#MeToo कैंपेन की चपेट में आए पत्रकार दिलीप खान, पढ़ें निशि शर्मा ने क्या लिखा है…

Nishi Sharma

मेरा अब्यूज़र मीडिया से है। मैं नहीं हूँ। न मुझे कोई डर है करियर और नौकरी का। मीडिया के हाथों में है ही नहीं मेरा करियर। मैं कोचिंग करती थी मुख़र्जी नगर में। हमारी मुलाकात बिल्कुल ही नॉर्मल मुलाकात थी। न पढ़ाई-लिखाई से रिलेटेड, न नौकरी से। वह मुझे हमेशा कहता था ‘सरकारी नौकर बन जाओगी तो असिस्टेंट रख लेना’।

मुझे जब भी IIMC जाने के सजेशंस मिले हैं, चाहे रीमा ने दिया हो, या किसी ने, मुझे दिलीप हमेशा याद रहा है। मैं जोश-जोश में हामी भर भी देती, तो आगे कुछ नहीं करती थी।

इसबार माँ के गुज़रने के बाद ग़ज़ब बौखलाहट थी। मुझे इस घर से कहीं भाग जाने का जी था। मुझे लग रहा था अब मुझसे कोई तैयारी नहीं होगी। मैं एकदम परेशान थी और रीमा के कहने पर मैंने एक-दो मीडिया की वेकेंसिज़ वाली जगहों पर सीवी तक भेज दिया था। पर मैं अंत में पीछे हट जाती हूँ। वो मेरे ज़हन से जाता ही नहीं। मैं कोई बहाना बना देती हूँ सबको, पर अपनी असल खीझ बता नहीं पाती।

कल रात डेढ़ बजे भाई आलमोस्ट रोने लगा और बोला, ‘तुम परेशान होती हो न तो देखा नहीं जाता। बचपन से तुम्हें ऐसे देखते-देखते मेरा ब्रेकिंग प्वाइंट आ गया है। मैं क्या करूँ जो तुमको ख़ुश देखूं। मैं अब्यूज़ वाले न्यूज़ आर्टिकल्स पढ़ता हूँ न तो तुम्हें भेजता नहीं। क्योंकि तुमपर उसका असर मुझसे देखा नहीं जाता।’ मैं खाना खा रही थी।

मेरा मन नहीं था इसलिए कह रही थी उससे कि अब मन नहीं, छोड़ देती हूँ। लेकिन उसकी बातें सुन बिल्कुल भी भावुक नहीं हुई। मेरा सिर दर्द कर रहा था इसलिए मैंने कहा कि मैं सोना चाहती हूँ। मैंने उसे सुलाया और उसे पकड़कर ख़ुद भी लेट गई। वह अकेला मर्द है जिसे पकड़कर सोते हुए मुझे सुरक्षित महसूस होता है। और मेरे भाई ही सिर्फ़ वे मर्द हैं, जिन्हें देख मुझे ख़ुशी मिलती है। उसे यह सोचकर नीन्द आ गई थी कि मैं सो गई हूँ। पर मैं रो रही थी। मुझे बहुत रोना आ रहा था।

औरतें जब मेरी बात सुन ख़ुद को बहादुर और उनसे कोई कुछ बोलने की ज़ुर्रत नहीं करेगा, उन्हें छूने की हिम्मत नहीं करेगा, सब बोलकर पता नहीं क्या साबित करना चाहती हैं तो मैं बस इतना ही पूछना चाहती हूँ कि WHY? Why you have to do this? Can’t you just listen? Can’t you stop telling me how brave you are and what a moron I was?

