरुद्ध बहल ने मीडिया का स्टिंग कर यह साबित कर दिया है कि वे सच्चे पत्रकार हैं जो दूसरों के घर के साथ-साथ अपने घर में भी झांकने और उसकी बुराइयों को सार्वजनिक करने का साहस रखते हैं. इसके पहले अनिरुद्ध बहल बैंकिंग, हेल्थ, पालिटिक्स समेत कई फील्ड्स के भीतर की गंदगी के बारे में स्टिंग कर चुके हैं.

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अश्वनी मिश्र पहुंचे नेशन फर्स्ट, राकेश कुमार भगत की नई पारी

खबर आ रही है कि ज़ी न्यूज़ भोपाल में रेजिडेंट एडिटर के पद से अश्वनी मिश्रा ने इस्तीफ़ा दे दिया है। अश्वनी ईटीवी एमपी में एडिटर भी रहे चुके है। ज़ी में सब कुछ सही नहीं चल रहा है। अश्वनी को जगदीश चंद्र का करीबी लोगों में से बताया जाता है।

अश्वनी ने खुद के प्रोजेक्ट में दिलचस्पी लेते हुए नेशन फर्स्ट को लांच करने का मन बनाया है। अश्वनी के साथ लखनऊ के एक और पत्रकार अनुराग श्रीवास्तव बतौर उनके पार्टनर के रूप में हैं। अनुराग भी हिंदी खबर और कई संस्थानों का हिस्सा रहे हैं। नेशन फर्स्ट की लॉन्चिंग को लेकर जोर-शोर से तैयारी चल रही है।

रांची से खबर है कि राकेश कुमार भगत को जनपथ न्यूज टुडे मासिक पत्रिका समूह में झारखंड ब्यूरो हेड का प्रभार सौंपा गया है। राकेश कुमार भगत तीन वर्षों तक हिंदुस्तान व प्रभात खबर में जिला संवाददाता के रूप में कार्यरत रह चुके हैं।

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झूठ के कारोबार में अब ‘राज्यसभा टीवी’ भी शामिल

बीते 24 मार्च, 2018 को राज्य सभा टीवी की मुख्य ख़बर रही कि भाजपा अब राज्यसभा में सबसे बड़ी पार्टी बन गयी है। सच ये है कि भाजपा पिछले साल से ही सदन में सबसे बड़ी पार्टी है। उसके अब तक 58 सदस्य हैं और कांग्रिस के 54 हैं।

राज्यसभा के अधिकारिक चैनल द्वारा ये ग़लत जानकारी देना बहुत ही आपत्तिजनक है। लोग इसको लेकर तरह-तरह के सवाल उठा रहे हैं। मीडिया के कुछ लोगों का कहना है कि क्या ये ख़बर बाक़ी मीडिया को भ्रमित करने के लिए चलायी गयी है, जो राज्यसभा टीवी की जानकारी को सत्य मान कर चलते हैं…

वहीं कुछ का कहना है कि मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए सरकारी षड्यंत्र में राज्यसभा टीवी भी शामिल हो गया है… वहीं, कुछ लोग व्यंग्य करते हुए कह रहे हैं- तो माना जाए कि नए उप राष्ट्रपति वेंकैय्या नायडू और उनकी मीडिया प्रबंधन टीम की ये ‘ज़बरदस्त उपलब्धि’ है…

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केंद्र सरकार के मंत्री ने माना- पत्रकारों के मजीठिया वेज बोर्ड का लागू न हो पाना लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को कमजोर कर रहा

संतोष गंगवार बोले- पत्रकारों के कमज़ोर होने से कमज़ोर होगा लोकतंत्र…  नयी दिल्ली : सरकार ने आज स्वीकार किया कि मीडिया संस्थानों में पत्रकार एवं गैर पत्रकार कर्मचारियों को अनुबंध पर नौकरी और मजीठिया वेतनबोर्ड के क्रियान्वयन न होने का मामला वाकई में लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को कमज़ोर कर रहा है तथा इसके समाधान के लिए विशेष प्रयास की ज़रूरत है।

केन्द्रीय श्रम एवं रोज़गार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संतोष गंगवार ने यहां एक कार्यक्रम में नेशनल यूनियन आफ जर्नलिस्ट और दिल्ली जर्नलिस्ट एसोसियेशन के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को सम्मानित किया। कार्यक्रम में जल संसाधन एवं संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल एवं सांसद धर्मेन्द्र कश्यप भी मौजूद थे।

कार्यक्रम में देश के जाने-माने पत्रकारों ने मंत्रियों को लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के कामकाज की दशाओं की जानकारी दी। वयोवृद्ध पत्रकार एवं एनयूजे आई के संस्थापक सदस्य राजेन्द्र प्रभु, के एन गुप्ता, विजय क्रांति ने कहा कि ठेके पर नौकरी के चलन ने पत्रकारों एवं पत्रकारिता को कमज़ोर कर दिया है। पत्रकारों को सामाजिक सुरक्षा नहीं है और उनका जीवन अनिश्चितता से भरा है। सरकार को इन विसंगतियों को दूर करने के लिए कुछ करना चाहिए। महिला पत्रकारों ने भी अपनी दिक्कतों से उन्हें अवगत कराया।

इस असवर पर श्री गंगवार ने मजीठिया वेतन बोर्ड की सिफारिशों को सुचारु रूप से लागू करने, पत्रकारों की समस्याओं को दूर करने और उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें मीडिया संस्थानों में पत्रकारों को अनुबंध पर नियुक्त  करने, मजीठिया वेतन बोर्ड को लागू करने से जुड़ी दिक्कतों और पत्रकारों की अन्य समस्याओं से अवगत कराया जाता रहा है। वह पत्रकारों की दिक्कतों को दूर करने को लेकर काफी संजीदा है और इस बारे में चर्चा करने के लिए हमेशा उपलब्ध हैं। उन्होंने अगले सप्ताह पत्रकार संगठनों के पदाधिकारियों को वार्ता के लिए अपने कार्यालय में आमंत्रित भी किया।

केन्द्रीय श्रम मंत्री ने कहा कि वह असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों की समस्याओं को लेकर बहुत गंभीर हैं। देश में असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले 40 करोड़ लोगों को राहत एवं सुरक्षा देने के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार श्रम कानूनों को तर्कसंगत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है और वह 40 कानूनों को मिला कर चार कानून बनाने वाली है जिनमें श्रमजीवी पत्रकारों से जुड़े मामलों का विशेष ध्यान रखा जाएगा।

श्री मेघवाल ने माना कि यदि पत्रकार स्वतंत्र, सुरक्षित एवं निर्भीक नहीं रहेंगे तो लोकतंत्र भी सुरक्षित नहीं रहेगा। उन्होंने स्वीकार किया कि संसद की विभिन्न समितियों की बैठक में ठेके पर नौकरियों एवं मजीठिया वेतन बोर्ड का मामला आता रहा है लेकिन पहले यह उतना गंभीर नहीं लगा लेकिन आज उन्हें इसकी गंभीरता का अहसास हुआ है। वह मानते हैं कि निश्चित रूप से पत्रकार समाज की सूरत में बदलाव आना चाहिए और सरकार इसके लिए गंभीरता से विचार करेगी।

श्री गंगवार और श्री मेघवाल ने इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार राजेन्द्र प्रभु, अच्युतानंद मिश्र और अन्य पत्रकारों को सम्मानित किया। इनमें श्री प्रभु, श्री गुप्ता, श्री हेमंत विश्नोई, रवीन्द्र अग्रवाल, यूनीवार्ता के विशेष संवाददाता एवं यूनाइटेड न्यूज आफ इंडिया वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष राजकुमार मिश्रा, एनयूजे आई के अध्यक्ष अशोक मलिक, महासचिव मनोज वर्मा, कोषाध्यक्ष राकेश आर्य, पाँच्यजन्य के संपादक हितेश शंकर, दिल्ली पत्रकार संघ के अध्यक्ष मनोहर सिंह, महासचिव प्रमोद कुमार आदि शामिल थे।

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दिल्ली में चल रहे बेरोजगार युवकों और किसानों के आंदोलनों को इग्नोर कर टीवी वाले ‘भाजपा-पर्व’ चलाने में मगन हैं!

Anil Sinha : रात दस बजे टीवी खोला तो एनडीटीवी पर खबर देखी कि देश भर से आए बेरोजगार दिल्ली में मोर्चा निकाल रहे हैं और हरियाणा के किसानों को सरसों का समर्थन मूल्य नहीं मिल रहा है। हिंदी में खबर देखने के बाद अंग्रेजी की ओर आया तो इंडिया टुडे पर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का इंटरव्यू चल रहा था।

सोचा उपचुनावों के बाद जी और दूसरे चैनलों पर उन्हें देख चुका हूं, दूसरे चैनल देख लूं। वहां भी अमित शाह बैठे थे। नाविका कुमार जरूरत से ज्यादा विनम्र थीं। इतनी विनम्र वह हैं नहीं। दूसरी पार्टियों के साथ तो बेहद बदसलूकी करती हैं। उनके सवाल भी मजेदार थे-राहुल गांधी यह कहते हैं और सोनिया गांधी वह कहती हैं। उनका अपना कोई सवाल नहीं था।

आगे न्यूज 18 पर राइजिंग इंडिया समिट को दोहराया जा रहा था और वहां स्मृति ईरानी सोशल मीडिया के नियमन की बात कर रही थीं। रिपब्लिक पर महाभारत की द्रौपदी रामनवमी पर बात कर रही थीं। एक अन्य चैनल पर भाजपा के प्रवक्ता आधार पर ग्यान बघार रहे थे।

मैं बेरोजगारी और किसानों की समस्या भूल गया। समझ में आ गया कि रविवार के दिन टीवी पर भाजपा-पर्व क्यों चल रहा है और अंग्रेजी वाले हिंदी में क्यों इंटरव्यू चला रहे हैं!

पत्रकार अनिल सिन्हा की एफबी वॉल से.

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बिहार में बाइक सवार दो पत्रकारों की स्कॉर्पियो गाड़ी से कुचलकर हत्या

बिहार के आरा से एक बहुत बड़ी खबर आ रही है. आरा में बाइक से जा रहे दो पत्रकारों की हत्या स्कॉर्पियो गाड़ी से कुचलकर कर दी गई. इन पत्रकारों ने हत्या की आशंका को लेकर प्रशासन को सूचित कर रखा था. इसके बावजूद यह घटना हो गई. मृतकों में एक दैनिक भास्कर के प्रखंड संवाददाता नवीन कुमार निश्चल हैं. दूसरे रिपोर्टर का नाम विनोद सिंह है. हत्या की सूचना मिलने के बाद गुस्साये लोगों ने स्कॉर्पियो को फूंक दिया और शव के साथ रोड जाम कर दिया.

दोनों पत्रकारों की फाइल फोटो.

दोनों पत्रकारों की हत्या के बाद की फोटो.

यह वारदात आरा-सासाराम स्टेट हाईवे पर गड़हनी थाना क्षेत्र के नहसी गांव के समीप हुई। दोनों पत्रकारों का जिले के गड़हनी पंचायत के पूर्व मुखिया हरशु से खबर को लेकर काफी दिनों से विवाद था. मुखिया ने पहले भी दोनों पत्रकारों को धमकी दी थी. घटना के बाद नाराज लोग सड़कों पर उतर आए हैं. पूर्व मुखिया की स्कॉर्पियो गाड़ी को आग के हवाले कर दिया. दूसरी गाड़ियों को भी बुरी तरह से क्षतिग्रस्त किया गया.

