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उत्तर प्रदेश के प्रकाशक बंधुओं अब आंदोलन के लिए उठ जाओ!

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अशोक कुमार नवरत्न

आप अवगत ही हैं कि माह जनवरी २०२२ से विधान सभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने के बाद से अभी तक छोटे व मझोले अखबारों को कोई भी सजावटी विज्ञापन सूचना निदेशालय ने जारी नहीं किया है, जबकि बड़े समाचार पत्रों को अनेकों विज्ञापन सूचना निदेशालय ने जारी किये हैं। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार बड़े अखबारों को ही पोषित करना चाहती है।

माननीय उच्चतम न्यायालय के निर्णय दिनांक १३ मई २०१५ में सभी अखबारों को समानता के आधार पर विज्ञापन देने का निर्देश दिया गया है। सरकार की सभी नीतियों का छोटे व मझोले अखबार ही सही तरीके से प्रचारित व प्रसारित करते हैं।

शासन व प्रशासन से अनेकों बार अनुरोध किया जा चुका है। अब ऐसा लगता है कि किसी साजिश के अंतर्गत ही छोटे व मझोले अखबारों का शोषण किया जा रहा है।

अपर मुख्य सचिव सूचना डॉक्टर नवनीत सहगल जी व सूचना निदेशक श्री शिशिर जी से भी अनेकों बार इस समस्या का समाधान करने का अनुरोध किया जा चुका है।

अब प्रकाशक बंधुओं जागृत हो जाओ अन्यथा छोटे व मझौले अखबारों का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जायेगा। उत्तर प्रदेश के हर जिले से अखबारों के प्रकाशकों को अब लखनऊ आकर आंदोलन करने की जरूरत है। अब तत्काल ही आंदोलन करना चाहिए।

अशोक कुमार नवरत्न
पूर्व सदस्य-भारतीय प्रेस परिषद
महासचिव- आल इंडिया स्मॉल एंड मीडियम न्यूज़पेपर्स फेडरेशन, नई दिल्ली

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