मुझे कमज़ोर और बेवकूफ़ के ठप्पे से डर नहीं लगता। मैं ख़ुद स्वीकार कर लेती हूँ कि हाँ, मैं उस वक्त यही थी। तुम जो औरतों को ऐसे कैटेगराइज़ करते हो, इससे मुझे कोई भय नहीं। ये कमज़ोर और बेवकूफ़ औरतें बोलने के लिए सबसे आगे खड़ी न हों तो शायद पता ही नहीं चलेगा कि और कितनी कमज़ोर और बेवकूफ़ औरतें हैं दुनिया में और कितने बहादुर मर्दों ने उन्हें कुचला है। मैं बस उन्हीं बेवकूफ़ औरतों से प्रेरणा लेती हूँ। मैं अजीब ज़िन्दगियों से प्ररेणा लेती हूँ। मुझे उमूल ख़ैर प्रेरणा दे सकती हैं, टीना दाबी कभी नहीं दे पाएगी। क्या करूँ मैं? मैंने जैसा जिया है, उन्हीं जैसी हूँ। उन्हीं में कहीं ख़ुद को देख पाती हूँ।

मुझे जो करना है, मैं करूंगी। तुम सबको इसलिए बताया है कि तुम मीडिया से हो और वो तुम्हारा ‘दिलीप भाई’ है। आज इस पोस्ट पर उसे भाई लिखकर संबोधित मत करना। वह तुम्हारी बहन को भी न छोड़े, ऐसा आदमी है। जितने भी उससे बात करने की बात कर रहे थे, उससे सवाल कर रहे थे, I want to know what he has said. He will have to talk. I’m not letting him go away.

When I decided to talk, one thing that I kept aside was ‘fear’. Fear of being judged for how careless I was. I just don’t care who believes me and who doesn’t. These people don’t matter to me. What matters is how I feel about it. And whether or not I have people to hold my back.

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यह कमेंट Bharti का है जिसे पोस्ट की शक्ल में पोस्ट कर रही हूँ। मैं उन बेवकूफ़ों में हूँ जिसने फ़ोर्स करने पर शराब पी लिया था। और, उसके घर पर पी लिया था। मुझे बिल्कुल भी आइडिया नहीं था कि वह सबके साथ ऐसा ही करता है। यह पैटर्न मुझे बहुत बाद में समझ आया था। मैं डिटेल दूंगी मामले की। लेकिन तब जब FIR दर्ज़ कराउंगी। हाँ, मैं यह करूंगी। अगर आप में से कोई लीगल असिस्टेंस दे सकता है, तो संपर्क करें।

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दिलिप ख़ान क्षितिज रॉय से ज़्यादा घटिया आदमी है। क्षितिज की छिछोरी हरकतें तो समझ आ जाती थीं। दिलिप तो शातिर है। दिमाग़ से खेलता है। मेरा यही एक ऐसा भयावह अनुभव रहा कि मैंने फिर किसी से भी मिलना ही छोड़ दिया। मैं नयी-नयी थी दिल्ली में। मुझे लगा था ये अच्छे लोग हैं।

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Dilip Khan knows how to gaslight. He knows it very well. That is what took me time to speak up against him. And I was a stupid stupid woman. You can’t imagine for how long I’ve been traumatized by it.

And those random people asking for the details, what will you do if I give you the details? I will take the legal way. I won’t give the details to random people on fb so that ‘it will be easy for them to judge’. Fucking morons, can’t you judge by how much I have spoken?

Why do you need more and more and more to believe a woman? I want him here. If he talks and answers all the questions that you’re all asking, I’ll say everything, every damn thing. But not when he has blocked me. Bring him here first. He is the abuser and I have called him out. I’m not answering. He will have to answer.

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मुझे इंतज़ार है उस पहली महिला का जो दिलीप ख़ान पर पोस्ट लिखकर जवाब मांगेगी। मैं तो उसे बोलने का मौका दे रही हूँ। मैंने कहाँ उसे शन किया है? बोले तो वो। मेरी पोस्ट पर मेंशन मत कीजिए। उसने पहला पोस्ट करने के एक घंटे के भीतर मुझे ब्लॉक कर दिया था। आपका ‘भाई’ यहाँ जवाब नहीं देगा। क्षितिज पर बोलना आसान था शायद आपके लिए। प्यारे दोस्त, प्यारे भाई पर आवाज़ ही नहीं निकल रही कंठ से। किसी ने कल कहा कि मोदी है क्या वो? अमित शाह है? अंबानी है? देश का सबसे ताक़तवर व्यक्ति है? आख़िर है कौन वो जो लोग सवाल तक न कर पा रहे? मैं भी पूछती हूँ, सज्जनों। आख़िर है कौन वो?