दोनों पत्रकार एक बाइक पर सवार होकर जा रहे थे. इसी दौरान गड़हनी थाना क्षेत्र के पुल के पास उनकी बाइक को स्कॉर्पियो गाड़ी से टक्कर मारकर गिरा दिया गया और फिर दोनों को कुचल दिया गया. दोनों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई है. जानकारी मिलने के बाद कई थानों की पुलिस घटनास्थल पर पहुंची. नाराज लोग जमकर हंगामा कर रहे हैं.

दैनिक भास्कर के संवाददाता ने पहले भी किसी अनहोनी की आशंका जताई थी. पुलिस के अधिकारियों को इस बाबत पूरी जानकारी दे दी थी कि उनके साथ कभी भी कुछ भी हो सकता है लेकिन प्रशासन ने इस ओर ध्यान नहीं दिया. कलम के दो सिपाहियों की पत्रकारिता से उत्पन्न विवाद के कारण हत्या के बाद इलाके में तनाव की स्थिति बनी हुई है.

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Struggle of Keezhattoor Vayalakilikal for Protecting Life, Livelihood and Precious Natural Resources

NHAI Must Accept Demand of the Struggle and Change the Alignment of NH 66, Kerala Government Should Hold Dialogue with the Struggle and find an Amicable Solution

New Delhi : Keezhattoor Vayalakilikal’s Struggle has been going for more than a year now to protect their Paddy fields and precious drinking water, in a state where fertile land is fast declining due to rapid urbanization and infrastructure development. They have been protesting acquisition of 250 acres of fertile paddy fields for National Highway 66.

The struggle has remained peaceful and non-violent even in face of violent attack by ruling party cadres and state repression. National Alliance of People’s Movements stands in solidarity with their struggle and endorses their demand to change the alignment of the highway to save the precious ecosystem.

The movement has even proposed alternative alignment for the highway prepared by Kerala Sasthra Sahithya Parishad to avoid environmental destruction, but the Union Surface Transport Ministry led by Shri Nitin Gadkari has refused to heed to this. It is unfortunate that Kerala government is also siding with the Union government on this issue and is not siding with the movement to press for change of the alignment. We urge that the government of Kerala pressurize the Union government and get NHAI to change the alignment to save the fields and drinking water sources. 

Kerala had an estimated 9 lakh hectares of land for paddy cultivation 40 years ago and today it has come to 1.75 lakh hectares, where as the population has increased several fold now. It was due to the persistent demand and agitation of agricultural labourers and environmentalists that the Kerala Government passed an Act for the protection of paddy fields and wetlands in 2008. However, till date required rules have not been framed, because of lack of political will. This has led to complete non-compliance with various provisions. On the other hand, government has bought in an ordinance and relaxed the provisions for filling up paddy fields, to facilitate so called ‘development projects’. We strongly feel that these incidents give a clear indication of the growing corporate development attitude of the Kerala government in developmental projects. 

We demand the government of Kerala listens to the demands of the movement and hold dialogue with the people of Keezhattoor to find an amicable solution for the issues raised by the Vayalkilikal and the affected people of Keezhattoor.  We also urge Union Transport Minister to take appropriate action and save the precious ecosystem and not destroy it when other options are available for the same.

Medha Patkar, Narmada Bachao Andolan (NBA) and National Alliance of People’s Movements (NAPM)
Aruna Roy, Nikhil Dey and Shankar Singh, Mazdoor Kisan Shakti Sangathan (MKSS), National Campaign for People’s Right to Information, NAPM
Vilayodi Venugopal, Prof. Kusumam Joseph, Sharath Chelloor, John Peruvanthanam, V D Majeendran, Purushan Eloor, Suresh George, NAPM, Kerala
Prafulla Samantara, Lok Shakti Abhiyan; Lingraj Azad, Samajwadi Jan Parishad & Niyamgiri Suraksha Samiti, NAPM Odisha
Dr. Sunilam, Adv. Aradhna Bhargava, Kisan Sangharsh Samiti, NAPM, Madhya Pradesh
P.Chennaiah, Andhra Pradesh VyavasayaVruthidarula Union-APVVU, Ramakrishnam Raju, United Forum for RTI and NAPM, Meera Sanghamitra, Rajesh Serupally, NAPM Telangana – Andhra Pradesh
Dr Binayak Sen, Peoples’ Union for Civil Liberties (PUCL); Gautam Bandopadhyay, Nadi Ghati Morcha; KaladasDahariya, RELAA, NAPM Chhattisgarh
Kavita Srivastava, People’s Union for Civil Liberties (PUCL); Kailash Meena, NAPM Rajasthan
Sandeep Pandey, Socialist Party; Richa Singh, Sangatin; Arundhati Dhuru, Manesh Gupta, Suresh Rathor, Mahendra, NAPM, Uttar Pradesh
Gabriele Dietrich, Penn UrimayIyakkam, Madurai; Geetha Ramakrishnan, Unorganised Sector Workers Federation; Arul Doss, NAPM Tamilnadu
Sister Celia, Domestic Workers Union; Maj Gen (Retd) S.G.Vombatkere, NAPM, Karnataka
Anand Mazgaonkar, Swati Desai, Krishnakant, Paryavaran Suraksha Samiti, NAPM Gujarat
Vimal Bhai, Matu Jan sangathan; Jabar Singh, NAPM, Uttarakhand
Dayamani Barla, Aadivasi-MoolnivasiAstivtva Raksha Samiti; Basant Kumar Hetamsaria and Ashok Verma, NAPM Jharkhand
Samar Bagchi, Amitava Mitra, NAPM West Bengal
Suniti SR, Suhas Kolhekar, Prasad Bagwe, & Bilal Khan, Ghar Bachao Ghar Banao Andolan, Mumbai NAPM Maharashtra
Anjali Bharadwaj, National Campaign for People’s Right to Information (NCPRI), NAPM
Faisal Khan, KhudaiKhidmatgar; J S Walia, NAPM Haryana
Guruwant Singh, NAPM Punjab
Kamayani Swami, Ashish Ranjan, Jan Jagran Shakti Sangathan; Mahendra Yadav, Kosi Navnirman Manch; Sister Dorothy, Ujjawal Chaubey, NAPM Bihar
Bhupender Singh Rawat, Jan SangharshVahini; Sunita Rani, Domestic Workers Union; Rajendra Ravi, Nanhu Prasad, Madhuresh Kumar, Amit Kumar, Himshi Singh, Uma, NAPM, Delhi

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कांग्रेस राज में मीडिया वालों के लिए एडवाइजरी आती थी, भाजपा शासनकाल में सीधे आदेश आते हैं : पुण्य प्रसून बाजपेयी

Sanjaya Kumar Singh : यादों में आलोक – “सत्यातीत पत्रकारिता : भारतीय संदर्भ”… दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में कल (शनिवार को) आयोजित एक सेमिनार में देश में मीडिया की दशा-दिशा पर चर्चा हुई। विषय था, “सत्यातीत पत्रकारिता भारतीय संदर्भ”। संचालन रमाशंकर सिंह ने किया और बताया कि अंग्रेजी के पोस्ट ट्रुथ जनर्लिज्म के लिए कुछ लोगों ने “सत्योत्तर पत्रकारिता” का सुझाव दिया था पर सत्योत्तर और सत्यातीत पत्रकारिता में अंतर है और आखिरकार सत्यातीत का चुनाव किया गया।

सबसे पहले आईटीएम विवि के पत्रकारिता विंभाग के जयंत तोमर ने आलोक तोमर के लेखन व पत्रकारिता पर संक्षिप्त प्रकाश डाला। विषय प्रवर्तन (भारत सरकार के) भारतीय जनसंचार संस्थान के आनंद प्रधान ने किया और मुख्य वक्ताओं में वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश, पुण्य प्रसून वाजपेयी और राजदीप सरदेसाई रहे। एनके सिंह भी आने वाले थे, नहीं आए। इस बारे में रमाशंकर सिंह ने लिखा है, “वक़्ता के रूप में सहमति देकर भी एन के सिंह न जाने क्यों नहीं आये?”

सबने वही कहा जो उनसे अपेक्षित था। फिर भी सूचनाप्रद और दिलचस्प। उर्मिलेश ने अपने अनुभव से कुछेक उदाहरण दिए और कहा कि सत्यातीत पत्रकारिता काफी समय से हो रही है। राजदीप सरदेसाई ना विवाद में गए और ना विवाद से बचने की कोशिश करते दिखे (मैंने उन्हें पहली बार सुना) और विषय पर केंद्रित रहे। उन्होंने कहा कि तकनीक है, समाज में बदलाव आया है उसका असर है। खबर सही हो या गलत खबर है तो कुछ ही देर में फैल जाती है और यह इनमें गढ़ी हुई तथा गलत खबरें भी होती हैं। उन्होंने भी अच्छे उदाहरण दिए। पुण्य प्रसून वाजपेयी का यही कहना था कि स्थिति लगातार खराब हो रही है। पहले एडवाइजरी आती थी अब आदेश आते हैं। राम बहादुर राय ने मीडिया आयोग बनाने की मांग की और इस बारे में अपने प्रयासों की जानकारी दी।

राम बहादुर राय ने अपनी 2008 से जारी मीडिया कमीशन की मांग को जारी रखा। उन्होंने तमाम उतार-चढ़ाव, बदलाव के दौर से गुजर रही पत्रकारिता के लिए पचास के दशक, फिर सत्तर के दशक में लाए गए प्रेस आयोग का जिक्र करते हुए इसे एक बार फिर मौजूं बताया। राम बहादुर राय ने कहा कि इस पत्रकारिता का भला तभी हो सकता है, जब पत्रकार अपना दायित्व, कर्तव्य दोनों ईमानदारी के साथ समझे। उसे निभाए। वह संसद भवन में राज्य सभा सदस्य बनकर प्रवेश करने का सपना देखना छोड़ दे। पत्रकारिता और लोकतंत्र दोनों का भला हो जाएगा।

मैं समझ रहा था कि राम बहादुर राय को सरकार के करीबी होने के नाते बुलाया गया था पर उन्होंने कहा कि वे आलोक से संबंधों और उनकी पत्नी सुप्रिया के निमंत्रण पर आए हैं और ज्यादातर लोग इसीलिए आए हैं।

मैं हर साल इस आयोजन में जाता रहा हूं। आलोक और सुप्रिया भाभी से करीबी भी इसकी वजह है पर मुख्य मसला तो पत्रकारिता पर चर्चा है। जो प्रिय है। और इसीलिए हर साल जाने के लिए समय निकाल पाया। नहीं तो किसी की याद में कहां हर साल ऐसे आयोजन होते हैं और कौन हर साल जाता है। फिर भी। कुल मिलाकर, अंत में भड़ास फॉर मीडिया के संस्थापक यशवंत सिंह का कहा ही ठीक लगा कि आंख वालों ने हाथी की व्याख्या अपने-अपने हिसाब से कर दी। पत्रकारिता रूपी हाथी को जो अपने हिसाब से हांक लेता था (आलोक तोमर) वो तो रहा नहीं। 

वरिष्ठ पत्रकार संजय कुमार सिंह की एफबी वॉल से.

