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दैनिक जागरण बिहार का अमानवीय शोषणकारी चेहरा...दैनिक जागरण के वरिष्ठ एवं ईमानदार पत्रकार पंकज कुमार का मजीठिया के अनुसार वेतन मांगने पर जम्मू किया तबादला.... वीआरएस लेने  के लिए जागरण प्रबंधन बना रहा है दबाव... बिहार के गया जिले में दैनिक जागरण के पत्रकार पंकज कुमार अपनी बेख़ौफ़ एवं निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. ये दैनिक जागरण के बिहार संस्करण के स्थापना काल से उससे जुड़े हुए हैं.

इनको स्वास्थ्य संबंधी समस्या के कारण 2004 में पेस मेकर लगा था जिसे वर्ष 2016 में बदलकर पुन: अधिक शक्तिशाली पेसमेकर लगवाना पड़ा था. उसी वर्ष अक्तूबर 2016 में इनका पोस्ट्रेट का आपरेशन भी पटना में हुआ. अपनी गंभीर बीमारी एंव स्वास्थ के कारण इन्होंने माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश के आलोक में मजीठिया वेतन आयोग की मांग दैनिक जागरण प्रबन्धक से कर दिया. इसके बाद दैनिक जागरण प्रबन्धक ने शारीरिक, मानसिक एवं आर्थिक रूप से परेशान करना शुरू कर दिया. पोस्ट्रेट ग्रिड के आपरेशन के दौरान ही पंकज कुमार को डायपर और लुंगी पहनकर कार्यालय आने के लिए बाध्य किया गया. इनके वेतन से पहले 14 दिन फिर एक बार 7 दिन की कटौती भी दैनिक जागरण ने कर ली जबकि इनका 92 दिन का उपार्जित अवकाश देय था.

पंकज कुमार ने गया में दैनिक जागरण को एक विश्वसनीयता प्रदान की थी. वर्ष 2003 के नवम्बर माह में राष्ट्रीय राजमार्ग के उप महाप्रबंधक इंजीनियर सत्येन्द्र दुबे की हत्या ने सनसनी फैला दी थी. जहां सभी अखबार इस हत्या का कारण सत्येन्द्र दुबे द्वारा प्रधानमंत्री कार्यालय में भ्रष्टाचार संबंधी की गई शिकायत बता रहे थे वहीँ पंकज कुमार ने इस हत्या का कारण बिहार में गिरती हुई कानून व्यवस्था को जिम्मेवार मानते हुए सड़क लुटेरों द्वारा इस घटना को अंजाम देना बताया था. सीबीआई की जांच में भी यही सामने आया था.

क्रूर एवं अमानवीय दैनिक जागरण प्रबन्धक ने इस तरह के पत्रकार को भी नहीं बख्शा और मुख्य महाप्रबंधक आनन्द त्रिपाठी ने मजीठिया आयोग के अनुसार वेतन की मांग पर नाराजगी जताते हुए दो माह का वेतन लेकर स्वैच्छिक सेवानिवृति लेने को कहा दिया तथा इनकार करने पर जम्मू जैसे दुर्गम इलाके में एक बीमार पत्रकार को तत्काल प्रभाव से जाने का फरमान जारी कर दिया. जनता की आवाज होने का दावा करने वाले ये अखबार खुद अपने ही कर्मचारियों का गला हक़ के लिए आवाज उठाने पर घोटने से बाज नहीं आते हैं.  पंकज कुमार ने भी संकल्प ले लिया है कानूनी सबक सिखाने का. उन्होंने पटना के लेबर कोर्ट तथा माननीय उच्च न्यायालय में भी मुकदमा दायर किया है.

अफ़सोस कि राजनीतिक दल और सामाजिक संगठन भी शिद्दत के साथ शोषक अखबारों के खिलाफ आवाज नहीं उठा रहे हैं. मजीठिया वेतन आयोग लागू होने के बाद से अब तक दस हजार से ज्यादा पत्रकारों की नौकरी अखबार प्रबन्धक खा चुके हैं. आज अगर पत्रकार हार गए तो बची खुची पत्रकारिता की भी मौत हो जायेगी.

मीडियाकर्मियों के लिए ये दो लाइनें बहुत प्रासंगिक हो गई हैं....

निकले सड़क पर जनता, बताये शोषक प्रबंधकों को उनकी औकात.
माना कि अन्धेरा घना है पर मशाल जलाए रखना कहाँ मना है?

भड़ास के संपादक यशवंत सिंह की रिपोर्ट. संपर्क : ह्वाट्सएप 9999330099

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  • Guest - madan kumar tiwary

    दैनिक जागरण की प्रति जलाकर विरोध करना चाहिए . शोषक प्रबंधको को सबक सिखाना जरुरी है .

  • Guest - shubham kumar

    Kindly, provide justice to mr. Pankaj Kumar so that truth prevails at the end...

    from Jaipur, Rajasthan, India
  • Guest - Rajan Raju

    This is very shameful for Dainik Jagran. A person like Pankaj Kumar should be given more respect for all the things he has done for the society. If such a respected senior gentleman like him is treated like this in Dainik Jagran then how can the news published in Dainik Jagran be trusted?
    If this is the situation then nobody will follow Dainik Jagran. I along with my family friends will unfollow Dainik Jagran till the date Pankaj Kumar is given proper respect and justice.

  • Guest - RAJEEV KUMAR

    It's shame on danik jagran that they have taken a cruel and rubbish decision without thining about the one of the oldest and honest editor Mr. Pakaj kumar...
    So they have to change there decision and with respect they should give some penality to Mr. Pankaj kumar...

  • Guest - Amit kumar

    Justice should be done to Pankaj Kumar.

  • Guest - Chaitanya Arya

    It is really shameful act by Dainik Jagran. A journalist like Pankaj Kumar dedicates whole life for this news agency and when he needs help. It is really shocking that how can they deny it and even forced to quit.
    Dainik Jagran should retract this decision otherwise people will think twice to work for this agency.
    As a individual I won't follow Dainik Jagran if they don't give compensation.

    from New Delhi, Delhi, India
  • Guest - Pushpamala

    What a shameful act by dainik Jagran:(:(... Justice should be done to Pankaj sir

    from Allahabad, Uttar Pradesh, India
  • Guest - Aniket Kumar

    We want justice for Pankaj sir.....

  • Guest - Shashi ranjan

    This is so shameful decision taken by dainik jagran. Pankaj sir is a inspirational man for students. You can't do like that. You will have to give justice neither I will show you student power

    from Gaya, Bihar, India
  • Guest - Shashi ranjan

    This is so shameful decision taken by dainik jagran. Pankaj sir is a inspirational man for students. You can't do like that. You will have to give justice neither I will show you the students power

    from Gaya, Bihar, India
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