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चार महीने से ज़्यादा पुरानी पोस्ट है यह। इसे शेयर करते हुए मैं इमोशनल हूँ। और कई बार सोच चुकी हूँ कि करूँ या नहीं। मैं किसी बाहरी प्रेशर में नहीं हूँ। लेकिन कुछ दिन पहले जब मेरी नज़र इसपर पड़ी तब से भीतर बेचैनी है। मैं बार-बार रोक रही हूँ ख़ुद को। अक़लीमा के पास सारा प्रूफ़ था फिर भी लोगों ने उसे टार्गेट किया था।

मेरा मामला तो और पेचीदा है इसे कितने हज़म करेंगे इसी बात का डर था मुझे। पर अब नहीं है। इस वक्त जब लिख रही हूँ, तब कोई डर नहीं है। इस पोस्ट में मेंशन किए गए बाक़ी किसी भी मर्द को नहीं जानती मैं। मेरे फ़्रेंडलिस्ट में कोई ऐडेड हो सकता है, पर कौन-कौन है यह मुझे याद नहीं। मैं सिर्फ़ एक इंसान को जानती हूँ। और कितने अच्छे से जान चुकी हूँ उसे ख़ुद पता है। मैं कोई स्क्रीनशॉट नहीं लगा रही। न कोई डिटेल बता रही हूँ। ये सब वह ख़ुद बताए।

I’m just calling him out. Because now I’m ready. Ready to take it out in the open. He is a bloody big manipulator, a liar, a perpetrator. He tricks women into believing that he actually admires them.

मुझे उसने कहा था कि उसे मुझपर दुलार आता है। और उसकी गर्लफ्रैंड (जिसका नाम कोई भी यहाँ मेंशन न करे) के बाद सिर्फ़ मुझपर इतना प्यार आता है। And I believed him. That is where I was wrong. लेकिन आज अगर मैं इस लड़की की बात का समर्थन नहीं करूंगी, तो ख़ुद को कभी माफ़ नहीं कर पाऊंगी।

मैंने कई बार सोचा था कि उसकी गर्लफ्रैंड को बता दूँ कि यह आदमी किस चरित्र का व्यक्ति है, मगर मुझे लगा पता नहीं वह मेरा विश्वास करेगी या नहीं। शुरुआत में मुझे पता भी नहीं था उसकी गर्लफ़्रेंड है। अक़लीमा ने भी कहा कि उसे पता तो होना चाहिए, पर मैं नहीं कर पाई।

मैंने हिमांंशी का यह पोस्ट देखा तो मुझे लगा लोग इस पर बात करेंगे। पर सबको साँप सूंघ गया। मैं बिल्कुल उम्मीद नहीं करती कि आप मेरी बात भी मानेंगे। मैं बस यह कहना चाहती हूँ कि हिमानी की वह सहेली अकेली नहीं थी। दिलिप ख़ान (राज्यसभा का पूर्व पत्रकार) बहुत ही शातिर और वाहियात इंसान है।

मैं इसके बिहेवियोरल पैटर्नस डिसकस करूंगी तो यक़ीन नहीं होगा। I’m calling Dilip Khan out. I want him to do the talking.

P.S. – हमारी सारी बातें आमने-सामने हुई थीं। इसे स्क्रीनशॉट भर का मामला न समझें।

#MeToo

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And Dilip Khan blocked me! ऐसे थोड़े चलेगा? So easy, no? मैं उम्मीद करती हूँ उससे सवाल होंगे।

निशि शर्मा की एफबी वॉल से.

उपरोक्त पोस्ट पर आए ढेरों कमेंट्स में से कुछ चनिंदा….

Dyuti Sudipta : He asked me to come over to his place too, I had told him that I was looking to change jobs and he offered to speak at OUP and asked me to come over to his place. Jab maine bola door pad jayega he said ruk jana. I anyway don’t stay over at people’s places until I know them well, so koi sawaal hi nahin tha jaane ka. God what is wrong with men.