कार्यक्रम में किसने क्या कहा…

मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद पत्रकारिता का पूरा परिदृश्य बदल गया है। अब संपादक को पता नहीं होता कि कब कहाँ से फोन आ जाए। संपादकों के पास कभी पीएमओ तो कभी किसी मंत्रालय से सीधे फोन आता है। ये फ़ोन सीधे खबरों को लेकर होते हैं और संपादकों को आदेश दिए जाते हैं। मीडिया पर सरकारों का दबाव पहले भी रहा है, लेकिन पहले एडवाइजरी आया करती थी कि इस खबर को न दिखाया जाए, इससे दंगा या तनाव फैल सकता है। अब सीधे फोन आता है कि इस खबर को हटा लीजिए। खुद मेरे पास प्रधानमंत्री कार्यालय से फोन आते हैं और अधिकारी बाकायदा पूछते हैं कि अमुक खबर कहां से आई?  ये अफसर धड़ल्ले से सूचनाओं और आंकड़ों का स्रोत पूछते हैं। अक्सर सरकार की वेबसाइट पर ही ये आंकड़े होते हैं लेकिन सरकार को ही नहीं पता होता। जब तक संपादक के नाम से चैनलों को लाइसेंस नहीं मिलेंगे,  जब तक पत्रकार को अखबार का मालिक बनाने की अनिवार्यता नहीं होगी, तब तक कॉर्पोरेट का दबाव बना रहेगा। राजनैतिक पार्टियों के काले धंधे में बाबा भी शामिल हैं। बाबा टैक्सफ्री चंदा लेकर नेताओं को पहुंचाते हैं। जल्द ही मैं इसका खुलासा स्क्रीन पर करूंगा।

-टीवी जर्नलिस्ट पुण्य प्रसून बाजपेयी

पत्रकारिता में झूठ की मिलावट बढ गई है। किसी के पास भी सूचना या जानकारी को छानने और परखने की फुरसत नहीं है। गलत जानकारियाँ मीडिया मे खबर बन जाती हैं। इसके लिए कॉर्पोरेट असर और टीआरपी के प्रेशर को दोष देने से पहले पत्रकारों को अपने गिरेबां मे झाँककर देखना चाहिए कि हम कितनी ईमानदारी से सच को लेकर सजग हैं।

-टीवी जर्नलिस्ट राजदीप सरदेसाई

भारत में पठन पाठन प्राचीन से मध्य काल तक कुछ लोगों के हाथों में रहा हैं। पत्रकारिता में सत्यातीत बोध हमारे समाज में लगातार चलता रहा है और आधुनिक काल मे भी चल रहा है। सच्चाई से परे तमाम खबरें आती रहती हैं जो दलितों, पिछड़ों आदिवासियों के खिलाफ होती हैं।

-वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश

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भोपाल की पत्रकार ममता यादव इस फेलोशिप के लिए चुनी गईं

युवा पत्रकार ममता यादव को आचार्य महावीरप्रसाद द्विवेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता फेलोशिप के लिए चुना गया है। माधवराव सप्रे स्मृति समाचारपत्र संग्रहालय एवं शोध संस्थान, भोपाल ने पत्रकारिता के परिष्कार और युवा पत्रकारों के प्रोन्नयन के उद्देश्य से फेलोशिप आरंभ की है।

फेलोशिप समिति के अध्यक्ष वरिष्ठ पत्रकार चन्द्रकान्त नायडू और सप्रे संग्रहालय के संस्थापक-संयोजक विजयदत्त श्रीधर ने फेलोशिप की घोषणा की। उन्होंने बताया कि सुश्री ममता यादव ‘हिन्दी समाचार पत्रों में भाषा का प्रयोग’ पर अध्ययन कर लघु शोध प्रबंध प्रस्तुत करेंगी। इसके लिए कुल एक वर्ष की समय सीमा तथा 50,000/- रुपये फेलोशिप राशि निर्धारित है।

गंगाप्रसाद ठाकुर राज्य स्तरीय पत्रकारिता फेलोशिप के लिए प्राप्त आवेदनों को योग्य नहीं पाया गया। इसलिए तय किया गया कि नये सिरे से प्रस्ताव आमंत्रित किए जाएँ। फेलोशिप समिति ने यह भी निर्णय लिया कि फेलोशिप के लिए विषय का चयन समिति करेगी। उसी के लिए प्रस्ताव (सिनाप्सिस) आमंत्रित किए जाएँगे। सबसे अच्छे प्रस्ताव का चुनाव फेलोशिप अध्ययन के लिए किया जाएगा।

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प्रतिनिधि टीवी के मीडियाकर्मी बकाया पैसे के लिए भटक रहे, पुलिस में की कंप्लेन

प्रतिनिधि टीवी के मालिक आलोक कुमार ने अपने कर्मचारियों को बड़े बड़े ख़्वाब दिखाए थे. लेकिन अब बकाया पैसे तक नहीं दे पा रहे. आलोक कुमार अब कर्मचारियों से गिड़गिड़ा रहे है. पिछले साल सेलरी के लिए परेशान कर्मचारियों ने आंदोलन किया. बाद में चैनल बंद हो गया.

किराये का आफिस और किराये का लाइसेंस. बस यही पूंजी रह गयी. पहले तो कर्मचारियों को धमकाया गया. जब गुस्साए कर्मचारियों के तेवर उग्रतम होते गए तो इज़्ज़त बचाने के लिए आलोक कुमार ने नवंबर 2017 के दिन सभी लोगो को 15 फरवरी का चेक दिया. तब से अब तक 3 डेट बदले जा चुके हैं. चेक क्लियर नहीं हुआ.

हर बार वो मेल और कॉल के जरिये चेक डालने के एक दिन पहले गिड़गिड़ाने लगते हैं. अब उन्होंने चौथी बार फिर ऐसा ही किया. लेकिन कर्मचारियों ने तय किया है कि पुलिस में कंप्लेन किया जाए. साथ ही आलोक कुमार के खिलाफ उनके आफिस, दिल्ली आवास और झारखंड स्थित पुश्तैनी आवास के इलाके में पोस्टर चिपकाने का निर्णय लिया गया है.

इस चैनल में एमडी रविंद्र मिश्रा थे. चैनल की सीईओ आलोक की बहन अल्का थीं. परेशान मीडियाकर्मियों ने बकाया न मिलने पर जल्द ही इन दोनों के खिलाफ भी मोर्चा खोलने का ऐलान किया है.

(प्रतिनिधि टीवी के एक पीड़ित पूर्व कर्मचारी की कलम से.)

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योगी सरकार के करोड़ों के इस विज्ञापन में कार्यक्रम स्थल का नाम ही नहीं है

सिस्टम को टीबी का सुबूत… जगाने का काम करने वाले सोते हुए कर रहे हैं काम… करोड़ों के बजट वाले इस विज्ञापन में पूरी रामकथा है। लेकिन रामकथा में राम जी का ही नाम नहीं है। कार्यक्रम की पूरी जानकारी है पर ये लिखना भूल गये कि कहां है कार्यक्रम।

उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों के सभी बड़े अखबारों में आज ये फुल पेज विज्ञापन छपा है। इस विज्ञापन में सरकार ने करोड़ों रूपये खर्च किये हैं।  खैर जब सिस्टम को ही टीबी हो गयी है तो टीबी को खत्म करने की जागरूकता भी टीबी का शिकार हो जाये तो ताज्जुब की बात नहीं।

लखनऊ के पत्रकार नवेद शिकोह की एफबी वॉल से.

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यूपी के सुपर ‘सीएम’ सुनील बंसल के खिलाफ फेसबुक पर लिखने से पूर्व आईएएस का गनर वापस!

पूर्व आईएएस सूर्य प्रताप सिंह

Surya Pratap Singh  : जान ले लो उसकी….. जो भी विरोध करे! उ. प्र. के ‘सुपर CM’ …. सुनील बंसल, भाजपा के महाभ्रष्ट संगठन मंत्री की बदले की कार्यवाही… मेरी सुरक्षा वापिस करायी ….. आज का ‘गायत्री प्रजापति’, सुनील बंसल अब मेरी जान लेने पर उतारू! ‘माल काटो-मौज करो’ और जो विरोध करे उसकी जान ले लो…… ये हैं आज की राजनीति का मूल मंत्र……चाहे कोई भी दल हो।

मित्रों! आपको ज्ञात ही है कि भाजपा शासन काल में ही मेरे घर पर गुंडों द्वारा दो बार अटैक कर मेरी जान लेने की कोशिश की थी …. जिसपर मैंने दो FIRs गोमतीनगर थाने में दर्ज करायी थी जिन पर आज तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है। इन हमलों के बाद सरकार ने एक सिपाही मेरी सुरक्षा में लगाया था, जिसे सरकार ने सुनील बंसल के दबाव में आज वापिस ले लिया।

आज सुबह एक उच्च प्रशासनिक अधिकारी ने यह मुझे बताया कि सुनील बंसल के भ्रष्टाचार को मेरे द्वारा उजागर किए जाने के कारण वे नाराज़ हो गए हैं और उन्होंने फ़ोन कर मेरी सुरक्षा तुरंत वापिस लेने के आदेश दिए हैं…… ज्ञात हो कि भ्रष्ट सुनील बंसल व उ.प्र. के दो मंत्री मिलकर एक यूनिवर्सिटी/मेडिकल कॉलेज खोल रहे हैं और मैं इस घोटाले की उजागर करने वाला हूँ इसीलिए सुनील बंसल बोखलाए हुए हैं।

मुझे इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता …. हाँ, यदि अब कोई हमला मेरे या मेरे परिवार पर हुआ तो उसके लिए ४० चोरों के सरदार अलीबाबा, दुश्चरित्र सुनील बंसल ही इसके लिए जिम्मेदार होंगे …. और मैं उन्हीं के ख़िलाफ़ FIR दर्ज कराऊँगा…… भ्रष्ट दुष्टों का अंत समय अवश्य आता है …. थोड़ी देर ज़रूर होती है….. ईमानदार योगी जी के बावजूद, उत्तर प्रदेश में सुनील बंसल जैसे गिद्धों का भ्रष्टाचार व अनाचार ही भाजपा को ले डूबेगा….. देखते रहिए।

पूर्व आईएएस सूर्य प्रताप सिंह की एफबी वॉल से.

