अयोध्या के ‘लपके’!

चंद्रप्रकाश गुप्ता-

10 जनवरी को अयोध्या गया था। अयोध्या में घुसते ही 2-3 नौजवानों ने कार रुकवा कर 200 रुपये में अयोध्या दर्शन का ऑफर दिया। हमने मना कर दिया।

फिर हम पहुंचे हनुमान गढ़ी। वहां फिर एक ने ऑफर दिया मात्र 30 रुपये का। हमारे मित्र Brijendra Singh Chauhan ने जिज्ञासावश स्वीकार कर लिया ये सोच कर इसे ज्यादा ही देंगे।

उस नौजवान ने अपनी बाइक हमारी कार के आगे लगा दी और पीछे चलने के लिए कहा। वो हमें कनक भवन वाली गली में, कनक भवन के लिए सीधे हाथ की तरफ मुड़ते हैं, वहां से लगभग 200 मीटर आगे बायीं तरफ एक मंदिर में ले गया और बताया ये सीता रसोई है। मैं फोटो नहीं ले पाया।

अंदर बहुत सारी पत्थर की शिला पट्टिया रखी थी। वहां पर एक पुरोहित ने पूजा अर्चना शुरू करवाई। मैं एक तरफ खड़ा हो कर सब देख रहा था। अपने साथियों से पहले ही बोल चुका था कुछ गड़बड़ है। पुरोहित ने अंत मे संकल्प के साथ धन राशि बोलने के लिए कहा। जो लोग पूजा में बैठे थे उन्होंने कहा गुप्त दान करेंगे। इस पर पुरोहित नाराज हो गए।

सभी लोग उठ कर चल दिये। नौजवान भी साथ आया और रामजन्म भूमि का रास्ता बता कर बोला मेरी सेवा यहीं समाप्त है। हमने कहा भाई अभी तो कुछ भी नही दिखाया, पर बहुत ही बदतमीजी से वो बहुत कुछ बोला। हमने भी कहा अभी पुलिस से शिकायत करते हैं। सुनकर तुरंत भाग लिया। भागते हुए फ़ोटो लिया है।

कुल मिलाकर अयोध्या जाएं तो वहाँ इस तरह की सेवा न लें। अब अयोध्या भी लपकों के हवाले होने की ओर अग्रसर है।



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One comment on “अयोध्या के ‘लपके’!”

  • Prashant Pandey says:

    Sirf ayodhya hi nahi, jyadatar dharmik sthalo me een “PANDO” type logo ne pura aatank macha rakha hai.
    Maar – peet par utar jaate hai. Eenki kisi bhi baat ko manana musibat mol lene jaisa hai.

    Reply

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