आर्थिक मोर्चे पर बुरी तरह फेल सरकार को जनता का ध्यान भटकाने के लिए अब CAA का ही सहारा!

गृह मंत्री ने कहा है कि सरकार CAA पर एक इंच भी पीछे नहीं हटेगी।

कैसे हटे?

क्योंकि पीछे एक बड़ा गड्ढा जो है, जिसमें अर्थव्यवस्था लुड़की हुई, औंधे मुँह पड़ी है।

ज़रा देखें:

  1. GST का कलेक्शन ₹1.2 लाख करोड़ कम रहने का अनुमान है।
  2. GST काउन्सिल का अनुमान है कि केंद्र से राज्यों को जो compensation cess मिलना है, उसमें ₹63,200 करोड़ की कमी आ रही है, क्योंकि केंद्र के पास पैसा नहीं है।
  3. ये कमी इस तथ्य के बावजूद है कि सरकार के पास पिछले दो सालों का जमा ₹47,229 करोड़ का अतिरिक्त यानि surplus compensation cess था।
  4. रेटिंग एजेन्सी ICRA के अनुसार इस वर्ष राज्यों के रेवेन्यू में ₹2.2 लाख करोड़ की कमी रहने की उम्मीद है।
  5. GST लागू करते वक्त ये माना गया था कि राज्यों का टैक्स कलेक्शन में प्रति वर्ष 14% वृद्धि होती है। इस साल पहले सात महीने के डेटा के अनुसार ये सिर्फ़ 2% रह गयी है।
  6. आय की कमी को पूरा करने के लिए सरकार ने रिज़र्व बैंक से ₹1.48 लाख करोड़ का इस साल का डिवीडेंड लिया था। साथ ही ₹28,000 करोड़ का अंतरिम डिवीडेंड भी लिया।
  7. अब सरकार ने रिज़र्व बैंक की अगले साल की भविष्य की कमाई से ₹45,000 करोड़ का advance/interim dividend और माँगा है।
  8. केंद्र सरकार ने तेल कम्पनियों -ONGC, BPL, HPCL, GAIL, Oil India आदि से ₹19,000 करोड़ माँगे हैं। तेल कम्पनियों का कहना है कि इतनी रक़म जुटाने के लिए उन्हें उधार लेना पड़ सकता है।
  9. Coal India, Hindustan Aeronautics, NMDC, RITES, Engineers India, NBCC, MOIL – ये वो सरकारी कम्पनियाँ हैं जिनसे सरकार interim dividend के रूप में ₹21,097 करोड़ माँग रही है, जो उनके कैश रिज़र्व का क़रीब 50% है।
  10. NMDC, NHPC, Oil India, BHEL, NALCO, NLC, Cochin Shipyard, KIOCL, ONGC अपने कैश रिज़र्व का प्रयोग सरकार से शेयर वापिस ख़रीदने के लिए कर रहे हैं, ताकि सरकारी ख़ज़ाना कुछ भर सकें।
  11. देश में 4.1 करोड़ senior citizen का ₹ 14 लाख करोड़ फ़िक्स डिपॉज़िट में है। सरकार ने उनका तिमाही ब्याज 31 मार्च से खिसका कर 1 अप्रैल कर दिया है। इससे ये अब अगले वित्त वर्ष में जुड़ेगा, जो इस वित्त वर्ष का भार है।
  12. मार्च, 15 से मार्च, 19 के बीच घरेलू क़र्ज़ GDP के 9% से बढ़ कर 11.7% हो गया था, जो इस साल और बढ़ने की शंका है। बढ़ती महंगाई, घटती ब्याज दर और बढ़ते घरेलू क़र्ज़ का एक मकड़जाल तैयार ही रहा है, जो retired लोगों के लिए और सरकार के लिए चिंता का विषय होना चाहिए।
  13. इस साल सरकार विनिवेश से यानि सरकारी assets बेच कर एक लाख करोड़ रुपए की उम्मीद थी। लेकिन अब कुल ₹42,000 करोड़ यानि 40% ही रहने की उम्मीद है। आर्थिक हालात इतने ख़राब हैं कि जो सरकारी सम्पत्ति आज तक जुटाई गयी है, उसे बेचना भी सम्भव नहीं हो रहा है।
  14. Air India कोशिश के बाद भी बिका नहीं। 5G स्पेक्ट्रम का ख़रीदार नहीं। NHAI की सम्पत्ति बेचने का फ़ैसला, लेकिन अभी कुछ नहीं बिका। कुल लक्ष्य ₹1.05 लाख करोड़ था, लेकिन दिसम्बर तक ₹ 17,364 करोड़ ही आये। मंडी है, ख़रीदार कहाँ हैं?
  15. केंद्र सरकार अपने वर्तमान खर्चे भी अगले वर्ष में खिसका रही है। Food Corporation of India (FCI) को अपने खर्चे के लिए क़र्ज़ लेने पर मज़बूर है और पेमेंट को स्थगित किया जा रहा है। सरकारी सिस्टम में deferred payment को खर्च में नहीं जोड़ा जाता है।
  16. इस साल FCI की कुल देनदारी (liability)₹200,000 होने की आशंका है। FCI जो फ़ूड सब्सिडी का खर्च वहन करती है, उस में ₹29,928 करोड़ की कमी है। यही नहीं, पूरी फ़ूड सब्सिडी FCI के पिछली देनदारियों के लिए इस्तेमाल होने की सम्भावना है।
  17. फ़रवरी-मार्च में होने वाले non-plan बजट को सरकार ने स्थगित कर दिया है। ये कुल ₹200,000 करोड़ है। इतना पैसा अब सरकार इस वित्त वर्ष में खर्च नहीं करेगी। इसका इकॉनमी पर क्या असर होगा? क्या इस खर्च का भार भी अगले साल में खिसकेगा?
  18. कुल मिला कर वास्तविक deficit इस साल के 3.3% लक्ष्य से बढ़ कर 5.5 % होने की उम्मीद है। इसे सरकार कैसे काम कर के दिखाएगी, वो पैसा फ़ौरी तौर पर कैसे जुटाया जाएगा, ये देखना है।
  19. और इस सब आर्थिक मुसीबत के बीच सरकार की प्राथमिकतायें क्या हैं:
  • इंडिया गेट-संसद भवन के इलाक़े को तोड़ कर पुनर्निर्माण के लिए ₹13,000 करोड़ रुपए
  • NPR के लिए ₹ 4000 करोड़
  • NRC यदि हुआ तो ₹ 50000 करोड़

पत्रकार गुरदीप सिंह सप्पल की एफबी वॉल से.

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