सुनील बंसल को लेकर लिखी गई कुछ पोस्ट्स पढ़ें…

Surya Pratap Singh : सुपर-CM की नोट-गिनने की मशीन भी नहीं रोक पा रही लखनऊ में नौनिहालों का यौन-शोषण ! उत्तर प्रदेश के ‘सुपर-CM’ और भाजपा के प्यारे गायत्री प्रजापति, श्री सुनील बंसल जी को दिखाई नहीं देता कि जिस शहर, लखनऊ में उन्होंने नोट गिनने की मशीन लगाई हुई है, वहाँ ३ बच्चों का यौनशोषण-जघन्य अपराध रोज़ होता है …… २०१६ में लखनऊ ने बच्चों पर होने वाले अपराधों में पूर्व वर्षों के सारे रिकोर्ड तोड़ दिए- ८४४ बच्चों का अपहरण…. २८६ बच्चियों सम्मलित हैं। … सुपर-CM बंसल, सर जी ! कुछ करिए ना….. आपसे निवेदन है कि बच्चों को तो छोड़ दो, बड़े साहब …. या फिर योगी जी को Freely मुक्तभाव से काम करने दो …. लेकिन, हुकुमशा, Encounter से आप भी बच के रहना ….. आज कल ‘मौसम’ कुछ ऐसा ही चल रहा है। और हाँ, बंसल जी, वैसे तो आपकी फ़िल्म ऐक्टर ‘दिलीप कुमार’ वाली Hair-Style तक की तारीफ़ उ.प्र. के भाजपा वाले करते हैं और मज़ाक़ भी बनाते हैं…… लेकिन याद रखना, ये ‘साले’ यू.पी. वाले जो आप पर आज ‘नोट’ वर्षा रहे हैं, आपके पद से हटने के बाद, चाय तक के लिए भी नहीं पूछेंगे और आपकी जाँच की माँग तो होने ही वाली है …. यह बात लिखकर रख लेना। कहीं, आपके ‘साले’ यू. पी. वाले आपकी “ऐसी-वैसी” वाली ‘सीडी’ बनाने व जेल भिजवाले की तैयारी तो नहीं कर चुके हैं ….. बच के रहना !!!!

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उत्तर प्रदेश में नए मुख्यमंत्री की तलाश में ……. ४० चोरों के सरदार, ‘अलीबाबा’……. सुनील बंसल जी ! उत्तर प्रदेश में ‘माल दो-काम कराओ’ के फ़ॉर्म्युला के आविष्कारक भाजपा के ‘महाविनाशक’ मंत्री श्री सुनील बंसल ने CM योगी के एक वर्ष के कार्यकाल पूर्ण करने पर उन्हें ‘बधाई’ नहीं दी, क्यों कि ‘सुपर-CM’ को ईमानदार CM योगी का काम पसंद नहीं आ रहा है ….. कारण क्या है? शायद अपनी ईमानदारी के कारण CM योगी आज के इस ‘गायत्री प्रजापति’ की कमाई के धंधे में व्यवधान डाल रहे हैं। अब ये भाजपा प्रवक्ता, ‘दुर्लोक कुवस्थी’ जैसे ४० चोरों के सरदार अलीबाबा (सुनील बंसल) ईमानदार CM योगी को हटवाकर अपनी पसंद का बेबस ग़ुलाम ‘कारिंदा-CM’ लाना चाहते हैं ….. ज्ञात हो कि अलीबाबा, बंसल जी के भ्रष्टाचार में व्यवधान डालने वाले RSS के देवतुल्य क्षेत्र प्रचारक (अवध क्षेत्र) श्री शिवनारायण जी का ट्रान्स्फ़र भी करा चुके हैं…… अब उनकी कुदृष्टि इसी क्षेत्र के एक अन्य RSS के उच्च पदाधिकारी पर है क्योंकि ये भी Facebook पर अप्रत्यक्ष रूप से सुनील बंसल की कार्य क्षमता पर टीका टिप्पणी करते रहते हैं….. उन्होंने सुनील बंसल के दुश्चरित्र/कदाचार के विषय में संघ में ऊपर तक बता चुके हैं। सोशल मीडिया पर भाजपा के ‘गायत्री प्रजापति’ बंसल जी के दुष्कर्मों के चर्चे आम हैं …..!!

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सत्ता की खींचतान में देखते हैं कौन बाज़ी मारता है? उ.प्र. में भ्रष्ट ‘बंसल-मौर्य’ गठजोड़ या फिर ईमानदार योगी …..सत्ता की मौज लूट रहे सुनील बंसल उर्फ़ दूसरे ‘गायत्री प्रजापति’ के सामने एक लाचार योगी! सत्ता में पॉवर के लिए एक दूसरे को पटकनी देना या फिर ज़ोर आज़माइश कोई नई बात नहीं ….. उ.प्र. भाजपा के भ्रष्ट महामंत्री संगठन सुनील बंसल ने योगी जी को एक वर्ष पूर्ण होने पर बधाई नहीं दिया ….. और जब राज्यसभा के लिए ९ सीट जीतीं तब भी ‘लड्डू खाओ’ जश्न में भी सम्मिलित नहीं हुए….. कारण योगी जी द्वारा बंसल जी की ‘खाओ-कमाओ’ नीति का विरोध करना …. अहंकारी सुनील बंसल के मधुर वाक्य जो सोशल मीडिया पर वाइरल हैं…… ‘साला पागल कर रखा है, यूपी वालों ने…….उत्तर प्रदेश के बच्चे भिखारी हैं’….. महाभ्रष्ट बंसल व उसके गैंग के कुछ भ्रष्ट मंत्रियों के कारण आज उत्तर प्रदेश में भाजपा कभी ख़ुशी कभी ग़म के दौर से गुज़र रहा है ….भाजपा का अहंकार चरम पर है और लोकप्रियता का ग्राफ़ तेज़ी से गिरता जा रहा है…

गोरखपुर-फूलपुर की हार का दर्द भूलाने के लिए कल राज्यसभा चुनाव में जोड़तोड़ से हुई जीत की ख़ुशी में ख़ूब लड्डू बटे और आज की मायावती की प्रेस कॉन्फ़्रेन्स से उपजी चिंता ने भाजपा की हवाइयाँ उड़ा दी हैं…कभी ख़ुशी-कभी ग़म के दौर से गुज़र रही है उ.प्र. की भाजपा और ऊपर से सुनील बंसल जैसे लोगों के भ्रष्टाचार का दंश … समझ नहीं आ रहा कि कौन सा मंत्र निकाला जाए जिससे सपा-बसपा-कोंग्रेस गठबंधन से पर पाया जा सके.. ….कोई ‘गुजरात फोर्मूला’ ही शायद काम आ जाए।

बसपा के प्रत्याशी को जोड़तोड़ से हराकर ‘बंसलवा’ जैसे लोग सोच रहे थे कि शायद सपा-बसपा के भावी गठबंधन में दरार पड़ जाए लेकिन मायावती ने आज सारा माजरा साफ़ कर उ.प्र. भाजपा की नींद उड़ा दी है …..सपा-बसपा-कोंग्रेस के संयुक्त वोट बैंक को पटकनी देना आसान नहीं होगा … गोरखपुर व फूलपुर में इसका ट्रेलर दिख चुका है।

भाजपा दो मुद्दों पर उत्तर प्रदेश की सत्ता पर क़ाबिज़ हुई थी …. गुंडाराज व भ्रष्टाचार …. लेकिन दोनों मुद्दों पर उपेक्षानुरूप परिणाम नहीं आए, बंसल और उसके गैंग के प्रदेश को लूट कर रख दिया …. बढ़ती बेरोज़गारी व महँगाई, किसानों/दिहाड़ी मज़दूरों की ख़स्ता हालात… भ्रष्ट नौकरशाहों व मंत्रियों से आज भी CM योगी घिरे हैं ….. ‘काम करो कम-जमकर झूँठे गीत गाओ’ के सिद्धांत से लोग ऊबने लगे हैं ….. प्रदेश में भाजपा का ग्राफ़ तेज़ी से गिर रहा है, लेकिन सच्चाई को कोई स्वीकारने को तैयार नहीं है …साम, दाम, दंड, भेद से जनता को हर बार मूर्ख नहीं बनाया जा सकता है …. गोरखपुर व फूलपुर की हार के बाद भी यह बात भाजपा के समझ में नहीं आ रही।

बाबरी मस्जिद गिरने बाद हुए सपा-बसपा के गठबंधन ने भाजपा को १४ वर्ष के वनवास पर भेज दिया था …..अभी भी समय है कि भाजपा को अहंकार त्याग कर …. भ्रष्ट नौकरशाहों व मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखाया जाए….नौटंकी बाज़ी का सहारा न लेकर बेरोज़गार युवाओं को रोज़गार देने , किसानों की आय दोग़ुनी करने जैसे वादों पर गम्भीरता से काम किया जाए ……सुनील बंसल जैसे भ्रष्ट, अहंकारी लोगों व चमचों को संगठन से बाहर कर टूटते मनोबल से पीड़ित भाजपा के ज़मीन पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं का सम्मान किया जाए ….तो शायद कुछ काम बने।

लोग कहने लगे हैं कि CM योगी की ऐसी ईमानदारी का क्या फ़ायदा यदि आज भी भ्रष्टाचार का बोलबाला है …… आमजन का तहसील/थानों में आज भी बिना पैसे के काम नहीं हो रहा…… बालू-मौरंग जैसी बस्तुओं के दाम भी नियंत्रित नहीं हो पा रहे….. अस्पतालों की आज भी हालत पहले जैसे ही हैं…. किसानों को बिजली का और अधिक मूल्य देना पड़ रहा है …..स्कूलों में आज भी पढ़ाई नहीं होती…प्राइवेट स्कूलों की अनियंत्रित फ़ीस अल्प/मध्य आय वर्ग के लिए जी का जंजाल बना है…. RTE ऐक्ट के तहत आज भी २५% बच्चों के निःशुल्क दाख़िला नहीं हो रहे। भाजपा को कभी ख़ुशी कभी ग़म के दौर से बाहर निकलने का एक ही रास्ता है….. काम अधिक करें और बातें कम !!!!

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‘गरुड़’ पर सवार एक ‘विवश’ मुख्यमंत्री! CM योगी, भ्रष्ट मंत्रियों व नौकरशाहों के ‘पिंजड़े’ में क़ैद …… ईमानदारी की कुल्हाड़ी कंधे पर ताने एक ‘लाचार’ लक्कड़हारे के रूप में दिखते है! भाजपा हाईकमांड ने CM योगी को उत्तर प्रदेश में ‘बँटाईदार-मुख्यमंत्री’ (Sharecropper CM) बना के रखा दिया है …. दो उपमुख्यमंत्री- दिनेश शर्मा और केशव मौर्य और ऊपर से एक ‘सुपर-सीएम’ सुनील बंसल …….. दो मंत्रीगण तो ऐसे हैं जो दिल्ली से आए सीधे हाईकमांड के ‘चाकर’ हैं और उनके विभागों की हालत बहुत ख़स्ता है और वे लखनऊ से ज़्यादा दिल्ली में रहते हैं….अर्थात कुल मिलाकर उत्तर प्रदेश में एक ‘Split -Leadership’ (विभाजित नेतृत्व ) है….. और CM योगी को पूर्ण-निर्णय लेने का अधिकार नहीं है….. नौकरशाही भी कन्फ़्यूज़ है कि किसकी सुने और किसकी नहीं….. असली मुख्यमंत्री कौन है ? अर्थात CM योगी एक Caged CM (पिंजरे में क़ैद मुख्यमंत्री) के रूप में विराजमान हैं।

किसी उच्च अधिकारी की पोस्टिंग करने का अधिकार भी दिल्ली व सुनील बंसल को है, CM योगी तो ख़ाली मौहर लगाते हैं….. कुछ प्रमुख सचिवों/आईएएस अधिकारियों को दिल्ली से premature repatriation कर लाया गया है ….. सीधे दिल्ली से ‘क्या करना और क्या नहीं’ बताकर भेजा गया है, वे CM योगी की नहीं अपितु ‘दिल्ली’ की ज़्यादा सुनते हैं और CM योगी की खुफियागिरी भी करते हैं….. ये IAS अधिकारी सचिवालय में ‘दिल्ली-वाले’ अधिकारियों के रूप में जाने जाते हैं। यदि कोई निर्णय CM योगी द्वारा अपने स्तर पर ले भी लिए जाते हैं, ‘दिल्ली-वाले’ ये IAS अधिकारी सारी बातों को अपना रंग देकर दिल्ली में जुगलख़ोरी कर देते हैं।

पंचमतल (CM office) में RSS व संगठन से लाकर कुछ ओएसडी बैठाए गए हैं …. जो केवल खुफियागिरी करते हैं और इन सबने CM योगी के नाक में दम कर रखा हैं….. एक OSD केवल बालू/मौरंग के ठेकों का काम के लिए जिलाधिकारियों को फ़ोन करते रहते हैं , उनके आका ‘सुनील बंसल’ जी स्वमँ जो ठहरे…. उनके call details निकलवा कर देखे जा सकते हैं….. ज़रा इन OSDs का कार्यविभाजन देखा लिया जाए तो पता चलेगा कि ये महानुभाव CM office में वास्तव में करते क्या हैं?