अंकित : वैसे एक पते की बात बताऊं जब एक संघी/दक्षिणपंथी ऐसी गिरी हुई हरकत करता है तो वो गिरा हुआ इंसान होता है पर जब एक वामपंथी ऐसी हरकत करता है तो वो मनोरोगी होता है. P.S. कहीं पढ़ा था कि दिलीप खान ने इस मसले पर ये स्पष्टीकरण दिया था.

सुभाष सिंह सुमन : एक होते हैं गली-नुक्कड़ के शोहदे, फिर आते हैं सफेदपोश लोग. पहले वाले से बचना है, उनकी हरकतें सावधान करती हैं. दूसरे के पास नारीविमर्श की चासनी होती है, क्रांति की बातें होती हैं. अपराधी दोनों हैं, दूसरे वाले अधिक भयंकर…शुद्ध धुर्त.

Samar Anarya : यह भयावह है अब- क़ानूनी कार्यवाही शुरू करनी चाहिए- तुरंत! एक नहीं, तमाम लड़कियों के बयान सुन लिए इस एक आदमी पर!

Pradyumna Yadav : ये आपके बारे में क्या बात हो रही है Dilip Khan? है तो फिर गलत है भाई. महंगी वाइन पिलाना हो तो कभी हमें कमरे पर बुलाए. हम भी बेरोजगार और हैरान परेशान इंसान है. आज तक महंगी छोड़िए कम्बखत सस्ती वाइन भी नहीं पिये. ये क्या कि लड़कियों को कमरे पर बुलाकर सेक्सुअल हैरसमेंट किये पड़े हैं. ये जेल जाने वाला अमानवीय कुकर्म ठीक नहीं है. सदाचारी बनिये , बलात्कारी नहीं. आपका पाठक होने के नाते अपील है कि यहां आकर बातचीत में शामिल हों और अपना पक्ष रखें.

Ehtesham Zaidi : We do not need the details. No need to further traumatise yourself. I hope this discussion will contribute towards a healthy society in the future irrespective of gender. More power and love to you.

Ramesh Saraswat : हर पुरुष की मानसिकता एक जैसी ही होती है…. इसलिए किसी की भी हमदर्दी के झांसे में ना आयें क्यूँकि बहुत सारे पुरुष खुद को दूसरों से बेहतर जाहिर करते हैं लेकिन ये उनका सफल अभिनय होता है, नकाब के पीछे का चेहरा मजबूरी पहचानने नहीं देती….. अब ये जरूरी तो नहीं कि एक धोखा अनजाने में और दूसरा धोखा जानबूझकर खाया जाए….. !!

सुनील कुमार : फोर्स करने पर शराब पी लेंगी. कहने पर रूम में भी मिलने जायेंगी. क्या लगता है. वहाँ कद्दू की सब्जी बनाने के लिए बुला रहा है?

अंकित द्विवेदी : सुनील कुमार तुम्हे कद्दू की सब्जी पकाने का अनुभव भले होगा और लड़की को वस्तु समझने का लेकिन पूरी दुनिया लड़की को वस्तु नहीं समझती है और ये तुम्हारी समझ से बहुत दूर की बात है।

Prashant Kanojiya मुझे 4-5 लड़कियों ने इनकी यही कहानी बताई है पूरी प्लानिंग के तहत ये काम करते हैं. कानूनी करवाई करनी चाहिए।

Ajay Kumar Singh : मुझे उसकी पोस्ट और टिप्पणियों से अंदेशा था। शब्द व्यक्ति की पोल खोलकर रख देते हैं जिससे वह ख़ुद अपरिचित ही रहता है।

Anita Misra : अज़ब है कितनी परतें होती लोगों की …यहां लिखे से किसी को समझना कितना मुश्किल…

Kashyap Kishor Mishra : दिलिप खान का नाम बार बार और ऐसे ही मामलों में ख रहा है। उसकी इस आपराधिक गतिविधि का तरीका भी लगभग समान है और ऐसे हर सवाल पर प्रश्नकर्ता को ब्लाक कर देना भी जस का तस है।

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