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दैनिक जागरण की हल्द्वानी यूनिट में अल्मोड़ा के तेजतर्रार पत्रकार चंदन नेगी ने इस्तीफा दे दिया है. पहले से ही पत्रकारों के संकट से जूझ रही जागरण की हल्द्वानी यूनिट इससे गहरी मुसीबत में है. अल्मोड़ा के पत्रकार चंदन नेगी ने प्रबंध तंत्र की उपेक्षा से नाराज होकर रविवार को अपना इस्तीफा भेज दिया. बीते बीस सालों से अल्मोड़ा में पत्रकारिता कर रहे चंदन नेगी हमेशा सहायक की भूमिका में ही रहे तथा उनकी सेलरी भी नहीं बढ़ाई गई. सीनियरों के रिटायरमेंट के बाद भी उन्हें ब्यूरो चीफ का पद नहीं दिया गया.

उत्पीड़न व उपेक्षा का आलम यह रहा कि गत वर्ष उनका प्रमोशन करने की बजाय कानपुर के व्यक्ति को ब्यूरो चीफ बनाया गया. अल्मोड़ा आफिस का हाल अब यह है कि यहां पहाड़ के एकमात्र पत्रकार डीके जोशी बचे हैं. शेष दो कानपुर के पत्रकारों से काम चलाया जा रहा है जिन्हें पहाड़ की सांस्कृतिक, भौगोलिक व पौराणिक परिस्थितियों की तनिक भी जानकारी नहीं है.

डा राघवेंद्र चड्ढा के जीएम व संपादक के रूप में कार्यभार ग्रहण करने के बाद हल्द्वानी यूनिट में इस्तीफों का यह सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है. इससे पूर्व चंपावत के पत्रकार व ब्यूरो चीफ नवीन देउपा तथा बागेश्वर के पत्रकार व ब्यूरो चीफ सुरेश पांडेय व पत्रकार अशोक लोहनी भी प्रबंध तंत्र की उपेक्षा व उत्पीड़न के चलते इस्तीफा दे चुके हैं. यूनिट की हालत बद से बदतर होती जा रही है. लगातार न्यूज, प्रसार व विज्ञापन डाउन हो रहा है. प्रबंध तंत्र द्वारा पहाड़ में मैदानी युवकों के पत्रकारों को भेजे जाने से पहाड़ के पत्रकार खिन्न हो गए हैं. शायद दैनिक जागरण के मालिकान इससे अनभिज्ञ हैं. नेगी के इस्तीफे के बाद शायद चेतें.

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  • Guest - vijay bhatt

    कानपुर के पत्रकारों ने पूरे पहाड़ को नरक कर दिया है। अमर उजाला हल्द्वानी में भी कानपुर के छटा हुआ आवारा पत्रकार अभिषेक सिंग आया है। जो खबरों की दलाली करता है। संपादक की आंख में धूल झोंक कर। देहरादून के लोगों की माने तो इसने वह भी गंदगी संपादक हरीश से मिलकर की । तो वहां से भगा दिया गया। अब हल्द्वानी में लोगो को सेट कर रहा है सबसे मीठा बोल कर।

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