प्रदेश में कई मंत्रियों पर भ्रष्टाचार के गम्भीर आरोप हैं …. खनन, ट्रान्स्पोर्ट, पीडबल्यूडी, शराब, पंजीरी,गन्ना, पंचायती राज आदि विभागों में भ्रष्टाचार रुक नहीं पा रहा है ….. थानों व तहसील स्तर पर बिना पैसे के काम नहीं हो रहे हैं और CM योगी विवशतावश कुछ नहीं कर पा रहे हैं। अन्य दलों से भाजपा में आए लोग दलाली कर रहे हैं और दूसरी तरफ़ भाजपा के ईमानदार/निष्ठावान कार्यकर्ताओं के सही काम भी नहीं हो रहे हैं….. वैसे तो प्रदेश में कई जहाज़ व हेलिकॉप्टर हैं जो अक्सर आसमान में उड़ते देखे जा सकते हैं, लेकिन कितना सुखद है कि उत्तर प्रदेश में CM के मुख्य हवाई जहाज़ का नाम ‘गरुड़’ है …. जो भगवान विष्णु का भी वाहन है।

वाहन तो गरुड़ है लेकिन इस पर सवार मुख्यमंत्री दिल्ली के ‘पिंजड़े’ में क़ैद है ….. इसी लिए स्वमँ ईमानदार होने के बावजूद भी CM योगी भ्रष्ट मंत्रियों व सुनील बंसल के संरक्षण प्राप्त भ्रष्ट उच्च अधिकारियों का कुछ नहीं बिगाड़ पा रहे हैं …. इस लिए CM योगी को गरुड़ पर सवार ….. और हाईकमांड के ‘पिंजड़े-में-क़ैद’ एक मुख्यमंत्री कहा जा रहा है….. कुछ लोग उपचुनावों में हुई हार का ठीकरा CM योगी के सर पर फोड़ने की कोशिश कर रहे हैं और अफ़वाह फैलाईं जा रही है कि CM योगी को २०१९ से पूर्व हटा दिया जाएगा …….. यदि ऐसा हुआ तो प्रदेश में एक ऐसा विद्रोह होगा कि भाजपा को सम्भालना मुश्किल हो जाएगा और २०१९ में भाजपा का बँटाढार होना कोई रोक नहीं पाएगा। CM योगी की प्रदेश में रहकर काम नहीं करने दिया जा रहा है…… आधे समय प्रदेश से बाहर ही रहते हैं। यदि CM योगी को स्वच्छंद होकर काम नहीं करने दिया गया तो गोरखपुर व फूलपुर की तरह २०१९ में भी भाजपा का कहीं यही हश्र फिर न हो जाए !!!

सूर्य प्रताप सिंह का लिखा ये भी पढ़ सकते हैं…

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एबीपी न्यूज़ वाले क्या-क्या वाहियात चीज़ें देते रहते हैं…

Om Thanvi : एबीपी न्यूज़ ने बीच में साहस का इज़हार किया। मेरे मित्र पुण्यप्रसून वाजपेयी को साथ लेकर उसी जज़्बे की पुष्टि की। लेकिन ये क्या? कल मैंने उनका ऐप डाउनलोड किया था। आज उठते ही किसी ख़बर की जगह फ़ोन पर उनकी ओर से यह इबारत नुमायाँ थी – “आज का राशिफल, २५ मार्च रविवार। आज जन्मदिन है तो जान लें कैसी रहेगी आपकी सेहत।”

थोड़ी देर बाद फिर ख़बरों के संसार से मेरे फ़ोन की स्क्रीन पर यह सूचना – “मकर राशि वाले आज न करें कोई शुभ कार्य” …

क्या-क्या वाहियात चीज़ें देते रहते हैं। राशिफल से बेईमानी भरा कोई काम पत्रकारिता में नहीं। लोगों की कमज़ोर भावनाओं से खिलवाड़ का यह एक हथकंडा मात्र है। टीवी ने इसे प्राइम या और क़ीमती चीज़ बना डाला है। मैंने जनसत्ता में राशिफल छापना बंद कर दिया था। कभी दुबारा सम्पादक हुआ (हालाँकि इसकी कोई संभावना नहीं, जनसत्ता के बाद और क्या बचता है!) तो राशिफल को कूड़े में फेंकने का पुण्य कार्य देख लीजिएगा फिर करूँगा!

वरिष्ठ पत्रकार ओम थानवी की एफबी वॉल से.

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एचटी के लिए ‘मालकिन का सम्मान’ बड़ी खबर है, अपने महिला मीडियाकर्मी की पिटाई नहीं

Sanjaya Kumar Singh : हिन्दुस्तान टाइम्स की महिला फोटोग्राफर की पिटाई… यह खबर हिन्दुस्तान टाइम्स में पहले पन्ने पर तो नहीं है… पत्रकारिता की भाषा में यह भी सम्मान है… पुलिस करती रहती है… छोटे शहरों में ज्यादा होता है… दिल्ली में मौका कम मिलता है… पर बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के जमाने में यह खबर महिला मालकिन के हिन्दुस्तान टाइम्स में नहीं है… पर कोलकाता के अखबार दि टेलीग्राफ ने पहले पन्ने पर छापी है…

यहां तक तो कोई खास बात नहीं है… पर दूसरी फोटो हिन्दुस्तान टाइम्स की मालकिन या चेयरपर्सन शोभना भरतीया के सम्मान की है… अब यह कितना महत्वपूर्ण या बड़ा है, आप तय कीजिए… केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने उन्हें यह सम्मान दिया और उनके अपने अखबार में खबर छपी है…

जब अखबार के चेयरपर्सन की फोटो छापनी हो तो फोटोग्राफर पिटे या मरे – प्राथमिकता तो तय है… यही है आज की पत्रकारिता… इसे सिखाने के लिए लोग पैसे लेते हैं और लोग सीखने में जीवन लगा देते हैं… संयोग से आज ही जनसत्ता के साथी, मशहूर पत्रकार आलोक तोमर की याद में एक सेमिनार है… विषय रखा गया है – “सत्यातीत पत्रकारिता : भारतीय संदर्भ”… पत्रकारिता कोई पढ़ाए-सिखाए… लेकिन ये भारतीय संदर्भ वाकई दिलचस्प है…

वरिष्ठ पत्रकार संजय कुमार सिंह की एफबी वॉल से.

इन्हें भी देखें-पढ़ें…

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साथी फोटोग्राफर की पिटाई से दुखी फोटो जर्नलिस्ट्स ने कैमरे दिल्ली पुलिस मुख्यालय के सामने रख दिए

Badal Saroj : हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्टर अनुश्री कल ज़मीन पर गिरे एक लड़के को पीट रहे पुलिसवालों की तस्वीर ले रही थीं। पास खड़े एक अफ़सर ने कहा, “इसका कैमरा तोड़ दो।” फिर अनुश्री का कैमरा छीन लिया गया। एक दूसरी पत्रकार को एक पुलिसवाले ने धक्का दिया और ऐसा करते हुए उसकी छाती दबाई।

बाद में पुलिस ने सफ़ाई दी कि उस पुलिसवाले ने महिला पत्रकार को छात्रा समझ लिया था। अब सवाल यह है कि क्या छात्रा का स्तन दबाना अपराध नहीं है। अगर नहीं है तो सरकार इसकी घोषणा कर दे। पुलिस मैनुअल में इसे शामिल तो नहीं कर दिया गया है? फ़र्स्टपोस्ट के पत्रकार प्रवीण सिंह को हाथ में गहरी चोट लगी। दूसरे पत्रकारों के साथ भी बहुत कुछ हुआ।

ये कैमरे फ़ोटोजर्नलिस्टों ने पुलिस मुख्यालय के सामने रखे हैं। विरोध जताते हुए। कुछ तस्वीरें बहुत बड़ी कहानी कह देती हैं। यह उन्हीं तस्वीरों में से एक है।

पोलिटिकल एक्टिविस्ट बादल सरोज की एफबी वॉल से.

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एचटी की फोटो जर्नलिस्ट अनुश्री के साथ दिल्ली पुलिस ने कैसा किया सुलूक, देखें वीडियो

Shweta R Rashmi :  दिल्ली पुलिस या गुंडागर्दी… ये वीडियो देखिए… कैसे पुलिस मीडिया के साथ वर्ताव कर रही है… आखिर इतनी बेशर्मी कहां से लाते हैं… अनुश्री फोटो जर्नलिस्ट हैं HT में…  किस तरह पुलिस की वर्दी में तैनात ये महिलाएं अनुश्री को पीट रही हैं… देखिए जरा…

क्या अपना दायित्व निभाने के लिए मीडियाकर्मी को फील्ड में जाना हो तो वह साथ-साथ अपनी सुरक्षा का डर भी ले के जाये… क्या अब भी कहेंगे कि मीडिया को काम करने की आज़ादी है… मैं इस घटना की निंदा करती हूं और उचित कार्रवाई की मांग भी… साथ ही पत्रकार सुरक्षा कानून बनाए जाने की मांग करती हूं… इसे आगे बढ़ाइये और इस पत्रकार सुरक्षा कानून के लिए अपनी आवाज दीजिये… देखें वीडियो….

महिला पत्रकार श्वेता आर. रश्मि की एफबी वॉल से.

