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जाने माने युवा कवि, ग़ज़लकार, शायर और पत्रकार तहसीन मुनव्वर ने ईटीवी के साथ नई पारी की शुरुआत की है. उन्हें ईटीवी उर्दू में सीनियर एडिटर नियुक्त किया गया है. वे पहले भी ईटीवी के हिस्से रह चुके हैं. ईटीवी के ग्रुप एडिटर राजेश रैना ने तहसीन मुनव्वर को ईटीवी नोएडा आफिस में सारे स्टाफ से रूबरू कराया और उनकी तैनाती के बारे में जानकारी दी. इस मौके पर राजेश रैना ने तहसीन मुनव्वर और पूरे स्टाफ के साथ एक सेल्फी लेकर फेसबुक पर प्रकाशित किया.

साथ ही तहसीन मुनव्वर के ईटीवी ज्वाइन करने की जानकारी इस रूप में दी-


Rajesh Raina : With Tehseen Munawer and other team members in ETV Noida office. Tehseen Munawer joined today as Senior Editor ETV Urdu. He will oversee the functioning of Urdu channel.


बहुमुखी प्रतिभा के धनी तहसीन मुनव्वर उर्दू के जाने माने साहित्यकार हैं. उनके शायरी के दो संग्रह ‘धूप चांदनी’ और ‘सहरा में शजर’ प्रकाशित हो चुके हैं. दिल्ली उर्दू अकादमी ने उनके कहानी संग्रह ‘मासूम’ के लिए 2004 में उन्हें पुरस्कृत किया था. वह उर्दू अकादमी दिल्ली की गवर्निग कौंसिल के सदस्य भी रहे हैं. उर्दू के अलावा कई भाषाओँ के ज्ञाता हैं तथा पंजाबी में भी शायरी करते हैं. इसके अलावा मीडिया सलाहकार के रूप में चार-चार केंद्रीय रेल मंत्रियों के साथ जुड़े रहे जिनमें लालू प्रसाद यादव और ममता बनर्जी भी शामिल हैं.

तहसीन मुनव्वर उर्दू समाचार वाचक और एंकर के रूप में आकाशवाणी, दूरदर्शन और ईटीवी से भी जुड़े रहे हैं. 1990 के दशक में जब कश्मीर में आतंकवाद अपने चरम पर था उस समय दूरदर्शन पर समाचार वाचक के रूप में उन्होंने सेवाएं दी. कई धारावाहिक लिखे हैं तथा अभिनय भी किया. एक फीचर फिल्म के गीत भी इनके नाम हैं. देश विदेश में मुशायरों और कवि सम्मलेन में अपनी अलग छाप छोड़ते रहे हैं. रेडियो, टीवी और फिल्म के अलावा उर्दू व् हिंदी समाचारपत्रों और पत्रिकाओं में विभिन विषयों पर उनके लेख तथा स्तंभ प्रकशित होते रहते हैं. एक उर्दू पाक्षिक समाचारपत्र ‘पर्वाना ए हिन्द’ का स्वयं प्रकाशन व संपादन भी करते रहे हैं. देश के कई नामी पत्रकारिता विद्यालयों से भी जुड़े हैं.  तहसीन मुनव्वर की लिखी कई रचनाएं बेहद मकबूल हुईं हैं. जैसे एक ये...

तुम कैसे सो जाते हो
तहसीन मुनव्वर

तुम कैसे सो जाते हो
तुम कैसे सो जाते हो
नंगे तन फूटपाथों पर
तोहमत लेके माथों पर
पत्थर जैसे हाथों पर
तुम कैसे सो जाते हो
गर्म अँधेरी रातों में
अशकों की बरसातों में
बर्फ से ठंडी बातों में
तुम कैसे सो जाते हो
पतली सी दीवारों पर
दो धारी तलवारों पर
उर्दू के अख़बारों पर
तुम कैसे सो जाते हो
पुलिस कार के शौर के बीच
लूट मार के ज़ोर के बीच
अप्राधिक घंघौर के बीच
तुम कैसे सो जाते हो
मैं क्यों जागता रहता हूँ
मैं क्यों जागता रहता हूँ
आलीशान मकानों में
दौलत के ऐवानों में
अंग्रेज़ी मैख़ानों में
मैं क्यों जागता रहता हूँ
ख़ुद जैसे बीमारों में
फ़िल्मी से किरदारों में
जिस्मों के बाज़ारों में
मैं क्यों जागता रहता हूँ
दोस्त नुमा अईयारों में
अमरीकी तईयारों में
मसनूई सईयारों में
मैं क्यों जागता रहता हूँ
हुस्न की दिलकश बाहों में
हवस से बोझल आहों में
बरबादी की राहों में
मैं क्यों जागता रहता हूँ
तुम कैसे सो जाते हो
सपनों में खो जाते हो
मुर्दा से हो जाते हो
और में ज़िन्दा रहकर भी
हर पल मरता रहता हूँ
ख़ुद से पूछा करता हूँ
तुम कैसे सो जाते हो
मैं क्यों जागता रहता हूँ
तुम कैसे सो जाते हो
ऊफ़ ......तुम कैसे सो जाते हो
मैं क्यों जागता रहता हूँ
मैं क्यों जागता रहता हूँ
क्यों........
तुम.......
क्यों......
ऊफ़........

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