मिलीभगत का खेल तो नहीं बसपा-भाजपा का टकराव!

सोशल इन्जीनियरिँग का खेल खत्म समझो… जब जुल्म हमें कामयाबी का जायका दे और अपमान हमारे सम्मान के रास्ते खोले तब सुरक्षा और सम्मान किस काम का? आप ठीक कह रहे थे.. चुनावी तैयारियों की गहमागहमी में बसपा खामोश जरूर है, पर निष्क्रिय नहीं है। अंडरकरंट सब कुछ चल रहा है। सुरक्षा और सम्मान का पर्व नजदीक आ गया। गिफ्ट तो बनता है न! नरेंद्र मोदी जी के सबसे अहम सूबों यूपी और गुजरात की घटनाएँ बसपा के लिये रामबाण बन गयी है।

कहीं सुरक्षा को लेकर तो कहीं सम्मान को लेकर दो-दो हाथ करने जा रही बसपा के पास इससे माकूल मौका क्या होगा चुनावी बिगुल फूँकने का। लोकसभा चुनाव में सब धोखा खा चुके हैं। अब कोई प्रयोग नहीं होने वाला। किसी की कोई सोशल इन्जीनियरिँग अब नहीं चलने वाली। अपने-अपने परम्परागत वोट बैंकों को साधो और उन्हें रिझाओ। लगता है इस बात के समझौते के रूप मे ये दो घटनाएँ सामने आयी हैं।

चलो जो भी हो, अब इन गाली-गलौज के बाद यूपी में भाजपा सरकार या भाजपा समर्थित सरकार बनने की जो दस-बीस प्रतिशत उम्मीद थी वो लगभग खत्म हो गयी। यही बात यूपी में भाजपा के बहुमत से जीतने की उम्मीद की, तो भईया ये तो मुँगेरी लाल के हसीन सपने नहीं, मुँगेरी लाल के बाप के हंसीन सपने होंगे। देखना है तो देखो भईया, हम कौन होते हैं जो भक्तों को सपने देखने से रोकें। भक्ति में ही तो शक्ति है।               

लखनऊ से नवेद शिकोह की रिपोर्ट. संपर्क : navedshikoh84@gmail.com



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Comments on “मिलीभगत का खेल तो नहीं बसपा-भाजपा का टकराव!

  • Naved ji, Bhakton ko “sapney dikhaney” ki aapko zaroorat nahin… Aur jab bhakt sapney dekh rahey hotey, to aap kaun hote hain unhein sapney dekhney se rokney waley…. Bhai, aap SP, Congress ke sapney dekhiye aur dusre ko sapney dekhney se mat rokiye…

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