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सरकारी विज्ञापन वितरण प्रणाली पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने जताई नाराजी, 17 विभागों को नोटिस जारी

उन्मेष गुजराथी, दबंग दुनिया

मुंबई: अभिव्यक्ति के साधनों में से एक विज्ञापन को आधार बनाकर विभिन्न संस्थाएं, व्यक्ति अपने कार्यो को जनता तक पहुंचाने का काम करते हैं। समाचार पत्रों, चैनलों, सोशल मिडिया, रेडियो, मोबाइल के संदेशों के माध्यम से अपनी अभिव्यक्ति दी जा सकती है। विज्ञापन देने वाली कंपनियां किसे विज्ञापन दें, यह तो विज्ञापन देने वाली कंपनी के अधिकार क्षेत्र में रहता है, लेकिन कई बार यह देखने को मिलना है कि अच्छा सर्कुलेशन होने के बवाजूद विज्ञापन देने में दोहरी नीति अपनायी जाती है, जो लोग ऊंची पहुंच वाले हैं, वे अपना स्वार्थ सिद्ध करने में कोई गुरेज नहीं करते।

दरअसल समाचार पत्रों में विज्ञापन देने वाले विभाग भी अपनी जेब भरने की फिराक में रहते हैं। दरअसल, इसके पीछे भी दबाव तंत्र काम करता है। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में ख्यात समाचार पत्रों में विज्ञापन को लेकर जिस तरह की कमीशनखोरी जारी है, उससे यह सिद्ध होता है कि मिडिया क्षेत्र में भी दबावतंत्र हावी है और कुछ बड़े समाचार पत्रों को सभी नियमों को तोड़ते हुए भरपूर विज्ञापन दिए जाते हैं और कुछ समाचार पत्र ऐसे हैं, जिन्हें जानबूझ कर विज्ञापन से वंचित रखा जाता है।

राज्य सरकार के सूचना व जनसंपर्क महानिदेशालय तथा अन्य विभागों की ओर से वितरित किए जाने वाले सरकारी विज्ञापनों में बड़ी मात्रा पर स्वेच्छाधिकार के बूते पर सरकारी नियमों को ताक पर रखते हुए कुछ चुने हुए समाचार पत्रों को ही विज्ञापन दिया जाता है। इस संबध में एडिटर्स फोरम ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसकी सुनवाई  मा. न्यायमूर्ति शंतनु केमकर और न्यायमूर्ति एम.एस. कर्णिक की खंडपीठ के सामने हुई। इस पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने गंभीर नाराजी जताई हैं। बॉम्बे हाईकोर्ट ने महानिदेशक (सूचना और जनसंपर्क), आयुक्त मुंबई महानगर पालिका, प्रबंध निदेशक और उपाध्यक्ष सिडको, मुख्याधिकारी एमआईडीसी समेत कुल 17 विभागों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए हैं।

छोटे अखबारों के साथ पक्षपात : मध्यम और छोटे समाचार पत्रों के विज्ञापन वितरित करते समय काफी पक्षपात किया जाता है। इस संदर्भ में एडिटर्स फोरम ने समय-समय पर सरकार और प्रशासन को इस सबंध में अवगत भी कराया गया था। लेकिन इस पर अभी तक किसी प्रकार को दखल सरकार ने नहीं ली, इस कारण  एडिटर्स फोरम ने इस के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की। कुछ समाचार पत्र तो अपने समाचार पत्र के प्रकाशन की संख्या बहुत ज्यादा बताकर बड़े बड़े विज्ञापन प्रकाशित करके का षडयंत्र रचते हैं। छोड़े बड़े समाचार पत्रों का भेद बताकर लाखों रूपए कमाने का धंधा भी इस क्षेत्र में खूब फल फूल रहा है। विज्ञापन के रूप में चल रहे काले कारनामों पर अंकुश लगाना इसलिए मुश्किल है, क्योंकि उनके साथ बड़े समाचार पत्र का सहयोग प्राप्त है। जब पत्रकारिता को चौथा स्तंभ कहा जाता है तो फिर छोटे, मध्यम तथा बड़े का भेद क्यों किया जाता है।

सूची में नाम नहीं होने पर भी मिलता विज्ञापन : वरिष्ठ अधिवक्ता सतीश तलेकर ने बताया कि जब यह याचिका कोर्ट में प्रलंबित होने पर भी 18 फरवरी को, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों नई मुंबई अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे का भूमि पूजन और मैग्नेटिक महाराष्ट्र  यानि बदलते  महाराष्ट्र और समृद्धि परिवर्तन की कहानियों पर राज्य सरकार की ओर से करोड़ रुपए के विज्ञापन विशेष समाचार पत्रों में दिया गया था। विशेष रूप से जिस समाचार पत्र का नाम सरकार के विज्ञापन सूची में नहीं हैं, उन्हें भी फुल पेज विज्ञापन सरकार की ओर से दिया गया है। यह जानकारी एडिटर्स फोरम ने शॉर्ट एफेडेवीट सी.एच.एस.डब्ल्यू.एस.टी.122/2018 दाखिल करते हुए, इस मामले को बॉम्बे हाईकोर्ट के सामने रखी गई है।

करोड़ों रुपए का विज्ञापन कैसे? : वरिष्ठ अधिवक्ता सतीश तलेकर के अनुसार विज्ञापन देने के दौरान मध्यम और छोटे अखबारों पर अन्याय हो रहा है। नियमों को ताक पर रखते हुए जिन विशेष अखबारों और जिनका नाम सरकारी विज्ञापन सूची में नहीं हैं, ऐसे समाचार पत्रों को करोडों रुपए के विज्ञापन कैसे दिया जाता है? साथ ही कहा है कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की फुल पेज फोटो की जरूरत न होने के बावजूद  विज्ञापनों में फोटो लगाकर करोड़ों रुपए सरकार क्यों खर्च कर रही है? राजनीतिक पार्टियां सरकारी विज्ञापन के जरिए आगामी चुनाव प्रचार कर रही है, ऐसा सवाल भी बॉम्बे हाईकोर्ट के सामने उपस्थित किया है। जिस पर न्यायाधीश केमकर और न्या.कर्णिक इस मामले को गंभीर बताते हुए। 17 विभागों को फौरन नोटिस भेजने के निर्देश दिए हैं।

सरकार विभागों के अधिकारी और नेताओं के मिली भगत के चलते अपने हित में समाचार प्रकाशित करवाने के लिए अखबारों को करोडों रुपए का विज्ञापन दिया जाता है। बहुत से समाचार पत्रों का सरकारी विज्ञापन सूची में नाम भी नहीं हैं, बावजूद इसके  मिली भगत के कारण लाखों रुपए के विज्ञापन दिए जा रहे हैं। इसके चलते छोटे समाचार पत्रों से साथ अन्याय हो रहा हैं। सरकार के इस रवैए से ऐसा लग रहा है कि सरकार लोकतंत्र का गला घोट रही है।

-सतीश तलेकर, वरिष्ठ अधिवक्ता

नोटिस पाने वाले 17 विभागों के नाम : 1) मुख्य सचिव 2) सचिव सामान्य प्रशासन (मावज) 3) सचिव राजस्व व वन 4) सचिव ग्रामीण विकास 5) सचिव समाज कल्याण 6) बस्ट प्रशासन 7) सचिव शहरी विकास 8) महानिदेशक सूचना और जनसंपर्क 9) आयुक्त समाज कल्याण 10) सभी निदेशक, उप निदेशक, जिला सूचना अधिकारी, (सूचना और जनसंपर्क) 11) आयुक्त ( राजस्व ) 12) आयुक्त मुंबई मनपा 13) आयुक्त नागपुर मनपा 14) आयुक्त बिक्री कर विभाग 15) जिला सूचना अधिकारी वर्धा 16) प्रबंध निदेशक तथा उपाध्यक्ष सिडको 17) मुख्य कार्यकारी अधिकारी एमआईडीसी इन विभागों को नोटिस जारी करने के आदेश बॉम्बे हाईकोर्ट ने दी है।

सरकार और राजनीतिक पार्टियों के हस्तक्षेप की वजह से विशेष समाचार पत्रों को विज्ञापन देने का काम किया जा रहा है। साथ ही नियमों का भी उल्लंघन करके लाखों रुपए के विज्ञापन अपने हितचिंतक समाचार पत्रों के दिए जा रहा हैं, जिससे लोकतंत्र खतरे में आ गया है। एडिटर्स फोरम ने कई बार राज्य सरकार और संबंधित विभागों को इस बारे में अवगत भी किया था, लेकिन सरकार ने इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया, इसके चलते बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। बॉम्बे हाईकोर्ट ने 17 विभागों को फौरन नोटिस भेजने के निर्देश दिए हैं।

-सतीश तलेकर, वरिष्ठ अधिवक्ता

लेखक Unmesh Gujarathi दबंग दुनिया, मुंबई संस्करण के स्थानीय संपादक हैं. उनसे संपर्क 9322755098 के जरिए किया जा सकता है.

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एबीपी न्यूज का महापतन, इंडिया टीवी ने स्थिति सुधारी

एबीपी न्यूज के इतने बुरे दिन आएंगे, किसी ने सोचा न था. यह चैनल कभी नंबर दो पर हुआ करता था. आजकल यह छठें स्थान पर गिरा पड़ा है. इंडिया टीवी की टीआरपी लगातार बढ़ रही है. यह चैनल नंबर दो पर होने के बावजूद टीआरपी में सुधार करने में सफल हो रहा है. अंबानी का चैनल न्यूज एट्टीन इंडिया नंबर तीन पर कामय है.

देखें इस साल के ग्यारहवें हफ्ते के आंकड़े….

Weekly Relative Share: Source: BARC, HSM, TG:CS15+,TB:0600Hrs to 2400Hrs, Wk 11
Aaj Tak 16.8 up 0.3
India TV 14.9 up 1.0
News18 India 12.6 dn 0.3
Zee News 11.8 same 
News Nation 10.5 up 0.1
ABP News 10.4 dn 1.9
India News 9.1 up 0.2
News 24 6.9 up 0.1
Tez 3.2 up 0.4
NDTV India 2.0 up 0.1
DD News 1.7 same 

TG: CSAB Male 22+

Aaj Tak 16.8 up 0.6
India TV 14.9 up 0.6
News18 India 13.8 dn 0.4
Zee News 12.7 dn 0.8
ABP News 9.8 dn 1.2
News Nation 9.5 up 0.4
India News 8.8 up 0.8
News 24 6.5 dn 0.2
Tez 3.3 up 0.2
NDTV India 2.5 same 
DD News 1.3 same

इससे पहले वाले हफ्ते की टीआरपी जानें…

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मृणाल पांडे नेशनल हेराल्ड और पुण्य प्रसून एबीपी न्यूज से जुड़े, ज़फ़र आगा को प्रमोशन

पत्रकार मृणाल पांडे को नेशनल हेराल्ड का वरिष्ठ संपादकीय सलाहकार बनाया गया है. मृणाल पांडे इससे पहले हिन्दुस्तान अखबार की समूह संपादक रही हैं. मृणाल प्रसार भारती की चेयरपर्सन भी रह चुकी हैं. 

वरिष्ठ पत्रकार ज़फ़र आग़ा को प्रमोट करके नेशनल हेराल्ड का एडिटर इन चीफ बना दिया गया है. यह पद नीलाभ मिश्र के निधन से खाली हो गया था. जफर आगा अभी तक समूह के उर्दू प्रकाशन ‘कौमी आवाज’ के एडिटर-इन-चीफ थे. वे अब पूरे ग्रुप के एडिटर इन चीफ बन गए हैं.

‘आजतक’ से इस्तीफा देने के बाद पुण्य प्रसून बाजपेयी अब एबीपी न्यूज के हिस्से बन गए हैं. पुण्य प्रसून जल्द ही एबीपी न्यूज में अपने शो केसाथ प्रकट होंगे.

