Galgotia College demands Of Illegal Fees of 45000

We the Students (Course – MCA & MBA) of Galgotias Institute Of Management & technology are facing a very critical issue. The College is asking us to pay 45000 as arrears fees as they won some case but we were never informed during our entire course duration. We took admission in 2010 in this college, & We paid full fees for all the three years which is the duration of course (MCA), We passed in June 2013 but after a few days we received a notice from the college to pay 45000 due arrears fees, Failure to do so will result in with-holding of the final degree. We were never told during those 3 years that the fees we were paying is provisional.

इस IPS ने गर्लफ्रेंड का साथ ना छोड़ा, दो करोड़ दहेज से मुंह फेर लिया

Amitabh Thakur

एक युवा आईपीएस अफसर की सोच ने हम सबका दिल जीत लिया : पिछले दिनों मेरी मुलाकात एक नए, अविवाहित आईपीएस अधिकारी से हुई. बातचीत के क्रम में उनसे पूछ बैठा- ‘शादी हो गयी?’ उत्तर मिला- ‘नहीं, अभी नहीं’. मैं यूँ ही आगे बढ़ा- ‘क्यों, कब तक शादी होनी है?’. उनका जवाब- ‘अभी तीन साल नहीं, वर्ष 2014 में शादी होगी.’

अपने-अपने युद्ध (9)

शांति प्रिय और आध्यात्मिक स्वभाव वाले आईएएस अफसर मुकेश पांडेय बिहार में बक्सर के जिला मजिस्ट्रेट हुआ करते थे. एक शाम वे सर्किट हाउस में अकेले रुकते हैं और खुद का एक वीडियो रिकार्ड करने लगते हैं. यह वीडियो अब उनके जीवन का अंतिम वीडियो बन चुका है. यह वीडियो उनकी निजी जिंदगी की दिक्कतों और जीवन के प्रति उनके नजरिए का गवाह बन जाता है. सुसाइड से ठीक पहले रिकार्ड किए गए इस वीडियो में उन्होंने पांच मिनट में ही काफी सारी बातें कही हैं.

अपने-अपने युद्ध (10)

बेचारा. पहले तो गिर गया. दाएं बाएं नहीं बल्कि गहरे नाले में. उसे निकालने फायर ब्रिगेड वाले आए और अंदर घुसे. उसे निकालने से पहले नाले में ही फायर ब्रिगेड कर्मियों ने जमकर पीटा. जब उसे बाहर निकाल दिया गया तो अब बारी पुलिस वालों की थी. इसे ही कहते हैं एक शराबी का बुरा दिन. इस महान शराबी का नाम है सुखवीर. मामला आगरा में थाना लोहामंडी क्षेत्र के नालबंद चौराहे का है. यहीं पर गहरे नाले में सुखवीर नाम यह शराबी नशे की हालत में गिर गया था.

अपने-अपने युद्ध (8)

भाग (7) से आगे… तब वह दिल्ली में जंगपुरा एक्सटेंशन में रहता था। घर पहुंच कर संजय ने रगड़-रगड़ कर नहाया। पर रीना की देह गंध जैसे उसके अंग-अंग में समा गई थी, निकल ही नहीं रही थी। “रात भर कहां थे?” होंठ गोल करते हुए उसके ऊपर रहने वाले श्रीवास्तव ने पूछा। श्रीवास्तव भी …

अपने-अपने युद्ध (7)

भाग (6) से आगे… नीला लंबी छुट्टी पर चली गई। पर अचानक महीने भर में ही छुट्टियां कैंसिल कर वह वापस आ गई। क्या तो, वह लीव विदआउट पे हो रही थी। लगातार बच्चे पैदा करने में छुट्टियां पहले ही खत्म हो चुकी थीं। और घर वालों को उसकी तनख्वाह की आदत पड़ गई थी। …

अपने-अपने युद्ध (6)

पार्ट (5) से आगे…. एक बार राजेश खन्ना नाइट दिखाने की तल्ख ने उसे पेशकश की। वह खुशी-खुशी मान गई। तल्ख ने राजेश खन्ना नाइट में दो मिले कार्डों में से एक उसे दिया। दोनों पर सीट नंबर थे। दोनों ही सीटें साथ की थीं। तल्ख मगन था टेलीफोन आपरेटर को कार्ड देकर कि बगल …

अपने-अपने युद्ध (5)

भाग (4) से आगे… शाम को उसका मन हुआ कि आज वह नाटक देखने न जाए। पर चूंकि पंजाबी लेखिका अजीत कौर की आत्मकथा “खानाबदोश” का मंचन था सो वह जाने का लोभ छोड़ नहीं पाया। खानाबदोश वैसे भी उसने पढ़ रखी थी। खानाबदोश के पहले उसने दो और महिला लेखिकाओं की आत्मकथा पढ़ी थी। …

अपने-अपने युद्ध (4)

भाग (3) से आगे…. संजय अब तक बस से उतर कर अपने घर वाले बस स्टाप पर आ गया था। उसने बस स्टाप वाली पान की गुमटी से सिगरेट की डब्बी खरीदी और एक माचिस भी। हालांकि रस्सी यहां भी जल रही थी। पर पता नहीं क्यों रस्सी से सिगरेट सुलगाने में उसका मजा खराब …

अपने-अपने युद्ध (3)

भाग-2 से आगे…. उस रात अजय बड़ी देर तक मैकवेथ के डायलाग्स सुनाता रहा कई-कई अंदाज में। डायलाग्स सुनते-सुनते संजय दुष्यंत कुमार के शेर सुनाने लग गया। फिर जाने कब फिल्मी गानों पर बात आ गई और दोनों गाने गुनगुनाने लगे। एक बार हेमंत के गाए किसी गीत पर झगड़ा हो गया कि साहिर ने …

अपने-अपने युद्ध (2)

भाग-1 से आगे…. खैर, अजय अलका को लेकर बाहर आया। बाहर आकर अलका ने अपने घुंघरू उतारे। और दूसरे दिन उसने कथक नृत्य को तो नहीं पर कथक केंद्र को अलविदा कहने की सोची। अजय को उसने रोते-रोते यह बात बताई। जो अजय को भी नहीं भाई। अजय ने उसे ढांढस बंधाया और कहा कि …

अपने-अपने युद्ध (1)

वह तब भी फ्रीलांसर था जब देवेंद्र से बारह बरस पहले मिला था। और आज जब फिर देवेंद्र से मिल रहा था तो फ्रीलांसिंग भुगत रहा था। फर्क बस यही था कि तब वह दिल्ली में मिला था और अब की लखनऊ में मिल रहा था। …..और देवेद्र? कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद …