यशस्वी संपादक गिरीश मिश्र के साठवें जन्मदिन पर उनकी किताब ‘देखी-अनदेखी’ का विमोचन

दैनिक जागरण, दैनिक हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, लोकमत समेत कई अखबारों के संपादक रह चुके वरिष्ठ और यशस्वी पत्रकार गिरीश मिश्र ने बीते 16 जुलाई को अपना साठवां जन्मदिन सादगी के साथ मनाया. इस मौके पर उनके परिजन और चाहने वाले मौजूद थे. 16 जुलाई का दिन गिरीश मिश्र के लिए एक यादगार और दोहरी ख़ुशी का दिन था. इस दिन उनका जन्मदिन तो था ही, इसी दिन एक गरिमापूर्ण समारोह में उनकी पुस्तक ‘देखी अनदेखी’ का विमोचन भी किया गया.

इस छोटे से और बेहद व्यक्तिगत समारोह में कुछ थोड़े से नजदीकी रिश्तेदार, मित्र और गिरीशजी के पुराने छात्र शामिल हुए. इस किताब में गिरीशजी के ही लिखे गये 23 जनवरी 2011 से लेकर 14 जुलाई 2012 तक के लेख संकलित हैं. यहां कुछ तस्वीरों के जरिए गिरीश मिश्र की किताब और उसके विमोचन का दृश्य प्रस्तुत किया जा रहा है.

ज्ञात हो कि गिरीश मिश्र मूलत: लखनऊ के रहने वाले हैं और कुछ वर्षों से स्वास्थ्य कारणों से नोएडा में निवास कर रहे हैं. उनके पढ़ाए और ट्रेंड किए हुए छात्र देश भर में वरिष्ठ पदों पर कार्यरत हैं. भड़ास4मीडिया के संस्थापक और संपादक यशवंत सिंह ने भी पत्रकारिता का शुरुआती शिक्षण-प्रशिक्षण गिरीश मिश्र के सानिध्य में दैनिक जागरण, लखनऊ में कार्य करते हुए लिया था.

गिरीश मिश्र बेहद इमानदार, सरोकारी और शालीन पत्रकार हैं जिन्होंने पत्रकारीय मापदंडों की खातिर प्रबंधन के दबावों को कतई स्वीकार नहीं किया. अपने जीवन में अनुशासन और ईमानदारी को जीने वाले गिरीश मिश्र यही पाठ अपने छात्रों और अधीनस्थों को भी सिखाते रहे हैं ताकि पत्रकारिता की शुचिता कायम रखी जा सके. गिरीश मिश्र के दो सगे भाई आशीष मिश्र और हरीश मिश्र भी वरिष्ठ पत्रकार हैं.

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Comments on “यशस्वी संपादक गिरीश मिश्र के साठवें जन्मदिन पर उनकी किताब ‘देखी-अनदेखी’ का विमोचन

  • दिनेश मणि पाठक says:

    आज आपके पोर्टल पर श्री गिरीश मिश्र जी के पुस्‍तक के विमोचन की खबर देखकर बहुत ही सुखद अनुभूति हो रही है। सच्‍ची पत्रकारिता के मायने क्‍या हैं यह श्री मिश्र जी से सीखा जा सकता है। पत्रकारिता के लिए उनका योगदान त्‍याग और प्रयास पत्रकारिता जगत के लिए गौरव है। आज की पत्रकारिता जो तकनीकी से तो बढ़ रही है लेकिन सीढि़यों से लुढ़ककर नीचे की ओर धराशायी हो रही उसमें श्री मिश्र जी को देखते हैं तो पाते हैं कि उनकी पत्रकारिता स्‍पष्‍टता और अपनी धार के लिए जानी जाती है। जो न सेठों के दफ्तरों में धूमिल हुई न किसी राजनीतिक दबाव से कुंद हुई। मुझे भी कुछ समय उनके साथ कार्य करने का सौभाग्‍य मिला। आज भी ऐसा मानता हूं कि मेरी पत्रकारिता का वह समय श्री मिश्र जी तमा डांट के साथ श्रेष्‍ठतम था। क्‍योंकि उसका आदि से अंत तक कैसे बेहतर करें यही होता था। कोई लगाव नहीं, कोई झुकाव नहीं, कोई दबाव नहीं।
    श्री गिरीश मिश्र जी को उनकी उन्‍नत स्‍वास्‍थ्‍य की कामना के साथ मेरा नमस्‍कार।

    मणि

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  • Ramendra Sinha says:

    गिरीश जी के जीवट वाले व्यक्तित्व की जितनी तारीफ की जाये, वो कम है। यशवंत जी आपने सही लिखा है। बेहद ईमानदार, शालीन और सरोकारी पत्रकार जिन्होंने स्वाभिमान से कभी समझौता नहीं किया। उनके सेकेंड मैन के रूप में दैनिक भास्कर, भोपाल में मैंने भी यही पाया।

    Reply

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