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उत्तराखंड की भाजपा सरकार पत्रकारों की मान-मर्यादा से खुलेआम खेलने लगी, देखें तस्वीरें

उत्तराखंड की डबल इंजन वाली भाजपा सरकार सत्ता के घमंड में लगातार पत्रकारों की तौहीन करने पर तुली हुई है। उत्तराखंड सचिवालय में पत्रकारों के प्रवेश पर रोक लगाने के बाद राज्य में पत्रकारों की मान मर्यादा के साथ भाजपा सरकार व उनके कार्यकर्ता खेलने पर तुले हुए हैं। उत्तराखंड के श्रीनगर गढ़वाल में एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों को बैठने तक के लिए जगह नहीं मिली। कार्यक्रम के कवरेज के दौरान जब पत्रकार तेज घूप में थक गये तो वे वहीं जमीन पर बैठ गये।

कुछ वरिष्ठ पत्रकारों के बैठने के बाद एक-एक कर अन्य पत्रकार भी उनके साथ बैठ गये। मंच से ये नजारे देख प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत, वन मंत्री हकर सिंह रावत, पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज व उच्च शिक्षा मंत्री मुस्कराते रहे। पत्रकारों के लिए बनी दीर्घा में भाजपा के नेता बैठे हुए थे।

पत्रकारों के जमीन पर बैठने के बाद वे एक दूसरे को इशारे कर ठहाके मारते रहे। इससे पूर्व भी भाजपा के एक बडे कार्यक्रम में पत्रकारों की इसी तरह की तौहीन की गयी। वहीं मुख्यमंत्री के सुरक्षा कर्मी भी लगातार पत्रकारों से अभद्रता करने पर तुले हुए हैं। सोमवार की घटना की चमोली, रूद्रप्रयाग, श्रीनगर, पौडी, उत्तरकाशी जनपद के पत्रकारों ने भी घोर निंदा की है। कुछ पत्रकारों ने सोशल मीडिया पर भी इस घटना की आलोचना की है।

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सुप्रीम कोर्ट ने ‘हिंदुस्तान’ की मालिकन शोभना भरतिया पर सवा लाख रुपये का हर्जाना ठोका

शोभना भरतिया

दैनिक हिन्दुस्तान फर्जी संस्करण और 200 करोड़ का सरकारी विज्ञापन घोटाला प्रकरण, सुनवाई की अगली तारीख 16 अप्रैल 2018 तय…. सुप्रीम कोर्ट ने 16 मार्च 2018 को एक ऐतिहासिक आदेश में मेसर्स हिन्दुस्तान मीडिया वेन्चर्ज लिमिटे, नई दिल्ली की चेयरपर्सन व पूर्व कांग्रेस सांसद शोभना भरतिया को सवा लाख रूपए की हर्जाना राशि के भुगतान का आदेश दिया। मेसर्स हिन्दुस्तान मीडिया वेन्चर्ज लिमिटेड नामक कंपनी देश में दैनिक हिन्दुस्तान नाम के हिन्दी दैनिक का प्रकाशन करती है।

कोर्ट ने पीटिशनर शोभना भरतिया को आदेश दिया कि वह हर्जाना राशि से एक लाख रूपया वार विडोज ऐसोसियेशन और पच्चीस हजार रुपया रेस्पोन्डेन्ट नं0. 02 मन्टू शर्मा को भुगतान करें। सुप्रीम कोर्ट के माननीय जस्टिस जे.  चेलामेश्वर और माननीय जस्टिस संजय किशन कौल की पीठ ने 16 मार्च 2018 को दोनों पक्षों को सुनने के बाद उपरोक्त आदेश सुनाया और इस मुकदमे की सुनवाई की अगली तारीक्ष 18 अप्रैल 2018 निर्धारित कर दी।

सुप्रीम कोर्ट ने 16 मार्च 2018 को पारित अपने आदेश में लिखा है- ‘कोर्ट अनुभव करता है कि स्पेशल लीव पीटिशन, क्रिमिनल 1603। 2013 , जो अब क्रिमिनल अपील नं0. 1216। 2017 के नाम से जाना जाता है, में पीटिशनर  को अपने वरीय अधिवक्ता की अनुपस्थिति में बहस के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए थी. इसलिए कोर्ट रेस्पोन्डेन्ट नं. 2 मन्टू शर्मा को क्षतिपूर्ति के लिए  पीटिशनर शोभना भारितया को सवा लाख हर्जाना राशि के भुगतान का आदेश देता है।”

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में आगे लिखा है- ”गत 18 जनवरी 2018 को भी न्यायालय में बहस इसलिए स्थगित कर दी गई थी क्योंकि पीटिशनर शोभना भरतिया के विद्वान वरीय अधिवक्ता न्यायालय में अनुपस्थित थे। रेस्पोन्डेन्ट नं. 02 के विद्वान वरीय अधिवक्ता ।श्रीकृष्ण प्रसाद। ने न्यायालय से प्रार्थना की थी कि मुकदमे का निबटारा त्वरित होना चाहिए। न्याय का तकाजा था कि कोर्ट ने पीटिशनर शोभना भरतिया और रेस्पोन्डेन्ट नं. 01 बिहार सरकार को न्यायालय में अपना-अपना पक्ष रखने के लिए 14 मार्च 2018 की अगली सुनवाई तिथि निर्धारित की थी।”

रेस्पोन्डेन्ट नं. 2 मन्टू शर्मा की ओर से बहस में हिस्सा ले रहे वरीय अधिवक्ता श्रीकृष्ण प्रसाद ने बहस में हिस्सा न लेने के लिए पीटिशनर शोभना भरतिया पर बड़ा हर्जाना लगाने और उनका और बिहार सरकार  का पक्ष सुन लेने की प्रार्थना की। अधिवक्ता श्रीकृष्ण प्रसाद ने कोर्ट को सूचित किया कि पीटिशनर इस मुकदमे में सुनवाई से कतरा रही हैं और रेस्पोन्डेन्ट नं. 02 मन्टू शर्मा के अधिवक्ता नई दिल्ली से लगभग दो हजार किलोमीटर दूर बिहार के मुंगेर जिला मुख्यालय से हर तिथि पर सुप्रीम कोर्ट में विगत पांच वर्षों से कोर्ट की कार्रवाई में हिस्सा लेते आ रहे हैं लेकिन सुनवाई लगातार टलती जा रही है।

सुप्रीम कोर्ट में 16 मार्च 2018 को बहस के दौरान पीटिशनर शोभना भरतिया की ओर से विद्वान वरीय अधिवक्ता मुकुल रोहतगी, रंजीत कुमार, सिद्धार्थ लुथरा, आर एन करंजावाला, संदीप कपूर, देवमल्य बनर्जी, विवेक सूरी, ए0एस0 अमन, वीर इन्दरपाल सिंह संधु , मनीष शर्मा, अविरल कपूर, करण सेठ, आई0 खालिद, माणिक करंजावाला, कार्तिक भटनागर, रेस्पोन्डेन्ट नं. 01 बिहार सरकार की ओर से विद्वान अधिवक्ता ई0सी0 विद्यासागर व मनीष कुमार और रेस्पोन्डेन्ट नं. 02 मन्टू शर्मा की ओर से विद्वान वरीय अधिवक्ता श्रीकृष्ण प्रसाद. शकील अहमद, प्रत्युष प्रातीक, उत्कर्ष पांडेय और राज किशोर चौधरी ने भाग लिया।

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केंद्रीय सूचना आयोग ने आईपीएस अफसरों पर मुकदमे सार्वजनिक करने का आदेश दिया

केंद्रीय सूचना आयोग ने गृह मंत्रालय को आईपीएस अफसरों के खिलाफ आपराधिक मुकदमों को तत्कल सार्वजनिक करने के आदेश दिए हैं.  यह निर्देश सूचना आयुक्त यशोवर्धन आजाद ने लखनऊ स्थित एक्टिविस्ट डॉ नूतन ठाकुर द्वारा दायर आरटीआई अपील में दिए. जहाँ गृह मंत्रालय ने सूचना देने से मना कर दिया था, आयोग ने कहा कि कैडर नियंत्रण प्राधिकारी के रूप में गृह मंत्रालय की आईपीएस अफसरों के सेवा संबंधी मामलों को देखने की जिम्मेदारी है, जिसमे विभागीय जाँच तथा आपराधिक मामले शामिल हैं. अतः आयोग ने मंत्रालय को इसकी सूची बनाकर नूतन को प्रदान करने के आदेश दिए हैं.

इसी तरह जहाँ मंत्रालय ने आईपीएस अफसरों की कैडर परिवर्तन संबंधी जानकारी उनकी व्यक्तिगत सूचना होने ने नाम पर देने से मना कर दिया था, आयोग ने कहा कि कैडर परिवर्तन का मामला लोक प्रशासन से जुड़ा है और इसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए. आयोग ने आईपीएस अफसरों के खिलाफ विभागीय जाँच की भी वर्षवार सूचना उपलब्ध कराने के निर्देश दिए, यद्यपि उसने शेष सूचना व्यक्तिगत सूचना के नाम पर मना कर दिया.

CIC: Publish data of criminal cases on IPS

The Central Information Commission (CIC) has directed the Ministry of Home Affairs (MHA) to publish data on criminal cases against Indian Police Service (IPS) officers. This direction was given by Information Commissioner Yashovardhan Azad in a RTI appeal filed by Lucknow based activist Dr Nutan Takur. While MHA had denied to provide this information, the Commission said that as the cadre controlling authority, MHA’s role is to look after the conditions of service of IPS officers, including departmental enquiries and criminal cases. Hence, the MHA must draw such list and provide it to Nutan.

Similarly, while the MHA had denied information on Cadre change of IPS officers calling it personal information, the Commission disagreed with it, saying that transfer of cadre affects public administration and must be placed in the public domain. The Commission also directed MHA to furnish year wise disciplinary action taken against IPS officers, though refusing to provide any further information as being beach of privacy.

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इस मीडिया समूह ने अपने कर्मचारियों का स्‍वास्‍थ्‍य बीमा तक नहीं करवाया है…

पत्रकार की मौत : क्‍या संस्‍थान की कवरेज से भर जाएगा परिवार का पेट! शिमला के एक वरिष्‍ठ पत्रकार की मौत पर उसके मीडिया संस्‍थान ने खबरें और संपादकीय लिख कर श्रद्धांजलि दी। पूरा प्रदेश गमगीन हुआ। लेकिन क्‍या इससे उसके परिवार का भविष्‍य संवर जाएगा। ऐसे वक्‍त में एक कर्मचारी को संस्‍थान से आर्थिक मदद के तौर पर जो मिलना चाहिए क्‍या वह मिलेगा।

ये सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्‍योंकि प्रदेश का अपना और नंबर एक मीडिया समूह होने का दंभ भरने वाले इस अखबार ने अपने कर्मचारियों के भविष्‍य की चिंता न करते हुए न तो कर्मचारी बीमा करवा रखा है और न ही स्‍वास्‍थ्‍य बीमा । ऐसे वक्‍त में इस पत्रकार के परिवार के भविष्‍य की आर्थिक मदद कैसे होगी। सरकार के आगे हाथ पसारे जाएं तो भी इतनी राशि नहीं मिल पाएगी जितनी एक कंपनी ग्रुप इंश्‍योरेंस के माध्‍यम से अपने कर्मचारियों को दिला सकती है। शर्मनाक बात यह है कि प्रदेश के पत्रकार सरकार के आगे हाथ पसारे तो दिख जाएंगे, मगर अखबार मालिकों से अपना वैधानिक हक मांगने की इनकी हिम्‍मत नहीं है।

अब एक अन्‍य मामले की चर्चा करते हैं। धर्मशाला में एक राष्‍ट्रीय दैनिक अखबार के पत्रकार के साथ ही ऐसा ही हादसा हुआ था। उसके परिवार की चिंता में कई तथाकथित हमदर्दों ने होहल्‍ला किया कि उसके परिवार का क्‍या होगा। बैठकें हुईं और हाथ पसारे हुए परिवार की मदद के लिए सरकार और दूसरे लोगों से मदद जुटाने की कोशिश की गई, जो रकम जुटाई गई उससे शायद ही परिवार का राशन भी आ पता।

फिर आई संस्‍थान की बारी, तो संस्‍थान ने जो मदद की उससे उसका परिवार आर्थिक संकट की चिंता से मुक्‍त हुआ। परिवार को संस्‍थान द्वारा करवाए गए बीमा और ग्रेच्‍युटी इत्‍यादि के माध्‍यम से करीब तीस से चालीस लाख रुपये तक की राशि प्रदान की गई। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्‍या शिमला के पत्रकार के परिवार को धर्मशाला की तरह संस्‍थान से इतनी आर्थिक मदद मिल पाएगी तो उसका जवाब ना में ही मिलता है। ऐसे में परिवार क्‍या पहले पन्‍ने से लेकर भितर के पन्‍नों में छापी गईं श्रद्धांजलि की खबरों को ताउम्र संभाले गुजारा करेगा!

