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Surya Pratap Singh :  उ. प्र. में भ्रष्टाचार की 'झनक़-झनक़ पायल बाजे' की धुन में फँसी बच्चों की 'किताबें/यूनिफोर्म' व 'पंजीरी'! उत्तर प्रदेश के प्राइमरी स्कूलों में अभी तक न तो किताबें और न ही यूनीफ़ॉर्म पहुँची.... ४ माह हो गए सत्र शुरू हुए। पंजीरी ख़रीद में ज़्यादा रुचि! क्या करें दृढसंकल्पित CM योगी? बड़ी चुनौती? प्राइमरी स्कूलों की हालात पहले से ख़स्ता थे... सबको भरोसा था कि नयी सरकार के आने से हालात बदलेगें लेकिन सब ढाक के तीन पात....

किताबों के अभाव में प्राइमरी स्कूलों में बच्चे पुराने छात्रों से उधार की किताबों से काम चला रहे हैं। वह भी ३ में से केवल १ छात्र के पास ही ये पुरानी किताबें हैं.... क्या बेसिक शिक्षा मंत्री जी को स्कूलों में जाकर देखने की फ़ुरसत नहीं है? पुष्ठाहार विभाग जिसमें पंजीरी माफ़िया पॉंटी चड्ढा 'पंजीरी' सप्लाई करता है, यह विभाग भी इन्ही मंत्री जी के पास है....शायद मंत्री जी पंजीरी की सप्लाई की व्यवस्था में ज़्यादा व्यस्त हैं या फिर किताबों व यूनीफ़ॉर्म ख़रीद का टेंडर किसी 'जुगाड़बाज़ी' में फँसा है.....आख़िर बड़ा बजट जो ढहरा। 

प्राइमरी स्कूलों में ७०% बच्चें हिंदी भी ठीक से नहीं पढ़ पाते .... अंग्रेज़ी की तो बात ही छोड़िए।  शिक्षामित्रों की हड़ताल व बवाल अलग से सारी व्यवस्था की चौपट किए है।  शिक्षा विभाग का इस वर्ष का बजट रु. १९,४४४ करोड़ का है , फिर भी किताब व यूनीफ़ॉर्म के नाम पर सब कुछ सिफ़र है। पिछले वर्ष भी प्रदेश में ३०% बच्चों को किताबें नहीं मिल पायीं थी।  CM योगी का यह कहना सर्वथा उचित है कि मंत्रियों व अधिकारियों को अपने बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ाना चाहिए, लेकिन पहले इस स्कूलों के हालात तो ठीक हों।

प्राइमरी स्कूलों में वास्तविक dropout दर ५५% से अधिक है .... जब मूलभूत सुविधाएँ नहीं हैं और शिक्षा का स्तर इतना बुरा है, शिक्षकों को पढ़ाना आती ही नहीं, तो कौन धनाढ़्य  अधिकारी/मंत्री भेजे अपने बच्चों को यहाँ पढ़ने।  सर्वशिक्षा अभियान का भी रु. ५,००० करोड़ प्रति वर्ष से अधिक का बजट अलग से है.... लेकिन कहाँ जाता है, ये सब पैसा? जनपदों में शिक्षा विभाग के कार्यालय भ्रष्टाचार के अड्डे माने जाते हैं.... कब दूर होगा इनका भ्रष्टाचार ? CM योगी के समक्ष बड़ी चुनौती है।

पंजीरी का ठेका रु. १०,००० करोड़ का है, इसी लिए इसमें शायद मंत्री जी का ज़्यादा समय जा रहा है, शराब व पंजीरी माफ़िया पॉंटी चड्ढा जिस पर पूर्व अखिलेश सरकार मेहरबान थी, उसी को अग्रिम आदेश तक पंजीरी का ठेका इन्ही मंत्री जी ने बढ़ा दिया गया है। ज्ञात हुआ है कि पॉंटी चड्ढा ग्रूप ने बरेली की संघ से जुड़े 'खंडेलवाल-अग्रवाल' जी को पार्ट्नर बनाकर/पटाकर यह कामयाबी हासिल की है..... संगठन के बहुत बड़े पदाधिकारी के रिश्तेदार हैं , ये खंडेलवाल -अग्रवाल जी। वैसे ईमानदार CM योगी ने कहा था कि माफ़िया पॉंटी चड्ढा ग्रूप का प्रदेश से सफ़ाया किया जाएगा....देखते हैं कि इतने दबाव में भला ये कैसे कर पाते हैं, अपनी धुन के पक्के योगी जी ?

आप जानते ही होंगे, जाति कोटे से बनी इन मंत्री जी को? किताब/ यूनीफ़ॉर्म माफ़िया व पंजीरी माफ़िया के चक्कर में फँसी हैं, ये बेचारी .....लेकिन अबोध बच्चों की 'शिक्षा' व स्वास्थ्य (कुपोषण को रोकने के लिए पंजीरी) के साथ तो खिलवाड़ कल भी हो रहा था और आज भी, तो बदला क्या ? शायद अभी तक कुछ ख़ास नहीं, सिवाय बड़ी-२ बातों के ...... अरे भाई धैर्य रखिये...ज़रा भ्रष्टाचार की 'झनक़-२ पायल बाजे' की धुन का मज़ा लीजिए।

चारा भी क्या है?
क्या CM योगी को फ़ेल कराने की साज़िश तो नहीं चल रही? मंत्री अधिकारी काम नहीं कर रहे!  एक अनुमान के अनुसार पिछले १५ वर्षों में रु. ४२,००० करोड़ डकारे जा चुके है इस 'चड्ढा-खंडेलवाल-अग्रवाल' माफ़िया सिंडिकेट ने? पंजीरी घोटाले की CBI जाँच का वादा किया था CM योगी ने..... इस जाँच में प्राइमरी स्कूलों के लिए किताब व यूनीफ़ॉर्म ख़रीद को भी शामिल किया जाना चाहिए।"

यूपी के चर्चित आईएएस अधिकारी रहे और इन दिनों भाजपा नेता के रूप में सक्रिय सूर्य प्रताप सिंह की एफबी वॉल से.

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