वरिष्‍ठ पत्रकार रविंद्र अग्रवाल की फेसबुक वॉल से.

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एचटी मीडिया ने मजीठिया वेज बोर्ड के आदेश को लागू नहीं किया : श्रम विभाग

मोहाली से खबर है कि श्रम विभाग ने एक पत्र जारी कर सूचित किया है कि एचटी मीडिया ने मीडियाकर्मियों की तनख्वाह रिवाइज करने के सरकार और कोर्ट के आदेश को लागू नहीं किया है.

मोहाली स्थित एचटी मीडिया में कार्यरत आईटी एक्जीक्यूटिव हरमनदीप सिंह ने मजीठिया वेज बोर्ड को लेकर एक केस किया हुआ है. इसी केस की सुनवाई के तहत जारी एक पत्र में एचटी मीडिया के कानून और कोर्ट विरोधी रवैये को उजागर किया गया है.

साथ ही यह भी बताया गया है कि हरमनदीप का केस अब इंडस्ट्रियल ट्रिब्यूनल कम लेबर कोर्ट में स्थानांतरित किया जाता है जहां कई बिंदुओं पर सुनवाई होगी.

देखें पत्र की प्रति…

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शिमला के पत्रकार सुनील शर्मा और जयपुर के मीडियाकर्मी वीरेंद्रपाल का निधन

दिव्य हिमाचल के ब्यूरो चीफ सुनील शर्मा का अचानक यूँ चले जाना हृदय विदारक है। अच्छे लोग कभी नहीं मरते। वो अपनी माद्दी जिस्मानी सूरत से तो आज़ाद हो जाते हैं लेकिन उनकी यादें दिलों में हमेशा घर किए रहती हैं और हम वक्त-बेवक्त उन्हें याद करते रहते हैं। निश्चय ही यह एक बहुत दुखद सूचना है ! कम उम्र में अनुज समान एक जुझारू, कर्मठ पत्रकार सुनील शर्मा का यूं जाना पीड़ित करता है ! हमें उनकी कमी हमेशा सालती रहेगी ! इस नौजवान संजीदा पत्रकार को मेरी विनम्र श्रद्धांजलि!

-शिमला के वरिष्ठ पत्रकार कृष्ण भानु की एफबी वॉल से.

जयपुर से सूचना है कि राजस्थान पत्रिका के आईटी विभाग में कार्यरत वीरेन्द्रपाल सिंह (वीरू जी) का निधन शनिवार को हो गया। उनकी अन्तिम यात्रा रविवार को एच-75-ए, झकोरेश्वर मार्ग, बनीपार्क से चांदपोल मोक्षधाम पहुंची। वीरेन्द्रपाल को 17 मार्च को ऑफिस में शाम करीब साढ़े सात बजे डबल हार्टअटैक आया था। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें। इससे पहले भी मशीन में कार्यरत सूर्य कुमार जी पर काम का भारी दबाव रहा, उनके निधन के बाद गुलाब सेठ ने परिवार की सुध तक नही ली. पत्रिका में उन पर काम का काफी दबाव था… इस वजह से टेंशन में थे.

-एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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केजरीवाल ने माफी मांगने का जो रास्ता ढूंढा है, मेरी राय में वह सर्वश्रेष्ठ है : डॉ. वेदप्रताप वैदिक

डॉ. वेदप्रताप वैदिक

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पहले विक्रमसिंह मजीठिया और अब नितिन गडकरी से माफी मांगकर भारत की राजनीति में एक नई धारा प्रवाहित की है। यह असंभव नहीं कि वे केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली और अन्य लोगों से भी माफी मांग लें। अरविंद पर मानहानि के लगभग 20 मुकदमे चल रहे हैं। अरविंद ने मजीठिया पर आरोप लगाया था कि वे पंजाब की पिछली सरकार में मंत्री रहते हुए भी ड्रग माफिया के सरगना हैं।

गडकरी का नाम उन्होंने देश के सबसे भ्रष्ट नेताओं की सूची में रख दिया था। इसी प्रकार अरुण जेटली पर भी उन्होंने संगीन आरोप लगा दिए थे। इस तरह के आरोप चुनावी माहौल में नेता लोग एक-दूसरे पर लगाते रहते हैं लेकिन जनता पर उनका ज्यादा असर नहीं होता। चुनावों के खत्म होते ही लोग नेताओं की इस कीचड़-उछाल राजनीति को भूल जाते हैं लेकिन अरविंद केजरीवाल पर चल रहे करोड़ों रु. के मानहानि मुकदमों ने उन्हें तंग कर रखा है।

उन्हें रोज़ घंटों अपने वकीलों के साथ मगजपच्ची करनी पड़ती है, अदालतों के चक्कर लगाने पड़ते हैं और सजा की तलवार भी सिर पर लटकी रहती है। ऐसे में मुख्यमंत्री के दायित्व का निर्वाह करना कठिन हो जाता है। इसके अलावा निराधार आरोपों के कारण उन नेताओं की छवि भी खराब होने की संभावनाएं हमेशा बनी रहती हैं। ऐसी स्थिति से उबरने का जो रास्ता केजरीवाल ने ढूंढा है, वह मेरी राय में सर्वश्रेष्ठ है। ऐसा रास्ता यदि सिर्फ डर के मारे अपनाया गया एक पैंतरा भर है तो यह निश्चित जानिए कि अरविंद की इज्जत पैंदे में बैठ जाएंगी।

यह पैंतरा इस धारणा पर मुहर लगाएगा कि केजरीवाल से ज्यादा झूठा कोई राजनेता देश में नहीं है लेकिन यदि यह सच्चा हृदय-परिवर्तन है और माफी मांगने का फैसला यदि हार्दिक प्रायश्चित के तौर पर किया गया है तो यह सचमुच स्वागत योग्य है। यदि ऐसा है तो भविष्य में हम किसी के  भी विरुद्ध कोई निराधार आरोप अरविंद केजरीवाल के मुंह से नहीं सुनेंगे। केजरीवाल के इस कदम का विरोध उनकी आप पार्टी की पंजाब शाखा में जमकर हुआ है लेकिन वह अब ठंडा पड़ रहा है। इस फैसले की आध्यात्मिक गहराई को शायद पंजाब के ‘आप’ विधायक अब समझ रहे हैं। यह फैसला देश के सभी राजनेताओं के लिए प्रेरणा और अनुकरण का स्त्रोत बनेगा।

लेखक डॉ. वेदप्रताप वैदिक देश के वरिष्ठ पत्रकार और स्तंभकार हैं.

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‘न्यूज तक’ नाम से यूट्यूब पर आया इंडिया टुडे ग्रुप, अंजना ओम कश्यप हैं कैप्टन

‘न्यूज तक’। जी हां, ये हमारे इंडिया टु़डे ग्रुप का यू ट्यूब चैनल है। बहुत ही कम वक्त में इसके सब्सक्राइबर्स की तादाद पांच लाख से ज्यादा हो गई है, जबकि इसके व्यूज की संख्या साढ़े 9 करोड़ से भी पार कर गई है। यही नहीं, ‘न्यूज तक’ के फेसबुक पेज के फॉलोअर्स की तादाद 10 लाख से भी ज्यादा हो गई। नौजवानों में ‘न्यूज तक’ जबरदस्त तरीके से लोकप्रिय हो रहा है।

अंजना ओम कश्यप

‘न्यूज तक’ की कोई भारी भरकम टीम नहीं है। छोटी सी टीम है, जो दिन रात जुटी रहती है और इस टीम की कैप्टन हैं अंजना ओम कश्यप। उनकी अगुवाई में उनकी टीम फ्रंटफुट पर बैटिंग करती है। अंजना खुद पूरे दिन ‘न्यूज तक’ की प्लानिंग से लेकर लाइव तक जूझती रहती हैं।

शाम को ‘न्यूज तक’ पर उनका लाइव शो होता है। दर्शकों के सवालों का लाइव जवाब देती हैं। उस वक्त तो मैसेजेज की जैसे बारिश सी हो जाती है, हजारों की तादाद में लोग उन्हें लाइव देख रहे होते हैं। ये अंजना की लोकप्रियता की मिसाल है। दर्शक उनसे कई बार पर्सनल सवाल भी पूछ लेते हैं, मसलन वो खुद को फिट रखने के लिए क्या करती हैं, उनका डाइट प्लान से लेकर उनकी कार कौन सी है, ये भी पूछ लेते हैं। अंजना सहजता से उन्हें जवाब भी देती हैं।

‘न्यूज तक’ की इस कामयाबी के पीछे अगर उनकी टीम की मेहनत है तो अंजना की अगुवाई भी इस कामयाबी के पीछे एक बहुत बड़ी ताकत है। अंजना ओम कश्यप से मेरा साथ करीब 10 बरसों का है। बहुत अच्छे रिश्ते हैं। अंजना बहुत अच्छी प्रोफेशनल हैं तो व्यक्तिगत रूप से भी हर समय मददगार। टीवी पर कई बार उनका बहुत आक्रामक अंदाज दिखता है, लेकिन निजी जिंदगी में वे बेहद सहज हैं और प्रोफेशनल जिंदगी में बेहद सजग।

टीवी पर उनके तेज तर्रार तेवर के लाखों प्रशंसक हैं, तो बहुतों को उनका ये अंदाज चुभता भी है। प्रशंसा और विरोध एक कामयाब एंकर की जिंदगी का हिस्सा भी हैं। बहरहाल ‘न्यूज तक’ की इस कामयाबी के लिए अंजना और उनकी टीम को मेरी तरफ से बहुत-बहुत बधाई। अगर आपने अब तक ‘न्यूज तक’ न देखा हो तो नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके देख सकते हैं…

https://www.youtube.com/channel/UCAUNFgpgVisKPL3yq_-Nj-Q

आजतक में वरिष्ठ पद पर कार्यरत पत्रकार विकास मिश्र की एफबी वॉल से.

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